Family Relationships: रोनित और नेहा 2 साल पहले शादी के पवित्र बंधन में बंधे थे. इस रिश्ते से न केवल वे दोनों खुश थे, बल्कि उन के परिवारजन भी प्रसन्न थे. कारण यह था कि वे एकदूसरे को तो पसंद करते ही थे, साथ ही दोनों परिवारों के अन्य सदस्य भी एकदूसरे का सम्मान करते थे. विशेषकर, अपनीअपनी सासूमां के साथ उन का अच्छा तालमेल था. आदर और सम्मान के साथसाथ उन में हंसीमजाक भी होता था.

दरअसल, जिस रिश्ते में अपनापन और दोस्ती का भाव होता है, वहां घर में प्रेम और सामंजस्य अपनेआप बढ़ जाता है. इन में सब से महत्त्वपूर्ण रिश्ता उभर कर सामने आता है, पत्नी और पति की मां का.

सास है, हिटलर नहीं

अकसर कुछ लड़कियां पति की मां का नाम सुनते ही माथा पकड़ लेती हैं, क्योंकि उन के मन में सास की छवि हिटलर जैसी बनी होती है. लेकिन यह उचित नहीं है. पति की मां को जीवन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा मानना चाहिए. उन्हें सम्मान देना और उन की राय का आदर करना रिश्ते की नींव को मजबूत करता है. यह रिश्ता बहू को ससुराल में भी मायके जैसी सहजता का अनुभव कराता है. बातचीत में विनम्रता और अपनापन होगा तो यह रिश्ता गहरी दोस्ती जैसा बन जाएगा.

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