friendship : आस्था का कहना है कि मेरी और प्रशांत की दोस्ती स्कूल टाइम से थी. हमारा हर वक्त का साथ था यहाँ तक की ग्रैजुएशन भी साथ में ही की थी. हम दोनों ही अपनी अपनी जॉब में लगे हुए थे लेकिन धीरे धीरे मैं काफी समय से ये महसूस कर रही थी कि प्रशांत मुझसे दूर हो रहा है. अब पहले की तरह ना बाते होती थी और ना मिलना जुलना था. हमारी कोई लड़ाई भी नहीं हुई और एक तरह से दबे पाँव ब्रेकअप को गया वो भी बिना कारण. इस बात का मुझ पर इतना नेगिटिव असर हुआ कि मैंने जॉब भी छोड़ दी और मैं उसे खूब कॉल करती और वापस आने के कहती लेकिन उसने मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया. अब मैं बहुत तनाव में हूं कि उसने ऐसा क्यूँ किया? इतनी पुरानी दोस्ती क्यों तोड़ी?

ये सिर्फ आस्था की बात नहीं है बल्कि ऐसे बहुत से लोग होते है. जो अपनी बहुत पुरानी दोस्ती को छोड़ नए दोस्त बना लेते है और पुराने साथी को छोड़ लाइफ में आगे बढ़ जाते है लेकिन ऐसा करना गलत नहीं है. जिस तरह जिंदगी के हर रिश्ते का एक लाइफ-साइकल होता है, उसी तरह दोस्ती की भी कोई लाइफटाइम वारंटी नहीं होती. हम अक्सर फिल्मों और कहानियों में ‘जय-वीरू’ जैसी अमर दोस्ती देखते हैं, लेकिन असल जिंदगी की हकीकत इससे बहुत अलग है.

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फ्रेंडशिप हमेशा पूरी उम्र चले ये कोई गारंटी नहीं

हम ये सोचते हैं कि एक रिलेशनशिप हमेशा के लिए होगा. हमेशा के लिए कुछ नहीं होता, मां बाप से भी रिश्ता नहीं होता. बच्चों से भी नहीं होता. थोड़े सालों के बाद जब बच्चे बड़े हो जाते है तो माँ बाप भी कह देते है तुम अपने रास्ते चलो हम अपने रास्ते चलेंगे जब जरुरत होगी तो एक दूसरे को याद कर लेंगे. बहुत सालों तक बच्चों और माँ बाप का सम्बन्ध बहुत औपचारिक सा रह जाता है. जब बच्चों की शादी होती है.

दोस्ती के इस तरह वक्त के साथ बदलने या खत्म होने के पीछे कई व्यावहारिक कारण होते हैं-

दखलअंदाजी है बड़ा कारण

दखलअंदाजी आज के टाइम में कोई पसंद नहीं करता है. अगर आप सामने वाले को उसकी लाइफ जीने दोगे,  कुछ नहीं बोलोगे कि ये गलत कर रहा है. तो ऐसी दोस्ती सालों चलती है. लेकिन अगर हर चीज में रोक टोक, माँ बाप की तरह फ्रेंड्स भी करने लगे तो खुद की स्पेस ख़तम हो जाती है. उसके बाद रिश्ता टूटना शुरू हो जाता है. क्यूंकि आज हर कोई अपने हिसाब से नीना चाहता है. न ही किसी की सुनते है और ना ही वे किसी के हिसाब से चलना चाहते है.

माहौल और  परिवेश का बदलना

स्कूल, कॉलेज या करियर के शुरुआती दिनों में दोस्तों के पास एक-दूसरे के लिए भरपूर समय होता है. लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, जिम्मेदारियाँ बदलती हैं. शादी, बच्चे, करियर का दबाव और पारिवारिक व्यस्तताएं—ये सब चीजें अनजाने में ही सही, पर दोस्तों को दूर कर देती हैं.

समय के साथ सोच बदलती है

स्कूल कॉलेज में जो आपका बेस्ट फ्रेंड था उससे आपकी सोच मिलती थी वो आज जब आप 40 साल के हो गए है तो अब भी आपकी सोच विचार उससे मिले ये जरुरी नहीं है. जब सोच के दायरे बदल जाते है तो कनेक्शन भी टूटने लगता है.

ज़िंदगी बड़ी काम्प्लेक्स हो गयी है

आज की ज़िंदगी बड़ी काम्प्लेक्स हो गयी है. इस काम्प्लेक्स ज़िंदगी में हर चीज हमेशा के लिए रहेगी ये जरुरी नहीं है. लोगों की परिस्थितियां  surcumchanses बदलते है. इससे सोच में भी बदलाव आ जाता है. इसलिए फ्रेंडशिप को ये सोचकर मत चलो कि ये जीवन  भर की है. अगर जीवन भर का कोई सम्बन्ध बनाना है तो फिर शादी कर लो क्यूंकि फ्रेंडशिप के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता कि ये कब तक रहेगी. फ्रेंडशिप एक न एक दिन टूटेगी ही या फिर धीमी हो जाएगी.

आजकल दोस्ती निभाना बहुत महंगा हो गया है-

पहले जो दोस्ती थी वो चाय वाले की दुकान पर जो झोपडी में बनी होती थी वहां निभ जाती थी. पहले लोग यहाँ शकेस्पियर पर बात करते हुए मिल जाते थे जो 2  रुपए की चाय पी रहे होते थे. घंटों वहां बैठकर बातें कर लेते थे. उसने कुछ टूटी फूटी कुर्सियां रखी होती थी 2 बैंच डाल रखे होते थे और वहां के  पेड़ के नीचे चाय पीना भी अअच्छा लगता था. गर्मी सर्दी कुछ नहीं सोचते थे एक चाय की जगह 4 चाय पीते थे और साथ में मठरी लेकिन बिल सिर्फ 40 रूपीस का आता था.

लेकिन अब काफी पीने स्टारबग जायेंगे तो एक बार में हज़ार का बिल आएगा. अगर आज किसी टॉपिक पर बात करनी है तो 200 रुपया की एक चाय अच्छी जगह लेंगे और तब बात करेंगे. अब खर्चा ज्यादा होता है दोस्तों से मिलने बात करने में. आज फ्रेंडशिप इसलिए टूटी है क्यूंकि आपके पास मिलने की जगह नहीं है.

वोकैब्लरी कम हो गयी है कम्युनिकेशन के लिए शब्द नहीं है

अब लोगों के पास बात करने के टॉपिक नहीं है. कम्युनिकेटिव के वर्ड्स नहीं है. वोकैब्लरी भी बहुत कम हो गयी है. आज की डेट में लड़का लड़की i love you के आलावा कुछ नहीं बोलते है. लोगों के पास बैठकर खत लिखने, शब्दों को तोलने-परखने या अपनी भावनाओं की गहराई को समझने का वक्त ही नहीं है. जैसे इंस्टेंट नूडल्स बनते हैं, वैसे ही आज जज्बात भी इंस्टेंटली डिलीवर किए जा रहे हैं. जब बातचीत का जरिया सिर्फ रील्स शेयर करना या इमोजी भेजना रह गया हो, तो शब्दों का दायरा तो सिमटेगा ही.

किताबों से दूरी भी वजह है

पहले के दौर में लोग गुलज़ार, निराला, या फिराक को पढ़ते-सुनते थे. हिंदी, उर्दू या अंग्रेजी की अच्छी किताबों का चलन था, जिससे इंसान को अपनी बात कहने के लिए नए और गहरे शब्द मिलते थे. आज की पीढ़ी की पूरी वोकैब्लरी सोशल मीडिया की slang भाषा तक सीमित हो गई है जैसे ‘situationship’, ‘ghosting’, ‘vibe’. इनके पास जज्बात तो हैं, लेकिन उन्हें पिरोने के लिए सही शब्द नहीं हैं क्यूंकि लोगों ने किताबें पढ़ना छोड़ दिया है इसलिए पहले जो शब्दों के जरिये एक दूसरे के प्यार और रिश्ते की गंभीरता को समझ पाते थे वो अब ख़तम हो गया है. दो दोस्त एक दूसरे के दिल में छिपे जज्बातों को समझ ही नहीं पाते क्यूंकि उन्हें समझने का जरिया जो शब्द थे वे अब है ही नहीं.

कोई भी चीज सात जन्मों के लिए नहीं होती

बदलाव हमेशा आता है

हम ऐसे सोचते है कोई भी चीज सात जन्मों तक के लिए बांध गयी है. यही गलत है. इसी गलत सोच के चलते हम सामने वाले पर अपना अधिकार समझने लगते है. लेकिन सच तो यह है कि ‘परिवर्तन ही नियम है’. कुदरत का नियम है कि यहाँ कुछ भी हमेशा के लिए ठहर नहीं सकता. मौसम, हमारी उम्र, हमारी सोच, हमारे हालात और हमारे रिश्ते सब कुछ लगातार बदल रहा है. जिसे हम आज अपनी पूरी दुनिया मानते हैं, हो सकता है कल वो हमारी जिंदगी का हिस्सा भी न रहे. यह कड़वा है, लेकिन सच है.

 अपेक्षाएं (expectations) का खेल है सारा

जब हम यह मान लेते हैं कि कोई भी चीज या इंसान हमेशा के लिए हमारे पास नहीं रहने वाला, तो हमारी अपेक्षाएं (expectations) कम हो जाती हैं. हम सामने वाले को बांधकर रखने की कोशिश छोड़ देते हैं. रिश्ते में जो ‘अधिकार जताने’ की भावना होती है, वह खत्म हो जाती है और उसकी जगह एक ठहराव आ जाता है.

आज के लम्हे को जीएं

जो इंसान यह जान लेता है कि यह सफर हमेशा का नहीं है, वह आज में जीना सीख जाता है. अगर आपको पता हो कि कोई खूबसूरत लम्हा या कोई प्यारा दोस्त हमेशा के लिए नहीं है, तो आप उसके साथ बिताए हर मिनट की कद्र करना शुरू कर देते हैं. आप छोटी-छोटी बातों पर लड़ना बंद कर देते हैं.

दोस्ती का खत्म होना हमेशा किसी की गलती नहीं होता, यह बस जिंदगी की रफ्तार है. जो लोग पीछे छूट गए, उन्हें दिल में एक अच्छी याद की तरह रखें, और जो आज आपके साथ हैं, उनके साथ का जश्न मनाएं.

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