गरिमा  और सागर ने मैट्रीमोनियल साइट से एकदूसरे को पसंद किया. कुछ महीनों तक फोन पर हुई बातचीत के बाद दोनों ने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाने पर सहमति की मुहर लगा दी. परिवार वालों ने भी आपस में मिल कर बच्चों की सहमति पर अपनी मुहर लगाई.

गरिमा और सागर दोनों नौकरी करते हैं. हालांकि गरिमा की पगार सागर से ज्यादा है लेकिन उस का परिवार मध्यवर्गीय कामकाजी है  वहीं सागर रिटायर्ड कलैक्टर का इकलौता बेटा है.

लड़के और लड़की की आपसी सहमति ने शेष सवालों पर पूर्णविराम लगा दिया. सगाई के बाद एक दिन सागर अपने दोस्तों के साथ गरिमा के घर भोपाल उस से मिलने पहुंच गया है. पहले तो परिवार वाल अचंभित हो गए लेकिन फिर उन्होंने गरमजोशी से सागर का स्वागत किया. गरिमा ने कैब बुक कर उसे दिनभर अपना शहर घुमाया और रात को पूरे परिवार ने आत्मीयता से उसे विदा किया.

सागर को महसूस ही नहीं हुआ कि वह पहली बार उन के घर आया है. सागर गरिमा के परिवार वालों से मिल कर इतना खुश हुआ कि शादी के पहले अकसर उन से मिलने आने लगा और गरिमा भी उस के घर जा कर परिवार वालों से मिलने लगी. दोनों परिवारों में भले ही आर्थिक संपन्नता समान न हो किंतु उन के विचारों की स्वतंत्रता एवं आत्मीयता परिपूर्ण थी. यह शादी सही अर्थों में 2 परिवारों का मिलन बनी है.

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