पतिपत्नी का रिश्ता विश्वास की डोरी से बंधा होता है. अगर इस रिश्ते में विश्वास की गाड़ी जरा सी भी डगमगाई, तो फिर रिश्ते के टूटने में देर नहीं लगती. पूरा परिवार ताश के पत्तों की तरह बिखर जाता है. अत: एकदूसरे पर संदेह करना मतलब घर की बरबादी को न्योता देना है. फिर चाहे संदेह पति करे या पत्नी. ज्यादातर मामलों में जब पत्नी नौकरीपेशा होती है तब यह संदेह उत्पन्न होता है, जिस का कारण औफिस के लोगों से बातचीत, दोस्ती होती है. संदेह करने वाला पति यह नहीं समझता कि उस की भी औफिस में महिला दोस्त हैं. वह भी उन से हंसहंस कर बातें करता है. अगर औरत किसी से हंसतेबोलते दिख जाए तो हजारों लोगों की उंगलियां उठने लगती हैं. समाज के ठेकेदार पता नहीं उसे क्याक्या नाम देने लगते हैं.

एक सच्ची दास्तां से रूबरू कराना चाहता हूं. पतिपत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं. उन के परिवार में 4 लड़के भी हैं. बड़े लड़के की उम्र करीब 27 साल होगी. काफी सालों तक सब ठीक चलता रहा. फिर अचानक पति के स्वभाव में बदलाव आने लगा. वह बदलाव परिवार को बरबाद करने के लिए काफी था. पति सरकारी नौकरी करता है. पत्नी प्राइवेट जौब करती है. कुछ साल पहले पतिपत्नी के बीच मतभेद शुरू हो गए थे. मतभेद की वजह शक था. पतिपत्नी में रोज लड़ाई होती थी. पति पत्नी को गंदी गालियां देता. बेचारी पत्नी सहन करती रही.

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