Mother’s Day 2026 : 15 साल की स्वेता जब अपनी मां को ले कर यूरोप टूर पर घूमने जाने वाली थी, तो पहले उसे चिंता हुई कि वह मां को साथ ले कर कैसे जाए क्योंकि मां इंडियन आउटफिट पहनती है और वह मां को वैस्टर्न आउटफिट पहनाना चाहती थी.

ऐसे में, उस ने मां के साथ इस बारे जब बात की, तो मां का कहना था कि वह इंडियन आउटफिट में ही विदेश घूमेंगी, लेकिन स्वेता चाहती थी कि वह मां को मौडर्न आउटफिट से परिचय करवाए. उस ने तरकीब निकाली और एक स्टाइलिस्ट से संपर्क किया और उसे घर बुला ली. स्टाइलिस्ट ने मां को समझाया कि वह उन के लिए ऐसी आउटफिट देगी, जिसे पहन कर वे खुद को स्मार्ट महसूस करने के अलावा आरामदायक भी महसूस कर सकती हैं.

स्टाइलिस्ट की बात स्वेता की मां को समझ में आई और उन्होंने अपना आउटफिट से ले कर ऐक्सैसरीज, शूज आदि सब बदल डाली. करीब 1 महीने की इस सेशन ने उन्हे स्मार्ट लेडी बना दिया. इस के बाद जब उन्होंने यूरोप जा कर फोटो खिंचवा कर सोशल मीडिया पर डाली, तो किसी को भी यह समझना मुश्किल था कि यह वही लेडी है, जो एकदम घरेलू थी. इतना ही नहीं आज स्वेता की मां को अपना आइडेंटिटी मिल चुका है और वे जान चुकी हैं कि किस आउटफिट से वे किसी भी पार्टी की रौनक बन सकती हैं.

बदलता है व्यक्तित्व

असल में हर स्त्री खुद को स्मार्ट और सुंदर दिखना पसंद करती है, लेकिन पारिवारिक माहौल में वह सब की देखभाल करते हुए खुद के बारे में सोचना भूल जाती है. ऐसे में अगर टीनऐज बेटी मां को उन के स्मार्टनैस से परिचय करवा सकती है, तो उन की दुनिया ही बदल सकती है. यह सिर्फ अच्छे कपड़े पहनने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और बुद्धिमत्ता का एक संतुलित मिश्रण होता है.

एक स्मार्ट महिला न केवल आकर्षक दिखती है, बल्कि वह स्वतंत्र और अपने लक्ष्यों के प्रति केंद्रित भी होती है. इस से वह केवल खुद को ही नहीं, पारिवारिक माहौल को भी बदल सकती है.

ऐक्सपर्ट की राय

इस बारे में मनोवैज्ञानिक राशिदा कपाड़िया कहती हैं कि टीनऐज (किशोरावस्था) में कदम रख रहीं बेटियां मां की सोच को आधुनिक और अपडेटेड बनाने में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. वे न केवल नई तकनीक से रूबरू कराती हैं, बल्कि मां की रुढ़िवादी सोच को बदल कर उन्हें समय के साथ चलने में मदद करती हैं. आज की टीनऐजर्स डिजिटल दुनिया में सब से ज्यादा सक्रिय होते हैं. वे अपनी मां को स्मार्टफोन चलाने, ऐप्स का इस्तेमाल करने (जैसे WhatsApp, Instagram या औनलाइन बैंकिंग) और सुरक्षित रहने के तरीके सिखा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश करती हैं. इस से मां को बाहरी दुनिया और नई जानकारियों से जुड़े रहने में मदद मिलती है.

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राशिदा आगे कहती हैं कि ऐसा मैं ने देखा है कि सामान्यतया बेटियां अपनी मां की सब से अच्छी ‘स्टाइलिश’ सलाहकार होती हैं. वे उन्हें पुरानी सोच और पुराने फैशन से बाहर निकाल कर मां को नए व ट्रेंडी कपड़े पहनने के लिए प्रेरित करती हैं. इतना ही नहीं त्वचा की देखभाल और खुद को संवारने के नए तरीके बताती हैं, जैसा स्वेता ने अपनी मां रेखा को बताया, जिस से मां का आत्मविश्वास बढ़ता है क्योंकि उम्र उन के लिए केवल एक नंबर है और वे भी आधुनिक दिख सकती हैं. ऐसा करने पर धीरेधीरे मां को भी विश्वास होने लगता है कि मौडर्न दिखना उन के लिए मुश्किल नहीं.

जागरूक होती आज की पीढ़ी

आज की पीढ़ी सामाजिक मुद्दों पर अधिक जागरूक और मुखर होती है. एक बेटी अपनी मां को लैंगिक समानता, मानसिक स्वास्थ्य और नए जमाने के रिश्तों के बारे में बात कर के उन की रुढ़िवादी सोच को बदलने में मदद कर सकती है, जो बेटों के वश की बात नहीं होती.

मां का सकारात्मक होना भी जरूरी

राशिदा हंसती हुई कहती हैं कि कुछ घरों में मां को भी बेटी की बात से सहमत होने में देर लगती है क्योंकि वे अपनी दकियानूसी सोच को सही मानती हैं और उस से निकलना नहीं चाहतीं. मां को भी बेटी की बातों से सहमत होना जरूरी होता है, ताकि वे खुद को आज के जमाने की नारी कहलाने के लिए अपनी लाइफस्टाइल बदलने के लिए तैयार हों.

मां के लिए कुछ निर्देश निम्न हैं :

-सब से पहले मन से यह बात निकाल दें कि मैं बड़ी हूं तो मुझे सब पता है. अपनी बेटी को एक मेंटर के रूप में स्वीकार करें. जब आप सीखने के लिए उत्सुक होंगी, तो बेटी भी आप को सिखाने में ज्यादा दिलचस्पी लेगी.

-मां का रुख सकारात्मक और साहसी होना चाहिए. जब आप अपनी बेटी के स्टाइल को अपनाती हैं, तो यह केवल आप का मेकओवर नहीं होता, बल्कि आप के और बेटी के बीच का रिश्ता भी बहुत गहरा और दोस्ताना हो जाता है.

-अकसर मांएं नए फैशन या तकनीक को इसलिए नहीं अपनातीं क्योंकि उन्हें समाज और आसपास के लोगों का डर होता है. यहां मां को अपनी बेटी पर भरोसा करना चाहिए. अगर आप की बेटी कह रही है कि कोई खास ड्रैस या स्टाइल आप पर अच्छा लग रहा है, तो उसे आत्मविश्वास के साथ पहनें.

-जरूरी नहीं कि आप एक ही दिन में पूरी तरह बदल जाएं. पहले छोटे बदलाव करें, जैसे हेयरस्टाइल बदलना, नई सैंडल पहनना या हलका मेकअप. डिजिटली बदलाव में पहले केवल फोटो भेजना सीखें, फिर धीरेधीरे अन्य ऐप्स का इस्तेमाल करें.

-अगर आप को बेटी का कोई सुझाव पसंद नहीं आ रहा है, तो उसे डांटने के बजाय तर्क के साथ चर्चा करें.

-अपडेट होने का मतलब खुद को तकलीफ देना नहीं है. मां को वही चीजें अपनानी चाहिए, जिन में वे सहजता महसूस करें. असली स्टाइल वही है, जो आप के व्यक्तित्व में आत्मविश्वास लाए.

-नया फोन चलाते समय या कोई नया शब्द बोलते समय गलती होना स्वाभाविक है. अपनी गलतियों पर खुद हंसना सीखें और बेटी को भी हंसने दें. यह माहौल को हलका रखेगा और आप पर दबाव भी कम होगा.

इस प्रकार मां को अपडेट करने में बेटी की भूमिका सब से अच्छी होती है क्योंकि मां बेटियों की बातें बेटों से अधिक सुनती हैं. इसे आज की बेटियां जानती हैं क्योंकि मां की मौडर्न इमेज का बेटियों के जीवन पर काफी गहरा असर पड़ता है और इसे करने में वे पीछे नहीं हटतीं.

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