Silk Mark: भारत की पहचान उसकी समृद्ध परंपराओं और अद्वितीय वस्त्र संस्कृति में छिपी है. इन्हीं में से एक है रेशम, जिसे सदियों से “वस्त्रों की रानी” कहा जाता है. लेकिन बाज़ार में असली और नकली रेशम की पहचान करना आम उपभोक्ता के लिए आसान नहीं. ऐसे में भारतीय रेशम मार्क संगठन (Silk Mark Organisation of India) उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा का सशक्त प्रहरी बनकर उभरा है.

उपभोक्ताओं के लिए भरोसे की मुहर

सिल्क मार्क, भारत सरकार के केंद्रीय रेशम बोर्ड (Central Silk Board) की पहल है, जो यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ताओं को 100% शुद्ध रेशम से बना उत्पाद ही मिले. हर असली रेशमी परिधान या साड़ी पर लगा सिल्क मार्क लेबल उपभोक्ता के लिए विश्वास का प्रतीक है - यह बताता है कि उत्पाद पूरी तरह असली रेशम से बना है. अब से जब भी आप शुद्ध रेशम खरीदें, सिल्क मार्क अधिकृत दुकानों में हे जाएं और सिल्क मार्क लेबल देखकर ही सिल्क खरीदें.

इस लेबल की मदद से उपभोक्ता न केवल ठगी से बचता है, बल्कि असली भारतीय बुनकरों और रेशम उत्पादकों को भी समर्थन देता है.

सिल्क मार्क एक्सपो: शुद्धता और शिल्प की संगमस्थली

हर वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित होने वाले सिल्क मार्क एक्सपो उपभोक्ताओं को सीधे बुनकरों और असली रेशम निर्माताओं से जोड़ते हैं. इन प्रदर्शनियों में न केवल बनारसी, कांजीवरम, पैठनी, पोचमपल्ली इत्यादि मशहूर साड़ियों की झलक मिलती है, बल्कि भारत के छोटे-छोटे रेशम क्लस्टर्स की अनूठी कलाओं से भी परिचय होता है.

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