सवाल-
मेरे चेहरे पर 2 – 3 जगह मस्से हो गए हैं ? जो धीरेधीरे अपने आकार में भी बढ़ने लगे हैं ? मुझे चिंता हो रही है कि कहीं ये बढ़कर पूरे चेहरे पर ही न फैल जाएं ? कृपया कोई उपाय बताएं जिससे ये मस्से हट भी जाएं और आगे भी न होएं?
जवाब
मस्सों को अंग्रेजी में वार्ट्स कहते हैं. ये अकसर ज्यादा धूप में रहने के कारण होते हैं या फिर ह्यूमन पेपिलोमा वायरस नामक विषाणु के कारण होते हैं. भले ही ये मस्से दर्द नहीं करते हैं. लेकिन न तो ये दिखने में अच्छे लगते हैं और साथ ही हमारी सुंदरता को भी कम करने का काम करते हैं. ऐसे में अगर ये मस्से आपकी गर्दन , पीठ की जगह आपके चेहरे पर उग आए , तो ये आपके लिए चिंता की बात है. ऐसे में हम आपको कुछ एडवांस्ड ट्रीटमेंट्स से अवगत करवाते हैं , जिससे आपको मस्सों की समस्या से छुटकारा मिलने के साथसाथ आपके चेहरे की खूबसूरती भी बरकरार रह सके. तो आइए जानते हैं इस संबंध में फरीदाबाद के एशियन इंस्टिट्यूट ओफ मेडिकल साइंसेज के डर्मेटोलॉजिस्ट डाक्टर अमित बंगिया से.
क्या है ट्रीटमेंट
बता दें कि काफी हद तक मस्से खुद से ठीक हो जाते हैं. इसका कारण यह है कि जब इम्यून सिस्टम , जिनके कारण मस्से होते हैं , उनसे फाइट करने में सक्षम हो जाता है. लेकिन इसमें कितना समय लगेगा , इस बारे में कहां नहीं जा सकता. ऐसे में बहुत से लोग इन मस्सों के बढ़ने की परेशानी को देखते हुए मेडिकल ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं. तो आपको बताते हैं उन ट्रीटमेंट के बारे में-
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– co2 लेज़र ट्रीटमेंट– जिस तरह से चेहरे व शरीर के अनचाहे बालों को हटाने के लिए लेज़र ट्रीटमेंट का सहारा लिया जाता है. ठीक उसी तरह से मस्सों यानि वार्ट्स को हटाने के लिए लेज़र ट्रीटमेंट का सहारा लिया जाता है. लेज़र एनर्जी के जरिए काम करता है. इस प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज का चेहरा क्लीन किया जाता है. उसके बाद मस्से के ऊपर एनेस्थेटिक क्रीम को अप्लाई किया जाता है, जिसे एक घंटे तक लगा छोड़ दिया जाता है, जिससे वो जगह सुन हो जाती है. इसके बाद आगे की प्रक्रिया को शुरू करने से पहले एनेस्थेटिक क्रीम को हटाया जाता है , उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाती है. जिसमें मस्सों पर लेज़र ,ट्रीटमेंट दिया जाता है. आखिर में हीलिंग क्रीम लगाई जाती है. अगर कम व छोटे मस्से होते हैं तो एक सिटिंग में काम हो जाता है. लेकिन अगर ज्यादा मस्से होते हैं तो 3 – 4 सिटिंग की जरूरत पड़ती है.
– रेडियो फ्रीक्वेंसी कॉटरी – इस प्रक्रिया में वार्ट को हीट वेव के जरिए हटाया जाता है. जिससे सोफ्ट टिश्यू को काट दिया जाता है. इसमें सबसे पहले लोकल एनेस्थीसिया देने के लिए क्रीम अप्लाई की जाती है. जिससे जरा भी दर्द की अनुभूति न हो. रेडियो फ्रीक्वेंसी कॉटरी प्रक्रिया के जरिए मस्से हटाने के बाद छोटे एरिया की स्किन में हल्का सा घाव रह जाता है. जो 4 -5 दिन में ठीक हो जाता है. जिसके लिए हीलिंग क्रीम दी जाती है.
– केमिकल पील– अगर फ्लैट वार्ट होते हैं , तो डाक्टर केमिकल पील की ही सलाह देते हैं. जिसमें आपको हर दिन पीलिंग मेडिसिन लगवाने की जरूरत होती है. पीलिंग मेडिसिन में सैलिसिलिक एसिड, ग्ल्य्कोलिक एसिड इत्यादि होते हैं. ये स्किन सेल्स को तब तक एक्सफोलिएट करने का काम करते हैं , जब तक वार्ट हट नहीं जाते. यहां तक कि ये हैल्दी स्किन सेल्स को भी प्रमोट करने का काम करते हैं. इससे कुछ ही महीनों में आपको वार्ट की समस्या से छुटकारा मिल जाता है. इस तरह से आप वार्ट्स की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं.
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कुछ सावधानियां भी– इन ट्रीटमेंट्स के बाद आपको कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है, जिसमें शामिल है आपको कुछ दिनों तक प्रभावित जगह को धूप व पानी से बचा कर रखना चाहिए. साथ ही फेशियल , शेविंग, हार्श क्रीम से चेहरे को बचाना चाहिए. डाक्टर के बताए सनस्क्रीन, फेस वाश लगाने के साथ ट्रोपिकल एंटीबायोटिक क्रीम जरूर लगानी चाहिए. इससे कुछ ही दिनों में घाव ठीक होने के साथ आपकी ब्यूटी में लगा दाग ठीक हो जाता है.
अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz सब्जेक्ट में लिखे…
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