सवाल-

मैं 26 वर्षीय युवती हूं. विवाह को 4 वर्ष हो चुके हैं. एक 3 वर्ष का बेटा है. घर में सासससुर और देवर है. हमारा अपना घर है. पति का अच्छा पैतृक व्यवसाय है, अर्थात आर्थिक रूप से काफी संपन्न हैं. मैं नौकरी करना चाहती हूं, परिवार वाले यही दलील देते हैं. विवाहपूर्व मैं नौकरी करती थी. इन लोगों के कहने पर ही मैं ने नौकरी छोड़ी थी. उसी कंपनी से मुझे फिर औफर आया है पर कोई नहीं मान रहा. मैं सारा दिन चूल्हेचौके में, जहां कोई खास काम मेरे करने लायक नहीं है, नहीं बिताना चाहती.

जवाब-

यदि पति और परिवार वाले आप के नौकरी करने के हक में नहीं हैं तो आप को इस की जिद नहीं करनी चाहिए. घर के कामकाज के साथसाथ आप पति के काम में मदद कर सकती हैं, बच्चे की देखभाल भलीभांति कर सकती हैं और अपनी कोई रुचि विकसित कर सकती हैं, किसी समाजसेवी संस्था में अपनी सेवाएं दे सकती हैं. इन के अलावा और भी कई काम हैं जिन्हें आप अपनी योग्यता और सुविधा के अनुसार घर पर रह कर कर सकती हैं.

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जून का महीना था. सुबह के साढ़े 8 ही बजे थे, परंतु धूप शरीर को चुभने लगी थी. दिल्ली महानगर की सड़कों पर भीड़ का सिलसिला जैसे उमड़ता ही चला आ रहा था. बसें, मोटरें, तिपहिए, स्कूटर सब एकदूसरे के पीछे भागे चले जा रहे थे. आंखों पर काला चश्मा चढ़ाए वान्या तेज कदमों से चली आ रही थी. उसे घर से निकलने में देर हो गई थी. वह मन ही मन आशंकित थी कि कहीं उस की बस न निकल जाए. ‘अब तो मुझे यह बस किसी भी तरह नहीं मिल सकती,’ अपनी आंखों के सामने से गुजरती हुई बस को देख कर वान्या ने एक लंबी सांस खींची. अचानक लाल बत्ती जल उठी और वान्या की बस सड़क की क्रौसिंग पर जा कर रुक गई.

पूरी कहानी पढ़ने के लिए- चक्रव्यूह भेदन : वान्या क्यों सोचती थी कि उसकी नौकरी से घर में बरकत थी

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