सवाल-

आजकल चारों तरफ कोरोना वायरस का दबदबा बना हुआ है और उसे ले कर लोग काफी डरे हुए हैं. मेरे पति की जौब ऐसी है कि उन्हें काफी ट्रैवल करना पड़ता है, इसलिए मैं उन के स्वास्थ्य के प्रति चिंतित रहती हूं. कृपया बताएं कि यह कोरोना वायरस है क्या, इस के होने पर क्या लक्षण प्रकट होते हैं, क्या ऐसी कोई दवा बनी है, जो इस का इलाज कर पाने में सफल है? इस के प्रकोप से बचे रहने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर क्याक्या युक्तियां अपनाई जा सकती हैं? क्या बाहर जातेआते समय मुंह और नाक पर मास्क लगाए रखने से वायरस से बचा जा सकता है?

जवाब-

कोरोना वायरस प्राणि जगत में पाई जाने वाली खास किस्म की बड़ी वायरस फैमिली है, जो मामूली खांसीजुकाम से ले कर गंभीर ‘सब ऐक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम’ (सार्स) और ‘मीडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम’ (मार्स) को उत्प्रेरित कर पूरी दुनिया में समयसमय पर गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न करने के लिए जानी जाती रही है. समझा जाता है कि इस की कुछ नस्लें (स्ट्रेंस) खास पशुओं में बिना उन के स्वास्थ्य पर धावा बोले पलतीपनपती रहती हैं, लेकिन संयोगवश जब ये नस्लें पशु से मनुष्य में प्रविष्ट कर जाती हैं तो श्वसन प्रणाली में गंभीर इन्फैक्शन उत्पन्न कर जान पर बन आती है.

दिसंबर, 2019 में चीन के वुहान शहर के लोगों में शुरू हो कर आज दुनिया के 100 से अधिक देशों में फैला नया कोरोना वायरस इसी वायरस फैमिली की नई पैदाइश है. इसे ‘कोविड 19’ का नाम दिया गया है. यह नया वायरस अपने उन पूर्वज कोरोना वायरसों से बिलकुल जुदा है, जिन्होंने बीते सालों में सार्स और मार्स उपजा कर दुनिया के कुछ देशों में मृत्यु का तांडव मचाया था. उन की तुलना में यह नया वायरस फैलने में कहीं अधिक तेज है, लेकिन इस की घातकता उन के मुकाबले कहीं कम है. अब तक मिले आंकड़ों से यह पाया गया है कि इस से प्रभावित हुए कुल 20% से कुछ कम लोगों में इन्फैक्शन गंभीर किस्म का होता है और कुल 2% लोगों में यह जानलेवा साबित हो रहा है. अधिक उम्रदराज लोगों, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रैशर और हार्ट डिजीज से पीडि़त लोगों में रोग की घातकता अधिक पाई गई है.

बुखार, सूखी खांसी, थकान, बदन में दर्द, सर्दीजुकाम नए कोरोना वायरस से उपजे रोग के मामूली लक्षण हैं और इस से पीडि़त 80% रोग इस के असर से कुछ ही दिनों में छुटकारा पा लेते हैं. बाकी 20% में इन लक्षणों के साथसाथ जब सांस भी उखड़ने लगे तो समझ लेना चाहिए कि मामला गंभीर है और अस्पताल में भरती होने की नौबत आ सकती है. इन गंभीर रोगियों में निमोनिया होने के साथसाथ गुरदे फेल होने से जान पर बन सकती है.

नए कोरोना वायरस से बचे रहने के लिए कई छोटेछोटे उपाय अपनाने उपयोगी हैं. ?भीड़ वाले सार्वजनिक स्थलों में जाने से बचने में भलाई है. जाना आवश्यक ही हो तो समयसमय पर अपने हाथ साबुन और पानी से या सैनिटाइजर से साफ रखने से इन्फैक्शन से बचा जा सकता है. यदि किसी जानने वाले को बुखार, सूखी खांसी, थकान के लक्षण हों, सर्दीजुकाम हो तो उस से दूर रह कर अपना बचाव करने में भलाई है.

कोरोना वायरस से बीमार व्यक्ति के खांसनेछींकने से यह हवा में पहुंचता है और फिर दूसरे के शरीर में प्रवेश पा उसे भी इंफैक्ट कर देता है. हवा में उड़ कर आए इस के कण आसपास के फर्नीचर, डौर हैंडल व अन्य चीजों की सतह पर कई घंटों और दिनों तक जिंदा रह सकते हैं. यह उस जगह के तापमान, नमी और सतह के भौतिक गुणों से तय होता है कि वायरस कितने दिन तक जिंदा रह कर दूसरों को इंफैक्ट कर सकता है.

मास्क लगाने में कोई हरज नहीं है, लेकिन उस की जरूरत तभी है जब घरपरिवार में किसी को रोग होने का अंदेशा हो, खुद को बुखार, सूखी खांसी, थकान के लक्षण हों या कोई डाक्टर, नर्स हो जिस का सामना कभी भी नए कोरोना वायरस के रोगी से हो सकता है.

जहां तक प्रभावी दवाओं का प्रश्न है, तो अब तक ऐसी कोई दवा नहीं बनी है, जो इस वायरस को मात दे सकती हो. गंभीर रोगियों को अस्पताल में रख कर लाइफ सपोर्ट थेरैपी ही दी जाती है ताकि शरीर वायरस के दुष्प्रभावी चक्रव्यूह से सुरक्षित बाहर आ सके.

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