अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है, तो ये लेख अंत तक जरूर पढ़ें…

डा. विकास जैन, डाइरैक्टर ऐंड यूनिट हैड, डिपार्टमैंट औफ यूरोलौजी, फोर्टिस हौस्पिटल, दिल्ली.

सवाल

कौन से लक्षण हैं जिन से हम पहचानें कि हमारी किडनियां सही काम कर रही हैं या बीमार हैं?

जवाब

‘इंटरनैशनल सोसायटी औफ नैफ्रोलौजी’ के अनुसार विश्व की 10त्न जनसंख्या किडनियों से संबंधित मामूली या गंभीर समस्याओं से जूझ रही है. ऐसे में आप इन 7 लक्षणों से अपनी किडनियों की सेहत को जान सकते हैं और उन्हें ठीक रखने के लिए जरूरी कदम उठा सकते हैं:

1.  लगातार उर्जा की कमी और थकान महसूस होना. 2. शरीर के विशेष भागों (विशेष कर पैरों और टखनों) में सूजन आना. 3. यूरीन से संबंधित समस्याएं शुरू होना जैसे सामान्य से अधिक या कम यूरिन पास करना, यूरिन का टैक्स्चर बदल जाना. 4. लगातार रक्तदाब अधिक बना रहना. 5. यूरिन ऐल्बुमिन टू क्रिएटनिन रेशो (जूएसीआर) बढ़ा हुआ होना. यूरिन में ऐल्बुमिन की मात्रा अधिक होना, किडनी के क्षतिग्रस्त होने का प्रारंभिक संकेत है. 6. ग्लोमेरूलर फिल्ट्रेशन रेट (जीएफआर) टैस्ट, जीएफआर सामान्य न होना किडनियों के बीमार होने का संकेत है. 7. सीरम क्रिएटनिन टैस्ट में रक्त में क्रिएटनिन का बढ़ना किडनियां ठीक प्रकार से काम नहीं करने का संकेत है.

सवाल

डायबिटीज के मरीजों में किडनियों से संबंधित समस्याओं का खतरा अधिक क्यों रहता है?

जवाब

दरअसल, डायबिटीज केवल एक रोग नहीं मैटाबोलिक सिंड्रोम है, जिस का प्रभाव किडनियों सहित शरीर के प्रत्येक अंग और उस की कार्यप्रणाली पर पड़ता है. हाथों, टखनों और पैरों के पंजों में सूजन की समस्या डायबिटिक नैफ्रोपैथी के कारण हो सकती है. डायबिटीज से पीडि़त 30-40त्न लोगों में डायबिटिक नैफ्रोपैथी के कारण किडनियां खराब हो जाती हैं. आप अपनी यूरिन की जांच कराएं. यूरिन में ऐल्बुमिन का आना और शरीर में क्रिएटिनिन बढ़ना डायबिटिक नैफ्रोपैथी के संकेत हैं. अगर यूरिन में माइक्रो ऐल्बुमिन नहीं आ रहा है तो किडनियों पर असर नहीं हुआ है. डायबिटिक नैफ्रोपैथी को ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन उपचार के द्वारा इस के गंभीर होने की प्रक्रिया को बंद या धीमा किया जा सकता है. उपचार में रक्त में शुगर के स्तर और रक्तदाब को जीवनशैली में परिवर्तन ला कर और दवाइयों से नियंत्रित रखा जाता है.

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