Ahaan Panday: ‘सैयारा’ के हिट होते ही अहान पांडे रातोरात फेमस चेहरा बन चुके हैं. अहान पांडे, 80ज के हिट एक्टर चंकी पांडे के भाई चिकी पांडे के बेटे और अनन्या पांडे के कजिन हैं. अहान पांडे की वह बातचीत काफी चर्चा में है, जिसमें वह कहते हैं कि उनकी और अंकल चंकी पांडे की फेमिली एक ही घर में रहती है. उनके इस स्टेटमेंट से पता चलता है कि टीनेजर्स या यूथ को घर में सही एनवॉयरमेंट मिले तो उन्हें ‘को-लीविंग’ से एतराज नहीं होगा.

अहान ने क्या कहा, समझें

अहान पांडे के आलीशान घर में चार फ्लोर्स है, जहां वह अपनी बहन और कजिन्स के साथ खेलते-कूदते बड़े हुए. अपनी बहन अलाना पांडे से बातों के दौरान उन्होंने कहा कि जब तक वह 14 साल के थे, फ्लैट के कॉरिडोर में बने कमरे में रहते थे. उन्होंने यह भी शेयर किया कि पहली बार 15 साल की उम्र में उन्होंने अपनी बहन के साथ स्मोकिंग की और इसके लिए उनकी बहन अलाना ने ही उन्हें उकसाया था. अहान की बातें इस ओर इशारा करती हैं कि अगर टीनेजर्स को अपने घर में स्पेस मिले तो वह कम उम्र में अलग रहने के बजाय ‘को-लीविंग’ में रहने को प्राइओरिटी देंगे.

‘कॉ-लीविंग’ को ‘जॉइंट फेमिली’ से कंफ्यूज मत करें

‘जॉइंट फेमिली’ में एक व्यक्ति ‘हेड ऑफ द फेमिली’ होता है और पूरे घर में उसी की बात चलती है. फेमिली मेंबर्स चाहे न चाहे उनकी बातों को मानते हैं. इससे परिवार में तनाव का माहौल पैदा होता है, जो अंतत: बटवारे का रूप ले लेता है. इसके ठीक विपरीत को-लीविंग के कंसेप्ट में परिवार में एक मुखिया नहीं होता.

मसलन दादा जी के तीन बेटे एक घर में रहते हुए अपनी-अपनी न्यूक्लियर फेमिली की जिम्मेदारियों को प्राइओरिटी देते हैं. इससे ताऊजी और चाचाजी का एक-दूसरे की फेमिली में दखलदांजी का लेवल सीमित होता है. देखा गया है कि  ‘जॉइंट फैमिली’ में झगड़े की शुरुआत की दो वजहें होती हैं.

पुरुषों के बीच हर फेमिली मेंबर के खर्च और घर चलाने में उनके योगदान की तुलना होती है तो महिलाओं के बीच कलह का विषय होता है कि आज खाना क्या और कैसे बनगा. ‘को-लीविंग’ में यह स्थिति नहीं होती. एक ही घर में रहने वाला हर परिवार अपनी आय के हिसाब से घर चलाता है और अपनी पसंद का खाना खाता है.

साथ रहने के लिए अपनाएं ‘कॉ-लीविंग’

कई फेमिलीज में टीनेजर्स, अपने पैरेंट्स को छोड़कर दोस्तों के साथ अलग रहने लगे हैं ताकि वह अपनी जिंदगी बिना किसी रोक-टोक के अपने हिसाब से एंजॉय कर सकें. हालांकि वह इस बात से कतई अनजान नहीं होते हैं कि ज्यादातर दोस्त मौकापरस्त होते हैं, जो किसी न किसी स्वार्थ की वजह से आसपास मंडराते हैं इसलिए जेनरेशन जेड भी फेमिली की जरूरत को समझती है.

आज के टीनेजर्स और यूथ में एक बात सबसे अच्छी है कि इनके पैरेंट्स की भले ही आपस में नहीं बनती हो, कजिन्स खासकर फर्स्ट कजिन्स के साथ इनकी खूब बनती है. यह अपने रिश्ते को लेकर स्पष्ट होते हैं, अपने चचेरे भाई-बहनों को स्पेस देते हैं और जरूरत के समय उनके साथ खड़े होते हैं. सही मायने में ये सच्चे बेस्ट फ्रेंड जैसे होते हैं.

‘को-लीविंग’ के लिए घर को थोड़ा चेंज करें

आर्किटेक्ट की मदद से घर के टीनेजर्स के कमरे को एक स्टूडियो अपार्टमेंट की तरह डेवलप कराएं. इनके कमरे में एक किचन हो जिसके पास एक आईलैंड हो. आईलैंड, किचन में एक ऊंची टेबल की तरह का स्पेस होता है, जिसमें कुछ ड्राअर्स बने होते हैं, इस आईलैंड के साथ कुछ चेयर्स लगी होती हैं ताकि यूथ अपने दोस्तों, गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के साथ बातें करते हुए फूड या टेबल गेम्स एंजॉय कर सकें. कमरे के किचन में एक हाईक्वालिटी की चिमनी जरूर लगवाएं ताकि कमरे में कुकिंग की स्मेल न फैले.

कॉ- लीविंग के और भी हैं फायदें

70 या इससे अधिक आयु के दोस्त भी साथ में रह सकते हैं, क्योंकि इनके बेटे-बेटी अपनी जॉब की वजह से और अपने बच्चों की जिम्मेदारियों में बहुत बिजी हो जाते हैं.

अकेलेपन से होने वाले डिप्रेशन से बचाव

एक घर में रहने की वजह से युवा भी पारिवारिक जिम्मेदारियों में अपना योगदान देते हैं. मसलन पापा के बिजनेस का अकाउंट्स देखना, मां को शॉपिंग के लिए जाना, घर में आने-जाने वाले रिलेटिव्स को महत्व देना, जिन तकलीफों को पैरेंट्स शेयर नहीं कर पाते हैं, वह साथ में रहने से समझ में आती हैं, पैरेंट्स के घरेलू कामों में योगदान करना जो कि फैमिली सिस्टम को समझने के लिए भी जरूरी है.

फैमिली सिस्टम पर ऐश्वर्या का इंटरव्यू

एक विदेशी एंकर ने तंज भरे लहजे में पूर्व मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या राय से सवाल किया था, क्या यह सच है कि आप पैरेंट्स के साथ रहती हैं? क्या इंडिया में बड़े हो चुके बच्चों का पैरेंट्स के साथ रहना कॉमन है? इस पर ऐश्वर्या राय का स्मार्ट जवाब था- हां, अपने पैरेंट्स के साथ रहना अच्छा लगता है.

इंडिया में पैरेंट्स के साथरहना कॉमन है, क्योंकि हमें पैरेंट्स के साथ डिनर करने के लिए अपॉइंटमेंट लेने की जरूरत नहीं पड़ती है. दरअसल, इंडियन या कहें तो एशियन फेमिली सिस्टम में किशोर और युवा बच्चे अपने पैरेंट्स के साथ रहते हैं, लेकिन पिछले एक दशक से अनमैरिड टीनेजर्स या यूथ की बड़ी संख्या न्यूक्लियर फेमिली से अलग रहने में यकीन करने लगी है.

ऐसे में 27 साल के एक्टर अहान पांडे का यह कहना कि वह अपने चाचा-चाची और कजन्स के साथ एक घर में रहते हैं, यूथ के मन की उन परतों को सामने लाता है जिसके अनुसार कुछ आजादी मिले, तो ये घर के बाहर किराए के घर का रुख नहीं करेंगे.  Ahaan Panday

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