Bikini Influencers: सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, पर फैशन इन्फ्लुएंसर्स की लंबीचौड़ी फौज खड़ी हो गई है. इन का एक सैक्शन खुद को सोशल मीडिया मौडल कहता है. दिलचस्प यह है कि इन में फीमेल मौडल ही सोशल मीडिया पर टिक पाती हैं. उन्हीं को फौलोअर्स और लाइक्स भरभर कर मिल रहे होते हैं. मेल मौडल का तो अतापता तक नहीं चलता.
सोचने वाली बात यह है कि ये इन्फ्लुएंसर्स, जो खुद को मौडल कहती हैं, मौडलिंग के नाम पर सिर्फ अपना शरीर दिखाती हैं. बेशक इस में कोई हर्ज नहीं, वे चाहे जैसा दिखें या दिखाएं. वे दिखाती हैं क्योंकि उन के पास मौडलिंग का महज यही सैंस है. मगर समस्या उन की है जो उन्हें देखते हैं, उन्हें लाइक करते हैं और फौलो करते हैं. इन्हें न मौडलिंग का सैंस है न इस बात का कि वे इन्हें फौलो-लाइक कर के हासिल क्या कर रहे हैं. सोशल मीडिया की मौडल तो यह कर के पैसा कमा रही हैं मगर देखने वाले क्या कमा रहे हैं?
यहां कुछ ऐसे इंस्टा मौडल के नाम हैं जो रैगुलर्ली बिकिनी फोटोज पोस्ट करती हैं और कई बार वायरल भी होती हैं-
केट शर्मा – ये हौट बिकिनी लुक्स में फोटोज शेयर करती हैं और ब्यूटीफुल कर्व्स के लिए जानी जाती हैं. इन की अधिकतर पिक्चर्स में मौडलिंग के नाम पर अंग प्रदर्शन दिखाई पड़ता है.
नेहा मलिक – इंस्टा पर स्ट्रिंग बिकिनी में बोल्ड पोज देती हैं ये और बहुत फास्ट ग्रो कर रही हैं. इन्हें खूब लाइक्स और शेयर मिलते हैं. लोग इन के कमैंट में सैक्सी, बोल्ड, और हौट खूब लिखते हैं.
साक्षी मलिक – ‘बम डिग्गी डिग्गी’ गर्ल अब इंस्टा पर बिकिनी शूट्स के लिए ट्रैंड में रहती हैं.
उर्फी जावेद – डिफरैंट और एक्स्ट्रा एक्सपोजिंग आउटफिट्स के लिए फेमस हैं ये. हालांकि बीते समय में इन्होंने अपनी इस छवि पर काम करना शुरू किया है.
आभा पौल – ये स्टिमी फोटोशूट्स के लिए जानी जाती हैं. इंस्टा पर 1.5 मिलियन फौलोअर्स हैं इन के. इन के पोज ख़ास इंटैंशन से भरे रहते हैं.
सोफिया अंसारी – 1 करोड़ 50 लाख से ज्यादा फौलोअर्स के साथ, बिकिनी में डांस और ट्रैंडिंग वीडियो पोस्ट करती हैं ये. ये फैशन पोस्ट कम जबकि हौट फोटो और रील ज्यादा अपलोड करती हैं.
खुशी मुखर्जी – हाल में काफी ट्रैंड में रही हैं ये. अजीबोगरीब कपड़े पहनने में माहिर है ये. हाल में इन्होंने ऐसी साइड स्लिट ड्रैस पहनी जिस के अंदर उन्होंने इनरवियर नहीं पहनी थी, जिसे ले कर ये काफी ट्रौल हुईं.
दरअसल, इन का मेजर फोकस फिजिकल अट्रैक्शन और सैंसुअल प्रजैंस पर होता है. इन्हें मौडलिंग की समझ न के बराबर होती है मगर इन्हें यह समझ खूब होती है कि सोशल मीडिया पर लोग क्या देखना चाहते हैं. यह भी हो सकता है कि इन्हें मौडलिंग की समझ हो मगर ये अच्छे से जानती हैं कि इन के फौलोअर्स और व्यूअर्स को क्या देखना अच्छा लगता है.
प्रोज और कौन्स
पौजिटिव पौइंट्स
- ये इंफ्लुएंसर्स अपने बौडी टाइप को कौन्फिडैंस के साथ शो करती हैं, जिस से बौडी पौजिटिविटी को बढ़ावा मिलता है.
- ब्रैंड्स इन्हें प्रमोशन्स, शूट्स और स्पौंसरशिप के लिए अप्रोच करते हैं, जिस से ये फाइनैंशियली इंडिपेंडैंट बनती हैं.
- ये जल्दी वायरल हो जाती हैं और इन्हें ढेरों फौलोअर्स मिल जाते हैं.
- इन की रील पर करोड़ से भी अधिक व्यूज मिल जाते हैं और इन की एंगेजमैंट भी बढ़िया रहती है.
नैगेटिव पौइंट्स
- लगातार बिकिनी फोटोज से ब्यूटी का स्टैंडर्ड सिर्फ फिजिकल अपीयरैंस तक सिमट जाता है.
- यंग गर्ल्स पर यह प्रैशर बन जाता है कि फेमस होने के लिए उन्हें भी ऐसा करना पड़ेगा.
- कभीकभी ये कंटैंट बौर्डर लाइन औब्जेक्टिफाइंग हो जाते हैं जहां सिर्फ बौडी दिखाना ही मेन कंटैंट बन जाता है.
- अश्लील कमैंट झेलने पड़ते हैं.
- इन का कैरियर ज्यादा दिनों तक टिकता नहीं, क्योंकि बौडी को मेंटेन भी खूब करना पड़ता है.
- ये इस के लिए सर्जरी करवाती हैं, मगर कभीकभी इन का रिस्क भी बढ़ जाता है.
क्लास बनाम औब्जेक्टिफिकेशन
बोल्ड होना गलत नहीं है, लेकिन अगर बोल्ड का मतलब सिर्फ शरीर दिखाना बन जाए तो वो एक्सप्रेशन नहीं, औब्जेक्टिफिकेशन बन जाता है. ऐसी कई इंस्टा इंफ्लुएंसर हैं, जैसे कोमल पांडे, कृतिका खुराना (बोहो गर्ल), जो पूरे कपड़ों में भी स्टाइल, ग्रेस और पर्सनैलिटी शो करती हैं. उन का कंटैंट आर्टिस्टिक और ट्रैंडी होने के साथसाथ रिस्पैक्टफुल भी होता है.
अगर हर पोस्ट सिर्फ एक्सपोजर पर बेस्ड हो, तो मैसेज यह जाता है कि ‘लुक्स इज एवरीथिंग’. हमें ऐसा एनवायरनमैंट बनाना चाहिए जहां ग्रेस, इंटैलिजैंस और एथिक्स भी फौलोअर्स और लाइक्स डिसाइड करें. मगर सोशल मीडिया पर ऐसी उम्मीद की नहीं जा सकती.
बिकिनी पहनना चौइस है, कोई गलत चीज नहीं. लेकिन जब वही बिकिनी हर पोस्ट की जान बन जाए और सिर्फ फिजिकल अट्रैक्शन से ही फौलोअर्स बढ़ें, तो फिर सोचने की जरूरत है कि क्या हम ब्यूटी को बहुत ही लिमिटेड तरीके से डिफाइन तो नहीं कर रहे?
खूबसूरती सिर्फ स्किन या बौडी में नहीं होती वह होती है सोच, बिहेवियर और ग्रेस में. बिकिनी में कौन्फिडैंट लगना एक स्ट्रैंथ हो सकती है, लेकिन इस में जब तक क्रिएटिविटी नहीं हो तो वह सपाट और बेहूदा लगने लगती है.
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