Khilti Gada Shah: हमारे देश में जो प्राचीन काल से आई हुई डिजाइंस है , जो हाथ से बनाई हुई खूबसूरत कलाकृतियां हैं,जो हमारे देश के छोटे-छोटे गांव और शहरों में क्रिएट होती रही है , वैसी खूबसूरत कलाकृतियां डिजाइंस पूरे विश्व में कहीं नहीं है , और मेरी इच्छा है अपने इंटीरियर डिजाइन के जरिए इन भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाली कलाकृतियों का अपने काम के जरिए प्रदर्शन करके पूरे विश्व में प्रसारित करना चाहती हूं.

यह हम नहीं कह रहे बल्कि यह कहना है आर्किटेक्ट और इंटीरियर डिजाइनर खिलती गदा शाह का जो पिछले 10 सालों से देश विदेश में घूम कर भारतीय कलाकृति पर रिसर्च करके अपने काम के जरिए बतौर आर्किटेक्ट और इंटीरियर डेकोरेटर ना सिर्फ भारतीय संस्कृति को सम्मानित कर रही है बल्कि अपने काम के जरिए भारतीय कलाकृतियों की खूबसूरती को अपने तरीके से पेश भी कर रही है.

पिछले 8 सालों से लाइंस एंड ग्रूव्स  lines & grooves के जरिए बतौर आर्किटेक्ट और इंटीरियर डिजाइनर डेकोरेटर खिलती गदा शाह ने 100 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स पर काम किया है , सिर्फ इंडिया में ही नहीं विदेश में दुबई में भी उनके कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. हाल ही में हुई मुलाकात के दौरान खिलती गदा शाह ने हमें अपने काम , संघर्ष, और नए प्रोजेक्ट्स को लेकर खास जानकारी दी.

आप बचपन से ही आर्किटेक्ट बनना चाहती थी, या किसी और काम में आपकी दिलचस्पी थी?

बचपन से ही मेरा सपना आर्किटेक्ट बनने का ही था, क्योंकि मेरे जो डैडी है वह भी बिल्डर है घर का माहौल भी काफी कुछ इसी लाइन से जुड़ा हुआ था , पर्सनली मुझे क्रिएटिव कामों में बहुत दिलचस्पी है, इसलिए मुझे आर्किटेक्ट ही बनना था, मैंने एल एस  रहेजा से 5 साल का आर्किटेक्ट  का कोर्स किया , मैं आर्किटेक्ट तो बन गई लेकिन मुझे इसमें संतुष्टि नहीं मिल रही थी, क्योंकि इसमें जितने भी प्रोजेक्ट थे ज्यादातर मुंबई के थे, और इस आर्किटेक्ट के प्रोजेक्ट में कम से कम 7 या 8 साल लग जाते हैं.

इतने लंबे समय तक एक ही प्रोजेक्ट से जुड़े रहना और क्रिएटिविटी ना दिखा पाना मुझे थोड़ा असंतुष्ट कर रहा था , इसलिए मैंने अपने दम पर लाइंस एंड ग्रूव्स नामक फर्म शुरू की जिसके जरिए मैं इंटीरियर डेकोरेटर का काम भी शुरू किया, क्योंकि इंटीरियर के प्रोजेक्ट में ज्यादा से ज्यादा 1 साल या डेढ़ साल लगता है, और काफी कुछ क्रिएटिव दिखाने का मौका मिलता है इसलिए मैंने आर्किटेक्ट के साथ इंटीरियर डेकोरेटर का काम भी शुरू किया . अच्छा रिस्पांस मिला , अब तक मैं 100 के करीब प्रोजेक्ट कर चुकी हूं, जो सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेश दुबई में भी संपन्न हुए हैं.

बतौर इंटीरियर डेकोरेटर आपको क्या नया सीखने को मिला?

इंटीरियर एक ऐसा क्षेत्र है जहां पर काफी कुछ करने का मौका मिलता है कई सारे क्रेजी आइडियाज होते हैं, जो हम क्लाइंट के साथ डिस्कस करके उस पर काम करते हैं, इसमें सिर्फ क्रिएटिविटी नहीं बल्कि क्लाइंट्स के कंफर्ट इमोशंस , आदि को ध्यान में रखकर हम अपना प्रोजेक्ट पूरा करते हैं.

जब आपने अपना खुद का लाइंस एंड ग्रूव्स शुरू किया तो घर वालों का कितना सपोर्ट मिला?

सच बात तो यह है घर वालों का सपोर्ट हर इंसान के लिए महत्वपूर्ण होता है . मेरे घर में भी मेरे डैडी मेरे भाई  मेरे पति ने मुझे फुल सपोर्ट किया , डैडी ने तो मुझे यह कहा कि मैं उनके साथ ही ज्वाइन हो जाऊं , लेकिन मैंने उनसे कहा कि मैं अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हूं , इसलिए वह मुझे सिर्फ अपने ऑफिस में थोड़ी सी जगह दे दे,उसके बाद डैडी ने मुझे 100 स्क्वायर फीट जगह दी , जहां से मैंने तीन लोगों के साथ मिलकर बतौर आर्किटेक्ट एंड इंटीरियर डिजाइनर अपना काम शुरू किया. और आज 8 साल बाद मेरे पास 1000 -1000 फिट के दो ऑफिस है वडाला में जहां 25 लोगों का स्टाफ है .

आपने जैसा कि बताया आपके दो ऑफिस है हजार हजार स्क्वायर फीट के क्या इसके पीछे कोई खास मकसद है?

हां मैंने नीचे का ऑफिस खास तौर पर इसलिए लिया ताकि मैं वहां से इंडिया की जो आर्ट है उसे अपने ऑफिस में क्रिएटिविटी के जरिए दिखाकर क्लाइंट्स को समझा कर  इंडियन संस्कृति से भरी कलाकृति को प्रस्तुत कर सकूं. जैसे कि कुछ लोगों को इंडियन आर्ट बोरिंग लगता है उनको मैं अपने काम के जरिए बताना चाहती हूं पूरे संसार में इंडियन आर्किटेक्चर हाथ से बुनी हुई कलाकृतियां कहीं और देखने को नहीं मिलेंगी.

हम लोग  लग्जरी डिजाइन करते हैं , वी स्पोक के जरिए हम क्लाइंट के परिवार घर से जुड़े भावनात्मक रिश्ते इंटीरियर के जरिए दर्शाते हैं जिसका सेटअप क्लाइंट को दिखाने के लिए हम नीचे के ऑफिस में करते हैं.

अपनी लाइंस एंड ग्रूव्स फर्म के जरिए आपने पहला प्रोजेक्ट कौन से किया था ?

बहुत रिसर्च किया, मैं इटली गई वहां का फर्नीचर मार्केट समझा , चीन और तुर्की भी गई वहां पर भी मैंने रिसर्च किया , सब कुछ होने के बाद जब मैं अपना काम शुरू किया तो मुझे लगा कि मुझे बहुत काम मिलेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं , क्योंकि यहां पर आपका काम देखकर ही आपको दूसरा काम मिलता है, यहां जा मैंने जो पहला प्रोजेक्ट किया वह एक संस्था के लिए बाथरूम बनाने का सोशल सर्विस वाला प्रोजेक्ट था.

यह गुजराती संस्था है , जो गरीब औरतों और बच्चों के लिए काम करती है, इसका नाम मानव सेवा संघ है , मेरे लिए इस संस्था के लिए बाथरूम बनाना बहुत बड़ा गुड लक रहा , क्योंकि उसके बाद जो काम मिलना शुरू हुआ वह आज तक जारी है, उस संस्था के लिए बाथरूम बनाने के बाद मुझे 1500 स्क्वायर फीट और 2000 स्क्वायर फीट तक का काम मिलने लगा .

अभी मेरे पास इंटीरियर डेकोरेटिंग के 35 नए प्रोजेक्ट है जिस पर मैं काम कर रही हूं, इसके अलावा अभी हाल ही में हमने दुबई में प्रोजेक्ट खत्म किया जो कि रेजिडेंशियल इंटीरियर का प्रोजेक्ट था.

इंटीरियर में 5-6 केटेगरी है जो सबसे रिच डिजाइन करते है , जैसे मार्बल का इनले का काम ,  तुर्किश में बहुत ब्यूटीफुल  आर्ट है , जो वुड पर ब्रास का काम होता है, ये सारी तकनीक इंडिया के पास है लेकिन इंडिया वाले वह सब नहीं दे रहे, और दे भी रहे है तो बहुत कम दे रहे हैं ,जो की कॉन्टेंप्टरी फॉर्मेट में होता है, कॉन्सेप्ट नया है तकनीक वही पुरानी है , मेरी इच्छा है कि मैं इंडिया की डिजाइंस को अपने काम के जरिए लोगों तक पहुंचाऊं.

आपकी इंटीरियर डिजाइंस की स्पेशलिटी क्या है ?

मैं क्लाइंट का मन पढ़ के उसके हिसाब से ऑफिस या घर डिजाइन करती हूं रंगों में मैं ज्यादातर बेच और लाइट शेड्स पसंद करती हूं, बिजनेसमैन के लिए खासतौर पर हिडन चीज रखने की खास जगह बनाती हूं जैसे कंप्यूटर लैपटॉप इसको कहां पर सुरक्षित सेट करना है जो हिडेन हो वो मेरी स्पेशलिटी है .

आज के समय में फिल्म स्टार्स भी इंटीरियर और आर्किटेक्ट में काम कर रहे हैं जैसे रितिक की एक्स वाइफ सुजेन खान , डिंपल कपाड़िया की बेटी ट्विंकल खन्ना आदि ,क्या सेलिब्रिटीज के इस क्षेत्र में जुड़ने से आप लोगों के लिए कोई प्रॉब्लम होती है ?

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है , हर एक की अलग जर्नी होती है , और अपना अलग काम करने का तरीका होता है, फाइनली काम उसी को मिलता है जिसका काम अच्छा होता है, अलग लोग ,अलग सोच , अलग माइंड सेट सबका अलग नजरिया होता है, विथ गुड माइंड काफी अच्छी चीज क्रिएट होती है,

क्या आपके पति भी इसी फील्ड से जुड़े है ?

नहीं मेरे पति  फाइनेंस डिपार्टमेंट में है, मेरा छोटा भाई जगन मुझे बहुत हेल्प करता है , मेरे साथ काम कर करके उसने बहुत कुछ सीख लिया. अभी तो वह भी आर्किटेक्ट बन गया है .

आखरी सवाल जब आप कोई पर नया प्रोजेक्ट लेती हैं , तो आपका टारगेट बजट होता है या क्वालिटी?

वैसे तो कहावत है जितना गुड़ उतना मीठा, अर्थात जितना बड़ा बजट होगा उतना अच्छा क्वालिटी का काम होगा, लेकिन हमको क्लाइंट के बजट के हिसाब से काम करना होता है वह भी अच्छी क्वालिटी के साथ.

Khilti Gada Shah

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