Parenting Expectations : आजकल सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल है,"यह इंदौर की एक घटना है। एक घर में मातापिता की मौत हो जाती है, 20-30 दिनों तक उन के शव घर में पड़ेपड़े सड़ते रहते हैं, उन में कीड़े पड़ जाते हैं... और उन का बेटा अमेरिका में बैठ कर सालाना ₹50 लाख का पैकेज कमा रहा है..."
सोशल मीडिया में बेटे को खूब ट्रोल किया जा रहा है। एक ने कहा,"धिक्कार है ऐसी तरक्की पर और लानत है ऐसी शिक्षा पर। जिस बेटे को पालपोस कर इस काबिल बनाया कि वह विदेश जा सके, उसी बेटे ने हफ्तों तक यह जानने की कोशिश भी नहीं की कि उस के मांबाप किस हाल में हैं। क्या एक फोन कर के हाल पूछने का समय भी डौलर कमाने की दौड़ में खत्म हो गया था?"
एक ने कहा,"ऊंची डिगरियां और लाखों का बैंक बैलेंस किस काम का, जब आप अपने मातापिता को सम्मानजनक अंतिम विदाई तक न दे सकें..."
यहां तक कहा जा रहा है कि यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो कैरियर के पीछे भागते हुए अपनों को पीछे छोड़ देते हैं। पैसा तो कल भी कमा लोगे, लेकिन यह वक्त और ये रिश्ते दोबारा नहीं लौटेंगे।
इस तरह का इमोशनल ड्रामा खूब किया जा रहा है और बेटे को भरभर के गालियां दी जा रही हैं.
लेकिन क्या आप को लगता है ऐसा करना सही है? क्या इस में सारी गलती बेटे की है? जी नहीं, इस में बच्चों का दोष नहीं है। मांबाप का दोष ज्यादा है कि वे अपेक्षा करने लगे हैं. समाज का ज्यादा है जो हर समय चाहता है कि बच्चे मांबाप के आगेपीछे घूमते रहें।
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