Late Marriage : आजकल शादियों में लोग ‘कैमरे’ के लिए मुसकराते हैं, ‘दुनिया’ के लिए खर्च करते हैं और ‘सोशल मीडिया’ के लिए सजते हैं. इस में वह इंसान कहीं खो जाता है जिस से उम्रभर का रिश्ता जोड़ना है.

इसलिए शादी में आप को भारी मेकअप, नथ और दिखावे के साफे की जरूरत नहीं है, बल्कि 2 लोग एकदूसरे को वैसे ही स्वीकार करें जैसे असलियत में हैं.

सादे कपड़ों में की गई बातचीत अकसर रेशमी शेरवानी में की गई बनावटी बातों से कहीं ज्यादा गहरी होती है. लोग आप के खाने की प्लेट की कीमत भूल जाएंगे, लेकिन अगर आप ने सादगी से उन का स्वागत किया है, तो वे आप के व्यवहार को हमेशा याद रखेंगे.

सादगी से करें शादी

40 की उम्र तक आतेआते इंसान परिपक्व हो चुका होता है. उस के शौक भी पहले जैसे नहीं रह जाते. इसलिए उम्र ज्यादा हो गए हैं तो शादी सादगी से करें. अगर आप शादी में ज्यादा धूमधड़ाका करेंगे और हिसाब से तैयार भी होंगे तो केवल हंसी का पात्र बनेंगे. लोग आप को ‘बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम’ कहने से भी बाज नहीं आएंगे.

घोड़ी पर बैठ कर आना बचकाना लग सकता है

माना शादी में दूल्हा घोड़ी पर आता है लेकिन उस का भी एक समय होता है. अब आप की उम्र हो चुकी है और भारी वजन के साथ आप घोड़ी पर बैठेंगे तो जंचेंगे नहीं. इस के विपरीत सादगी से अपनी गाडी में आएं और कंफर्टेबल रहें. पता चला घोड़े पर बैठने के चक्कर में कमर में दर्द हो गया या कोई नस खींच गई तो शादी भी ऐंजौय नहीं कर पाएंगे.

शेरवानी के बजाय शालीन कपड़े पहनें

अपनी शादी के लिए आप एक भारीभरकम शेरवानी साफे के साथ बनवाने की सोच रहे हैं, तो ऐसा मत कीजिए. वहीं लड़की भी अगर भरी लहंगा, नाथ, हैवी ज्वैलरी और भड़काऊ मेकअप कर शादी करेगी, तो अच्छी नहीं लगेगी बल्कि ऐसे कपडे पहनना आरामदायक भी नहीं होगा. इस ऐज तक आतेआते कई बार ज्यादा गरमी लगना और लो बीपी की समस्या भी हो जाती है. इस से आप को शादी में परेशानी हो सकती है. इस के विपरीत लड़का कोई भी अच्छे से कलर का सूट और लड़की लाइट ज्वैलरी के साथ कोई साड़ी पहने और उस पर दुपट्टा ले तो ज्यादा अच्छी और डिसेंट लगेगी.

मेकअप और दिखावा

पार्लर जा कर खुद को पूरी तरह बदल लेना असल सुंदरता को छिपा देता है. सहज दिखना ही सब से बड़ी खूबसूरती है.

बिना मतलब की भीड़ इकट्ठा न करें

आप ने अपनी शादी के लिए कोई फाइवस्टार होटल बुक कराया और  500 लोगों को खाने पर बुलाया तो यह आप के भविष्य के बजट को भी पूरी तरह हिला देगा. आप देर से शादी कर रहे हैं तो आप को घर लेना होगा. कई नई चीजें जोड़नी होंगी. इस उम्र में अब आप मांबाप से भी पैसा मांगते अच्छे नहीं लगेंगे. इसलिए जितनी अपनी चादर हो उतना ही पैर फैलाइए. 500 लोगों को बुला कर शोरशराबा करने से बेहतर है कि आप उन लोगों को बुलाएं जो वास्तव में आप के करीब हैं.

आप शादी को सिंपल करिए और धीरेधीरे अपने जानपहचान वालों को खाने पर बुलाइए. कभी 20 को बुला लिया कभी 10 को बुला लिया, कभी 15 को बुला लिया. यह जरूरी नहीं है कि आप ने फाइवस्टार होटल की 8 हजार की प्लेट का खाना खिलाना है. फाइवस्टार होटल की ‘8 हजार की प्लेट’ के बजाय घर जैसा सादा और स्वादिष्ठ खाना मेहमानों को ज्यादा याद रहता है. 10-20 लोगों को अलगअलग समय पर बुलाने से आप हर मेहमान से बात कर पाते हैं.

शादी एक जिम्मेदारी है दीवाली नहीं

शादी एक दिन की दीवाली नहीं है. यह जीवनभर का सफर है. शादी का मतलब नए कपड़े, ज्वैलरी, महंगा खाना खिलाना नहीं है, शादी का मतलब सारी जिंदगी साथ चलना है. यह एक दिन की दीवाली नहीं है. लोग शादी में करोड़ों रुपए पटाखों और शोरशराबे में उड़ा देते हैं, जैसे कोई एक दिन का इवेंट हो जबकि शादी के अगले दिन जब ‘बिल’ सामने आते हैं, तब असली जिम्मेदारी का एहसास होता है.

कोर्ट मैरिज और सादगी

रजिस्टर्ड शादी इस बात का प्रतीक है कि आप कानूनी और मानसिक रूप से इस रिश्ते के लिए गंभीर हैं. इस में वह ‘बचकानी हरकतें’ नहीं होतीं जो अकसर बड़ी शादियों में सिर्फ दूसरों को नीचा दिखाने या खुद को ऊंचा दिखाने के लिए की जाती हैं.

एक परिपक्व सोच की आवश्यकता

40 की उम्र के आसपास व्यक्ति को यह समझ आ जाना चाहिए कि मेहमान केवल खाना खाने आते हैं, दुख बांटने नहीं. जिम्मेदारी का मतलब है कि अपने पार्टनर के स्वास्थ्य, बुढ़ापे के निवेश और आपसी सम्मान पर ध्यान देना, न कि इस पर कि 8 हजार की प्लेट में पनीर कैसा था.

जब आप 40 साल की उम्र में शादी कर रहे हों, तो परिपक्व लोग शादी करते हैं, इसलिए उन का ध्यान ‘शादी के फंक्शन’ पर नहीं, बल्कि ‘वैवाहिक जीवन’ की नींव पर होना चाहिए.

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