Brave Indian Daughters: 22 अप्रैल को जम्मूकश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. इस हमले में कई पर्यटक मारे गए. हमले के 15 दिन बाद भारत ने इस का करारा जवाब 7 मई की आधी रात को दिया. एक ऐसा जवाब जिस ने न सिर्फ आतंकियों के मंसूबे तोड़े बल्कि पाकिस्तान को भी सख्त संदेश दिया कि यह नया भारत है जो चुप नहीं बैठता.

भारत प्रशासित कश्मीर के संदर्भ में कहा जाए तो सदियों पुरानी फारसी पंक्ति का अनुवाद सटीक बैठता है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं है. इस हकीकत को कोई झुठला नहीं सकता. ऊंचे हिमालय पर्वतों के बीच बसा यह छोटा सा शहर जिस के बीच से कलकल करती नदी बहती है. तभी तो इस को भारत का मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है. यहां की घाटियां और घास के मैदान लंबे समय से बौलीवुड रोमांटिक सीन्स के लिए परफैक्ट प्लेस रहे हैं और भारत के दूसरे राज्यों की गरमी से बचने के लिए हजारों पर्यटकों को आकर्षित करते रहे हैं. लेकिन 22 अप्रैल को यह शांत घाटी दुनियाभर के मीडिया की सुर्खियों में तब आ गई जब यहां का विशाल घास का मैदान कत्लेआम के मैदान में बदल गया.

शहर से लगभग 7 किलोमीटर दूर एक खूबसूरत जगह बैसरन में उग्रवादियों ने 25 हिंदू पुरुष पर्यटकों को चुनचुन कर उन के परिवारों के सामने नृशंस हत्या कर दी. आतंकवादियों ने सभी लोगों को यानी मुसलिम को अलग और हिंदू को अलग होने का आदेश दिया और फिर सभी हिंदू पुरुषों को गोली मार दी. आतंकवादियों ने पुरुषों से 3 बार ‘कलमा’ पढ़ने को भी कहा. जो लोग इसे नहीं पढ़ पाए उन का बड़ी बेरहमी से कत्ल कर दिया गया.

पर्यटकों की मदद करने की कोशिश कर रहे एक स्थानीय मुसलिम टट्टू संचालक की भी गोली मार कर हत्या कर दी गई. इस घाटी में उस दिन कई नए जोड़े भी घूमने के लिए आए थे जिन की नईनई शादी हुई थी. एक महिला की तो कुछ दिनों पहले ही शादी हुई थी. इस महिला को अपने पति के शव के साथ बैठे रोते देख लोगों की आंखों में आंसू आ गए थे.

निंदनीय घटना

इस नरसंहार ने परमाणु सशस्त्र भारत और पाकिस्तान को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया. भारत ने इन हत्याओं के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया तो इस्लामाबाद ने इस आरोप का खंडन किया. दोनों देशों ने मई के महीने में 4 दिनों तक एकदूसरे पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया जिस के बाद एक नाजुक युद्ध विराम पर सहमति बनी.

यहां जो हुआ वह निंदनीय है. निर्दोष लोग मारे गए. उन के साथ कू्ररता की गई. नतीजा क्या हुआ? हमले के तुरंत बाद पर्यटक शहर छोड़ कर भाग गए तथा जो लोग आने की योजना बना रहे थे उन्होंने भी आना रद्द कर दिया. एक खूबसूरत शहर से कितने ही लोग जिंदगी का सब से बुरा अनुभव ले कर लौटे. भारतपाकिस्तान के बीच कड़वाहट और बढ़ गई.

आतंकियों ने भारतीय महिलाओं के सामने उन के पतियों के सिर में और सीने में गोलियां मारी थीं. ये बहुत गहरे जख्म थे जिन्हें वे महिलाएं कभी नहीं भुला पाएंगी जिन्होंने अपना जीवनसाथी इस हमले में खो दिया. बैसरन घाटी में आतंकी जब पुरुषों को गोली मार रहे थे तो उन के परिवार वालों से कह रहे थे कि जाओ अपनी सरकार को बता देना.

औपरेशन सिंदूर

ऐसे में जब भारत ने इन आतंकियों को जवाब दिया तो औपरेशन का नाम ‘औपरेशन सिंदूर’ रखा. ‘औपरेशन सिंदूर’ से बेहतर नाम शायद इस हमले के लिए हो ही नहीं सकता था. यह औपरेशन उस सिंदूर का बदला था जो बैसरन घाटी में सुहागिनों के माथे से पोंछ दिया गया और उन की मांग सूनी कर दी गई थी. भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से ले कर उस के दिल पंजाब के बहावलपुर तक 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया. भारतीय सेना ने पाकिस्तान पीओके में घुस कर आतंकियों के इन ठिकानों को बरबाद किया. भारत की एयर स्ट्राइक में 70 से ज्यादा लश्कर आतंकी मारे गए.

पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में बैठे क्रूर आतंकवादियों को सजा देने के लिए भारत ने जब औपरेशन सिंदूर लौंच किया और उन्हें सबक सिखाया तो देश को इस के बारे में जानकारी देने के लिए भारतीय सेना ने 2 महिला चेहरों को आगे किया. इन में से एक इंडियन एअरफोर्स की विंग कमांडर व्योमिका सिंह और दूसरी कर्नल सोफिया कुरैशी थीं. ये दोनों महिलाएं ‘औपरेशन सिंदूर’ के लिए पब्लिक फेस बनीं. औरतों के सुहाग पर की गई कू्ररता का अंजाम दुश्मनों को किस तरह भुगतना पड़ा इसे हम भारतीयों को बताने का दायित्व 2 महिलाओं को सौंपा गया. उन से लोग कनैक्ट हुए. लोगों के दिलों को तसल्ली मिली. कलेजे में ठंडक पड़ी.

‘औपरेशन सिंदूर’ के बारे में आधिकारिक तौर पर दुनिया को जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के बारे में आज हरकोई जानना चाहता है. कर्नल व्योमिका सिंह और सोफिया कुरैशी भारत की 2 बहादुर बेटियां हैं जो भारतीय सशस्त्र बलों में अपनेअपने पद पर देश की सेवा कर रही हैं. व्योमिका सिंह भारतीय वायु सेना में विंग कमांडर हैं और एक अनुभवी हैलिकौप्टर पायलट हैं. सोफिया कुरैशी भारतीय सेना में कर्नल के पद पर हैं और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में एक अखिल भारतीय पुरुष दल का नेतृत्व किया था.

इन दोनों महिला अफसरों ने न सिर्फ प्रैस ब्रीफिंग में जानकारी दी बल्कि अपने आत्मविश्वास से लबरेज अंदाज से सभी का ध्यान भी खींचा. सेना में महिलाओं की भागीदारी को ले कर जो लोग सवाल उठाते थे उन्हें भी इन दोनों बहादुर बेटियों ने करारा जवाब दिया.

कर्नल सोफिया कुरैशी

कर्नल सोफिया कुरैशी 1999 में भारतीय सेना में शामिल हुई थीं. अपनी सेवा के 26वें वर्ष यानी मई, 2025 में ‘औपरेशन सिंदूर’ के लिए राष्ट्रीय मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भारतीय वायु सेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह और भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री के साथ उपस्थित रहीं. वर्तमान में वे सिग्नल कोर की एक विशिष्ट इकाई की कमान संभाल रही हैं. अपने लंबे और शानदार कैरियर में कर्नल कुरैशी ने जम्मू और कश्मीर, पूर्वोत्तर, नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों से ले कर रेगिस्तानी इलाकों तक आतंकवादरोधी और उग्रवादरोधी अभियानों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं.

कर्नल कुरैशी दुनिया की सब से बड़ी फील्ड ट्रेनिंग ऐक्सरसाइज में भारतीय सेना की टुकड़ी की कमान संभालने वाली उन गिनीचुनी महिला अधिकारियों में से एक हैं जिन में अमेरिका, रूस और चीन सहित 22 देशों की सेनाओं ने भाग लिया था.

कर्नल कुरैशी बहुभाषी और कवयित्री भी हैं. वे अपना खाली समय अपने परिवार के साथ बिताना पसंद करती हैं. वे हौकी और बास्केटबौल खेलती हैं और वर्तमान में गोल्फ खेलना सीख रही हैं. वे एडब्ल्यूडब्ल्यूए (आर्मी महिला कल्याण संघ) से भी सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं.

सोफिया कुरैशी गुजरात के वड़ोदरा की रहने वाली हैं. उन्होंने 1999 में शौर्ट सर्विस कमीशन के जरीए सेना में कदम रखा था. उस समय देश कारगिल युद्ध के दौर से गुजर रहा था. बहुत कम उम्र में सेना में शामिल हो कर उन्होंने एक ऐसा सफर शुरू किया जो आज युवाओं के लिए मिसाल है. सोफिया सेना की सिगनल कोर में अधिकारी हैं. इस कोर का काम है सेना के बीच संचार बनाए रखना. 2016 में उन्होंने एक अंतर्राष्ट्रीय अभ्यास में भारतीय सेना का नेतृत्व भी किया.

सोफिया सैन्य परिवेश में पलीबढ़ी हैं. कर्नल सोफिया कुरैशी की ननिहाल उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में स्थित घाटमपुर के लहुरीमऊ गांव में है. कर्नल सोफिया का बचपन घाटमपुर और मुरादाबाद में बीता. उन की मां हलीमा की शादी मध्य प्रदेश में स्थित छतरपुर जिले के नौगवां में हुई थी. उन के पिता का नाम ताज मोहम्मद है. वे भी सेना में थे. हलीमा की 2 बेटियां कर्नल सोफिया और सायना जुड़वा हैं. घर का माहौल शुरू से ही ऐसा था कि कर्नल सोफिया भी राष्ट्र सेवा की बातें करती रहती थीं. दूसरे बच्चे जिस समय खेलखिलौनों की बात करते थे सोफिया सीमा पर जा कर देश सेवा की बातें करती थीं.

अपने पिता और परदादाओं की निष्ठा और अटूट समर्पण को बचपन से देखा है. लोरियों की जगह वीर रस और साहस की कविताएं और गीत सुने है. बचपन से ही सेना की वरदी उन्हें आकर्षित करती रही है. उन का दिल जानता था कि उन्हें भारतीय सेना में शामिल होना है लेकिन उस समय महिलाओं के लिए प्रवेश वर्जित था. इसलिए उन्होंने डीआरडीवो (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) में एक वैज्ञानिक के रूप में शामिल होने का फैसला किया. हालात बदले और उन्हें सेना में आवेदन करने का अवसर मिला.

1992 में भारतीय सेना ने गैरचिकित्सा बैचों में 25 महिला कैडेटों को शामिल किया. जब सोफिया 1999 में भारतीय सेना में शामिल हुईं तो सिग्नल कोर में शामिल होने वाले शुरुआती बैचों में से एक थी. 2004 में भारतीय महिलाओं ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में न केवल पर्यवेक्षकों के रूप में बल्कि कांगो, लेबनान और दक्षिण सूडान सहित दुनिया के कई क्षेत्रों में रसद अधिकारियों, स्टाफ अधिकारियों और सैन्य पर्यवेक्षकों के रूप में भी सेवा देनी शुरू की.

‘औपरेशन सिंदूर’ के दौरान राष्ट्रीय ब्रीफिंग में महिला अधिकारियों की उपस्थिति ने बहुत कुछ कहा और यह संदेश दिया कि उत्कृष्टता का कोई लिंग नहीं होता. सोफिया युवाओं को संदेश देते हुए कहती हैं कि भारत की युवा आबादी 37 करोड़ से ज्यादा है. यह हमारे भविष्य को आकार देने वाली है. खुद पर विश्वास रखें. आत्मविश्वास आत्मविश्वास बढ़ाता है. साहसी, मेहनती और गतिशील बनें. सपने देखने का साहस करें. अपनी मानसिकता पर नियंत्रण रखें. टाइम मैनेजमैंट करें. 8+8+8 के नियम का पालन करें यानी 8 घंटे अपना काम पूरी लगन से करें, अपने शौक को पूरा करने के लिए 8 घंटे का समय निकालें और बाकी 8 घंटे सोएं. एक उत्साही पाठक बनें, अच्छी आदतें विकसित करें.

व्योमिका सिंह

व्योमिका सिंह ने दिल्ली के सेंट एंथनी सीनियर सैकंडरी स्कूल से पढ़ाई की है. उन्होंने सेंट एंथनी कालेज से ग्रैजुएशन की और बाद में ‘दिल्ली कालेज औफ इंजीनियरिंग’ से एन्वायरन्मैंटल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. अपने स्कूल के आखिरी दिन व्योमिका सिंह स्कूल के स्टाफरूम के बाहर खड़ी थीं. उन के हाथ में एक औटोग्राफ बुक थी. औटोग्राफ बुक में टीचर्स की ओर से स्टूडैंट्स के लिए संदेश लिखे जाते हैं. व्योमिका सिंह के बारे में उन की हिंदी की टीचर नीलम वासन ने लिखा था, ‘‘व्योमिका यानी जो व्योम को छूने के लिए बनी हो यानी तुम आसमान छूने के लिए पैदा हुई हो.’’ इस संदेश को पढ़ कर और साथ ही अपने नाम के अर्थ को समझते हुए व्योमिका के दिल में वास्तव में आसमान छूने की अभिलाषा जगी. उन्होंने तय किया कि वे अपना नाम सार्थक करेंगी.

1991-92 में स्कूल में पढ़ते हुए उन्होंने ऐंप्लौयमैंट न्यूज देखी जहां एक विज्ञापन में लिखा था कि केवल अविवाहित पुरुष उम्मीदवार ही पायलट बन सकते हैं. लेकिन फिर इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के दौरान उन्हें पता चला कि महिलाएं पीएससी के माध्यम से शौर्ट सर्विस कमीशन के लिए एक प्रतियोगी परीक्षा दे कर वे पायलट बन सकती हैं. उन्होंने अकादमी में पायलट कोर्स पास किया और उन्हें विंग्स से सम्मानित किया गया. इस तरह वे एक हैलिकौप्टर पायलट बन गईं. उस के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. यह एक उतारचढ़ाव भरा अनुभव था खासकर एक हैलिकौप्टर पायलट होने के नाते वे कई तरह की भूमिकाएं निभाती थीं. उन्होंने समुद्र तल से ले कर 18 हजार फुट की ऊंचाई तक उड़ान भरी है.

विंग कमांडर व्योमिका सिंह का मायका लखनऊ में है. उन के पिता का नाम आरएस निम और मां का नाम करुणा सिंह है. एअरफोर्स की कुशल हैलिकौप्टर पायलट विंग कमांडर व्योमिका सिंह का विवाह हरियाणा के भिवानी में स्थित बापोड़ा गांव में हुआ है. उन के पति विंग कमांडर दिनेश सिंह सभ्रवाल हैं. उन के 2 भाईबहन हैं- भूमिका सिंह और निर्मलिका सिंह. उन की बड़ी बहन भूमिका सिंह ब्रिटेन में वैज्ञानिक हैं. उन के मातापिता सेवानिवृत्त शिक्षक हैं. व्योमिका कभी भी सामान्य बच्चों की तरह खेलखिलौनों में नहीं उलझती थीं. खेलकूद, वादविवाद से ले कर पढ़ाईलिखाई में अव्वल रहती थीं. जब व्योमिका ने सभी परीक्षाएं पास कर लीं और एअरफोर्स में चुन ली गईं तो यह खुशखबरी सब से पहले मां के साथ ही साझा की थी. तब मां को अचानक विश्वास नहीं हुआ था.

व्योमिका सिंह एक जानीमानी हैलिकौप्टर पायलट हैं. वे 18 दिसंबर, 2004 को भारतीय वायुसेना में शामिल हुईं और 2017 में विंग कमांडर बनीं. उन के पास चीता और चेतक जैसे लड़ाकू हैलिकौप्टर उड़ाने का शानदार अनुभव है. वे 21 वर्षों से वायुसेना में सेवा दे रही हैं और उन के पास 2500+ घंटों की फ्लाइंग का अनुभव है. उन का नाम ही उन की पहचान बन गया है.  उन्होंने जिस आत्मविश्वास से प्रैस कौन्फ्रैंस में बात की वह उन के अनुभव और जिम्मेदारी को दिखाता है.

व्योमिका सिंह ने जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर और अरुणाचल प्रदेश जैसे कठिन और दुर्गम इलाकों में चेतक और चीता हैलिकौप्टर्स को सफलतापूर्वक उड़ाया है. नवंबर, 2020 में उन्होंने अरुणाचल में एक महत्त्वपूर्ण बचाव मिशन का नेतृत्व किया था. यह मिशन पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के बीच रात में उड़ान भरते हुए सफलतापूर्वक संपन्न किया गया था. वे 2021 में 21,650 फुट की ऊंचाई पर माउंट मणिरंग पर आयोजित एक त्रिसेना महिला पर्वतारोहण अभियान का भी हिस्सा रही हैं.

‘औपरेशन सिंदूर’ भारतीय सैन्य इतिहास में वह नाम बन गया है जिस ने पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बना कर भारत की सैन्य ताकत का परिचय दुनिया को दिया. इस औपरेशन में विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने न केवल हैलिकौप्टर स्क्वाड्रन को कमांड किया बल्कि जटिल परिस्थितियों में निर्णय ले कर मिशन को सफल भी बनाया. उन की तेज निर्णयक्षमता और नेतृत्व कौशल की पूरे देश में सराहना हो रही है. महिला अधिकारियों की सैन्य क्षमताओं को ले कर जो पूर्वाग्रह होते हैं व्योमिका ने उन्हें अपनी कर्तव्यपरायणता से तोड़ा है.

विंग कमांडर व्योमिका सिंह नई दिल्ली में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के लिए एक उच्च प्रोफाइल ब्रीफिंग में आत्मविश्वास से खड़ी थीं. उन्होंने ‘औपरेशन सिंदूर’ के बारे में विस्तार से जानकारी दी जो भारत द्वारा पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई हवाई काररवाई थी. इस ब्रीफिंग में उन के साथ थे विदेश सचिव विक्रम मिस्री और कर्नल सोफिया कुरैशी.

कर्नल सोफिया और विंग कमांडर व्योमिका उन लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं जो आज किसी मंजिल को पाने का सपना देख रही हैं. इन्होंने यह साबित किया है कि अगर इरादा पक्का हो तो कोई भी मुकाम दूर नहीं.

‘‘औपरेशन सिंदूर के दौरान राष्ट्रीय ब्रीफिंग में महिला अधिकारियों की उपस्थिति ने बहुत कुछ कहा और यह संदेश दिया कि उत्कृष्टता का कोई लिंग नहीं होता. सोफिया युवाओं को संदेश देते हुए कहती हैं कि भारत की युवा आबादी 37 करोड़ से ज्यादा है. यह हमारे भविष्य को आकार देने वाली है. खुद पर विश्वास रखें. आत्मविश्वास आत्मविश्वास बढ़ाता है…’’

‘‘पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में बैठे क्रूर आतंकवादियों को सजा देने के लिए भारत ने जब औपरेशन सिंदूर लौंच किया और उन्हें सबक सिखाया तो देश को इस के बारे में जानकारी देने के लिए भारतीय सेना ने 2 महिला चेहरों को आगे किया. इन में से एक इंडियन एअरफोर्स की विंग कमांडर व्योमिका सिंह और दूसरी कर्नल सोफिया कुरैशी थीं…’’

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