Multistorey Society Management: आजकल शहरों में मल्टीस्टोरी सोसाइटीज का चलन है. एकल परिवारों में जहां पतिपत्नी दोनों कामकाजी हैं या फिर बच्चों के सैटल हो जाने के बाद जब दंपत्ति अकेले रह जाते हैं तो फ्लैट में रहना ही आजकल सुरक्षित माना जाता है. यहां पर सुरक्षा के साथ दैनिक जीवन के लिए उपयोगी पानी, बिजली जैसी समस्यायों का समाधान भी बहुत आसानी से हो जाती है.
अधिकांश सोसाइटीज को शुरुआत में बिल्डर के द्वारा और जब बिल्डर का काम पूरा हो जाता है तब सोसाइटी निवासियों द्वारा चुनी गई सोसाइटी के द्वारा चलाया जाता है. यहां के निवासियों द्वारा चुनी गई इस सोसाइटी में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव जैसे अनेक पदाधिकारियों समेत लगभग 15-20 सदस्य होते हैं. सोसाइटी का चुनाव लोकल प्रशासन द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में बिलकुल उसी तरह कराया जाता है जिस तरह देश के विविध चुनाव होते हैं. कुल मतों की गणना के बाद रिजल्ट घोषित कर दिया जाता है. हालांकि यह सभी काम प्रशासनिक ढंग से किए जाते हैं पर सोसाइटी के सभी सदस्य सोसाइटी के हित में बिना कोई वेतन लिए कार्य करते हैं. यहां जो भी सदस्य इंगेज रहते हैं उन्हें कुछ लाभ भी होते हैं तो कुछ हानियां भी.
आइए, जानते हैं कि इन लोगों को क्या फायदे और नुकसान होते हैं :
फायदे
पावर और सम्मान : मैनेजमेंट में इंगेज रहने वाले लोगों को सोसाइटी में सम्मान की नजरों से देखा जाता है. रहवासी से ले कर सोसाइटी में काम करने वाले वर्कर्स भी इन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, जिस से ये एक प्रकार से सोसाइटी में विशिष्ट प्राणी का दर्जा प्राप्त करते हैं.
आर्थिक लाभ : अधिकांश सोसाइटीज में मैनेजमेंट में इंगेज होने को ले कर झगड़ाफसाद होता रहता है. एक बार चुनी हुई सोसाइटी यदि दोबारा नहीं जीतती तो वह नई सोसाइटी पर आरोप लगाना शुरू कर देती है और फिर यह आरोपप्रत्यारोप का सिलसिला पूरी सोसाइटी के वातावरण को खराब कर देता है. इस का कारण सोसाइटी से होने वाली असीमित आय होती है, जिस में हेरफेर कर के सोसाइटी के चुने सदस्य आर्थिक लाभ प्राप्त करते हैं. इस के अतिरिक्त सोसाइटी में करवाए जाने वाले विभिन्न कार्यों और खरीद में भी विभिन्न संस्थाओं से भी कमीशन ले कर आर्थिक लाभ लिया जाता है.
इनडाइरैक्ट पर्क्स
सोसाइटी के प्रत्येक कार्य के लिए रेट्स निर्धारित होते हैं ताकि सोसाइटी के रहवासी एक राशि दे कर अपना काम करवा सकें. पर मैनेजमेंट में ऐक्टिव सदस्य बालकनी व गार्डन की देखभाल से ले कर नल, बिजली ठीक करवाने जैसे अनेक छोटेछोटे कार्यों को सोसाइटी के वर्कर्स से बिना कोई राशि दिए करवाते हैं. इस प्रकार के अनेक अप्रत्यक्ष पर्क्स वे खुदबखुद प्राप्त कर लेते हैं.
प्रशासन से पहचान : सोसाइटी के कार्यों के चलते मैनेजमेंट के लोगों को नगर निगम और प्रशासन के विभिन अधिकारियों और महापौर जैसे राजनीतिक लोगों से मिलनाजुलना पड़ता है, जिन से उन के संबंध काफी अच्छे हो जाते हैं, जो बाद में उन के व्यक्तिगत कार्यों को करवाने में भी मददगार साबित होते हैं.
फिटनैस में लाभ : एक मल्टीस्टोरी सोसाइटी के सचिव चुने जाने से पूर्व कुणाल अनेक शारीरिक समस्याओं से ग्रस्त रहते थे पर सचिव बनने के बाद वे पूरे दिन सोसाइटी की विभिन्न गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं जिस से अनेक लोगों से मिलनेजुलने के साथसाथ मूविंग भी होती है. इस तरह सचिव बनना उन के लिए काफी लाभदायक रहा है.
नुकसान
सोसाइटी में इंगेज होने के यदि फायदे हैं, तो नुकसान भी कुछ कम नहीं हैं :
समय का अभाव : विनय जब से अपनी सोसाइटी के अध्यक्ष चुने गए हैं उन के घर में अकसर कलह की स्थिति बन जाती है क्योंकि पहले जहां वे घर के अधिकांश कार्यों में अपनी पत्नी की मदद करते थे अब उन का ज्यादातर समय सोसाइटी के कार्यों में चला जाता है, जिस से वे अपने घर में जरा भी समय नहीं दे पाते. यही नहीं, पहले जहां वे अपने समय का सदुपयोग सिंगिंग कर के करते थे, अध्यक्ष बनने के बाद अब वे अपने इस शौक को भूल से गए हैं.
जिम्मेदारी का बोझ : रंजना पर अपनी सोसाइटी के कल्चरल गतिविधियों को संचालित कराने का दायित्व है. वे कहतीं हैं,”लगभग 500 परिवारों की सोसाइटी में प्रत्येक त्योहार पर प्रोग्राम को भलीभांति संपादित कराना बहुत कठिन कार्य होता है. भाग लेने वाले प्रतिभागियों से ले कर आयोजनकर्ता संस्थाओं से तालमेल बैठाना बहुत बड़ी चुनौती होती है, इसलिए जब तक यह संपन्न नहीं होती तब तक शांति नहीं मिलती.”
बुराई मिलना : एक कहावत है कि आप अच्छा करो या बुरा करो लोगों का काम है कहना… यह सोसाइटी के पदाधिकारियों पर एकदम सटीक बैठती है. एक चुनी गई सोसाइटी के सदस्य रमेश कहते हैं,”हम ने सोसाइटी में ऐक्युप्रेशर पार्क बनाना तय किया जिसे कुछ लोगों ने बहुत पसंद किया, तो वहीं कुछ लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया. अब सब को तो संतुष्ट नहीं किया जा सकता और यदि सब को संतुष्ट करने की कोशिश की तो विकास नहीं किया जा सकता. इसलिए हम अपनी खाल को थोड़ा मोटा कर के बुराईभलाई का चिंता किए बगैर केवल विकास पर जोर देते हैं.”
तनाव और दबाब : सोसाइटी में यदि आप ऐक्टिव हैं और किसी अच्छे पद पर हैं तो सोसाइटी के हित में कई बार कठोर ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं, जो आमतौर में लोगों को पसंद नहीं आते जिस से अकसर बहुत तनाव हो जाता है. यही नहीं, इस से कई बार कुछ लोग बीपी व शुगर आदि जैसी बीमारियों के शिकार भी हो जाते हैं.
निजी जीवन पर दुष्प्रभाव : सोसाइटी में इंगेज होने के बाद आप एक पब्लिक फिगर बन जाते हैं, जिस से आप का निजी जीवन प्रभावित होने लगता है.
इस बारे में एक मल्टीस्टोरी सोसाइटी के अध्यक्ष अजय कहते हैं,”कभी सफाई वाले नहीं आए, कभी किसी फ्लैट में आग लग गई, कभी किसी ने पानी नहीं चलाया या फिर कभी किसी फ्लैट में किराए पर रहने वाले स्टूडैंट आपस में लड़ाई कर ली जैसे अनेक इश्यूज के आने का कोई समय नहीं होता और इन्हें तुरंत ही सुलझाना पड़ता है. इस सब से निजी जिंदगी पर असर तो पड़ता ही है.”
कुल मिला कर यदि आप ऐक्टिव हैं, रचनात्मक प्रतिभा के धनी हैं, नेतृत्व क्षमता रखते हैं और समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो सोसाइटी के मैनेजमेंट में इंगेज हो सकते हैं.
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