Divorce  : अकसर पतिपत्नी दोनों के बीच जब आपसी सहमति नहीं बनती या फिर किसी और वजह के चलते जब साथ रहना नामुमकिन हो जाता है, तो ऐसे में कपल कानूनी तौर पर अलग हो जाते हैं और तलाक ले लेते हैं. कभीकभी तलाक लेने वाले कपल के बीच फिर से रिश्ते ठीक होने लगते हैं और वे दोबारा शादी करने की सोचते हैं. लेकिन उन के मन में कई सवाल होते हैं कि क्या ऐसा किया जा सकता है? ऐसा करना कितना सही रहता है? और ऐसा करते समय किन बातों का खयाल रखें? वगैरह.

हाल ही में पूजा और विनय की जिंदगी की कहानी सोशल मीडिया पर खूब वायरल है. दरअसल, यह एक आम सी अरैज्ड मैरिज थी. 2012 में बनारस में शादी हुई. लेकिन शादी के सिर्फ 6 महीने बाद ही रिश्ते में दरार आने लगी. न झगड़ा था, न गालीगलौच, न ही मारपीट…बस, सोच और संस्कारों के बीच ऐसा फासला था, जो हर दिन बढ़ता चला गया.

आखिरकार 2018 में दोनों ने अलग होने का फैसला किया.कानूनी तौर पर तलाक हो गया.पूजा पटना लौट आई, विनय गाजियाबाद में अकेले रह गए. लगा कहानी यहीं खत्म हो गई. लेकिन जिंदगी ने अभी आखिरी अध्याय लिखा ही नहीं था.

2023 की शुरुआत में पूजा को खबर मिली कि विनय को भयानक हार्ट अटैक आया है. हालत इतनी गंभीर थी कि बायपास सर्जरी जरूरी थी. पूजा चाहती तो मुंह मोड़ सकती थी. आखिर अब कोई रिश्ता नहीं बचा था. लेकिन उस ने ऐसा नहीं किया. वह सबकुछ छोड़ कर गाजियाबाद पहुंच गई. करीब ढाई महीने तक आईसीयू के बाहर रातें बिताईं और विनय की एक छोटे बच्चे की तरह देखभाल की.

मौत और जिंदगी के बीच झूलते विनय को और उन की सेवा करती पूजा को पहली बार एहसास हुआ कि पिछली बार उन्होंने एकदूसरे को समझने की कोशिश ही नहीं की थी.

अब जहां कड़वाहट थी, वहां फिक्र थी. जहां शिकायतें थीं, वहां दोबारा प्यार जन्म ले रहा था.आखिरकार 23 नवंबर, 2023 को वही 2 लोग, जिन का कभी तलाक हो चुका था, फिर से एकदूसरे के हो गए. आज पूजा और विनय साथ हैं.

एक व्यक्तिगत निर्णय

वाकई एक बार तलाक लेने के बाद दोबार फिर अपने उसी साथी से शादी करना एक बहुत बड़ा फैसला है, जिसे सोचसमझ कर ही लिया जाना चाहिए. हालांकि इस में कोई बुराई नहीं है क्योंकि कई बार परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि दोनों में प्यार होने के बावजूद भी वे अलग हो जाते हैं और कुछ समय बाद उन्हें अपने उस फैसले पर पछतावा होता है. अगर उस समय दोनों सिंगल हैं और शादी नहीं की है तो दोबारा साथ आना अच्छा हो सकता है.

कानून क्या कहता है

हिंदू विवाह अधिनियम के तहत, एक बार तलाक की डिक्री मिल जाने के बाद आप कानूनी रूप से सिंगल हो जाते हैं. इस के बाद आप किसी से भी शादी करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिस में आप का पूर्व साथी भी शामिल है. इस के लिए आप को दोबारा कानूनी तौर पर शादी यानि रीमैरिज करनी होगी और उस का पंजीकरण कराना होगा. आप किसी भी अन्य व्यक्ति की तरह अपने पूर्व साथी से भी दोबारा शादी करने के लिए स्वतंत्र हैं.

हिंदू मैरिज एक्ट में इस को ले कर कोई रोकटोक नहीं है. लेकिन अगर आप दूसरे धर्म से ताल्लुक रखते हैं, तो फिर आप को इस धर्म के कानून के अनुसार शादी करने का अधिकार मिलेगा.

तलाक धारा 13(1) या 13(ए) के तहत हुआ है, (जिसे विवादित तलाक कहते हैं), तो यह कानूनी और भावनात्मक रूप से काफी पेचीदा हो जाता है. इस में बुराई नहीं, बल्कि चुनौतियां बहुत ज्यादा होती हैं. जैसे कि अगर 13ए में डिवोर्स हो यानी झगड़ा हुआ हो, आप ने कोई गलती की है, तो इस बिना पर कोर्ट आप को अलग रहने की इजाजत दे रही है. इस में भी शादी हो तो जाएगी लेकिन इस दौरान आप ने एकदूसरे पर इतने आरोप लगा दिए, इतनी छींटाकशी कर दी होगी कि आप का मन कभी नहीं मानेगा. वही पहले वाले इशू वहां बारबार आएंगे कि पहली बार भी तो तुम ने ऐसा ही किया था… तुम्हारा क्या भरोसा कि तुम कल फिर पुलिस बुला लो और मुझ पर झूठे आरोप लगा दो… इसलिए 13(ए) के तहत डिवोर्स हुआ है तो पहले कुछ दिन साथ रह कर देख लें कि जो फैसला आप दोबारा लेने जा रहे हैं क्या वह सही रहेगा या नहीं? आप दोनों एकदूसरे को बिना ताना मारे रह भी पाएंगे या नहीं? इस पर पूरी तरह सोचविचार कर के ही आगे बढ़ना चाहिए.

सेक्शन 13बी के तहत तलाक हुआ हो, तो दोबारा साथ आने की राह को काफी आसान और कम कड़वाहट वाला बना देता है. इस में दोनों पक्ष आपसी सहमति से अलग होते हैं. एकदूसरे पर कोई केस नहीं करते. इस से उन में झगड़ा भी कम हुआ होता है. इस के बाद दोबारा साथ आना ज्यादा आसान होता है.

इसलिए जब साथी से मन ऊब जाए तो बगैर विवाद किए, बगैर कानूनी इशू उठाए सीधेसीधे 13बी में जा कर अलग होने की कोशिश करना सही रहता है क्योंकि इस के बाद दोबारा साथ होना आसान होता है और दोनों के ही बीच इस की गुंजाइश होती है.

दोबारा साथ आने के सकारात्मक पहलू

एकूसरे से पहले से ही परिचित होना : आप एकदूसरे के घर के माहौल, सोचविचार, आदतों से पहले से ही वाकिफ होते हैं और उन के साथ निभाना किसी नए व्यक्ति के साथ निभाने से ज्यादा आसान होगा.

बच्चों के लिए अच्छा रहता है : बच्चों को किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी मां और बाप समझना और दूसरे व्यक्ति को भी उन्हें उतना ही प्यार देना थोड़ा मुश्किल होता है. बच्चों का भी भावनात्मक रूप से अपने बायलौजिकल मदरफादर के साथ ही अटैचमेंट होता है. यह उन के भविष्य के लिए भी बहुत अच्छा रहेगा अगर एक बार फिर आप दोनों एक हो जाएं.

बच्चों को 2 घरों के बीच बंटने और मातापिता के बीच के तनाव को देखने के बजाय, उन्हें एक स्थिर और पूर्ण परिवार मिलता है, जो उन के विकास के लिए बहुत अच्छा है.

एकदूसरे की कमियों को समझ चुके होते हैं : अब तक आप दोनों ने ही एकदूसरे की कमियों को स्वीकार कर लिया होगा, तभी आप फिर से साथ आने की सोच रहे हैं. इस से आप को किसी दूसरे के साथ नए सिरे से शुरुआत नहीं करनी पड़ेगी.

समय के साथ हर किसी में परिपक्वता आती है : समय के साथ हर किसी में परिपक्वता आती है. कल तक जिन बातों पर आप झगते थे वे अब आप को बचकानी लग सकती हैं और यही परिपक्वता किसी भी रिश्ते के लिए जरूरी है.

ईगो खत्म हो जाती है : जो झगडे पहले ईगो की वजह से बड़े लगते थे अब वे समय के साथ छोटे लगने लगते हैं और एहसास होता है कि इन बेकार की बातों के लिए हम ने घर तोड़ दिया.

किसी नए के साथ तालमेल बैठना मुश्किल रहता है : किसी नए व्यक्ति के साथ रिश्ता शुरू करने में बहुत समय और ऊर्जा लगती है. आप को फिर से अपनी पसंदनापसंद और इतिहास बताना पड़ता है. पूर्व साथी के साथ आप एकदूसरे की आदतों, परिवार के माहौल और स्वभाव को पहले से जानते हैं, जिस से तालमेल बैठाना आसान होता है.

इन बातों का भी रखें खयाल

अगर तलाक की वजह मारपीट, किसी दूसरे से अफेयर, घर का टौक्सिक माहौल था तो एक बार अच्छी तरह देख लें कि परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं या नहीं? वार्ना एक बार फिर साथ रहना मुश्किल हो जाएगा. बहुत समय हो गया कोई नया साथी नहीं मिल रहा तो चलो पुराने के पास ही लौट चलते हैं, यह सोच कर वापसी न करें.

याद रखें

हम कई बार ऐसा सोचते हैं कि काश, हम समय के पीछे लौट पाते और बिगड़ी बातों को फिर से बना पाते. हम ऐसा सोचते जरूर हैं लेकिन ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि बहुत से अगरमगर और किंतुपरंतु के सवाल ऐसे होते हैं जो हमारी समय के साथ पुरानी पड़ चुकी बिगड़ी बातों को भी सही करने में सब से बड़ी रूकावट का काम करते हैं.

लेकिन अगर आप अकेले हो और आप को मालूम है कि साथी भी अकेला है, तो कोशिश कर के देखने में बुराई नहीं है. क्या पता दोनों फिर एक हो जाएं क्योंकि रिश्ते जल्दबाजी से नहीं, धैर्य से चलते हैं. हर किसी को दूसरा मौका नहीं मिलता, लेकिन जिन्हें मिलता है, वह सच में खुशनसीब होते हैं. अगर आप को मौका मिल रहा है, तो सोचसमझ कर आगे बढ़ जाइए.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...