सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर सख्ती बनाए रखी है और डौग लवर्स की नहीं सुनी कि इन जानवरों को भी जीने का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट पिछले साल से कुत्तों द्वारा बच्चों और बूढ़ों को बुरी तरह काटने के मामलों को ले कर सुनवाई कर रहा है और पिछले और्डर्स में कहा है कि कम से कम स्कूलों, अस्पतालों, बसअड्डों, रेलवे स्टेशनों, सरकारी दफ्तरों, एअरपोर्ट्स पर कोई आवारा कुत्ता नहीं हो, यह वहां के मैनेजरों की जिम्मेदारी है.

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की म्युनिसिपल कौरपोरेशनों को डौग शैल्टर बनाने का आदेश दिया है और उद्दंड, काबू से बाहर वाले कुत्तों को मारने की इजाजत भी दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कुत्ता प्रेमियों के आवारा कुत्तों पर प्यार उडे़लने को और उन्हें खिलाने का कोई मौलिक संवैधानिक हक नहीं है जो आम आदमी को काटने के हक से बड़ा हो.

आम नागरिक के कौंस्टिट्यूशन के आर्टिकल 21 में जीवन का जो राइट है वह कुत्तों के राइट्स से बड़ा है और कोई यह नहीं दावा कर सकता कि आवारा कुत्तों का ?ांड किसी एक मासूम बच्चे पर हमला कर के उस के चिथड़े कर दे तो गलती बच्चे की है.

पिछले कुछ सालों में आवारा कुत्तों से प्रेम दिखाना एक फैशन हो गया और पढ़ेलिखे, मौडर्न समाज की खाली बैठी हाउसवाइफ्स ने इस का बीड़ा उठा लिया है. उन के लिए यह ऐंटरटेनमैंट से ज्यादा कुछ नहीं है. आवारा कुत्तों को सहला दिया, खाना खिला दिया, उन की चोटों पर औइंटमैंट लगा दी, उन की लाइफ बन गई.

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हर कालोनी में डौग लवर्स एकजुट हो कर अब जम कर हल्ला करने लगी हैं पर आम बच्चों, राहगीरों, औरतों, बूढ़ों को 2-4 कुत्तों से बचाने के लिए वे मौजूद नहीं होतीं. ये डौग लवर्स इन स्ट्रे डौग्स को अपने घरों में रखने को तैयार नहीं पर स्ट्रीट में उन के रहने के हक के लिए धरनों, प्रदर्शनों के लिए तैयार हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने सही किया है. डौग्स ह्यूमन के साथी हजारों सालों से रहे हैं पर तब लोग गांवों में बड़े मकानों में रहते थे और सभी डौग्स अपने पड़ोसी ह्यूमन को पहचानते थे. वे भौंका करते थे तो केवल अनजान पर. डौग लवर्स उन डौग्स की सेफ्टी चाहते हैं जिन पर उन का खुद का कंट्रोल नहीं है.

हर साल लाखों लोग स्ट्रे डौग्स का शिकार होते हैं. कुछ तो रैबीज के कारण मर जाते हैं, कुछ छोटेमोटे इलाज से ठीक भी हो जाते हैं. ज्यादातर कुत्तों के भौंकने से ही भयभीत हो जाते हैं. कुछ उग्र हो जाते हैं और पलट कर कुत्तों के साथ बेरहमी का व्यवहार भी करने लगते हैं.

सुप्रीम कोर्ट का जजमैंट सही है कि अगर डौग्स लवर्स जिम्मा लें कि आम नागरिक को होने वाले नुकसान के लिए वे जिम्मेदार हैं तो उन की तरफदारी करें. डौग्स को पैट्स की तरह घर में रख कर पालें, सड़क पर छोड़ कर प्यार न दिखाएं.

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