domestic violence : घरेलू हिंसा कभी भी अचानक हुए किसी बड़े हमले से शुरू नहीं होती. इस की जड़ें अकसर उस खामोशी में पनपती हैं, जो एक पीड़ित पहली बार अपमान या दुर्व्यवहार सहते हुए अपना लेता है. बारबार हिंसा होने पर चुप रहना आरोपी की हिम्मत को बढ़ावा देता है और मानसिक प्रताड़ना और गालियों से शुरू हुआ यह चक्र, समय के साथ जानलेवा शारीरिक चोट तक पहुंच जाता है.
शारीरिक चोट इस बात का सुबूत है कि चुप रहने से हालत सुधरती नहीं बल्कि और बिगड़ती जाती है. इसलिए अगर किसी के साथ भी घरेलु हिंसा हो रही है और पति ने बहुत मारा और हौस्पिटल तक पहुंचा दिया, तो वहां पति की गलतियों को छिपाने के बजाए उस पर आवाज उठाएं.
दरअसल, घरेलू हिंसा के मामलों में जब पति द्वारा पत्नी को गहरी और गंभीर चोटें पहुंचाई जाने लगें, तो यह स्पष्ट चेतावनी है कि स्थिति अब जानलेवा हो चुकी है. ऐसी स्थिति में तुरंत घर छोड़ना और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना सब से पहली प्राथमिकता होनी चाहिए.
सहेली के घर में किराए का कमरा लें
किसी सच्ची सहेली के घर में एक छोटा सा किराए का कमरा सब से अच्छा और तुरंत राहत देने वाला विकल्प हो सकता है. यहां आप को छिपने की जगह के साथसाथ भावनात्मक सहारा भी मिलता है.
मायके में आप का अपना कमरा हो
अगर आप के मातापिता और परिवार आप के साथ मजबूती से खड़े हैं, तो मायका सब से सुरक्षित जगह है. लेकिन यह तभी सही है जब आप के परिवार वाले हिंसक पति के दबाव या 'समाज क्या कहेगा' के डर से आप पर वापस जाने का या समझौता करने का दबाव न डालें.
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