बुरा हो सरकारों का कि वे खाने पर भी हल्ला मचाती रहती हैं. अभी नैशनल फैमिली हैल्थ सर्वे ने एक सर्वे रिपोेर्ट जारी कर के कहा है कि 2019 से 2025 के बीच लोगों का मोटापा बढ़ रहा है. 6.79 लाख घरों का सर्वे कर के अनुमान लगाया गया है कि जहां 2019-20 में 24त्न युवतियां मोटी थीं, वहीं 2024-25 में बढ़ कर 30.7त्न हो गई हैं.

अब यह मोटापा, ओबैसिटी तोे गई होगी ही जब मैकबर्गर्स, पास्ता, छोलेभठूरे, पेस्ट्री, रसगुल्ले के साथ पैप्सी, कोक खाने का हिस्सा होगा. पर जेब में पैसे हैं तो क्या यह हक भी बनता नहीं कि मन का खा सकें? अब घीया और टिंडे की सब्जी और मिलेट की रोटी की कितनी ही पब्लिसिटी कर लो, यह टेस्टी तो हरगिज नहीं है. मसाले जब तक घीतेल में खाने के अंदर तक मैरिनेट न हों खाना स्वाद कहां रहेगा.

यह एकदम सरकार की कौंस्पिरेसी है कि औरतें कमाएं पर खाएं नहीं ताकि उन से टैक्स वसूला जा सके. अगर वे नहीं खाएंगी तो बचत करेंगी और फिर बचत के इंटरैस्ट पर इनकम टैक्स देंगी या नहीं? सरकारें हल्ला मचा रही हैं कि मोटे न हों ताकि उन का खजाना भरता रहे.

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सरकारों को यह भी परेशानी है कि जो लोग मोटे होंगे, वे बीमार ज्यादा पड़ेंगे और फिर सरकारी अस्पतालों में जाएंगे या सरकारी अस्पतालों की मांग करेंगे. लो, सरकार तो अपने सुखों के लिए काम करती है, अपने लिए बड़े हवाईजहाज लेती है, बड़े विशाल घर रायसीना हिल पर बनवाती है, मंदिरों को बनवाती है जहां पेड़ों का प्रसाद तैयार करना होता है. डिफैंस का खर्चा करती है जिस में मोटे कमीशन का अवसर हरेक को रहता है. तो लड़कियां अपनी कमाई अगर खाने पर खर्च कर देंगी तो इन सब का पैसा कहां से आएगा?

यूनियन हैल्थ मिनिस्ट्री जो सरकार की हैल्थ की देखभाल के लिए बनी है, बेमतलब में लोगों को गलत राय दे रही है कि मोटे न हों, युवतियों को ज्यादा दे रही है क्योंकि उन्हें इन्हीं युवतियों को हांक कर कलश यात्राओं में ले जाना है, चारधाम की यात्रा पर ले जाना है. हर सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार को किसी मंदिर में ले जाना है. मोटी हुई ये लड़कियां आलस्य करेंगी.

गृहशोभा ही ऐसी साफसाफ बात कहती है कि मोटापा चाहे लाख बुरा हो, सरकार को कोई हक नहीं कि वह बौडी शेम की बातेंकरे. खासतौर पर तब जब वह कहेगी कि 30.7त्न युवतियों के मुकाबले युवकों का परसैंट 27.3 है. यह कोरा भेदभाव है. यह जैंडर डिस्क्रिमिनेशन है. गृहशोभा इस सर्वे को नकारती है और नारा देती है कि औल फैटीज युनाइट, यू हैव नथिंग टू लूज बन सम किलोज.

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