Importance of skills : मलोनी मालाड वेस्ट की रहने वाली 46 वर्षीय गुलिस्तान शेख सिंगल और पढ़ी – लिखी है, माता – पिता के देहांत के बाद उन्हे अपने भाई और भाभी के साथ रहना पड़ रहा है. जब गुलिस्तान के पैरेंट्स थे, तब उन्हे किसी प्रकार की आर्थिक समस्या नहीं हुई, क्योंकि उस समय वे ही उनकी आर्थिक स्थिति को सम्हालते रहे, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उनके भाई – भाभी उनसे बुरा बर्ताव करने लगे, क्योंकि वह कुछ अधिक कमा पाती थी. तंग आकर गुलिस्तान ने अच्छी जॉब के बारें में सोचा, लेकिन कही कोई ढंग का अच्छा जॉब नहीं मिल रहा था, क्योंकि उन्हे कंप्युटर की अधिक जानकारी नहीं थी, ऐसे में गुलिस्तान ने कंप्युटर सीखने का प्लान बनाया और अपने किसी दोस्त के कहने पर स्किल सेंटर जा पहुंची, जहां केवल साढ़े तीन हजार के रुपये से उन्हे 4 महीने का कोर्स करने को मिला, जो पूरा होने वाला है.
वित्तीय आत्मनिर्भरता होना जरूरी
आज गुलिस्तान ने कंप्युटर की बारीकियों को काफी हद तक सीख लिया है और आगे एक कॉम्पनी में जॉब भी करने वाली है. आँखों में आँसू लिए गुलिस्तान कहती है कि मुझे प्रकाश जयन्तीलाल फाउंडेशन स्किल सेंटर की जानकारी मेरी भाभी से मिली, मैंने जॉइन किया, क्योंकि अच्छा काम कर मैँ आत्मनिर्भर होना चाहती हूँ. मैंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है, लेकिन कंप्युटर की स्किल न होने की वजह से अच्छा काम मिलना मुश्किल हो रहा था. यहाँ पर मैंने कंप्युटर की बेसिक्स से लेकर पूरी पढ़ाई की है और जॉब करने वाली हूँ. आज सभी लड़कियों को चाहे शादी हो या न हो, जॉब कर आत्मनिर्भर होना बहुत आवश्यक है.
सपने को किया साकार
इतना ही नहीं, मालाड वेस्ट मलोनी की रहने वाली शेख परवीन कहती है कि मुझे हमेशा से कुछ अच्छा काम करने की इच्छा थी, मैँ अधिक पढ़ी – लिखी नहीं, लेकिन काम करना चाहती थी, मेरी बहन की नर्स दोस्त ने इस फाउंडेशन का नाम दिया और मेरी बड़ी बहन ने इसकी साढ़े तीन हजार की फीस भर दी है. मैंने यहाँ पर ब्यूटी थिरेपी के सारे स्किल सीख लिया है. मुझे एक कंपनी जॉब भी मिल गया है, यहाँ पर मैंने क्लीन अप, फेसियल, बॉडी पॉलिशिंग, बॉडी मसाज, थ्रेडिंग आदि सब सीख लिए है. मैँ खुश हूँ की मैँ आत्मनिर्भर बन चुकी हूँ.

शिक्षा में स्किल की कमी
प्रकाश जयन्तीलाल फाउंडेशन की अलिशा चौहान कहती है कि मैंने एक स्टडी की थी और पाया कि मुंबई की मालाड मालवणी, अंधेरी पूर्व, कांदिवली वेस्ट, गोरेगांव पूर्व आदि चाल वाले अधिकतर एरिया में कम पढे – लिखे और गरीब घरों के छात्र छात्राएँ स्किल नहीं सीख पाती, क्योंकि ये अधिकतर 10 वीं या 12 वीं पास है और किसी स्किल की कमी की वजह से उन्हे अच्छा रोजगार नहीं मिलता. इसलिए वर्ष 2019 में मैंने इसका निर्माण कुछ लोगों के साथ मिलकर किया. इसमें मैंने आसपास की अकेली रह रही लड़की, डिवोर्स ले चुकी स्त्रियों, लड़के जो कम पढे – लिखे होने पर भी कुछ अच्छा करने की इच्छा रखते हो, उन्हे सोच कर स्थापित किया है. इसमें एडमिनिस्ट्रेशन स्किल, जिसमें सेक्रेटरी, किसी कंपनी की बुकिंग ऑफिस में काम करना यानि फ्रन्ट डेस्क ऑफिस से लेकर पूरे एडमिनिस्ट्रेशन का काम सीखाते है. टेक्निकल स्किल, जिसमें फ्रिज, एयर कॉन्डीशनर, वाशिंग मशीन आदि सभी को ठीक करने के बारें में जानकारी देने के साथ – साथ उन्हे मॉडल पर प्रैक्टिस भी करवाया जाता है. इसमें किसी को भी 12 वीं पास होने की जरूरत होती है, ताकि उन्हे विज्ञान की थोड़ी जानकारी हो. हेयर स्टाइलिस्ट के क्षेत्र में 8 वीं पास और ब्यूटी सेक्शन में कोई भी लड़की, जिसे आत्मनिर्भर बनना है, उन्हे उस कला की पूरी जानकारी दी जाती है और उन्हे अच्छी कॉम्पनियों में रोजगार भी दिया जाता है. इतना ही नहीं ब्राइडल मेकअप की स्किल भी इन्हे सिखाया जाता है, जिससे वे ब्यूटी के क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो काम कर सकें. यहाँ ट्रेनिंग से संबंधित मटेरियल संस्था से ही उन्हे उपलब्ध करवाया जाता है.
उन्हे स्किल सीखाने वाले अधिकतर अपने क्षेत्र में माहिर प्रशिक्षित रिटायर्ड टीचर होते है. अगर किसी के पास प्रशिक्षण लेने के लिए पैसे नहीं है, तो उन्हे स्पॉन्सर उपलब्ध करवाया जाता है. यहाँ उन्हे ही ट्रैनिंग दी जाती है, जो वाकई काम के इच्छुक होते है. इसमें उनकी काउन्सलिंग कर पता लगाकर, सुझाव देकर, संबंधित क्षेत्र में ट्रेनिंग दी जाती है.

स्किल सीखना जरूरी
हेयर ड्रेसर की कोर्स कर चुके हेयर स्टाइलिस्ट पप्पू ठाकुर को पढ़ाई में मन नहीं लगता था, इसलिए उन्होंने इस संस्था में आकर हेयर स्टाइलिस्ट के कोर्स कर अपने व्यवसाय को शुरू किया. वे कहते है कि मेरे पिता के दोस्त ने इस संस्था के बारें में बताया और मैंने यहाँ जॉइन किया. हेयर कट मेरे परिवार का काम है और मेरे पिता सैलून में हेयर कट किया करते थे, लेकिन मुझे प्रोफेशनल लेवल पर सीखना था. मैंने पिता से बात किया, क्योंकि मैँ अपनी स्किल को बढ़ाना चाहता था. इसमें मेरे पेरेंट्स ने साथ दिया और मैंने जॉइन किया, मैंने यहाँ प्रोफेशनल सैलून की सारी स्किल को सीख लिया है, जिसमें ग्राहक से बात करना, उनके सर्विसेज़ के बारें में जानना, उनके जरूरतों को पूरा करना आदि सभी सीखा है, जो नॉर्मल सैलून से काफी अलग रहा. मैंने 4 महीने की प्रशिक्षण के बाद एक बड़ी कंपनी में असिस्टेंट हेयर स्टाइलिस्ट के रूप में काम करने लगा. दो साल बाद मैंने अपना व्यवसाय पिता के साथ शुरू किया. अभी मेरे पास तीन सैलून है, जो पूरी मुंबई में फैला है.
रील की दुनिया है छोटी और बनावटी
आज मेरे परिवार को गर्व है और मैँ खुश हूँ कि मेरे पास 25 लोगों की टीम है और मैंने 32 साल की इतनी कम उम्र में खुद को स्थापित कर लिया है. मेरे हिसाब से जो सपना आपने, काम के लिए देखा है, उसके स्किल को सीखना बहुत आवश्यक है, तभी आपकी चाहत पूरी हो सकती है. यहाँ के टीचर की गाइडलाइंस बहुत अच्छी है, जिससे एक नॉर्मल व्यक्ति जिसे हिन्दी या अंग्रेजी ठीक से नहीं आती, उसकी भी ट्रेनिंग यहाँ दी जाती है. रील पर समय बिताने वालों से मेरा कहना है कि आप अपने सपनों को साकार करें, रील की दुनिया बहुत छोटी और बनावटी है. इस क्षेत्र में अगर स्किल है, तो 25 से 30 हजार तक कमा सकते है. मैंने कई सेलिब्रिटी के साथ काम किया है और अभी अभिनेता कार्तिक आर्यन का पर्सनल हेयर स्टाइलिस्ट भी हूँ.
जगी प्रेरणा
इतना ही नहीं कांदिवली वेस्ट की चाल में रहने वाली अक्षता 10वीं तक पढ़ी है और एक आर्टीफिशल ज्वेलरी मेकिंग और एक ब्यूटी सैलून में हेल्पर का काम करने के बाद उन्होंने देखा कि वहाँ काम करने वाली लड़कियों को ब्यूटी के बारें में अधिक जानकारी है और अक्षता वैसी स्किल पाने के लिए इस फाउंडेशन से जुड़ी और ब्यूटी का कोर्स किया. वह सिंगल मदर है, आर्थिक रूप से कमजोर है और अपनी 6 साल की बेटी को लेकर पेरेंट्स के साथ रहती है. वह कहती है कि यहाँ से ब्यूटी का कोर्स कर मैंने काफी कुछ सीख लिया है और अब 20 हजार कमा लेती हूँ, जो मेरे लिए काफी अच्छा है. इस संस्था में आकर मेरे अंदर अच्छा काम करने की प्रेरणा जगी है और मैँ पूरी तरह से ग्रूम हो चुकी हूं, पहले तो मुझे किसी से बात करने में भी डरती थी.
स्किल के साथ ग्रूमिंग भी आवश्यक
सांताक्रूज पूर्व की चाल में रहने वाली शक्ति पिल्लई कहती है कि मैँ मध्यम वर्गीय परिवार से हूं. मेरे पिता एक मिस्त्री थे, लेकिन ऊपर से गिरने की वजह से उनकी पीछे की हड्डी टूटी और वे काम नहीं कर पा रहे थे, माँ फूलों का हार बेचती थी, एक बहन हैंडीकैप्ड है, जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था, ऐसे में मैंने 10 वीं की पढ़ाई, मुंबई में तमिल मिडियम में कर, मेट्रो में सिक्युरिटी का काम करना शुरू किया, उधर एक साल काम करने के बाद मुझे वह जॉब अच्छा नहीं लगा और मैंने ब्यूटीशियन का कोर्स करने की सोची, मैंने एक सैलून में सीखने की कोशिश की, लेकिन वहाँ वे हाउस कीपिंग का काम करवाते थे, कुछ पूछने पर डांटने लगते थे. फिर मुझे इस संस्था का पता चला, लेकिन सांताक्रूज से मालाड आकर ट्रेनिंग लेने से मेरे परिवार मना कर रहे थे, मैंने किसी की बात नहीं सुनी और यहाँ जॉइन किया. अभी मैंने एक नामचीन सैलून में काम करना शुरू किया है. यहाँ की ट्रेनर ने मुझे अच्छी तरह से ग्रूम किया है. अब मैँ काफी कॉन्फिडेंट हो चुकी हूं.
इस प्रकार अगर आपने कुछ अच्छा करने का सपना देखा है, तो उसकी स्किल को विकसित करें, तभी आप एक अच्छी वर्कर बन अच्छा कमा अपने भविष्य को सुधार सकते है. साथ ही इसके लिए बहुत जरूरी है मेहनत, लगन और धैर्य, ताकि आप अपनी मंजिल तक आसानी से पहुँच सकें.
