Jamma Mallari: (फोक हेरीटेज आइकन अवार्ड) 80 वर्षीय जम्मा मल्लारी ओग्गु कथा की एकलौती महिला कथाकार हैं. वे इस क्षेत्र में अर्थात ओग्गु कथा कला में बदलाव की क्रांति ले कर आईं, जहां हमेशा से पुरुषों का बोलबाला था. दशकों से अपने ओग्गु कथा के प्रति निष्ठा और समर्पण से कई खूबसूरत परफौर्मैंस पेश कर अपनी सांस्कृतिक कला को बड़ा भी कर रही हैं और अपनी कला के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को प्रेरित भी कर रही हैं.

जिस महिला ने अपनी 80 वर्ष की आयु में 70 वर्ष अपनी सांस्कृतिक कला की रक्षा में त्याग दिए, उस महिला से बड़ा फोक आइकन आखिर कौन होगा. जम्मा के इसी समर्पण और निष्ठा को प्रणाम करते हुए गृहशोभा ने उन्हें गृहशोभा इंस्पायर अवार्ड में फोक हैरिटेज आइकन अवार्ड प्रदान किया. जम्मा का कलात्मक सफर और उस के प्रति उन की निष्ठा आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल तो है ही, साथ ही एक आत्मपुकार भी है कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक कला से जुड़े रहना चाहिए.

पुरुषों के क्षेत्र में एक महिला की क्रांति

जम्मा का जन्म उस परिवार में हुआ जो परंपरागत रूप से ओग्गु कथा को पेश करता आ रहा था. इसलिए जम्मा के पहले गुरु और कोई नहीं उन के पिता ही थे. जहां औरतों का समाज में कई पिछड़ी धारणाओं के चलते अपने विचार व्यक्त करना, एक अलग सोच रखना भी अपराध माना जाता था, वहां जम्मा ने केवल 11 वर्ष की आयु में प्राचीन कला का ज्ञान अर्जित करना शुरू कर दिया. जिस समय में एक लड़की का घर के बाहर पैर रखना भी अच्छा और सुरक्षित नहीं माना जाता था उस समय अपनी कला प्रदर्शन के लिए जम्मा अपनी यात्राएं हर मुश्किल पार करते हुए पूरा करतीं और मल्लान्ना की कथा को अपने अभिनय द्वारा एक उम्दा कला के रूप में पेश करतीं. उन का जनून और ओग्गु कथा कला सीखने और निखारने के संकल्प ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया.

अध्ययन, अभिनय और प्रशंसा

1956 के पास जम्मा ने ओग्गु कथा में पारंगत होने के लिए गायन, संगीत, नृत्य और परंपरागत वा-यंत्र जैसे रोल ऐंड झांझ को सीखना आरंभ किया ताकि अपने अभिनय को और निखार दे सकें और भारतीय संस्कृति की महान कहानियों को अपनी कला से ओग्गु कथा के रूप में पेश कर सकें. ओग्गु कथा को देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए जम्मा ने पिछले 6 दशकों से हर संभव प्रयास किया. जम्मा तेलंगाना और उस के आसपास के राज्यों और उन के गांवों, शहरों और उत्सवों में जा कर अपनी कला से लोगों का दिल जीत रही हैं.

जम्मा की कला का सब से अनूठा रंग है उन की बहुमुखी प्रतिभा, जहां वे पुरुष का भेष धारण परफौर्मैंस करती हैं. पुरुष वेशभूषा में गाती भी हैं और अभिनय भी करती हैं, जिस से वे सभी दर्शकों का दिल जीतती हैं और पारंपरिक कथा प्रदर्शन के मानदंडों को भी पूरा करती आ रही हैं.

जम्मा की उपलब्धियां

– 1950 के मध्य से ओग्गु कथा का प्रदर्शन करते हुए लगभग 70 वर्ष हो गए.

– सदियों पुरानी पुरुष प्रधान कला शैली में महिला भागीदारी की शुरुआत की.

– लोक कला समुदायों द्वारा आध्यात्मिक और कलात्मक गुरु की मान्यता.

अवार्ड्स

– सर्वश्रेष्ठ महिला लोक कलाकार के लिए वूमन अचीवर अवार्ड, ‘तेलंगाना’ (2020).

– क्षेत्रीय मीडिया और सांस्कृतिक मंचों पर ओग्गु कथा की एक प्रभावशाली महिला कलाकार के रूप में व्यापक रूप से प्रदर्शित कलाकार.

एक संरक्षक और शक्ति के रूप में

जम्मा मल्लारी का योगदान सिर्फ एक कलाकार के रूप में ही नहीं बल्कि एक शक्ति के रूप में भी है. वह शक्ति जो भारत की मौखिक और लोक विरासत के भीतर लैंगिक सशक्तीकरण की आवाज भी है और निरंतर रूप से उस के किए कर्मठ भी है. पारंपरिक रूप से जिस कला में  महिलाओं को अस्वीकार किया जाता था, जम्मा ने उसी कला में अपनी अहम भूमिका निभाई और समाज की बहुत सी महिलाओं के लिए कई रास्ते खोल दिए, जिस से महिलाओं की भागीदारी और प्रेरणा को बढ़ावा मिला है.

Jamma Mallari

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