Kids screen time : पिछले कुछ सालों में सरकार ने भारत में डिजिटल क्रांति लाने का दावा किया है, मतलब एक समय ऐसा आ जाएगा जब कागज का उपयोग ना के बराबर होगा ,सभी कुछ डिजिटल हो जाएगा ऐसे युग में जबकि बच्चों के पैदा होने से पहले पैदा होने की रिपोर्ट से लेकर पैदा होने के बाद उसकी शिक्षा , नौकरी, स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट , आर्थिक तौर पर पैसों की डीलिंग , नेट बैंकिंग , आदि सिर्फ और सिर्फ मोबाइल और नेटवर्किंग के जरिए ही संभव होने की प्रक्रिया के बाद क्या यह संभव है की बच्चों के हाथ में मोबाइल ना हो , बच्चे मोबाइल से दूर हो ,क्योंकि ऐसा कहा जा रहा है मोबाइल की स्क्रीनिंग लाइट की वजह से बच्चों को बीमारी हो जाती है , बच्चों को पैनिक अटैक आने लगे हैं , शरीर में एलर्जी हो जाती है , मोबाइल इस्तेमाल के दौरान जब बच्चे मोबाइल पर ही गेम खेल रहे होते हैं ,तो मोबाइल से निकली रेंज का बच्चों पर गलत प्रभाव होता है . कई माएं बच्चों से कुछ समय के लिए जान छुड़ाने के लिए जब बच्चों के हाथ में गेम खेलने के लिए मोबाइल दे देती है तो उस वक्त गेम के बीच में विज्ञापन के तौर पर अचानक ही आने वाली अश्लील सामग्री देखने की वजह से बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ रहा है , बावजूद इसके कई कारणों की वजह से मां-बाप बच्चों को मोबाइल देने के लिए मजबूर है . ऐसे में कई लोगों का सार्वजनिक तौर पर यह कहना कि वह अपने बच्चों को मोबाइल नहीं देते , क्या यह संभव है? आज के समय में जबकि बच्चों से लेकर बूढ़े तक मोबाइल को अपनी छाती से लगाए रहते हैं, 1 मिनट के लिए भी अपने से दूर नहीं करते ऐसे युग में क्या बच्चों को मोबाइल से दूर रखना संभव है ? पेश है इसी सिलसिले पर एक नजर…
अभिषेक बच्चन और सोनू सूद ने बच्चों को मोबाइल से दूर रहने की सलाह दी ….
हाल ही में अभिषेक बच्चन ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी बेटी आराध्या 14 साल की है और उन्होंने अभी तक अपनी बेटी को मोबाइल इस्तेमाल करने के लिए नहीं दिया है, इसी तरह सोनू सूद ने भी बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की अपील की. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने सभी कुछ मोबाइल के जरिए ही काम करने की सलाह दी है बच्चों की शिक्षा स्कूल टाइम टेबल सारा होमवर्क जब मोबाइल के जरिए ही होता है , स्कूल से संबंधित छोटी से छोटी बात भी जब व्हाट्सएप के जरिए मां बाप को पहुंचाई जाती है ऐसे में बच्चों को मोबाइल से दूर रखना कितना संभव है । अगर 1 मिनट के लिए यह भी सोच ले कि बच्चे बिना मोबाइल के क्लास में रहते हैं लेकिन क्लास से निकलने के बाद अगर उन्हें दूसरे किसी काम के लिए जैसे मां-बाप या ड्राइवर से कांटेक्ट करने की जरूरत हो तो वह बिना मोबाइल के कैसे कांटेक्ट करेंगे. सच बात तो यह है की हर स्कूल ने सारी पढ़ाई और बाकी सारी एक्टिविटीज रिपोर्ट होमवर्क व्हाट्सएप के जरिए ही भेजने की प्रक्रिया कंपलसरी कर दी है ऐसे में बच्चों को मोबाइल से कैसे दूर रखा जा सकता है . मोबाइल की आज के समय में महत्ता को देखते हुए गरीब बच्चे भी दो-तीन लोग मिलकर मोबाइल खरीद कर अपना काम चलाते हैं. ताकि उनकी स्कूल से संबंधित की कोई भी महत्वपूर्ण कार्य छूट ना जाए. और ये तो पॉसिबल ही नहीं है कि स्कूल वाले सारे मेटर का प्रिंट आउट निकाल कर एक एक बच्चे को दे . भले ही आज टीचर्स की तनख्वाह पहले के मुकाबले ज्यादा है लेकिन मोबाइल और व्हाट्स अप की वजह से अब टीचर्स की भी मेहनत करने की आदत खत्म हो गई है . ऐसे में अभिषेक बच्चन का यह कहना कि वह अपनी बेटी को मोबाइल से दूर रखते हैं कितना संभव है , क्योंकि जब उनकी बेटी आराध्या अपनी मां के साथ भी विदेश में या देश में कही जाती है तो 24 घंटे तो ऐश्वर्या अपनी बेटी के साथ हीं नहीं रहती होगी , ऐसे में जब ऐश्वर्या काम के चलते कुछ घंटों के लिए ही बेटी से दूर रहती है और उस वक्त अगर आराध्या को अपनी मां से संपर्क करने की जरूरत पड़े तो क्या तब भी वह मोबाइल हाथ में नहीं लेगी ?
कहने का मतलब यह है कि आज के समय में मोबाइल उतना ही जरूरी हो गया है जितना की सांस लेना, आज के समय में अगर किसी का मोबाइल खो जाता है तो उसको ऐसा लगता है जैसे उसकी दुनिया ही उजड़ गई हो, मोबाइल आज सिर्फ शौक ही नहीं अब जरूरत बन गया है जिसके बिना हर कोई अपने आप को अधूरा महसूस करता है.
इसके पीछे खास वजह यही है कि आज की मौजूदा सरकार ने हर काम के लिए मोबाइल का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है ऐसे में बच्चे हो या बड़े मोबाइल के बिना एक कदम उठाना भी नामुमकिन सा है सच बात तो यह है कि आज के समय में मोबाइल इतना जरूरी है कि भिखारी तक के पास मोबाइल होता है . घर काम करने वाली नौकरानी से लेकर मजदूर डिलीवरी बॉय तक हर कोई बिना मोबाइल के काम करने में असमर्थ है . अगर बच्चों की भी बात करें तो आज के समय में डिजिटल युग के चलते बच्चों के पास भी सिर्फ मोबाइल होना ही जरूरी नहीं है बल्कि उसका इस्तेमाल करना आना भी जरूरी है . ऐसे में अभिषेक बच्चन या सोनू सूद जो बच्चों को मोबाइल ना देने के लिए ज्ञानवर्धक राय दे रहे हैं , उनको सबसे पहले सरकार से अपील करनी चाहिए की बच्चों के लिए स्कूलों में शिक्षा के तहत मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए , तभी कही जाकर बच्चों के पास मोबाइल रखने पर रोक लगा दी जा सकती है .
नहीं तो नामचीन लोगों की ऐसी सलाह ठीक वैसे ही साबित होगी जैसे एक तरफ तो फिल्मी हस्तियां जगह जगह झाड़ और पेड़ लगाने की सभी लोगों से अपील करती है , वहीं दूसरी तरफ बड़ी-बड़ी बिल्डिंग मॉल और फैक्ट्री बनाने के लिए है जंगल के जंगल साफ कर रही है ,जिस वजह से जंगल में रहने वाले शेर चीते सड़क पर रहने वाले इंसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
इससे तो यही निष्कर्ष निकलता है कि सलाह वही दे जो इस सलाह पर अमल करने का रास्ता भी बता सकते हो .
