Relationship equality : अब कार मैन्यूफैक्चरर्स ने अपनी कारों के साथ स्टैपनी देना कम कर दिया है अगर कार में टायर ट्यूबलैस है और टायर रिपेयर किट साथ में दी गई है. काश, ऐसा ही जिंदगी में होता कि किसी पार्टनर को स्टैपनी की जरूरत ही न होती.

सदियों से दुनियाभर में औरतों को तो एक पति के साथ बांध कर रखा गया है और मैरिज इंस्टिट्यूशन का नाम दे कर उन्हें सिक्युरिटी दी गई है पर उन के पतियों के लिए ब्रौथेल, प्रौस्टिट्यूशन, रखैल की स्टैपनी का इंतजाम किया गया है. अब जब औरतें घरों से निकल कर कमाने बाहर जाने लगी हैं पतियों की स्टैपनी गायब होने लगी है. अब साथी का टायर खुद मजबूत है और यदि कोई मिसफिट हो जाए तो या तो गाड़ी को फेंक दो या टायर बदल दो पर स्टैपनी को साथ नहीं ले चल सकते.

वैसे बहुत से घरों में पहले पत्नियां ही स्टैपनी होती थीं जो सिर्फ बच्चे पैदा कर के पति के लिए बेकार हो जाती थीं. जैसे घिसे टायर को आमतौर पर स्टैपनी के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, वैसा ही पत्नियों के साथ होता था.

अब हर साथी बराबर का हक मांगता है. वह न तो स्टैपनी है न दूसरे टायर की स्टैपनी रखने की इजाजत देता है. साथी बनना है तो खुद को मजबूत करो, देखभाल करो, स्टैपनी पर डिपैंड न रहो. हर रिलेशनशिप में सभी टायरों का कंट्रीब्यूशन बराबर का होना चाहिए वरना एलाइनमैंट खराब हो जाएगा और एक ज्यादा घिसेगा और कार खड़खड़ाएगी. आगे और पीछे के दोनों तरफ के टायरों का महत्त्व अब बराबर है.

अब रिपेयर फिट रखो, स्टैपनी की सोचो भी नहीं. कार जीवन का अच्छा प्रतीक है और जैसे इस की सर्विसिंग, रिपेयर, डैंटिंग, पैंटिंग जरूरी है वैसे ही रिलेशनशिप की भी है चाहे विवाह की पुरानी सेरेमनियां की गई हों या न की गई हों. अगर आप को जीवन की कार, चाहे 5 साल के लिए चलानी हो या 50 साल के लिए, तो उस की देखभाल करो और स्टैपनी को पूरी तरह भूल जाओ. अब तो बच्चे भी स्टैपनी नहीं हैं क्योंकि वे खुद ही अलग कार बन जाते हैं. वे टो कर के कहीं कभी ले जाएं वरना तो वे बस साथ चलने वाले व्हीकल हैं, अपने में खुद स्वतंत्र.

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