Language Skill: साउथ सुपरस्टार कमल हासन कन्नड़ पर दिए गए बयान से विवादों में हैं. उन्होंने कहा था कि कन्नड़ तमिल से जन्मी है. विवाद बढ़ने पर कर्नाटक में उन की फिल्म ‘ठग लाइफ’ रिलीज नहीं होने दी गई. वहीं कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी उन्हें बयान के लिए फटकार लगाई. अब कमल हासन का हिंदी पर एक बयान सामने आया है, जिस में उन्होंने कहा है कि हिंदी को अचानक थोपा नहीं जाना चाहिए क्योंकि अचानक हुए भाषा के बदलाव से हम कई लोगों को अनपढ़ बना देंगे.

भाषा को सीखें बिना झिझक

एक इंटरव्यू में कमल हासन से भाषा विवाद पर सवाल किए जाने पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि मैं पंजाब के साथ खड़ा हूं. हालांकि आगे उन्होंने संजीदगी से कहा कि मैं कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के साथ खड़ा हूं. सिर्फ यही वे जगहें नहीं हैं, जहां भाषा थोपी जा रही है. मैं फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ का ऐक्टर था. बिना थोपे मैं ने भाषा सीखी. थोपो मत क्योंकि एक तरह से यह शिक्षा है.

आप को शिक्षा के लिए सब से आसान रास्ता अपनाना चाहिए न कि बाधाएं डालनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर आप को वाकई इंटरनैशनली सफलता चाहिए तो आप को एक भाषा सीखनी चाहिए और मुझे इंग्लिश काफी उचित लगती है. आप स्पेनिश या चीनी भी सीख सकते हैं, लेकिन सब से आसान रास्ता यह है कि हमारे पास 350 साल पुरानी इंग्लिश ऐजुकेशन है जो धीरेधीरे लेकिन लगातार चली आ रही है. जब आप अचानक इसे बदलते हैं तो आप बेवजह कई लोगों को अनपढ़ बना सकते हैं.

भाषा है एक ऐक्स्प्रैशन

यहां यह समझना होगा कि हर व्यक्ति की शारीरिक ऊंचाई, वजन, स्वभाव एकजैसा नहीं होता जैसाकि सैन्य रैजीमैंट में होता है, जहां आप को पता चल जाता है कि फलां व्यक्ति किस रैजीमैंट में किस पद पर काम कर रहा है क्योंकि वहां काम करने वाले का एकजैसा सीना, वजन, शारीरिक बनावट आदि की रिक्वायरमैंट होती है और वहां रैजीमैंट के आधार पर सब को चलना पड़ता है.

भाषा सीखना है गर्व

असल में भाषा एक ऐक्स्प्रैशन है, जिस के द्वारा आप अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं, फिर इसे ले कर आपसी तनातनी क्यों? क्या आप बता सकते हैं कि आप किस भाषा में हंसते या रोते है? इंसान की ये भावनाएं पूरे विश्व में एकजैसी ही होती हैं. भाषा न जानने पर भी आप सामने वाले व्यक्ति को हंसता या रोता हुआ देख कर उस की मनोदशा को समझ लेते हैं यानी किसी की भावना को समझने के लिए भाषा की जरूरत नहीं पड़ती. भावनाएं चेहरे पर अनायास ही आ जाती हैं.

हर भाषा का अपना सौंदर्य होता है और उसे किसी के द्वारा सीख लेना गर्व की बात होती है. जो व्यक्ति जितना अधिक भाषा का ज्ञान रखता है वह उतना अधिक विद्वान माना जाता है. पड़ोस में कोल्हापुरी चप्पल बेचने वाले को 5 भाषाएं आती हैं, जबकि वह बहुत कम पढ़ालिखा है. उस ने मराठी में 5वीं तक पढ़ाई की, लेकिन उस की दुकान पर कोल्हापुरी चप्पलें खरीदने वालों की भीड़ लगी रहती है क्योंकि वह जिस किसी भी भाषा में संवाद छोटा सही पर कर लेता है. बड़ी हैरानी तब हुई, जब उस ने बंगला, पंजाबी, गुजराती, इंग्लिश सभी भाषाओं में अपनी चप्पलों की तारीफ ग्राहकों से की. भाषा के इस ज्ञान का विकास उस ने अपने व्यवसाय में कामयाबी के लिए किया है जो बहुत जरूरी है.

है एक स्किल

माथेरान में घुमाने वाला घोड़े वाला व्यक्ति भी मराठी, गुजराती, हिंदी के अलावा इंग्लिश और फ्रैंच जानता है क्योंकि उसे वहां की वादियों के बारे में पर्यटकों को बताना पड़ता है ताकि उस के घोड़े पर सवार हो कर व्यक्ति वहां के दृश्यों का आनंद उठा सकें. उस ने फ्रैंच और इंग्लिश पर्यटकों से सुनसुन कर सीख ली है. यही वजह है कि कोई भी उस के घोड़े को सवारी के लिए ले जाना पसंद करता है, जबकि उस के घोड़े की सवारी महंगी है, लेकिन भाषा ज्ञान उसे सब से अलग और कामयाबी की श्रेणी में रखता है. दिल्ली प्रैस समूह ने भी गृहशोभा मैगजीन को कई भाषाओं में प्रकाशित कर यह सिद्ध कर दिया है कि भाषा कोई भी हो, आप इस मैगजीन के लेखों से खुद को ऐन्हैंस कर सकते हैं.

मूल रूप से गृहशोभा हिंदी में शुरू हुई थी, लेकिन बाद में बंगला, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में भी उपलब्ध होने लगी. इस से इस पत्रिका से अलगअलग भाषा जानने वाले हर वर्ग के पाठक को रुचिकर और उपयोगी सामग्री मिलने लगी. इसे पूरे देश में सभी तक पहुंचाना आसान नहीं था क्योंकि पाठकों की रुचि को देखते हुए लेखों को अनुवाद किया जाने लगा. आज देश का हर नागरिक इस के लेखों, कहानियों को पढ़ सकता है. यहां यह साबित हुआ कि किसी भाषा को सीखना कोई बड़ी बात नहीं, जिस की राजनीति आज देखने को मिल रही है.

राजनेता भाषा के माध्यम से अपने वोटबैंक की रोटियां सेंक रहे हैं और चाहते हैं कि हिंदी के जानकार को दक्षिण में हिंदी पढ़ाने की जौब मिल जाए, जिसे ये अपनी कामयाबी कहेंगे. कोई भी व्यक्ति आसानी से किसी भाषा को सीख सकता है. असल में यह एक अच्छी स्किल है, जिसे सभी को सीख लेना चाहिए, जितनी भाषाएं व्यक्ति बोल सकता है, उतना ही उस की पहचान का दायरा बढ़ता जाता है.

सिखाएं एकदूसरे को

बड़ेबड़े शहरों में हाई राइज बिल्डिंग्स में जहां हर भाषा के लोग आज एकसाथ रहते हैं, वहां भी सोसाइटी के किसी गैटटूगैदर में सब अपनीअपनी भाषा के साथ गु्रप बना लेते हैं. ऐसे स्थानों पर दूसरी भाषा बोलने वाले लोग जाने से परहेज करते हैं क्योंकि उन्हें उन के संवाद समझ में नहीं आते. ऐसे में अगर हर सोसाइटी आपस में एकदूसरे की भाषा की फ्री में एक क्लास चला दे तो कोई भी उसे सीख सकता है और ग्रुप में होने वाली दूरियां भी मिट सकती हैं.

धारावाहिक ‘सपनों की छलांग’ फेन अभिनेत्री मेघा रे कहती हैं कि भाषा पर विवाद कभी सही नहीं होता, भाषा खुद की भावनाओं को व्यक्त करने का एक जरीया मात्र है. जानवरों की भी अपनी भाषा होती है, जिसे हम समझ नहीं पाते, लेकिन उन की मनोदशा को समझ सकते हैं. आज हम किसी भी भाषा की फिल्में और वैब सीरीज सबटाइटल के साथ देखते और ऐंजौय करते हैं. मैं ओडिसा की हूं, लेकिन मराठी, हिंदी, इंग्लिश और गुजराती अच्छी तरह से बोल लेती हूं. भाषा ज्ञान से ही हम उस स्थान की कला और संस्कृति से परिचित होते हैं जो अच्छी बात है. मुझे भाषा सीखना पसंद है और इंडस्ट्री में अच्छा काम करने के लिए कई भाषाओं का ज्ञान होना जरूरी है ताकि किसी संवाद को अच्छी तरह से परदे पर उतारा जाए.

इस प्रकार भाषा विवाद का समाधान टकराव में नहीं बल्कि समावेशी दृष्टिकोण अपनाने में है. यूथ को मातृभाषा के अलावा अन्य भाषाओं का भी ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए ताकि वे जहां भी पढ़ाई करने या जौब के लिए जाएं तो उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या न हो. वहां से भागे नहीं. वे जहां भी जाएं वहां की भाषा पहले से सीख लेने की कोशिश करें ताकि वे खुद को अकेले नहीं बल्कि उसी परिवेश का हिस्सा समझें.

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