Revlon ED: मोदी मुंडीफार्मा प्राइवेट लिमिटेड ने 1995 में भारत में रेवलौन की शुरुआत की थी जो देश में लौंच होने वाला पहला अंतर्राष्ट्रीय कौस्मैटिक ब्रैंड था. इस ब्रैंड ने ब्यूटी के क्षेत्र में एक ट्रेंडसैटर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है. अपनी अच्छी क्वालिटी वाले प्रोडक्ट्स और नए एक्सपेरिमैंट्स के लिए प्रसिद्ध यह ब्रैंड अब मेघना मोदी के नेतृत्व में एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है, जिस का लक्ष्य भारत के बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करना है. नवंबर, 2023 में ऐग्जीक्यूटिव डाइरैक्टर और भारत की प्रमुख के रूप में नियुक्त हुईं मेघना मोदी के नेतृत्व में कंपनी नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी में है.
उमेश मोदी गु्रप के अध्यक्ष उमेश कुमार मोदी की सब से बड़ी बेटी मेघना ने ‘लंदन बिजनैस स्कूल’ और ‘हार्वर्ड स्कूल औफ बिजनैस’ से शिक्षा प्राप्त की है और वहां के अनुभव ले कर आई हैं. हार्वर्ड से एमबीए करने के बाद उन्होंने बोस्टन में एक बैन कंसल्टिंग में 4 साल तक एडवाइजर के रूप में काम किया. मेघना 4 भाईबहन हैं. मेघना, हिमानी, अभिषेक और जय. वे सब से बड़ी हैं. मेघना मोदी बताती हैं कि वे मोदीनगर में पैदा हुई. उन के ग्रैंडफादर गुजरमल मोदी साहब ने 1933 में मोदीनगर शहर बसाया था. यह शहर अमेजिंग था. गुजरमल मोदी के 11 बच्चे थे. वे उन के 10वें बेटे उमेश मोदी की सब से बड़ी बेटी हैं. वे 1997 में रेवलौन में ट्रेनी यानी एज अ इंटर्न आई थीं और पापा के औफिस में जौइन किया. तब उन्हें ब्यूटी एडवाइजर की नौकरी मिली. उन्होंने शौपर्स स्टौप अंसल प्लाजा में 1 साल ब्यूटी एडवाइजर की नौकरी की थी ताकि मार्केट और कस्टमर को समझ सकें. फिर वे रेवलौन में बोर्ड की ऐग्जीक्यूटिव डाइरैक्टर बनीं.
करीब 4 साल यहां काम करने के बाद वे ‘हार्वर्ड स्कूल औफ बिजनैस’ में पढ़ने चली गईं. 2003 में बोस्टन में कंसल्टिंग का काम शुरू किया और 4 साल तक इस का अनुभव लिया. उन्होंने गो मोबाइल कंपनी की शुरुआत भी की. इस के लिए फंडिंग बाहर से ले कर आई. आज भी गो मोबाइल अच्छे से चल रही है. यह दिल्ली में एक फोन रिटेल है जोकि मल्टीब्रैंड है. इस कंपनी से उन्होंने दुकानदारी सीखी. दुकानदारी सीखनी बहुत जरूरी थी. ब्रैंड प्रोडक्ट बनाते हैं जबकि दुकानदार प्रोडक्ट बेचते हैं. आज 15-16 साल हो गए गो मोबाइल को. गो मोबाइल से उन्होंने अपने रिटेल की जर्नी शुरू की थी. फिर 2024 में उन्होंने रेवलोन को जौइन किया. रेवलान थोड़ी दिक्कतों में चल रहा था. रेवलौन जौइन किए 1 साल से ज्यादा हो चुका है. मेघना बताती हैं कि यहां लड़कियां बहुत हैं. हर स्टोर में एक ब्यूटी एडवाइजर लड़की है.

वे लड़कियों को आगे बढ़ाना चाहती हैं और ऐंपौवर करना चाहती हैं ताकि लड़कियां ब्यूटी एडवाइजर से ब्रैंड ऐंबेसेडर बन सकें. उन के पास करीब एक हजार ब्यूटी एडवाइजर गर्ल्स हैं. रेवलौन के प्रोडक्ट्स अब स्टोर के साथसाथ ई कौमर्स में भी बिकते हैं. भले ही वह अमेजन हो या फ्लिपकार्ट, मिंत्रा या ब्लिंकिट अथवा औफलाइन रिटेलर, सब को एकजैसा ट्रीट किया जाता है और एकजैसा डिस्काउंट दिया जाता है. उन को गो मोबाइल के लिए 2017 में ऐप्पल का आल इंडिया अवार्ड मिला. जयपुर में उन्होंने अपनी जरमन फ्रैंड के साथ जो लायर हैं, आशिता नाम से एक अनाथ लड़कियों के लिए एनजीओ खोला है.
इस एनजीओ में उन लड़कियों को आश्रय दिया जाता है, जिन की मदर प्रौस्ट्रेट हैं, जेल में हैं या मांबाप ने छोड़ दिया. विदेशी कंपनियों से कंपीटिशन? मेघना मोदी बताती हैं, ‘‘1932 में शुरू हुए 90 साल पुराने हमारे ब्रैंड का काफी नाम है. एक बार प्रोडक्ट ले कर कस्टमर रिपीट करते हैं. रेवलौन एक इंटरनैशनल ब्रैंड है. मगर फिर भी इंडियन हो या इंटरनैशनल, कौस्मैटिक कंपनियां बहुत सी हैं. उन से कंपीट करने के लिए हम कई चीजों का खयाल रखते हैं. सब से पहले प्रोडक्ट की क्वालिटी सब से महत्त्वपूर्ण होती है. मसलन, फाउंडेशन की बात करें तो हमारा प्रोडक्ट ऐसा होना चाहिए जिसे लगाने पर स्किन ड्राई न हो, ब्लैक पैचेज न पड़ें, कहीं चैप न हो यानी क्वालिटी ऐसी हो कि कस्टमर रिपीट करना चाहे.
इस के अलावा प्राइसिंग भी बहुत महत्त्वपूर्ण है. हम कस्टमर के बजट की रिस्पैक्ट करते हैं. हमारी लिपस्टिक 400-500 रुपए से ले कर 5,000 रुपए तक की है. हम कोई कैमिकल यूज नहीं करते. सब नैचुरल तत्त्वों से बने प्रोडक्ट्स हैं. हम नए प्रोडक्ट लौंच को अहमियत देते हैं. लगातार प्रोडक्ट्स के नए कलर, नए स्किन शेड्स, नई रेंज लाते रहते हैं. हमारी कंपनी का सब से लोकप्रिय प्रोडक्ट लिपस्टिक है. इस की 5 रेंज हैं. हाल ही में हम ने पुरुषों के लिए भी एक नई रेंज लौंच की है. पुरुषों के ग्रूमिंग के लिए रेवलोन एकदम नई रेंज ले कर आया है. हेयर कलर बहुत अहम हैं.’’
इस फील्ड में आना तय था या कुछ और करना था?
मेघना कहती हैं, ‘‘मैं बहुत पढ़ाकू थी और हमेशा सब से आगे रहने की सोची. टौप पर रही हूं. मेरे पेरैंट्स भी पढ़ाई पर बहुत जोर देते थे. हमें नंबर अच्छे लाने पड़ते थे क्योंकि पेरैंट्स पढ़ाई को अहमियत देते थे. जब रेवलौन आया तो यह कौस्मैटिक ब्रैंड था इसलिए मुझे औपर्च्यूनिटी मिली और मैं इस से जुड़ी. फिर मैं ने इसे आगे बढ़ाने की कोशिश की. 1995 में उमेश मोदी यानी मेरे पिताजी रेवलान को इंडिया में ले कर आए. उन्हें इस के लिए लाइफटाइम लाइसैंस मिला था. 1997 में मैं ने ट्रेनी के रूप में रेवलौन को जौइन किया था. यहां 4 साल काम किया फिर हार्वर्ड स्कूल चली गई. फिर वहां से मैं ने बहुत से ऐक्सपीरिएंस लिए. अपने बिजनैस खोले. कैटालौगिंग का काम भी किया. गो मोबाइल शुरू किया. अब मैं ने फिर से रेवलौन की कमान संभाली है और इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाना है.’’
कैसे बसा था मोदीनगर?
मेघना बताती हैं, ‘‘हम लोग पटियाला से थे. हमारे दादाजी यानी गुजरमल मोदी ने 1932 में मोदीनगर की स्थापना की. यह अमेजिंग नगर था. यह शुगर प्लांट से शुरू हुआ. तब हमारे पास कुछ नहीं था. लेकिन दादाजी हमेशा कम्युनिटी को साथ ले कर चले. एक बिजनैस के बाद दूसरा बिजनैस बढ़ाया और जो भी प्रौफिट होता वे उसे उसी शहर में इन्वैस्ट करते जाते थे. तब मैं बहुत छोटी थी. उन की डैथ के समय 3 दिन तक कोई चूल्हा नहीं जला क्योंकि उन्होंने कम्युनिटी फीलिंग बहुत बना कर रखी थी. उन में सिर्फ देने की भावना थी. उन के पास कोई बैंक अकाउंट नहीं था.
अगर आप बड़े घर में पैदा हुए हों तो काम करने के साथ काम देना बहुत बढि़या है. यह मुझे बहुत अच्छा लगता है. गो मोबाइल में 700 से ज्यादा लोग काम करते हैं. रेवलौन में 5000 से ज्यादा लड़कियां हैं. रेवलौन में कुल 10000 कर्मचारी हैं. मुझे खुशी होती है कि हम ने भी इतने लोगों को रोजगार दिया है.’’ कंपनी को आगे बढ़ाने का फ्यूचर प्लान क्या है? ‘‘मेरी नजर में मार्केटिंग महत्त्वपूर्ण है. आजकल डिजिटल पर सबकुछ है. इंस्टाग्राम, इन्फ्लुएंसर का जमाना है. इस पर मेरा फोकस है. मार्केट को देखते हुए हम प्रोडक्ट लौचिंग कर रहे हैं. जैसे हम ने अभी लिपस्टिक की नई रेंज लौंच की है.
पुरुषों के लिए भी नया ग्रूमिंग रेंज लौंच की है. कंपीटिशन बहुत है, सुपर मार्केट्स के साथ टाईअप करना है. ‘‘दूसरी चीज है स्टोरी टैलिंग. आप बता सकें कि इस प्रोडक्ट में क्या खासीयत है. दुकान पर खड़ी हमारी लड़कियों को कौन्फिडैंस होना चाहिए कि वे अपने प्रोडक्ट्स के बारे में सारी डिटेल अच्छे से समझएं. कस्टमर को यह बताना जरूरी है कि उन का फायदा किस में है. सस्ता सामान बारबार लेना पड़ता है, मगर महंगा सामान एक बार ही लेने से लंबे समय तक चलता है. इस तरह की बातें बारबार ऐक्सप्रैस करना जरूरी हैं. ‘‘तीसरा ट्रेनिंग इंपौर्टैंट है. जो लड़कियां दुकानों में खड़ी हैं उन्हें कैसे ट्रेंड करें ताकि वे परफैक्टली बताएं कि कस्टमर के लिए कौन सा राइट प्रोडक्ट है और कस्टमर को पहचान सकें. ‘‘चौथा हमें डिस्ट्रीब्यूशन बढ़ाना है. प्रोडक्ट हर जगह दिखना चाहिए. अभी रेवलौन मार्केट में वाइडली डिस्ट्रीब्यूटेड नहीं है. उसे बढ़ना होगा.
इस सब के अलावा ऐक्टिव मैनेजमैंट जरूरी है. हमारे सभी पार्टनर जैसे रिटेलर, डिस्ट्रीब्यूटर, मार्केटर, कंपनी के बाकी लोग सब ऐक्टिव होने चाहिए. तभी कंपनी जंप करेगी. ब्रैंड का नाम बहुत है. अब हमारा फोकस होना चाहिए कि इस नाम को आगे कैसे बढ़ाएं. हर दिन जो काम करना है वह करना ही है. काम कल के लिए टालना नहीं है. मैं इन सब बातों पर ध्यान दे रही हूं.’’
चैलेंजेज क्या थे?
‘‘हम काफी स्लो थे, जबकि स्पीड जरूरी है. मार्केट में आगे बढ़ने के लिए फास्ट होना जरूरी है. इस के लिए हमारे पास सही प्लान होना चाहिए. भागनादौड़ना और सब काम समय से करना होगा. आप को खुद में पहले जोश लाना होगा तब आप अपने नीचे के लोगों को समय पर काम करने को कह सकते हैं. आप को हमेशा इस बात का खयाल रखना होगा कि कस्टमर वेट कर रहा है. ‘‘एक सही टीम बनानी भी एक बड़ी चुनौती है. माहौल के हिसाब से हमें इंपू्रवमैंट करना है. जमाना बहुत तेजी से बदल रहा है. जैसे चैट जीपीटी पहले नहीं था. मोबाइल से सबकुछ होने लगा. डिजिटल मार्केटिंग काफी तेजी से आगे बढ़ी है.
आज 15-16 साल की लड़कियां, उन का फैशन, उन का सोचने का तरीका, उन के खरीदने का स्टाइल काफी अलग है. हम उन के हिसाब से खुद को चेंज नहीं करेंगे तो पीछे रह जाएंगे. मार्केट के हिसाब से चलना जरूरी है. ‘‘हमारे लिए एंबिशस बने रहना भी एक चुनौती है. कोई काम करना है तो करना है. कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी. रेवलौन 1997 में लौंच हुआ था बट हम ने मार्केट शेयर लूज कर दिया था. हम औनलाइन उपलब्ध नहीं थे. मार्केटिंग सही नहीं थी. अब हमें रेवलौन को फिर से ऊपर पहुंचाना है. ‘‘एक चुनौती ट्रांसपेरैंसी बना कर रखनी भी है. ओपनली व्हाट्सऐप ग्रुप में बात करना जरूरी है. किसी से छिप कर बात नहीं करना. हर बात सब को मालूम होना चाहिए. तभी टीम फीलिंग आती है.’’
जीवन के स्ट्रगल?
मेघना बताती हैं, ‘‘हमारे परिवार में लेडीज काम नहीं करती हैं. मेरे लिए भी पढ़ाई इंपौर्टैंट थी, मगर काम करना इंपौर्टैंट नहीं था क्योंकि घर में पैसे की कमी नहीं थी. हमारे घर के लोग पुरातनपंथी थे तो ऐसे में मेरा आगे बढ़ना और फुलटाइम जौब करना काफी स्ट्रगल भरा फैसला था. हमारे घर का एन्वायरन्मैंट ऐंड कल्चर भी काफी ट्रैडिशनल थे. मैं पहली लड़की थी जो यूएस और लंदन गई. मैं घर की पहली लड़की थी जो कोएड स्कूल में पढ़ने गई. मेरी सारी कजिन गर्ल्स कालेज में जाते थे. मैं ने एक तरह से घर वालों की ट्रैडिशनल सोच से हट कर काम किया जो काफी चैलेंजिंग था. मुझे मेरे पेरैंट्स ने बचपन से हार्ड वर्किंग, बीइंग औनैस्ट, स्ट्रेट फौरवर्ड और टफनैस सिखाई है. हजारों लोग हम से जुड़े हैं तो उन का कैरियर अब हमारे हाथ में है. जिम्मेदारी लेना सिखाया गया है. इन्हीं सीखों की वजह से आज मैं इस मुकाम पर हूं.’’
विदेशी और भारतीय सोच में बेसिक अंतर?
‘‘विदेशों में लड़केलड़की में अंतर नहीं पाया जाता है लेकिन हमारे यहां यह बहुत बड़ा अंतर है. भारत में लड़की की शादी के बाद लाइफ बहुत टफ हो जाती है. रोकटोक बहुत हो जाती है. यह करो, यह मत करो जैसी बातें समझई जाती हैं. लड़का जिम जाता है और फिर औफिस आ जाता है जबकि लड़कियां घर का खाना बनाती हैं और सब को खिलातीपिलाती हैं, घर के बाकी काम निबटाती हैं फिर औफिस आती हैं. तो डिफरैंस बहुत है. शादी के बाद सब टफ हो जाता है. वहां ऐन्वायरन्मैंटल चैलेंजेज इतने नहीं हैं. लड़की घर में भी इंडिपैंडैंट नहीं ससुराल में भी नहीं, जबकि विदेशों में लड़के हों या लड़कियां सब 18 साल के बाद इंडिपैंडैंट हो जाते हैं. विदेशों में औपर्च्युनिटी बहुत है. वहां इंसान छोटा काम कर के भी बहुत जल्दी रिच बन जाता है. मगर भारत में सबकुछ इतना आसान नहीं है. यहां पौपुलेशन ज्यादा है और इस वजह से कंपीटिशन भी ज्यादा है.’’
इंस्पिरेशन किस से मिलती है?
‘‘मेरे इंस्पिरेशन मेरे दादाजी हैं और इस के अलावा कोई भी शख्स जो नीचे से ऊपर आया, अपनी जिंदगी को उस ने खुद संवारा, जिस ने अपने हाथों से कुछ बनाया. वे प्रैसिडैंट रूजवेल्ट हों या प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी हों या फिर किसी कंपनी का छोटामोटा कर्मचारी हो. अगर कोई डिलिवरी बौय है जिस की बैकग्राउंड अच्छी नहीं है पर उस ने हिम्मत नहीं हारी और स्टोर मैनेजर बन गया और अपने बल पर लाइफ में आगे बढ़ा तो मेरे लिए वह इंस्पिरेशन है.’’
बिजनैस की सफलता के मंत्र?
‘‘किसी भी बिजनैस की सफलता के लिए सही इंडस्ट्री सिलैक्शन इंपौर्टैंट है. हम कहां हैं और किस दिशा में मेहनत करें यह बहुत माने रखता है, साथ ही यह देखना भी जरूरी है कि उस इंडस्ट्री को कैप्चर करने के लिए क्या आप के पास कोई खासीयत है? मसलन, हमारी इंडस्ट्री में सब के पास लिपस्टिक है या बिजनैस का आइडिया है तो आप के पास क्या अलग है जो दूसरा कौपी नहीं कर सकता है? यह समझना जरूरी है क्योंकि मार्केट में कंपीटिशन बहुत है. ‘‘साथ ही इंडस्ट्री में बने रहने के लिए प्रौफिट जरूरी है. बिजनैस बिना प्रौफिट कुछ नहीं है. आप को देखना होगा कि आप को प्रौफिट हो रहा है या नहीं. घर से रुपए लगाने की जरूरत नहीं है बल्कि अपना प्रौफिट देखें. शुरू में आप पैसा लगाते हैं लेकिन बाद में आप को देखना होगा कि कितना प्रौफिट होगा. प्रौफिट से ही आप का बिजनैस ऐक्सपैंशन होना चाहिए. आज रेवलौन के प्रोडक्ट्स नेपाल, पाकिस्तान, बंगलादेश, श्रीलंका और यूएस जैसे देशों में भी अवेलेबल है.’’
सफलता का सीक्रेट?
‘‘मेरी सफलता का सीक्रेट डीप नौलेज में है. हर चीज को ऐग्जाम समझना और उस में पास होना जरूरी समझती हूं. मैं किसी भी चीज के अंदर तक घुसती हूं. हर चीज को गंभीरता से समझती हूं. अपने बिजनैस से जुड़ी हर छोटीबड़ी बात मालूम रखती हूं. नौलेज पाने के लिए मैं डिलिवरी बौय और सेल्स गर्ल्स से ले कर बड़े ओहदे वालों तक सब से जानकारी लेने की कोशिश करती हूं.’’
लड़कियां ब्यूटी प्रोडक्ट्स लेते समय किस तरह की गलतियां करती हैं?
मेघना मोदी कहती हैं, ‘‘लड़कियां अकसर गोरा दिखने के लिए हलके शेड्स वाले या व्हाइट फाउंडेशन ले लेती हैं. यह नहीं करना चाहिए. फाउंडेशन को स्किन टोन से मैच न किया तो वह गलती होती है. इसलिए ऐन्वायरन्मैंट और अपनी स्किन कलर को समझते हुए फंक्शन के हिसाब से प्रोडक्ट लें. शादी के फंक्शन में ब्राइट कलर अच्छे लगते हैं, जबकि किसी गैटटुगैदर में जाना हो तो लाइट कलर ही शूट करते हैं. दरअसल, किसी भी प्रोडक्ट का कब ब्राइट कलर लेना है, कब मैट या न्यूड कलर लेना है इस के बारे में कई तरह से सोचना चाहिए. मौका, समय और अपनी स्किन के हिसाब से ही शेड्स चूज करें.’’
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