Supper Club Business: सपर क्लब (Supper Club) का चलन भारत में तेजी से बढ़ रहा है. यह पारंपरिक रेस्तरां से अलग एक अंतरंग और विशिष्ट भोजन करने का अनुभव देता है, जहां लोग अजनबियों या छोटे समूहों के साथ निजी घरों या प्राइवेसी वाले जगहों पर एक साथ खाना खाते हैं. हालांकि इसका चलन विदेशों में खासकर लंदन में बहुत अधिक है, जहां उन्हें रेस्टोरेंट के एनवायरनमेंट से अधिक घरेलू वातावरण पसंद आता है, यह चलन भोजन से कहीं बढ़कर एक गेटटूगेदर, नए लोगों से परिचय और अच्छी नेटवर्किंग करना होता है.

देखा जाए, तो डिजिटल दुनिया से दूर होकर वास्तविक बातचीत और नए लोगों से जुड़ना आजकल एक समस्या बन चुका है, ऐसे में जहां अजनबियों के साथ एक मेज पर बैठकर खाना, नए रिश्ते बनाने का एक शानदार तरीका ये क्लब देती है, यही वजह है कि यूथ से लेकर वयस्क इसका आनंद उठाने में पीछे नहीं हटते.

खाना बनाना पसंद

इस बारें में पिछले कुछ सालों से मास्टर शेफ बिलकिस खान ‘गल्पों’ सपर क्लब मुंबई के चेंबूर में चला रही है, जहां साथ मिलकर भोजन करने के अलावा गपशप करना होता है. वह कहती है कि मुझे बचपन से खाना बनाना पसंद रहा है, मुझे तरहतरह के व्यंजन को अलग तरीके से सजाने का क्रेज रहा है. मेरे पूर्वज अरब देशों से आकर बंगाल में बस गए थे और यही रहने लगे. मेरा मुंबई में आना शिलांग से हुआ, क्योंकि वहां मेरे पिता व्यवसाय करते थे. मैं शादी के बाद पति के साथ मुंबई आई हूं और अब यही रह रही हूं.

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मिली प्रेरणा

इस कॉन्सेप्ट के बारें में मैंने कई सालों से सोच रखा था, क्योंकि पहले मैं ‘पॉप-अप’ किया करती थी, जिसमें खाना खिलाने का मतलब किसी अस्थायी जगह, जैसे कि घर, आर्ट गैलरी या खाली पड़ी जगहों पर खास थीम पर आधारित भोजन का आयोजन करना है. इसे अक्सर शेफ अपने नए मेनू को आज़माने या मेहमानों को एक अनोखा फाइन डाइनिंग अनुभव देने के लिए करते हैं, लेकिन ये कॉमन न होने की वजह से सोसाइटी में स्वीकार्य नहीं था, क्योंकि इसमें आने वाले सारे लोग अनजान होते थे. इसमें शेफ पहले से ही पूरा खाना डिसाइड कर रखती है.

मिला सहयोग

इसके बाद मैंने सपर क्लब की स्थापना की, जो शाम को आयोजित किया जाता है. इसे मैंने सालों से सोचा हुआ था. असल में मैँ आसमा खान की फॉलोअर हूँ, जो लंदन में रहती है और सपर क्लब चलाती है. वहाँ ये बहुत पोपुलर है, जहां कुछ समूह में लोग एक साथ मिलकर खाना खाते और गपशप करते है. मुझे लगा नहीं था कि मैं इंडिया में इसे कर पाऊँगी.  मुझे इसमें सहयोग देने लगा. ये कल्चर मुंबई के अलावा, कोलकाता, बंगलुरु आदि सभी स्थानों पर काफी पोपुलर है. मेरी एक शेफ दोस्त शेरी मेहता ने ने सपर क्लब शुरू कर दिया था, मैँ वहाँ गई और मुझे उसका सेटअप बहुत पसंद आया और मैंने भी इसे करने की ठान ली. हालांकि सालों से मैँ इसे करना चाह रही थी, लेकिन उसके सेटअप को देखकर प्रेरणा मिली.

उत्साहित नई जेनरेशन

मैँ वेस्ट बंगाल के राढ़ जिले की बंगाली सूफी मुस्लिम हूं और इस क्षेत्र में सूफी शेफ बहुत कम है, ऐसे में मेरे क्विज़ीन प्योर अथेनटिक होता है, जिसे लोग बहुत पसंद करते है, क्योंकि मैँ वैसी ही ओरिजनल रूप में खाना परोसती हूं और उसी टेस्ट को बनाए रखती हूं. नई जेनरेशन के लोग इस तरह के व्यंजन से परिचित नहीं थे, इसलिए जब उन्होंने मेरे क्विज़ीन को टेस्ट किया तो उनकी जागरूकता इस ओर बढ़ी है. मैँ मास्टर शेफ हूं और कई प्रतियोगिता भी जीत चुकी हूं. मेरे इस काम में मेरी एक टीम है, जो मेरे साथ काम करती है, जिसमें पाँच फोरन मुर्गी, आलू पोसतों, कातला माछेर कोफ़्ता, कबाब, बहुत तरीके की बिरयानी, पुलाव आदि कई व्यंजन मैँ तैयार करती हूं, जिसे सोलफुल फूड कहा जा सकता है. असल में बंगाल के राढ़ जिले में पोस्ता की खेती काफी होती है, जिससे सभी व्यंजन में इसका प्रयोग होता है, जो किसी भी डिश को खास बनाती है. मेरे यहाँ यहाँ 12 से 14 लोग साथ मिलकर आते है और भोजन करते है, ये अधिकतर शाम के 6 बजे से शुरू होकर रात तक चलता रहता है.

होती है चुनौती

इस काम में सबसे बड़ी चुनती सही भोजन की क्वालिटी को परोसना होता है, जो सबको अच्छा लगे. खाना बाहर से नहीं, घर पर बनाना पड़ता है, ताकि लोगों को वाउ मूवमेंट फ़ील हो. बिलकिस कहती है कि इसकी मार्केटिंग मैंने सोशल मीडिया से किया है, इसके अलावा मेरा नेटवर्क अच्छा है, लोग जानते है और माउथ टू माउथ भी अच्छी पब्लिसिटी हो जाती है. सोशल मीडिया की सहायता से लोग अपनी बुकिंग कर लेते है, जो कम से कम 15 दिन पहले करना पड़ता है, ताकि मैँ सभी सामानों की  व्यवस्था कर सकूँ, इसमें मैँ हमेशा अच्छी क्वालिटी की प्रोडक्ट का प्रयोग करती हूं, ताकि स्वाद सही बनी रहे. हर प्रांत के लोग मेरे यहाँ आकर इस फूड का आनंद उठाते है. इस काम के लिए मैंने 8 सीटर और 4 सीटर की डाईनिंग टेबल लगा रखी है, मेरा घर बड़ा है, इसलिए कोई मुश्किल नहीं होती. आगे मैँ 20 से 30 लोगों का इंतजाम करने वाली है.

घरेलू स्त्रियां भी करें

इस काम को खाना बनाने में रुचि रखने वाली घरेलू स्त्रियां भी कर सकती है, क्योंकि ये एक अच्छा प्रोफेशन है और इसमें संतुष्टि बहुत मिलती है. बिलकिस कहती हैं कि कुछ बातें इस काम में याद रखने की जरूरत होती है, ताकि आप ग्राहक को अच्छा फ़ील करवा सकें, क्योंकि इसमें एक प्लेट 3 हजार से लेकर 5 हजार रुपये तक होता है,

  • थीम तैयार करना, अच्छी हायजिन को मैन्टैन करना,
  • अच्छी और वैरायटी ऑफ डिशेज के बारें में जानकारी होना, जिसे खुद घर पर कम मात्रा में तैयार कर इक्स्प्लोर करना,
  • खाने की अच्छी क्वालिटी देना,
  • मेन्यू पर ध्यान देना,
  • डिशेज को अच्छी डेकोरेशन कर पाना,
  • एलिट क्लास की फीलिंग के लिए टेबल सेटअप अच्छी तरह से करना,
  • बहुत अच्छी वैरायटी ऑफ कटलरी सेट और प्लेटस का होना,
  • रिंगस, नैप्किन, कैन्डल्स, फ्लावर्स की अरैन्जमेंट का होना,
  • अच्छी एम्बिएन्स के लिए सुदिंग संगीत की व्यवस्था करना आदि.

अंत में इतना कहना सही होगा कि सपर क्लब के जरिए शेफ की नेटवर्किंग अच्छी हो जाती है, साथ ही अच्छे लोगों से मिलने का मौका मिलता है, क्रीऐटिवटी सैटिसफ़ाई हो जाती है. इतने सारे लोगों के लिए जब आप फाइन डाईनिंग करते है, तो आप खुद में काफी ग्रो भी करते है. इतना ही नहीं , सही मार्केटिंग और प्लानिंग के साथ आप इसमें अच्छा कमा भी सकते है.

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