Community Leader
सोशल इंपैक्ट अचीवर
महाराष्ट्र की वनिता जगदेव बोराडे एक जमीनी स्तर की नेता हैं, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण और महिला सशक्तीकरण में उन के दोहरे योगदान के लिए जाना जाता है. उन्होंने न केवल हजारों सांपों को बचा कर जंगल में छोड़ा है बल्कि ग्रामीण समुदायों में महिलाओं को संगठित कर रूढि़वादी धारणाओं को भी तोड़ा है.
गृहशोभा इंस्पायर अवार्ड में वनिता ने कहा, ‘‘पर्यावरण ही प्राण संजीवन, चलो करें मिल कर संरक्षण संवर्धन. सांप बचाइए, पर्यावरण बचाइए. मैं गृहशोभा को बहुत धन्यवाद देती हूं और इस पुरस्कार की मैं अकेली हकदार नहीं हूं. मेरे साथ जो लोग हैं, मु झे जिन का सहयोग मिला है वे सब इस के हकदार हैं.’’
प्रारंभिक जीवन
महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके के छोटे से गांव में जन्मी वनिता जगदेव बोराडे 10 साल की उम्र से ही सांप पकड़ती थीं. बचपन में सांप पकड़ना उन की हौबी थी, जिस में उन के पिताजी और पति ने बहुत साथ दिया. पहले उन्हें यह मालूम नहीं था कि कौन से सांप जहरीले हैं और कौन से नहीं क्योंकि गांव में शिक्षा स्तर इतना नहीं था और गांव के बाहर भी आज भारत में भी सांपों की प्रजातियों के बारे में इतनी जानकारी नहीं है. ऐसे में उन के घर वाले उन्हें बुक्स ले कर देते थे, जिन्हें वनिता ने खूब पढ़ा, बहुत मेहनत की और सांपों के संरक्षण में सब को जागरूक किया.
सर्प मित्र की यात्रा
वनिता ने पारंपरिक लैंगिक सीमाओं को चुनौती देते हुए वन्यजीवों की मदद करना शुरू किया. उन्होंने जहरीले सांपों को सुरक्षित पकड़ने और उन्हें बचाने में विशेषज्ञता हासिल की.
अब तक 75 हजार से अधिक सांपों का रैस्क्यू कर सुरक्षित जंगलों में छोड़ा.
वे ग्रामीणों को सांपों के साथ सहअस्तित्व और सुरक्षा के प्रति शिक्षित करती हैं, जिससे इंसानों और रेंगने वाले जीवों दोनों को होने वाले नुकसान में कमी आई है.
