War Memes: इंटरनैट पर मीम्स आज के युवाओं का ह्यूमर है. यह ह्यूमर तब ढहता हुआ दिखता है जब अधकचरी सोच और संवेदनाओं की कमी इन मीम्स में दिखाई पड़ती है. पहले जब भी किसी देश पर हमला होता था, जब भी कहीं जंग की खबर आती थी तो लोग बेचैन हो जाते थे. डर लगता था कि अब क्या होगा. लोगों के मन में सवाल उठते थे, हमारे जवान ठीक तो हैं? फोन कर के रिश्तेदारों से पूछा जाता था, ‘सब ठीक है न?’

मोबाइल का ज़माना तब भले न था पर ऐसी विकट स्थिति में पोस्ट से हालचाल जरूर पूछा जाता था. उस दौर में युद्ध का मतलब होता था अपनों के लिए डर, चिंता, बेचैनी और एक अनजाना खौफ. इस के अलावा अगर ह्यूमर की जगह होती थी तो उस में सत्ताओं से कड़े सवाल होते थे. कवि सम्मेलनों में थो खूब मसखरी हुआ करती थीं मगर जूतमपजामा जैसी मसखरी नहीं, बल्कि सलीके वाली.

अब का माहौल देखिए. जैसे ही 2 देशों के बीच कोई टैंशन होती है तो एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मीम्स की बाढ़ आ जाती है. कोई दुश्मन देश का मजाक उड़ा रहा होता है, कोई युद्ध को जोक्स में बदल रहा होता है और कोई उस में छिछले कमैंट कर रहा होता है. यह ह्यूमर नहीं, बल्कि छिछोरापन है, क्योंकि इस से सैंस डैवलप नहीं होता बल्कि युद्ध जैसी गंभीर स्थिति की हत्या होती है. ऐसा लगता है जैसे जंग नहीं, बल्कि कोई एंटरटेनमैंट चल रहा हो.

हर चीज को मजाक में लेना यह ट्रैंड क्यों आया?

युवाओं के पास हर मुद्दे का जवाब आज मीम के तौर पर होता है. राजनीति हो, महंगाई हो, कोई सैलिब्रिटी का विवाद हो या फिर 2 देशों के बीच तनाव. हर बात को एक मीम में बदल देना जैसे अब हमारी आदत बन गई है, जैसे हमारे पास शब्दों की कमी होने लगी हो. जैसे ही कोई बड़ा मुद्दा ट्रैंड करता है, लोग सब से पहले ‘फनी एंगल’ ढूंढ़ने लगते हैं. उन्हें लगता है कि अगर मजेदार मीम नहीं बनाया तो आप ट्रैंड से पीछे हैं और ट्रैंड फौलो कर आप ‘कूल’ कहलाते हैं. लेकिन इस ‘कूल’ बनने की चाह में हम इनसैंसिटिव बन गए हैं. क्या हर बात मजाक हो सकती है. सोनम रघुवंशी मामले में भी यूथ सोशल मीडिया पर पिल पड़ा मीम बनाने और शेयर करने में. किसी ने इस का सोशल इंपैक्ट पर सोचा नहीं. यह नहीं सोचा कि पीड़ित परिवार पर इन मीम्स से क्या गुजर रही होगी.

जंग सिर्फ न्यूज नहीं होती, जिंदगियां दांव पर होती हैं

जब 2 देशों के बीच जंग होती है तो सिर्फ मिसाइलें नहीं चलतीं, घर उजड़ते हैं, फौजी शहीद होते हैं, बच्चे अनाथ होते हैं और आम लोगों की जिंदगी तबाह हो जाती है. देश की इकोनौमी को तो छोड़ ही दें, उस पर कौन ही सोचे. लेकिन शायद इन बातों का स्क्रीन के पीछे छिप कर मीम बनाने वालों को अंदाजा नहीं है.

 मजाक की एक सीमा होती है

मीम बनाना गलत नहीं है. ह्यूमर भी जरूरी है. लेकिन ह्यूमर कैसा हो, यह आप की सोच पर निर्भर करता है. दिक्कत यह है कि मीमर इसे डार्क ह्यूमर कहते हैं. मगर यह डार्क ह्यूमर कम बल्कि मन में भरी गंदगी उड़ेलना ज्यादा दिखाई पड़ता है. हर मुद्दा फनी नहीं होता. युद्ध में शहर के शहर उजड़ जाते हैं, सरकारी और निजी संपत्तियों का भारी नुकसान होता है.

युद्ध कोई कौमेडी शो नहीं है कि आप पौपकौर्न ले कर देखें और हंसे. जब हम जंग पर जोक्स बनाते हैं तो हम उन लोगों की तकलीफ का मजाक उड़ा रहे होते हैं जो असल में उस दर्द से गुजर रहे होते हैं, जैसे सरहद पर खड़े सिपाही जो हर पल जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं.

 मीम्स का जलवा और भारतीय युवा

भारत में मीम्स का क्रेज पिछले कुछ सालों में गजब बढ़ा है. इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक और व्हाट्सऐप पर ढेर सारे मीम पेज हैं, जो हर दिन नए व मजेदार कंटैंट लाते हैं. यहां कुछ पौपुलर मीम पेज की चर्चा की गई है जो आएदिन दुनियाभर में चल रही झड़पों को मीम और जोक की तरह पेश करते हैं:

पौलीटूंस: इंस्टाग्राम का यह पेज पौलिटिक्स, बोल्ड ओपिनियन और ग्लोबल इवैंट्स पर मीम्स बनाता है. भारत व पाकिस्तान तनाव के वक्त इस ने कई मीम्स डाले, जो पाकिस्तानी आर्मी और वहां की जनता के हालात मजेदार मजाकिया अंदाज में दिखाते थे.

द इंडियन मीम्स- यह पेज बौलीवुड न्यूज से ले कर लगभग सभी पहलुओं पर फोकस करता है और युद्ध जैसे सीरियस टौपिक को भी हलकेफुलके ढंग से पेश करता है. मिसाल के तौर पर, ईरान व इजराइल झगड़े के दौरान इस ने एक मीम डाला, जिस में लिखा था, ‘ईरान व इजराइल लड़ रहे हैं और हम यहां पैट्रोल की कीमत बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं.’

मीमनिस्ट- एक्स प्लेटफौर्म पर जब कमाल राशिद खान ने कहा कि इंडिया-पाक वार में अगर जरूरत पड़ी तो मैं भी जंग लड़ने जाऊंगा, तो मीमनिस्ट पेज ने एक मीम बनाया कि ‘अब कचरा भी खेलेगा.’ इस पर हजारों लोगों ने ठहाके लगाए.

घंटा- यह पेज अपने तीखे और बेबाक कंटैंट के लिए फेमस है. भारत व पाकिस्तान तनाव के दौरान इस ने ऐसे मीम्स बनाए जो दोनों देशों के न्यूज चैनलों की ओवर द टौप बातों का मजाक उड़ाते थे.

इस के अलावा ऐसे सैकड़ों मीम पेज हैं जो वाकर या किसी भी स्थिति में धड़ाधड़ मीम बनाना शुरू कर देते हैं, जैसे सर्कास्टिक अस, बींग ह्यूमर, इंडियन ट्विटर आदि. इन सभी के लाखों में फौलोअर्स हैं औऱ ये देशविदेश, पौलिटिक्स, बौलीवुड आदि पर मीम बनाते करते हैं.

युवा पीढ़ी को जिम्मेदारी समझनी होगी

आज के युवा तेज हैं, स्मार्ट हैं, टैक्नोलौजी में आगे हैं. लेकिन अगर यही पीढ़ी हर गंभीर बात को हलके में लेने लगे, तो आने वाले कल में कोई हमें गंभीरता से नहीं लेगा.

देश के लिए सोचने का मतलब सिर्फ झंडा लहराना या जय हिंद कहना नहीं होता. कभीकभी चुप रह कर, सोचसमझ कर रिऐक्ट करना भी देशभक्ति होती है. हर मुद्दे को ट्रैंड में लाने के बजाय कभीकभी उस के पीछे की सच्चाई को समझना भी जरूरी होता है.

भारत व पाकिस्तान का तनाव हो या ईरान व इजरायल का झगड़ा, मीम ने इन सभी देशों के बीच की झड़प को जोक का जरिया बना दिया है. यह ट्रैंड एक तरफ तो क्रिएटिविटी दिखाता है लेकिन दूसरी तरफ इस से सवाल उठता है कि क्या इतने गंभीर मुद्दों को मजाक बनाना ठीक है?

War Memes

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...