writing skills : आज  का युग डिजिटल युग है और एआई की दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं. जब आप बोलें और वह लिखे या आप सिर्फ टौपिक बताएं और वह कुछ सैकंड्स में ही आप को लिख कर दे दे तब भला लिखना कौन चाहेगा? आप से बातचीत करे. आप के हर सवाल का जवाब दे, आप की मदद के लिए हर समय तैयार रहे तब ऐसे में भला लिखनेपढ़ने का क्या काम? अगर याद रहे क्लासरूम और परीक्षा हाल में आप के काम एआई नहीं आएगा क्योंकि यहां लिखने का काम आप को अपने हाथों से करना है और वह भी एक तय समय सीमा में, इसलिए अपनी उंगलियां हर समय स्क्रीन, कीबोर्ड पर चलाने की जगह पैन या पैंसिल को पकड़ कर कागज पर चलाएं ताकि लिखने की कला को भूलें नहीं.

आजकल मोबाइल फोन हमारे हाथों का स्थाई हिस्सा बन चुका है सुबह उठते ही अपना मोबाइल उठाना, मैसेजस चैक करना और उन का रिप्लाई करना मानों हमारी आदत का हिस्सा बन गया है. सुबह आंख खुलते ही और रात को सोने से पहले, चलतेफिरते, उठतेबैठते हर वक्त हमारी उंगलियां रील्स को स्क्रौल करने के लिए स्क्रीन पर लगातार चलती रहती हैं. परंतु सवाल यह है कि क्या ये उंगलियां केवल स्क्रौलिंग के लिए बनी हैं? क्या इन का काम सिर्फ तसवीरें, वीडियो और पोस्ट ऊपरनीचे करना ही रह गया है? यह सोचने का विषय है.

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ऐसे डालें लिखने की आदत अब तो बोलने मात्र से ही काम हो रहा है. आप बोलिए कंप्यूटर या मोबाइल पर टाइप होगा जिस के कारण बच्चे लिखने में आलस कर रहे हैं. परीक्षा में बड़े प्रश्नों के उत्तर छोटे ही लिख रहे हैं या फिर आधाअधूरे उत्तर लिख रहे हैं जिस का असर उन की क्षमता पर पड़ रहा है. परफौर्मैंस बिगड़ रही है और हमें शौर्ट में शब्द लिखने की आदत हो गई है जैसे

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ेद्दशशस्र द्वशह्म्ठ्ठद्बठ्ठद्दब को ेद्दद्व,ब ेड्ढद्गह्यह्लब को ेड्ढह्यह्ल,ब ेद्घड्ड1शह्म्द्बह्लद्गब को ेद्घड्ड1ब लिख रहे हैं. अब तो टाइपिंग के लिए उंगलियां भी नहीं चलानी और थैंक्स, नमस्ते या कोई चीज पसंद आने पर अपने कुछ कमैंट्स लिखने के बजाय इमोजीस का उपयोग कर रहे हैं.

इन सभी का असर हमारी लिखने की क्षमता पर पड़ रहा है. हर चीज में शौर्टकट अपनाने की आदत लिखने की आदत को खत्म कर रहा है साथ ही एक तय समय सीमा में अपना लिखने का काम पूरा नहीं कर पा रहे है क्योंकि लिखने की आदत छूट रही है. हमारी उंगलियां स्क्रीन चला रही हैं एवं कुछ भी लिखने के लिए ये कीबोर्ड का उपयोग कर रही हैं, पैनपैंसिल का उपयोग कम कर रही हैं.

लिखने की छूटी आदत को दोबारा डालने के लिए छोटे लक्ष्य जैसे 1 पैराग्राफ या 5 मिनट लेखन से शुरुआत करें. रात को डायरी लिख सकते हैं. रोजाना का एक निश्चित समय तय करें, परफैक्शन की चिंता किए बिना जो मन में आए लिखें और लिखने के लिए पैनपैंसिल और कागज का इस्तेमाल करें क्योंकि जब हम कंप्यूटर या मोबाइल पर कुछ लिखते हैं तब उन के औटो डिक्शनरी फीचर शब्दों के भंडार का उपयोग करने के लिए हमारे मस्तिष्क पर जोर नहीं डालते और वहीं औटो करैक्ट फीचर हमारी शब्दों को सही लिखने की कला को खराब कर रहा है.

फीचर यह गलत लिखे शब्द को सही कर देता है और हम ध्यान नहीं देते और जब उन्हें लिखने का समय आता है गलत लिखते हैं, जबकि जब हम पैन से कुछ भी लिखते हैं कौन सा शब्द कैसा लिखा रहा है, हाथ किस दिशा में घूम रहा है, साथ ही सही शब्द लिखना जानते हैं जिस से मात्राओं का ज्ञान बढ़ता है.

हाथ से लिखना मस्तिष्क के लिए बेहतर है और एकाग्रता, रचनात्मकता, क्रिएटिविटी को बढ़ाता है. हाथ से लिखते समय औटोकरैक्ट फीचर का इस्तेमाल नहीं होता इसलिए शब्दों को सहीं लिखना सीखते हैं, मात्राओं का ज्ञान बढ़ता है एवं डिक्शनरी नहीं होती तो शब्दों का भंडार भी बढ़ता है अपने दिमाग में स्टोर शब्दों में से सही शब्द का चयन करते हैं, इसलिए लिखने को अपनी आदत का हिस्सा बनाए ताकि इसे भूलें नहीं.

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