Youth lifestyle trends :  ‘‘तू कल औफिस की दीवाली पार्टी में क्या पहनने वाली है?’’

‘‘मैं ने अपने बर्थडे पर एक ड्रैस खरीदी है उसे ही पहनने की सोच रही हूं.’’

‘‘तो क्या उस ड्रैस को किसी ने देखा नहीं है? तूने बर्थडे पिक्स सोशल मीडिया पर शेयर नहीं की थीं?’’

‘‘यही सोच कर नहीं की थीं कि ड्रैस जगजाहिर हो जाएगी और फिर किसी मौके पर इसे पहनने से पहले मु  झे सोचना पड़ेगा.’’

‘‘वाह यार तू तो बड़ी होशियार निकली.’’

‘‘क्या करें यार सोचना पड़ता है. आजकल सोशल मीडिया का जमाना है और अकसर पार्टियों में जाना भी पड़ता है और हर बार नई ड्रैस तो नहीं खरीद सकते न.’’

‘‘हां सही है, मेरे साथ तो यही प्रौब्लम है कि अब मैं क्या पहनूं क्योंकि मेरी तो नौकरी भी अभी ही लगी है और पार्टी के लायक कोई नई ड्रैस भी नहीं है. जब से पार्टी का ऐनाउंस हुआ है मैं तो टैंशन में ही आ गई हूं कि क्या पहनूं और क्या ऐक्सैसरीज कैरी करूं.’’

यह वार्त्तालाप स्वस्ति और वर्तिका का है

जो एक मीडिया डिपार्टमैंट में काम करती हैं. आज ही औफिस की दीवाली पार्टी का एक महंगे होटल में किया जाना तय हुआ है. चूंकि औफिस की पार्टी है तो जाना भी जरूरी हो जाता है. दोनों ही अपने घर से दूर दिल्ली में अकेली एक पीजी में रहती हैं.

आजकल बड़ेबड़े होटलों में पार्टियों का आयोजन किया जाना बहुत आम बात है जिन में महंगे कपड़े, ड्रिंक्स और डांस पार्टियां होती हैं. न्यू ईयर, दीवाली, दशहरा, क्रिसमस, होली जैसे विशेष अवसरों के साथसाथ ये पार्टियां संस्थान की ऐनिवर्सरी या फिर बर्थडे आदि पर भी की जाती हैं. अकसर इन पार्टियों को कभी एक ही व्यक्ति द्वारा या फिर युवाओं के गु्रप द्वारा कंट्रीब्यूशन कर के किया जाता है.

यों तो पार्टियां अटैंड करना बहुत साधारण सी बात है, अकसर इन पार्टियों में जाना युवा पसंद भी करते हैं यही नहीं कई बार तो इन्हें अटैंड करना उन का सपना भी होता है. लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के लिए ये पार्टियां अटैंड करना बहुत बड़ी समस्या हो जाती है क्योंकि लड़कों के आउटफिट और ऐक्सैसरीज में जहां बहुत सीमित औप्शंस होते हैं वहीं लड़कियों के आउटफिट्स और उन की मैचिंग ऐक्सैसरीज में विविधता की भरमार होती है.

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एक मल्टीनैशनल कंपनी में सौफ्टवेयर इंजीनियर अश्लेषा कहती है, ‘‘पार्टी में जाना इज नौट ए प्रौब्लम बट वहां क्या पहन कर जाना है दिस इज द वैरी बिग प्रौब्लम. पार्टी के लिए ड्रैस मैचिंग, फुटवियर और ऐक्सैसरीज जुटाना बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि पहले ही अपनी सैलरी में खर्च चलाना बहुत मुश्किल होता है. ऊपर से इस तरह के ऐक्स्ट्रा खर्चे कैसे मैनेज करें सम  झ नहीं आता.’’

कुछ इसी तरह का अपना अनुभव आस्था ने शेयर किया, ‘‘मैं जब पढ़ाई कर रही थी तो इस तरह की पार्टियां मु  झे बहुत आकर्षित करती थीं. एक कंपनी में ऐवरेज पैकेज पर नौकरी लगने के बाद जब मैं ने 4-5 इस तरह की पार्टियां अटैंड की तो बहुत मजा आया पर मु  झे शौक तब लगा जब इन पार्टियों के चक्कर में महीने के अंत में मेरे पास अपने खर्चे के पैसे भी नहीं बचे और मु  झे अपने दोस्त से उधार लेने पड़े. उस समय मु  झे लगा कि ये पार्टियां तो मु  झे सड़क पर ही ला देंगी क्योंकि हर पार्टी के लिए आप को फैशनेबल ड्रैस, ब्रैंडेड पर्स, ज्वैलरी और फुटवियर चाहिए होते हैं, भले ही आप ये सब सरोजनी मार्केट से डुप्लीकेट खरीदो पर पैसे तो खर्च होते ही हैं और एक ड्रैस को आप दोबारा पहन नहीं सकते क्योंकि पार्टियों की पिक्स को सोशल मीडिया पर शेयर करना न केवल क्रेज बल्कि खुद को मौडर्न और स्टाइलिश दिखाने का एक तरीका भी है यों भी शुरूशुरू में तो ये पार्टियां काफी लुभावनी लगती हैं पर धीरेधीरे इन सब में बोरियत होने लगती है.’’

निस्संदेह इस तरह की पार्टियों में जाना बेहद खर्चीला होता है परंतु हर बार इन में जाना टाला भी नहीं जा सकता क्योंकि कई बार आप के लिए अपने वर्क रिलेशन बनाने के लिए इन्हें अटैंड करना जरूरी भी होता है.

ऐक्सचेंज है बेहतर औप्शन

हर बार नई ड्रैस, फुटवियर और तमाम ऐक्सैसरीज खरीदना किसी के लिए भी आसान नहीं होता. ऐसे में अपनी किसी सहेली से ऐक्सचेंज का औप्शन खुला रखें. इस बारे में सौफ्टवेयर इंजीनियर हर्षा कहती है, ‘‘मैं और मेरी रूममेट हमेशा ड्रैसेज ऐक्सचेंज करती रहती हैं. इस से हम दोनों का ही कम खर्चे में काम चल जाता है, बस खरीदते समय रंग और डिजाइन का ध्यान रखती हैं ताकि वे एकजैसे न हों.’’

मिक्स ऐंड मैच है कारगर

हमेशा नई ड्रैस खरीदने की अपेक्षा ड्रैसेज के साथ मिक्स ऐंड मैच की टैक्नीक अपनाएं. मसलन, टौप और जींस के साथ श्रग या कलमकारी, इकत जैसे ट्रैडिशनल प्रिंट की जैकेट ट्राई करें, लौंग कुरते को वन पीस की तरह कैरी करें. इस से आप कम खर्चे में भी बेहतरीन पार्टी आउटफिट तैयार कर पाएंगी.

मिक्स ऐंड मैच के बारे में अनीशा अपना अनुभव शेयर करती है, ‘‘मैं अपनी मम्मी और बहन की ड्रैसेज और ऐक्सैसरीज को ले आती हूं और उन्हें अपनी ड्रैसेज के साथ पेयर कर के पार्टियों में कैरी करती हूं. इस से मु  झे हर बार नया आउटफिट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती.’’

सावधानी से करें परचेजिंग

अकसर युवा जब मौल या बाजार जाते हैं तो जो अच्छा लगा बिना सोचेविचारे   झट से खरीद लेते हैं. फिर बाद में जब किसी पार्टी में जाना होता है तब उन्हें लगता है कि काश पार्टी में जाने के लायक ही ड्रैस खरीद लेते. यदि आप को अकसर पार्टियों में जाना पड़ता है तो ड्रैस, फुटवियर आदि खरीदते समय सदैव विचार कर लें कि इन्हें कब, कहां और कैसे कैरी करेंगे.

हमेशा सोचविचार कर शौपिंग करने वाली अदिरा कहती है, ‘‘ब्लैक, ग्रे और व्हाइट पर्स और फुटवियर मेरी हमेशा फर्स्ट चौइस रहती है क्योंकि ये सभी कलर्स के आउटफिट के साथ पेयर हो जाते हैं.’’

जाना भी अवौइड करें

नताशा जैसे ही अपने बौयफ्रैंड अमन के दोस्त की बर्थडे पार्टी से लौटी तो कमरे में प्रवेश करते ही बड़बड़ाने लगी, ‘‘इस सड़ी सी पार्टी के लिए मैं ने इतना खर्चा कर दिया और रत्तीभर भी मजा नहीं आया.’’

यदि आप भी किसी पार्टी में जाने के बाद इस तरह से पछताती हैं तो आप के लिए सलाह है कि प्रत्येक पार्टी में जाना जरूरी नहीं है. आप उसी पार्टी में जाएं जहां जाना अति आवश्यक हो, जहां से वापस आने के बाद आप को पछताना न पड़े. इस से आप अनावश्यक तनाव से तो बचेंगे ही साथ ही आप का बजट भी नहीं बिगड़ेगा.

पारदर्शिता है जरूरी

वास्तव अपने चार फ्रैंड्स के साथ न्यू ईयर पार्टी मनाने गया दोनों तरफ से कैब का किराया भी उसी ने दिया. जब एक महीने के बाद उस के फ्रैंड्स ने कैब के किराए के बारे में बात नहीं की तो उस ने घुमाफिरा कर कैब के पैसे देने के बारे में बात की परंतु बारबार कहने के बाद भी किसी ने उस की बात पर ध्यान नहीं दिया. इस समस्या से बचने के लिए हमेशा पार्टी में जाने से पहले पार्टी में होने वाले सभी खर्चों को कैलकुलेट कर के शेयर करने के लिए स्पष्ट बात करें ताकि आप का बजट बिगड़ने से बचा रहे.

रैंटेड आउटफिट्स भी हैं औप्शन

आजकल रैंटेड आउटफिट्स भी बहुत अच्छे औप्शन हैं. मार्केट में इस तरह के बहुत सारे आउटलेट हैं जहां पर मेल और फीमेल दोनों के लिए बहुत अच्छे औप्शंस मिल जाते हैं. क्व1000 से ले कर क्व3000 तक के रैंट में बहुत अच्छी ड्रैसेज मिल जाती हैं. इन आउटफिट्स की सब से बड़ी विशेषता यह होती है कि इन के साथ मैचिंग ऐक्सैसरीज भी मिल जाती हैं. इस से आप अलगअलग पार्टियों में भांतिभांति की ड्रैसेज पहन कर अपना जलवा तो बिखेर ही पाएंगे, साथ ही आप का बजट भी नहीं बिगड़ेगा, जिस से बिना किसी चिंता के पार्टियों में जा कर ऐंजौय भी कर पाएंगे. -प्रतिभा अग्निहोत्री द्य

क्या वाईफाई रात में औफ करना चाहिए

आजकल सोशल मीडिया पर डिजिटल डीटौक्स से ले कर वाईफाई रात में औफ करने को ले कर बहुत ज्ञान परोसा जा रहा है. लेकिन ऐसा करना कितना सही है यह हम आप को बताते हैं. जहां तक डिजिटल डीटौक्स की बात है ऐसा करना सही है क्योंकि आजकल जरूरत के लिए कम और रील्स देखने के लिए स्मार्टफोन का इस्तेमाल ज्यादा होता है. जीवन सुधारने की बात तो यहां मिलने से रही उलटा आंखें अलग खराब हो जाती हैं. बात करें वाईफाई रात में औफ कर के सोने की, तो इस पर ऐक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि यदि घर के कुछ गैजेट्स को हर समय नैट की नीड है तो वाईफाई औफ करना उन के अपडेट होने में बाधा बन सकता है. यदि ऐसा नहीं है तो औफ कर के सोना आप की स्लीप क्वालिटी को इंप्रूव कर सकता है क्योंकि इलैक्ट्रौनिक सिगनल्स स्लीप एनवायरमैंट को दूषित करते हैं. बेहतर नींद के लिए रात को सोने से पहले रीडिंग करने की सलाह दी जाती है.

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