डा. वीणा विज ‘उदित’
Drama Story: ‘‘मामा हम लैंड कर गए हैं.’’
‘‘ओके मैं एअरपोर्ट पर ही हूं,’’ कह कर उस ने फोन बंद कर दिया और लगी इंतजार करने आउटर सर्किल पर. 42 की उम्र में गोरीचिट्ठी धरा 30 वर्ष की युवती लगती थी. जींस और टौप पहने छरहरी काया व तिरछी मांग निकले स्मोकी बाल जो कंधों से थोड़ा नीचे तक खुली लटों में बिखरे रहते थे, उस के गौर वर्ण और गुलाबी चेहरे को और खूबसूरत निखार देते थे. हर वक्त मुसकराता चेहरा जिस की आभा उस की आंखों की चमक बढ़ा देती थी जो उस के सौंदर्य को दोगुना कर देते थे. कानों में 1-1 मोती का स्टड व एक डायमंड की रिंग. पास से गुजरता आदमी उसे पलट कर फिर देखता था ऐसा उस के साथ प्राय: घटता रहता था. वह स्वभाववश अपने चेहरे पर सदा एक मीठी मुसकान ओढ़े रहती थी.
तभी देखती है कि सामने से बहुत स्मार्ट उस की बिटिया मान्या ग्रे पैंटकोट सूट में आ रही है, साथ में मिनी फ्रौक में छोटे कद की ब्लैक ब्यूटी भी आ रही है. मान्या की हाइट अपनी मां जितनी 5 फुट 4 इंच थी और वह भी चेहरे पर वही चिर स्मित मुसकान ओढ़े थी.
‘‘मामा यह मार्था है, जिस के बारे में मैं आप को बता रही थी फोन में.’’
‘‘हैलो मार्था वैलकम.’’
‘‘हैलो आंटी यू लुक सो यंग.’’
तीनों बातें करती हुई ट्रौली ले कर पार्किंग लौट में पहुंच गईं और कार में बैठ गईं.
घंटेभर में वे घर पहुंच गई थीं. मार्था बात करने में चुलबुली व अपनत्व लिए हुए थी. वह मान्या के साथ सैन फ्रांसिसको घूमने आ गई थी. उन की लास एंजिल्स में औफिस मीटिंग थी. वह फिनिक्स से वहां आई थी. धरा को यह संतोष था कि उस की बेटी उस के साथ प्रसन्न है. नहीं तो वह हंसना ही भूल गई थी, जब से उस के पापा उन को छोड़ सिधार गए थे.
2-3 दिनों तक मान्या और मार्था घूमती रहीं. मान्या उसे वाइनरिज (अंगूर के बगान) दिखाने ले गई थी. आर्ट पैलेस, म्यूजियम, गोल्डन गेट ब्रिज, हाफ मून बीच ये सब दिखा कर वह उसे बाहर खाना भी खिलाती रही. फिर भी धरा ने टोटिया (मैदे की रोटी) में पनीर भुर्जी डाल कर रोल बना कर उसे खिलाए जिस की वह कायल हो गई थी. राजमा चावल भी उसे बहुत पसंद
आए थे. हम भारतीयों की आदत है कि हम विदेशियों को अपना खाना अवश्य खिलाते हैं. शायद भारतीय खाने की प्रशंसा पाने के लिए और अपना ईगो शांत करते हैं कि हम भी किसी से कम नहीं हैं.
खैर, वह वापस जा रही थी. एसएफओ एअरपोर्ट से प्लेजेंटन सबर्ब में जाने के लिए समु्रद्र के ऊपर बना ब्रिज आधे घंटे की ड्राइव है. मार्था के लिए यह अनुभव नया था. वह आते वक्त और जाते हुए भी समुद्र के ऊपर से सफर करती अत्यंत उत्साहित थी. वापस जाते हुए धन्यवाद कर के वह विनम्रता और शालीनता से उन मांबेटी के हाथ चूम कर गई थी और फिनिक्स आने के लिए आमंत्रित कर गई थी. जहां सूखे सपाट पहाड़ थे, जबकि सैन फ्रांसिस्को प्राकृतिक संपदा से भरा पड़ा था.
मार्था के जाने के पश्चात दोनों के बीच चुप्पी का साम्राज्य पुन: छा गया था. घर पहुंच कर दोनों अपनेअपने बैडरूम में चली गई थीं. सामने खयालों की गहरी रात थी. धरा पुन: अतीत की स्मृतियों में विचरने लग गई थी…
यश के साथ उस का जीवन फुल स्पीड में दौड़ रहा था. मान्या उन के जीवन की कुदरत प्रदत अनुपम सौगात थी. पढ़ाई मन लगा कर करती थी और वह गर्व से जी रहे थे कि तभी एक गाज गिरी. यश की कार का ट्रैश (कचरे) के भारी ट्रक से ऐक्सीडैंट हो गया और वह वहीं स्पौट पर उन को रोताबिलखता छोड़ कर चला गया.
मान्या पापा की जुदाई सह नहीं पाई थी, पूरी शोक में चली गई थी. हाल तो धरा का भी यही था लेकिन मान्या के कारण उस ने धीरज का दामन थाम स्वयं को और उस को भी संभाला. उस के जीवन का अंधेरा कभी कुछ कहता लगता तो कभी खामोश हो जाता था. तब वह छाती के द्वार खटखटाती थी. दिल की दीवारों को नाखूनों से खरोंचती थी और यादें दबे पांव आ कर बदन पर रेंगती थीं. तब दिन बरस बन जाते थे, बिताए नहीं बीतते थे. यश की स्मृतियों में भी धरा को यश की गंध आती थी. जैसे नीबू काटने पर मुंह में खटास आ जाती है. जब कभी उसे जोर से रोना आता तो दोनों हथेलियों से अपने होंठों को भींच लेती थी कि कहीं मान्या न सुन ले.
मान्या ने इंटरनैशनल बिजनैस में ग्रैजुएशन की तो उस को अच्छी जौब मिल
गई. उस का ध्यान बंट गया और धरा ने एक स्टोर मैनेजर की पोस्ट खाली होने पर वहां अर्जी दी. उस की स्मार्टनैस पर उसे भी नौकरी मिल गई. अब मांबेटी को एकदूसरे से आंखें चुरा कर रोने का समय कम ही मिलता था. जिंदगी पुन: जी उठी थी. ‘ढाक के वही तीन पात’ धरा का सोशल सर्कल अच्छा था. उस की सखीसहेलियां कभीकभार आ जातीं लेकिन फोन पर संबंध अवश्य बनाए रखती थीं. उसे जिंदादिली से जीना सिखाती थीं. फिर भी एकांत में दबे पांव एक
क्षण आता था स्मृति का क्षण. तब जब खयालों की रात बहुत गहरी होती थी और वह टूट कर बिखर जाती थी.
यों ही वक्त सरक रहा था कि एक दिन यश के नाम से एक चिट्ठी आई जिस पर यश के पुराने घनिष्ठ मित्र रघुवंश का नाम लिखा था. यह चिट्ठी अमेरिका से ही थी, जबकि अब केवल भारत से भी कभीकभार ही किसी की चिट्ठी आती. रघुवंश ने यश को सूचित किया था कि उस की पत्नी जेनिफर (जो अमेरिकन थी) का निधन हो गया है. वह अपने दोस्त की सहानुभूति की आस में था. लेकिन धरा ने धैर्यपूर्वक उत्तर दिया कि उन के दोस्त यश भी नहीं रहे हैं.
धरा का पत्र मिलते ही रघुवंश ने अटलांटा से फ्लाइट पकड़ी और सैन फ्रांसिस्को आ गए. दोनों दोस्तों के परिवार टूट गए थे वह भी एक ही समय. रघुवंश के आने पर यश और धरा की शादी का अलबम निकाल कर वे इकट्ठे बैठ कर देख रहे थे. यश है कि नहीं है? विश्वास करना दुरूह हो गया था. 2 दिन होटल में रुक कर रघुवंश वापस चले गए. लेकिन उन की उपस्थिति ने बहुत धैर्य बंधाया था धरा और मान्या को. कुछ पल ऐसे भी होते हैं जिन का भविष्य से कोई लेनादेना नहीं होता है फिर भी सांसों में बस जाते हैं, प्राणों में धड़कते हैं. इन सब से गुजरते हुए फिर एक समय आता है जब वह इंसान आगे बढ़ कर कुछ सोच पाता है. धरा यही सब सोचते हुए नींद के आगोश में उतर गई.
अगले दिन रघुवंश का फोन आया तो धरा ने सोचा पहुंचने का फोन आया
होगा लेकिन फिर हर दिन उस का हालचाल, मान्या के विषय में पूछने का फोन चलता रहा. उस की बेटी माला के विषय में भी बातचीत होने लग गई थी. अचानक क्रिसमस के बाद रघुवंश माला को ले कर पुन: सैन फ्रांसिस्को आ गए थे. मान्या भी घर पर थी. माला का फाइनल ईयर था ग्रैजुएशन का. हमउम्र लड़कियों का आपसी तालमेल बैठ गया था.
माला अपनी मां जैसी गोरी अंगरेज थी लेकिन उस के बाल काले थे पापा के जैसी और आंखें भी मोटीमोटी पापा जैसे आकर्षक थीं. बेहद खूबसूरत. धरा मान्या की ओर से निश्चिंत हो गई थी. मान्या रघु अंकल में अपने पापा की झलक देखती थी. दोनों दोस्तों की आदतें एकजैसी थीं, जिन्हें वह नोट करती थी. उसे अपना घर भरा हुआ अच्छा लग रहा था. 4 दिनों में ही दोनों के चेहरे खिल से गए थे. माला को
भी धरा आंटी डीसैंट लगीं. वह उसे बहुत भा
गई थीं क्योंकि वे कोई भी बात उस पर थोपती नहीं थीं.
मान्या अपने पापा को बहुत मिस करती थी. उस के नए मैनेजर साहिल का सामीप्य औफिस में उसे एक सहारे के रूप में लगने लग गया था. दोनों एकदूसरे को पसंद करने लगे थे और अब तो डेट्स पर भी जाने लगे थे, जबकि वे 3 महीने के लिए वहां ट्रेनिंग पर आए थे.
उधर मां को लगा कि वह दिल से जख्मी बेटी को मना नहीं कर पाएगी, तो वह चुप्पी साध गई थी. कई बार यादों से उभरे जख्मों के जवाब में एक रिक्तता होती है जिसे भरना सुनने वाले के जिम्मे होता है. उस की सोच के अनुसार साहिल बहुत ही आकर्षक व्यक्तित्व का 6 फुट लंबा, हलकी मूंछों वाला युवक था जो मान्या को बहुत पसंद करता था.
मान्या की पीली पड़ी चेहरे की रंगत अब अपना रूप बदल रही थी. वह गुलाबी आभा में तबदील हो रही थी. मां को बेटी के चेहरे पर हलकी मुसकान थिरकती देख कर सुकून मिलता था. उस से रहा नहीं गया. धरा ने रघु को फोन पर सारा राज बता दिया.
अगले ही दिन रघु फ्लाइट ले कर उस के पास आ पहुंचा. इस बार वह होटल न जा कर घर पर ही आ गया था. सां?ा ढले मान्या जब औफिस से घर आई तो रघु अंकल को सामने पा कर खिल गई.
उस के चेहरे की गुलाबी रंगत देख कर रघु ने पूछ ही लिया, ‘‘जिंदगी में कोई आ गया है क्या मान्या, तुम्हारा चेहरा भेद खोल रहा है?’’
‘‘जी हां अंकल, मेरा बौयफ्रैंड है. मैं डेट कर रही हूं आजकल उस के साथ.’’
अमेरिका में बच्चे झूठ बोल कर कोई बात छिपाते नहीं हैं. वे खुली
किताब की तरह होते हैं. उस के विषय में
1-2 बातें पूछ कर रघु शांत हो गए. रघु के होने से धरा को चैन मिल गया था. मान्या की उम्र की आहटें उस की गति बता रही थीं. रघु ने एक बड़े रैस्टोरैंट में अगली रात डिनर के लिए मान्या को कहा कि वह साहिल को भी इनवाइट कर ले. उस से मिल कर उन्हें हार्दिक प्रसन्नता होगी, धरा भी साथ थी. बहुत ही सरल स्वभाव का लगा था साहिल बच्चों सा निश्छल.
रघु और धरा दोनों को वह पसंद आ गया था. रघु के पसंद करने से तसल्ली हो गई थी. रघु निश्चित वापस चले गए थे. रघु का होना और साहिल से बात करना धरा को मानो सही सलाह मिल गई थी.
माला की मई में ग्रैजुएशन पूरी हो ही थी. रघु बहुत उत्साहित थे. वहीं हाल के बाहर माला
ने पापा को बौब से मिलाया. वह बौब से डेटिंग कर रही थी. बौब माला का सीनियर था, उसी यूनिवर्सिटी से पढ़ कर गया
था. अब नार्थ कैरोलिना में टैक्निकल कंपनी में कार्यरत था. दोनों को माला की ग्रैजुएशन की प्रतीक्षा थी.
उस ने अपने पापा से कहा, ‘‘पापा, अब मैं वयस्क हो गई हूं और शादी के लिए तैयार हूं. बौब को इसी दिन का इंतजार था. आप की सहमति हो तो हमारी शादी करा दीजिए.’’
रघु ने बौब के अमेरिकन मातापिता को बुलाया और चर्च से तारीख ले ली फिर सब को निमंत्रण भेज कर खबर कर दी. नियत समय पर सब रिश्तेदार और दोस्त पहुंच गए. मान्या और साहिल भी, मस्ती के रंग में थे. दूधिया सफेद डिजाइनर गाउन में माला कोई स्वर्ग से उतरी अप्सरा लग रही थी. माला और बौब शादी के बंधन में बंध गए. हवाओं में शादी की सुगंध छाई हुई थी.
पांचसितारा होटल के हौल में सभी जोड़े नृत्य करते माला और बौब के आसपास थिरक रहे थे. मान्या ने पेस्टल पर्पल शिफौन के गाउन के साथ कानों में डायमंड के लंबे लटकन व गले में पतली सोने की चेन डाली हुई थी. उस के गोल्डन बाल टेढ़ी मांग निकाल कर दोनों कंधों पर लहरा रहे थे. काले सूट में स्मार्ट साहिल की बांह में हाथ डाले हुए वह सब से अलग लग रही थी.
धरा ने सिंपल जरी की प्लेन साड़ी के साथ गले में लंबी डबल सोने की चेन पहनी थी. कानों में डायमंड के सालिटेयर थे, जिन से उस का चेहरा दमक उठा था. रघु उस के रूप को निहारते ही रह गया. उन का जी चाहा कि वे धरा को प्रोपोज कर दें लेकिन इस के लिए उन्हें बेटी से आज्ञा लेनी थी. रघु ने जैसे ही माला से बात की, वह अपनी मां की अनुपस्थिति में पापा का किसी और का हो जाना सह नहीं पा रही थी. अब उसे पापा पर अपना एकछत्र अधिकार लगने लगा था. नई मां को घर में स्वीकार करना उस के लिए असहनीय था लेकिन अपनी अनुपस्थिति में पापा का एकाकीपन सोच कर उस ने काफी नानुकर के बाद हामी भर दी.
वहीं मान्या ने यह सुनते ही उत्साहित हो मां को दोनों बांहों में भर लिया और बोली, ‘‘मु?ो रघु अंकल पापा जैसे लगते हैं ममा. मैं दोबारा से पापा पाना चाहती हूं. मु?ो मालूम है वे आप को बहुत प्यार से रखेंगे. हां मां.’’
उधर धरा सोच रही थी. यादें जो अतीत से जुड़ी एक धरातल पर घटी होती हैं, जिन की प्रविष्टि पर आप का पूर्ण स्वायत्त अधिकार होता है, आप उन में आकंठ डूब सकते हैं फिर चाहे आप रोएं या हंसे, संतुष्ट हों या दर्द में डूब जाएं. यदि आप कोई ठोस कदम उठा लेते हैं तो खुशियों की क्या गारंटी? कहीं जमानेभर का दर्द आप की ?ाली में न डल जाए. लेकिन रघु का रवैया और अपने होने का एहसास उसे हरदम देते रहना. धरा को सकारात्मक रुख अपनाने की ओर प्रेरित कर रहा था. रघु ने जैसे ही सब के सम्मुख उसे प्रोपोज किया तो वह षोडिशी सी लजा गई.
लोकल आर्य समाज में धरा की बहन गार्गी, जिसे फ्लोरिडा से बुलाया
गया था व सारे परिवार के समक्ष रघु ने धरा की मांग भरी और मंगलसूत्र डाल दिया. धरा सहम सी गई. न मालूम उस के भीतर कौन से अंधड़ चल रहे थे जो वह बाहर शांत व संयत थी, पर शायद भीतर के कोलाहल को समेट नहीं पा रही थी.
इधर मान्या संतुष्ट हो गई थी कि मां को सुरक्षित हाथों में सौंप कर अब वह सुहागन बन कर घर से विदायगी कर सकती है. वे सब एक नए रूप में घर वापस जा रहे थे. धरा ने अपनी प्यारी सखीसहेलियों को फोन पर खुशखबरी दी और अपनी फ्लाइट भी बताई. वे लोग इकट्ठी हो कर एअरपोर्ट पर फूल और बुके लिए उन्हें लेने आ पहुंची थीं.
अगले दिन वही सूना घर गोल्डन और जामुनी फूलों और गुब्बारों से दुलहन जैसा सजा हुआ था दीवारें मुसकरा रही थीं और आंगन नाच रहा था. और नाच रहे थे सब. मान्या और साहिल भी इतनी जोर के म्यूजिक में हर्षविह्वल हो सब के बीच थिरक रहे थे. इस के साथ ही मान्या की शादी की तारीख अगले इतवार की पक्की कर दी गई. इन की शादी पंजाबी रीतिरिवाज से होनी थी. साहिल के मातापिता और छोटा भाई भी तीसरे दिन पहुंच गए थे. इंडिया से मान्या की शादी का डिजाइनर लहंगाचोली वगैरह ले कर. मान्या प्रफुल्लित थी कि उस की शादी की वेदी पर मम्मी सुहागन बन, नए डैडी के साथ बैठ कर कन्यादान करेंगी.
सारे रीतिरिवाजों के साथ मान्या का विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ. मान्या की नवब्याहता मां नए पापा के साथ खूब जंच रही थीं और मान्या मन ही मन मां को सुहागन देख कर पुन: जी उठी थी. उस का जोश परम पर था. अतीत का कुहरा छंट गया था और अब समक्ष था निरभ्र आसमान, जहां रात्रि में सितारों की ओढ़नी टंकी थी.
सोमवार को विदाई हुई. मान्या अपने ससुराल परिवार के साथ मां की ओर से बेफिक्र हो लास एंजिल्स चली गई.
धरा ने सारा बिखरा घर कार्ड बोर्ड के डब्बों में समेटा और बाकी चीजें अपनी सहेलियों को दे दीं क्योंकि रघु एक बड़ी कंपनी के सीइओ थे, उस का घर तो पहले से ही सैट था. वह बात और है कि न जाने ये डब्बे कब खुलेंगे या कभी खुलेंगे भी कि नहीं? सब के जाने के बाद अपने आंचल में ढेरों खुशियां समेटे अतीत की सुधियों को दरकिनार रख वह रघु के होने से निश्चिंत हो भविष्य में उड़ान भरने चली थी.
उधर साहिल के मम्मीपापा और छोटा भाई रोहन 1 महीना उन के साथ रह कर भारत लौट गए थे. मान्या हफ्ते में 3 दिन फ्लाइट ले कर अपने पुराने औफिस में सैन फ्रांसिस्को जाती थी. वह अपने ट्रांसफर के चक्कर में लगी थी. इस से साहिल कभीकभी खीज जाता था. उस का मेन औफिस लास एंजिल्स में ही था. वह 3 महीने की ट्रेनिंग के लिए उन की कंपनी में गया था जब मान्या से मुलाकात हो गई थी और वह मुलाकात ही आज उन्हें करीब ले आई थी. बाकी दिनों में मान्या वर्क फ्रौम होम यानी घर से ही काम कर रही थी.
एक दिन साहिल ने मान्या से कहा, ‘‘चलो, आज डिनर बाहर करने चलेंगे, मैं 8 बजे शाम को आ जाऊंगा तुम तैयार रहना.’’
मान्या घर से काम कर रही थी. उसे पता ही नहीं चला कब 8 बज गए. साहिल के पहुंचने तक वह तैयार नहीं हो पाई थी. साहिल ने आकर गुस्से में उस के हाथ से लैपटौप छीन लिया. वह कोई जरूरी मैसेज कर रही थी.
वह भी गुस्से में चिल्लाई, ‘‘यह क्या किया तुम ने साहिल? मैं काम कर रही थी. सब गड़बड़ कर दिया.’’
यह सुन कर साहिल ने गुस्से से लैपटौप जोर से पलंग पर फेंक दिया. इस पर मान्या अपने लैपटौप को उठा कर जोरजोर से रोने लग गई. इतना गुस्सैल है साहिल. उस के स्वभाव का यह गुण तो उसे मालूम ही नहीं था. उस ने डिनर के लिए रैडी क्या होना था? सारा माहौल ही भयावह और कुटिल बन गया. साहिल के ऐसे रूप की उस ने कल्पना भी नहीं की थी. वह बहुत डर गई थी. खड़ीखड़ी कांप रही थी. फिर बाथरूम में जा कर मुंहहाथ धोए और सौरी, सौरी बोल कर साहिल को प्यार करना चाहा तो उस ने उस के हाथों को झटक दिया. मरती क्या करती? वह चुपचाप बाहर जा कर बैठ गई. वह मनन कर रही थी कि अब क्या करे? क्या मां को फोन करे? नहीं, वह मां को बेचैन नहीं कर सकती. उसे स्वयं यह सबकुछ सहना होगा. उस ने स्वयं अपना जीवनसाथी चुना है.
वक्त के साथ धीरेधीरे जिंदगी पुन: ढर्रे पर चल पड़ी थी कि एक दिन साहिल ने अलमारी से अपनी एक कमीज निकाली, उस का एक बटन टूटा हुआ था. वह जोर से चिल्लाया, ‘‘तुम से एक बटन भी नहीं लगाया जाता मान्या?’’
इस पर मान्या ने कहा, ‘‘मैं ने देखा नहीं था. तुम ने कहा है तो अब लगा दूंगी.’’
तभी साहिल ने अलमारी में से उस का एक टौप हैंगर समेत उतारा और कैंची से उस के सारे बटन काट दिए. यह देख कर मान्या काम छोड़ कर भागी और उस का हाथ पकड़ा तो उस ने कैंची उस के हाथ पर दे मारी. मान्या का हाथ जख्मी हो गया. वह अनदेखा कर के औफिस चला गया लेकिन मान्या का दिल बुरी तरह जख्मी हो गया.
अपने जख्मों को दिल में छिपाए दोनों की पटरी फिर से बैठने लगी थी कि एक दिन सूप में नमक कुछ ज्यादा हो गया, जोकि थोड़ा पानी डाल कर ठीक हो सकता था लेकिन उस ने वह सूप का कप मान्या की प्लेट के खाने पर उड़ेल दिया. कुछ मान्या के कपड़ों पर भी गिरा. ढाक के वही तीन पात. वह जरा सी भी गलती होने पर कुछ बोलने का मौका ही नहीं देता था और अपना रिएक्शन कर देता था. मान्या को बहुत परेशानी होने लग गई थी. वह उस से डरने लगी थी.
एक इतवार को मान्या बहुत तन्मयता से ‘अलेक्स हेली’ का उपन्यास ‘रूट्स’
पढ़ रही थी. तभी साहिल ने कहा, ‘‘राघव और रिया की शादी की आज सालगिरह है. चलो, जल्दी से तैयार हो जाओ अभी चलना है. मैं फ्रेश हो कर आया.’’
उस ने आ कर देखा कि मान्या अभी भी लेटी हुई उपन्यास पढ़ने में तल्लीन है और उस ने अभी तक कपड़े भी नहीं निकाले थे. यह देख कर उस ने तो हद ही कर दी. उसे बहुत गुस्सा आया. उसे जब भी गुस्सा आता था तो वह आपे से बाहर हो जाता था. उस ने बाथरूम से लिक्विड सोप कंटेनर उठाया और लेटी हुई मान्या के ऊपर चढ़ कर बाएं हाथ से मान्या का मुंह पकड़ा और दाहिने हाथ से उस के मुंह के भीतर लिक्विड सोप भरने लगा. स्वयं उस की बांहों पर चढ़ कर बैठ गया था.
मान्या तड़प उठी. उस ने दोनों टांगों से उस को पीछे से धक्का दिया. उपन्यास उस के हाथ से छूट कर वहीं गिर गया. पास में पड़े फोन और टेबल से कार की चाबी ले कर वह मुंह से सोप थूकती दरवाजा खोल कर कमरे से बाहर भागी और कार ले कर मेन रोड पर आ गई. उसे कुछ सम?ा नहीं आ रहा था कि वह क्या करने जा रही है. वह बेध्यानी में मम्मी की एक पुरानी सहेली के घर चल पड़ी, जहां वह कभी यहां आने पर पापा के साथ गई थी. संगीता आंटी के घर पहुंच कर उस ने वाशरूम का इशारा किया फिर उन्हें अपनी शारीरिक प्रताड़ना के विषय में सबकुछ बताया. साथ ही ढेरों उलटियां करकर के सोप से मुंह और गला खाली किया.
संगीता और उस के पति राजेश बहुत घबरा गए. वे धरा से पूछे बिना कोई कदम नहीं उठाना चाहते थे. रात 10 बजे उन्होंने धरा को फोन लगाया तो वह तड़प उठी और खूब रोने लगी. रघु ने सारी बात पूछी. सब सुन कर उन दोनों के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई.
सुबह की पहली फ्लाइट ले कर वे लोग संगीता के घर लास एंजिल्स पहुंच गए. चूंकि मान्या ने लव मैरिज की थी, वह स्वयं को दोषी मान रही थी और भयभीत हुई बैठी थी. लेकिन मां का तो कलेजा फटा जा रहा था. कहां वे निश्चिंत थीं कि उन की बेटी खुश है. पर यहां तो उस पर हुए जुल्म की हद ही हो गई थी. रघु के कहने पर वे लोग मान्या को ले कर साहिल के पास गए. केस पुलिस में जा सकता था क्योंकि अमेरिका में शारीरिक प्रताड़ना देना बहुत बड़ा क्राइम है. लेकिन रघु ने साहिल के पापा से इंडिया में वीडियो कौल कर के बात की और उन्हें सारी बातों से अवगत कराया. साहिल को दोषी करार देते हुए तलाक का फैसला कर वे मान्या को ले कर आ गए.
धरा के तो हाथपैर फूल रहे थे. सबकुछ रघु ने संभाला हुआ था. घर आ कर धरा ने रघु से कहा, ‘‘तुम्हें अपने संग पा कर मैं पूर्णता का अनुभव कर पा रही हूं. तुम ही हमारे रक्षा कवच हो. हम आत्मविश्वास से भर कर यह फैसला ले पा रहे हैं तुम्हारे होने से, हां रघु, केवल तुम्हारे होने से,’’ इतना कह कर वे दोनों मांबेटी रघु की दोनों बाहों में समा कर उस की छाती से लग गईं. रघु ने भी प्रेम से भर कर उन को अपनी दोनों बांहों से भींच लिया.
Drama Story
