Family Drama : अवनि के 32वीं मंजिल के कैबिन में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की टिकटिक भी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी.
‘‘मैम, बोर्ड मीटिंग…’’ प्रिया की आवाज अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि अवनि ने हाथ के इशारे से उसे चुप करा दिया.
अवनि की आंखों के सामने 32 साल पुराना वह दृश्य घूम गया. अम्मां उसे अमरूद के पेड़ से नीचे उतारने के लिए हाथ में बेलन लिए खड़ी थीं. अवनि ने आज 500 करोड़ की डील फाइनल की थी पर उसे ऐसा लग रहा था जैसे उस की रूह उसी बेलन की मार खाने के लिए तरस रही है.
शाम को घर पहुंचते ही अवनि ने मेज पर वह पीला लिफाफा देखा. जैसे ही उस ने चाबी और नक्शा निकाला, समीर कमरे में दाखिल हुआ. उस का चेहरा गुस्से से तमतमाया हुआ था.
‘‘तो अब तुम औफिस की कौल भी उठाना बंद कर दोगी?’’ समीर अपनी फाइलें सोफे पर पटकते हुए चिल्लाया, ‘‘तुम्हें अंदाजा है कि तुम्हारी इस खोईखोई रहने वाली आदत की वजह से हमारा कितना नुकसान हो रहा है? हम एक पावर कपल हैं अवनि, कोई भावुक
कवि नहीं.’’
अवनि ने शांति से लिफाफा दिखाया, ‘‘समीर, किसी ने मु झे यह भेजा है. यह हमारे पुराने घर का नक्शा है… और यह चाबी.’’
समीरका उपहास भरा अट्टहास कमरे में गूंज उठा, ‘‘चाबी? उस मलबे की चाबी? अवनि, वहां अब ‘प्राइड प्लाजा मौल’ खड़ा है. वह जगह अब कंक्रीट का एक बड़ा सा डब्बा है. तुम क्या ढूंढ़ रही हो वहां? अपनी मर चुकी अम्मां का आशीर्वाद या वह धूलमिट्टी जिस से मु झे ऐलर्जी है?’’
‘‘समीर, जबान संभाल कर,’’ अवनि की आवाज में एक ऐसी धार थी जो समीर ने पहले कभी नहीं सुनी थी, ‘‘वह सिर्फ धूलमिट्टी नहीं थी, मेरी पहचान थी. तुम जैसे लोग जो रिश्तों को ‘इनवैस्टमैंट सम झते हैं, कभी नहीं सम झेंगे कि अम्मां का वह चौका मेरे लिए मंदिर क्यों था.’’ ‘‘पहचान? तुम्हारी पहचान यह 4 बीएचके पेंटहाउस और तुम्हारी सीईओ की कुरसी है. जाओ, जी लो उस मलबे में,’’ समीर ने गुस्से में हाथ में पकड़ा वाइन का गिलास दीवार पर दे मारा. कांच के टुकड़े बिखर गए बिलकुल अवनि के दिल की तरह.
उस रात अवनि सो नहीं सकी. उस ने आंखें मूंदीं तो उसे अम्मा का चेहरा दिखाई दिया. उसे याद आया वह दिन जब उस ने गांव छोड़ने का फैसला किया था.
अवनि पुरानी यादों में खो गई जब उस ने अम्मा से कहा था, ‘‘अम्मां, यहां क्या रखा है? इस धूल और गोबर की गंध में मैं अपनी जिंदगी बरबाद नहीं करना चाहती. मु झे शहर जाना है, मु झे बड़ा बनना है.’’
अम्मां ने तब बहुत ही शांत स्वर में जवाब दिया था, ‘‘बड़ी जरूर बनना लाडो, पर इतनी बड़ी मत हो जाना कि तु झे धरती छोटी लगने लगे. याद रखना, जिस पेड़ की जड़ें कंक्रीट में दब जाती हैं, वह फल तो दे सकता है पर छांव नहीं.’’
अवनि ने तुरंत चिढ़ कर कहा, ‘‘आप की ये दार्शनिक बातें मु झे नहीं रोक पाएंगी. मैं यह घर, यह आंगन… सब छोड़ कर जा रही हूं.’’
अम्मां ने दोबारा सम झाना चाहा ,‘‘तू छोड़ रही है पर यह आंगन तु झे नहीं छोड़ेगा. तू जहां जाएगी, यह धुंधलका तेरे साथ चलेगा.’’
आज अवनि को सम झ आया कि अम्मां की वह छांव क्या थी. उस ने उसी वक्त बैग उठाया. उसे समीर की चीखों और समाज के ‘सक्सैस पैरामीटर्स’ से दूर जाना था.
गांव पहुंचते ही अवनि का दम घुटने लगा. जहां उस की सहेलियों के घर थे,
वहां अब पार्किंग लौट था. वह मौल के पीछे के उस अंधेरे सर्विस एरिया में पहुंची नक्शे के अनुसार, एक छोटी सी लोहे की जाली के पीछे उस का अतीत छिपा था. जैसे ही उस ने चाबी घुमाई और दरवाजा खोला, उस की चीख निकल गई. अंदर का दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं था.
मौल के शोरशराबे और ऐस्कलेटर की गूंज के नीचे, एक छोटा सा कमरा था बिलकुल वैसा ही जैसा उस का पुराना घर था. राघव काका वहां लालटेन जला कर बैठे थे.
‘‘काका… यह सब?’’ अवनि के पैर लड़खड़ा रहे थे.
‘‘तेरी अम्मां ने बिल्डर के आगे हाथ जोड़े थे बेटी,’’ काका की आवाज कांप रही थी, ‘‘उन्होंने कहा था कि मेरी अवनि जब शहर की चकाचौंध से अंधियारी हो कर लौटेगी तो उसे रोशनी के लिए अपनी मिट्टी चाहिए होगी. उन्होंने मौल की जमीन के बदले यह एक कोना मांग लिया था.’’
अवनि उस फर्श पर गिर पड़ी. उस ने मिट्टी को छुआ. वही मिट्टी, जिसे उस ने ‘गोबर की गंध’ कह कर दुत्कारा था.
‘‘अम्मां, मु झे माफ कर दो,’’ अवनि का कं्रदन उस बंद कमरे की दीवारों से टकरा कर वापस आने लगा. यह एक सफल सीईओ का नहीं बल्कि एक हारी हुई बेटी का विलाप था. उस ने अपने महंगे सिल्क सूट की परवाह किए बिना उस चबूतरे को गले लगा लिया.
तभी समीर का फोन फिर बजा. अवनि ने उठाया, ‘‘अवनि, बहुत हो गया. वापस आओ वरना मैं तलाक के पेपर्स रैडी रखूंगा. मु झे एक नौर्मल बीवी चाहिए, कोई पागल औरत नहीं जो मलबे में जा कर रोती हो,’’ समीर की आवाज में अहंकार और आक्रामकता चरम पर थी.
अवनि खड़ी हुई. उस की आंखों में अब आंसू नहीं, एक नई चमक थी, ‘‘समीर, पेपर्स रैडी रखना क्योंकि जो अवनि तुम्हारे पास थी वह इस कंक्रीट के नीचे मर चुकी है और जो यहां से निकलेगी वह अब कभी किसी की गुलामी नहीं करेगी,’’ और उस ने इरिटेट हो कर फोन पटक कर तोड़ दिया.
अवनि ने उस रात उस कमरे की खिड़की से बाहर देखा. ऊपर मौल की आधुनिक लाइट्स जल रही थीं पर उस के कमरे में अम्मा की यादों का एक दिव्य प्रकाश था.
सुबह जब अवनि बाहर निकली तो उस ने मौल के मालिक जो अम्मां का पुराना परिचित था से मुलाकात की.
‘‘मु झे यह कोना नहीं चाहिए,’’ अवनि ने दृढ़ता से कहा. ‘‘मु झे यह पूरा मौल चाहिए. मैं इसे खरीदना चाहती हूं.’’
‘‘पर क्यों अवनि?’’ मालिक ने पूछा.
‘‘ताकि मैं इस विकास के भीतर उस बचपन को जगह दे सकूं जिसे हम सब भूल गए हैं. मैं यहां एक ऐसा सैंटर बनाऊंगी जहां शहर की थकी हुई स्त्रियां आ कर अपनी मिट्टी को छू सकें, जहां अम्मां की कहानियां सुनाई जाएंगी.’’
आज अवनि उसी मौल की मालकिन है पर वह 32वीं मंजिल पर नहीं बैठती. वह बेसमैंट के उस छोटे से आंगन में बैठती है. समीर की दुनिया से वह बहुत दूर आ चुकी है.
लोग कहते हैं कि अवनि पागल हो गई है पर अवनि जानती है कि वह पहली बार होश में आई है. विकास की राह पर चलतेचलते उस ने अपना जो हिस्सा खो दिया था वह उसे वापस मिल गया है.
वक्त को कोई नहीं रोक पाया पर अवनि ने वक्त के एक खुशनुमा हिस्से को कंक्रीट के जंगल में कैद होने से बचा लिया. यही उस की असली दुनिया फतह थी.
अवनि की आंखों में वह धुंधलका अब
छंट चुका था. उस की जगह एक बर्फीली शांति ने ले ली थी. उस ने समीर की आक्रामकता का जवाब चीख कर नहीं बल्कि एक फीकी मुसकान से दिया.
‘‘समीर, तुम मु झे पागल घोषित करने के लिए डाक्टर लाए हो?’’ अवनि ने धीरे से कहा और उस पुराने लकड़ी के संदूक पर बैठ गई, ‘‘लेकिन तुम ने डाक्टर को यह बताया कि तुम्हारी नौर्मल बीवी को इस गंदी नाली वाली जगह का पता कैसे चला?’’
समीर का चेहरा थोड़ा पीला पड़ा,
‘‘क्या बकवास कर रही हो? तुम ने खुद ही तो यह सब…’’
‘‘नहीं समीर,’’ अवनि ने वह पीला लिफाफा हवा में लहराया, ‘‘यह लिफाफा मु झे तुम ने भेजा था या यों कहूं उस समीर ने भेजा था जिसे लगा था कि मैं यहां आ कर अपनी पुरानी यादों में इतना टूट जाऊंगी कि तुम मु झे आसानी से मैंटल असाइलम भेज दोगे. तुम ने सोचा था कि मैं यहां रोऊंगी, गिड़गिड़ाऊंगी और तुम मु झे अनस्टेबल साबित कर दोगे.’’
पुलिस वाले एकदूसरे का मुंह देखने लगे. डाक्टर ने चश्मा ठीक करते हुए समीर की ओर संदेहास्पद नजरों से देखा.
‘‘अवनि, यह सब फालतू की बातें बंद करो और चुपचाप घर चलो,’’ कर समीर ने झपट कर अवनि का हाथ पकड़ने की कोशिश की पर अवनि ने बिजली की फुरती से अपना हाथ पीछे खींच लिया, ‘‘रुको समीर. डाक्टर साहब, आप जिस पागलपन का इलाज करने आए हैं उस का सुराग उस पुराने चूल्हे के पीछे है,’’ अवनि ने दीवार की एक ढीली ईंट की ओर इशारा किया.
राघव काका जो अब तक खामोश थे, आगे आए और उन्होंने वह ईंट हटा दी. उस के पीछे एक छोटा सा डिजिटल रिकौर्डर और कुछ पुराने दस्तावेज रखे थे.
अवनि की आवाज अब और भी कठोर हो गई, ‘‘समीर, तुम ने इस मौल को बनाने के लिए सिर्फ अम्मां की जमीन नहीं ली थी. तुम ने अम्मा के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर किए थे जब वे अस्पताल में बेहोश थीं और वह पीला लिफाफा? वह तुम ने मु झे डराने के लिए नहीं भेजा था बल्कि वह तुम्हारी सब से बड़ी गलती थी. तुम ने गलती से अपनी फाइल में से वह ‘ओरिजिनल ऐग्रीमैंट’ भी उस में डाल दिया था, जिसे अम्मां ने कभी साइन ही नहीं किया था.’’
समीर की आक्रामकता अब डर में बदलने लगी, ‘‘यह… यह झूठ है. तुम पागल हो चुकी हो.’’
‘‘पागल मैं नहीं थी समीर, पागल तुम थे जो भूल गए कि एक स्क्रिप्टराइटर और प्रोड्यूसर की बीवी होने के नाते मु झे क्लाइमैक्स लिखना बहुत अच्छे से आता है,’’ अवनि ने मुसकराते हुए पुलिस इंस्पैक्टर की ओर देखा, ‘‘इंस्पैक्टर साहब, ऐग्रीमैंट के कागजात और समीर की आवाज की रिकौर्डिंग, जिस में वे अम्मां को धमकी दे रहे थे, सब इस रिकौर्डर में है. यह रिकौर्डर अम्मां ने ही यहां छिपाया था क्योंकि उन्हें पता था कि एक दिन विकास की आड़ में तुम जैसा भेडि़या जरूर आएगा.’’
समीर का अहंकार ताश के पत्तों की तरह ढह गया. वह वहीं फर्श पर बैठ गया, उसी मिट्टी पर जिसे वह गंदगी कह रहा था.
‘‘समीर, तुम ने कहा था न कि बीता वक्त वापस नहीं आता?’’ अवनि ने अपना बैग उठाया और दरवाजे की ओर बढ़ी, ‘‘वक्त वापस नहीं आता, पर वह अपना हिसाब जरूर पूरा करता है. तुम ने अम्मां का घर छीना था, अब यह कानून तुम्हारा पावर कपल वाला मुखौटा छीनेगा.’’
अवनि कमरे से बाहर निकल गई. मौल के बाहर निकलते ही अवनि ने अपनी कार की डिक्की खोली. उस में एक और पीला लिफाफा रखा था. अवनि ने उसे खोला, उस में समीर का भेजा हुआ कोई कागज नहीं था. उस में एक फोटो था अवनि की अम्मां का, जिस में वे एक छोटे बच्चे को गोद में लिए खड़ी थीं. फोटो के पीछे लिखा था, ‘‘अवनि, समीर तो सिर्फ एक मुहरा था. असली दुश्मन वह है जिस ने समीर को यह सब करने के लिए उकसाया… और वह तुम्हारे बहुत करीब है.’’
अवनि का फोन बजा. स्क्रीन पर रोहित भाई (अवनि का भाई) का नाम चमक रहा था. अवनि की सांसें थम गईं. उस ने फोन उठाया, दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘अवनि, समीर का खेल खत्म हो गया? चलो अच्छा है, अब हम मौल की डील फाइनल कर सकते हैं.’’
अवनि ने फोन कान से हटा कर उसे ऐसे देखा जैसे वह कोई बम हो. अवनि के हाथ में फोन अभी भी कांप रहा था. रोहित भाई… वह भाई जिस के लिए अवनि ने शहर में अपनी पहली कमाई से घड़ी खरीदी थी. वह भाई जो हर दीवाली पर अम्मां के साथ आंगन में दीए जलाता था. क्या वह भी उस कंक्रीट की साजिश का हिस्सा था?
‘‘अवनि, आवाज आ रही है? मौल की फाइलें ले कर सीधे मेरे औफिस पहुंचो. समीर अब रास्ते का कांटा नहीं रहा,’’ रोहित की आवाज में एक ऐसी व्यावसायिक ठंडक थी जिस ने अवनि की रूह को सुन्न कर दिया.
अवनि ने गला साफ किया और अपनी आवाज को स्थिर रखने की कोशिश की, ‘‘हां भाई, मैं… मैं बस निकल ही रही हूं पर समीर का क्या होगा?’’
‘‘उस की चिंता मत कर. पुलिस और डाक्टर को मैं ने ही मैनेज किया था. उसे बस डराना था ताकि वह बैकआउट कर ले. अब यह मौल और इस की प्राइम लोकेशन सिर्फ हमारी है,’’ रोहित ने हंसते हुए कहा और फोन काट दिया.
अवनि वहीं कार के स्टीयरिंग पर सिर टिका कर बैठ गई. उसे महसूस हुआ कि धुंधलका आज के व्यस्त माहौल में सिर्फ एक चादर की तरह नहीं फैला है, बल्कि उस ने अवनि की आंखों पर पट्टी बांध दी है. जिस बचपन के आंगन को वह पवित्र सम झ रही थी, उसे उस के अपने भाई ने प्रौपर्टी बना दिया था.
अवनि वापस उस गुप्त कमरे की ओर भागी. उसे लगा कि कुछ तो छूट रहा है. राघव काका अभी भी वहीं लालटेन जलाए बैठे थे जैसे उन्हें पता था कि अवनि वापस आएगी.
‘‘काका, भाई इस में कैसे शामिल हो सकते हैं? उन्होंने तो हमेशा कहा कि वे गांव और मिट्टी से प्यार करते हैं,’’ अवनि ने हांफते हुए पूछा.
काका ने धीरे से अपना सिर हिलाया, ‘‘बेटी, इंसान मिट्टी से तभी प्यार करता है जब उसे पता हो कि उस मिट्टी के नीचे सोना दबा है. तुम्हारी अम्मां को पता था कि रोहित की नीयत बदल चुकी है. इसीलिए उन्होंने यह कमरा और यह नक्शा सिर्फ तुम्हारे नाम किया था.’’
काका ने उस पुरानी तिजोरी की ओर इशारा किया जो दीवार में धंसी थी, ‘‘रोहित को लगा कि समीर के जरीए वह इस जमीन पर कब्जा कर लेगा और उसे वह मिल जाएगा जिस के लिए वह सालों से तरस रहा है.’’
‘‘क्या है इस तिजोरी में काका? पैसे? जेवर?’’ अवनि ने बेताबी से पूछा.
‘‘नहीं बेटी. इस में तुम्हारी अम्मां की वह वसीयत है जो अगर दुनिया के सामने आ गई तो रोहित और समीर दोनों सड़क पर आ जाएंगे. तुम्हारी अम्मां ने इस मौल की जमीन कभी बेची ही नहीं थी, वह सिर्फ एक लीज थी जो तुम्हारी शादी के 10 साल पूरे होते ही खत्म होनी थी और आज… आज तुम्हारी शादी को ठीक 10 साल और 1 दिन हो गया है.’’
अवनि रोहित के औफिस पहुंची. रोहित अपनी आलीशान कुरसी पर बैठा शैंपेन का गिलास हाथ में लिए किसी जीत का जश्न मना रहा था.
‘‘आओ अवनि. हमारी जीत का वक्त आ गया. समीर अब जेल जाएगा और हम इस मौल की जगह एक आलीशान होटल बनाएंगे,’’ रोहित ने चमकती आंखों से कहा.
अवनि ने फाइल मेज पर पटक दी, ‘‘होटल नहीं बनेगा भाई और समीर अकेला जेल नहीं जाएगा.’’
रोहित की मुसकान गायब हो गई, ‘‘क्या मतलब है तुम्हारा?’’
‘‘मतलब यह कि अम्मां ने तुम्हें बहुत पहले पहचान लिया था. उन्होंने लीज ऐग्रीमैंट में एक क्लौज डाली थी कि अगर इस जमीन पर कोई भी पारिवारिक विवाद या साजिश पाई गई तो यह पूरी प्रौपर्टी एक चैरिटेबल ट्रस्ट को चली जाएगी और भाई, मेरे पास आप की और समीर की वह रिकौर्डिंग है जो यह साबित करती है कि आप दोनों ने मिल कर अम्मां के फर्जी साइन किए थे.’’
रोहित अपनी कुरसी से उछला, ‘‘अवनि, तुम पागल हो गई हो? मैं तुम्हारा भाई हूं. हम करोड़ों कमाएंगे.’’
‘‘भाई?’’ अवनि की आवाज में चीख नहीं बल्कि एक गहरा दर्द था, ‘‘भाई वह होता है जो आंगन की यादों को संजोता है, उन्हें बेचता नहीं. आप ने मेरा बचपन बेचा, मेरी अम्मां की आखिरी निशानी बेची. अब आप अपनी आजादी बेचिए.’’
अवनि औफिस से बाहर निकल आई. उस ने ट्रस्ट के कागजात पर साइन कर दिए थे. वह अब फिर से अकेली थी, पर आजाद थी.
तभी अवनि की कार के शीशे पर किसी ने दस्तक दी. वह एक छोटी सी बच्ची थी, बिलकुल वैसी ही जैसी अवनि बचपन में दिखती थी. उस के हाथ में एक अमरूद था.
‘‘दीदी, यह आप के लिए. एक बूढ़ी दादी ने दिया है और कहा कि अपना घर कभी मत छोड़ना,’’ बच्ची अमरूद दे कर भीड़ में गुम हो गई.
अवनि ने चौंक कर चारों ओर देखा. पास ही एक काली कार खड़ी थी, जिस के शीशे चढ़े हुए थे. कार के अंदर से कोई उसे देख रहा था. जैसे ही अवनि ने करीब जाने की कोशिश की, कार तेजी से निकल गई.
अवनि ने अमरूद को देखा. उस पर दांतों से काटने का एक निशान था बिलकुल वैसा ही जैसा अवनि बचपन में अमरूद पर छोड़ती थी और उस फल के अंदर एक छोटी सी माइक्रोचिप फंसी हुई थी.
अवनि ने चिप को अपने फोन से कनेक्ट किया. एक वीडियो प्ले हुआ. वीडियो में कोई और नहीं बल्कि अवनि की अम्मां थीं जो एक अस्पताल के बैड पर नहीं बल्कि एक अज्ञात आलीशान घर में बैठी थीं.
अम्मां ने कैमरे की ओर देखा और मुसकराते हुए कहा, ‘‘अवनि, खेल तो अब शुरू हुआ है. रोहित और समीर तो सिर्फ परदे के आगे थे… क्या तुम तैयार हो असली खिलाड़ी से मिलने के लिए?’’
अवनि की सांसें अटक गईं. वीडियो के पीछे के शीशे में एक परछाईं दिखी. वह चेहरा अवनि के पिता का था, जिन्हें 20 साल पहले मृत घोषित कर दिया गया था.
अवनि के हाथ से फोन छूट कर कार
की सीट पर गिर गया. वीडियो के उस आखिरी फ्रेम में उस के पिता का चेहरा किसी पत्थर की लकीर की तरह जम गया था. वही चेहरा, जिसे उस ने 20 साल पहले एक जलती हुई चिता पर विदा किया था.
अवनि को सम झ आ गया था कि बचपन उस का पीछा नहीं छोड़ रहा है, बल्कि उसे एक ऐसे सच की ओर खींच रहा है जो कंक्रीट की परतों से भी गहरा दफन है.
अवनि ने उस काली कार का पीछा किया. शहर की व्यस्त सड़कों को चीरते हुए वह कार एक पुराने, जर्जर सिनेमाहाल के पास जा कर रुकी. यह वही सिनेमाहाल था जहां अवनि के पिता कभी मैनेजर हुआ करते थे. आज यह खंडहर विकास की बाट जोह रहा था.
अवनि अंदर गई. चारों ओर पुरानी रीलें और धूल भरी कुरसियां थीं. अचानक स्क्रीन पर एक लाइट जली. अवनि के पिता सामने खड़े थे, बिलकुल वैसे ही जैसे 20 साल पहले थे. न एक झुर्री पड़ी थी, न बालों में सफेदी आई थी.
‘‘पापा?’’ अवनि की आवाज कांपी, ‘‘आप… आप इतने सालों तक कहां थे? अम्मां कहां हैं?’’
वह व्यक्ति मुसकराया. पर उस की मुसकान में वह पिता वाली गरमाहट नहीं थी बल्कि एक ठंडी, मशीनी चमक थी, ‘‘अवनि, तुम ने स्क्रिप्ट बहुत अच्छी लिखी. समीर को जेल भेजा, रोहित को बरबाद किया… बिलकुल वैसा ही जैसा हम ने प्रोग्राम किया था.’’
अवनि के पैरों तले की जमीन खिसक गई, ‘‘प्रोग्राम? आप क्या कह रहे हैं?’’
उस व्यक्ति ने अपने चेहरे के पास हाथ ले जा कर एक बारीक तार खींचा. उस की खाल एक सिलिकौन मास्क की तरह उतर गई. नीचे कोई चेहरा नहीं था बल्कि चमकते हुए सैंसर्स और तारों का एक जाल था.
‘‘तुम्हारे पिता 20 साल पहले ही मर चुके थे, अवनि. लेकिन तुम्हारी अम्मां जो एक महान वैज्ञानिक थीं, वे उस कसक को बरदाश्त नहीं कर पाईं. उन्होंने इस आंगन, इस महल्ले और इस याद को सिर्फ एक मकसद के लिए बचाया ताकि वह आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस और ह्यूमन मैमोरी का सब से बड़ा प्रयोग कर सकें.’’
अवनि को चक्कर आने लगा, ‘‘मतलब… मेरा बचपन? वह आंगन? वह सब…’’
‘‘वह सब एक मेमोरी स्टिमुलेशन (का हिस्सा था,’’ वह रोबोटिक आवाज गूंजी, ‘‘तुम्हें उस मौल के बेसमैंट में इसलिए भेजा गया ताकि तुम्हारे भीतर के इमोशनल डेटा को चरम सीमा तक पहुंचाया जा सके. वह पीला लिफाफा, वह चाबी, यहां तक कि रोहित का लालच सब उस ऐक्सपेरिमैंट की स्क्रिप्ट का हिस्सा थे. अम्मां देखना चाहती थीं कि एक इंसान अपनी जड़ों के लिए किस हद तक जा सकता है.’’
तभी पीछे से एक दरवाजा खुला. व्हीलचेयर पर एक बेहद बूढ़ी औरत बाहर आई. वह अवनि की असली अम्मां थीं. उन की आंखें अब धुंधली नहीं थीं बल्कि एक वैज्ञानिक की पैनी चमक से भरी थीं.
‘‘अवनि बेटी,’’ अम्मां ने लड़खड़ाती आवाज में कहा, ‘‘समीर और रोहित असली इंसान थे, उन्होंने जो किया अपनी फितरत के कारण किया. पर तुम ने जो किया वह उस इमोशन के कारण किया जो मैं ने तुम्हारे भीतर फिट किया था. अब बताओ… क्या तुम्हें अभी भी लगता है कि वे बचपन की यादें तुम्हारी अपनी थीं?’’
अवनि ने अपने हाथ देखे. उसे पहली बार अपनी खाल के नीचे कुछ सरसराहट महसूस हुई. उस ने अपने हाथ की कलाई को जोर से खुरचा. खून नहीं निकला बल्कि एक नीली रोशनी की झीनी सी चादर फैल गई.
अवनि की चीख उस के गले में ही घुट गई. उसे याद आया कि वह बचपन की परीक्षा की तैयारी बेमन से क्यों करती थी शायद इसलिए क्योंकि उस का दिमाग उस वक्त अपलोड हो रहा था.
अवनि उस खंडहर से बाहर निकली. सामने वही मौल खड़ा था. अब उसे न तो कसक महसूस हो रही थी, न दर्द. उस ने आसमान की ओर देखा और मुसकराई. उस के सिस्टम में अब कोई ‘धुंधलका’ नहीं
था, बस साफ और ठंडी कोडिंग थी. वह बचपन जिसे वह खोज रही थी, वह कभी था ही नहीं. वह तो बस एक सौफ्टवेयर अपडेट था.
अवनि ने अपनी आंखों को एक बार झपकाया. दुनिया अब किसी सर्किट बोर्ड जैसी दिखने लगी थी. उस ने धीरे से कहा, ‘‘टास्क कंप्लीटेड. अब अगली स्क्रिप्ट की बारी है.’’
