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‘‘वापस चलते हैं... अब जो भी होगा देर आयद, दुरुस्त आयद... अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा... एक रात भी बाहर नहीं रहे हैं अभी... बात संभल जाएगी... माफी मांग लेंगे... गलती की है तो सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी...’’ शुभांगी धीरज बंधाती हुई बोली.

‘‘ठीक है, चलो फिर...’’ दोनों ने अपना इरादा मजबूत कर अपनाअपना बैग उठाया और बाहर निकल गए.

उधर पुलिस वाले यह कह कर पलट रहे थे कि आगे की कार्यवाही कल करेंगे. तभी गेट पर एक टैक्सी रुकी, गेट खुला और शुभांगी व मानव अंदर आते दिखाई दिए. सब लोग चिंतित से बाहर ही खड़े थे, उन्हें देख कर सब चौंक गए.

‘‘कहां, चले गए थे तुम लोग?’’ वरुण की मां बोली.

‘‘औफिस के काम से निकले थे आंटीजी...रास्ते में टैक्सी खराब हो गई...दूसरी मिली ही नहीं...इसीलिए इतनी देर हो गई,’’ मानव किसी तरह बात बना कर बोला.

सभी समझ रहे थे कि मानव झूठ बोल रहा है. मानव ने भी इस समय समझबूझ कर पुलिस वाले व सब के सामने बात बनाई थी. पर समय को देखते हुए सब ने उस झूठ को सच ही रहने दिया.

‘‘चलो श्यामली, घर चलें... टैक्सी खड़ी है बाहर...’’ समय व

स्थिति को देखते हुए श्यामली दोनों बच्चों को ले कर गेट की तरफ बढ़ गई. शुभांगी घर के अंदर चली गई और बच्चे उस के पीछेपीछे. पुलिस वाला आंखों में शक लिए बाहर निकलते हुए कह गया, ‘‘कल थाने आ कर आवश्यक कार्यवाही पूरी कर दीजिएगा?’’

शुभांगी लौबी में सिर झुकाए बैठी थी. वरुण की मां ने घृणा से उस की तरफ देखा और अपने कमरे में चली गई. वरुण ने भी दोनों बच्चों का हाथ पकड़ा और बैडरूम की तरफ चला गया.

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