Hindi Kahani 2025 : मैं जब भी अनुराग को सुधांशु अंकल के साथ देखती तो न चाहते हुए भी मन में एक शक की लहर दौड़ जाती. बिल्कुल वही नुकीली नाक, ऊंचा माथा, भूरी आंखें और चौड़ी ठोढ़ी जैसे दोनों पड़ोसी नहीं बल्कि बापबेटे हों.

अनुराग यानी मेरे पति की सूरत मेरे ससुर से बहुत कम और हमारे पड़ोसी सुधांशु अंकल से काफी ज्यादा मिलती थी. मैं अक्सर सोचा करती कि इस बात की कोई तो वजह होगी. सुधांशु अंकल का वैसे भी हमारे घर के में बहुत आनाजाना है. उन की पत्नी की मौत 2 साल पहले हो गई थी. एक बेटा है जो नागपुर में अपनी पत्नी के साथ रहता है. इधर बीवी के जाने बाद से सुधांशु अंकल घर में अकेले ही रहते हैं. वैसे उन का ज्यादातर समय हमारे साथ ही गुजरता है. मां अक्सर अकेली भी सुधांशु अंकल के साथ बैठी बातें करती दिख जाती हैं. इस से मेरा शक और गहरा हो जाता.

मेरे ससुर काफी सीधे और शांत प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं. मुझे वे कई बार बेचारे नजर आते हैं जो अपनी पत्नी और दोस्त की नजदीकियां इतनी सहजता से स्वीकार कर लेते हैं. मुझे सास के साथसाथ सुधांशु अंकल पर भी गुस्सा आता है. पत्नी नहीं है तो क्या पड़ोसी की पत्नी को अपना मान लेंगे या फिर कहीं उन की पत्नी इसी गम में तो नहीं चल बसी? तरहतरह की बातें मेरे दिमाग में चलती रहतीं. मन ही मन मैं ने सुधांशु अंकल और अपनी सास की एक अलग तस्वीर अपने दिमाग में बना ली थी.

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