Hindi Drama Story: ‘‘प्रदीप आई एम सौरी, तुम्हारे दिल का हाल मैं समझ सकता हूं. पर क्या करूं नीता ने मेरे साथ रिलेशनशिप में रहना पसंद किया है?’’ शैलेंद्र ने कहा. ‘‘इस में सौरी जैसी कोई बात नहीं है. यह नीता का निर्णय है और उसे पूरा हक है अपनी जिंदगी का निर्णय लेने का,’’ प्रदीप ने कहा. शैलेंद्र को आश्चर्य तो हुआ पर उसे उस की बातों से काफी राहत भी मिली. शैलेंद्र उस का बहुत ही प्यारा दोस्त था. संयोग से दोनों ही नीता से बहुत प्यार करते थे और करीबी दोस्त होने के कारण दोनों एकदूसरे से अपने दिल की बात साझ भी करते थे. कभीकभी तीनों साथ समय बिताते थे.
दोनों ने नीता से अपनेअपने तरीके से अपने दिल की बात बताई थी. नीता ने प्रदीप की बात का कोई जवाब नहीं दिया था और शैलेंद्र से प्यार का इजहार किया था. शैलेंद्र खुश तो बहुत था पर इस बात को ले कर दुखी भी था कि प्रदीप के दिल पर क्या गुजरेगी. आज प्रदीप ने जब कहा कि उसे पूरा हक है निर्णय लेने का तो शैलेंद्र के दिल को काफी राहत मिली. इस के बाद शैलेंद्र और नीता का प्यार परवान चढ़ने लगा. शैलेंद्र और प्रदीप की दोस्ती भी पहले की तरह ही चलती रही. नीता शैलेंद्र के साथ तो थी ही, कभीकभी तीनों का साथसाथ प्रोग्राम बन जाता था. तीनों साथसाथ घूमते, खाते, मूवी देखते और ऐश करते थे. इसी बीच शैलेंद्र को औफिस के काम से हैदराबाद जाने का आदेश मिला. शैलेंद्र हैदराबाद चला गया.
वहां से वह रोज नीता से बातें करता था. कभीकभी वीडियो कौल भी कर लिया करता था. प्रदीप से भी बीचबीच में बातें होती रहती थीं. उसे 1 महीने तक हैदराबाद में रुकना था. इसी बीच नोएडा स्थित एक रिश्तेदार के यहां किसी समारोह में जाने का न्योता मिला. मन ही मन वह बहुत खुश था.सोचा था कि नीता से 1 महीने के बाद मिल पाएगा पर इस निमंत्रण के कारण पहले ही मिलने का मौका मिल गया था.पर उस के मन में एक आइडिया आया. वह बिना कोई सूचना दिए नीता के सामने जाने की योजना बना चुका था.
शुक्रवार को शाम में ही वह फ्लाइट से दिल्ली आ गया. आ कर अपने फ्लैट में रुका. दूसरे दिन सुबह नोएडा अपने रिश्तेदार के घर गया. समारोह में शामिल हो कर वह शाम को वापस अपने फ्लैट में वापस आ गया.अब वह सोच रहा था कि नीता को कहां बुलाए मिलने के लिए. हैदराबाद से वह नीता के लिए मोतियों की माला लाया था. जल्दबाजी में उसे पैक कराना भूल गया था. पहले गिफ्ट पैक करा लूं फिर नीता से बात करता हूं, उस ने सोचा. वह अपने फ्लैट से मोतियों की माला ले कर नीचे उतरा.
अपनी स्कूटी से वह दुकान की ओर गिफ्ट पैक कराने के लिए बढ़ा. इसी बीच उसने देखा नीता प्रदीप के साथ मोटरसाइकिल पर बैठी जा रही थी. वह बड़े ही रोमांटिक अंदाज में प्रदीप से चिपकी हुई थी. शैलेंद्र ने अपनी स्कूटी से प्रदीप की मोटरसाइकिल का पीछा किया. कुछ ही दूरी पर नौर्थ इंडिया मौल था. प्रदीप ने मोटरसाइकल पार्किंग में जा कर पार्क की और नीता के साथ मौल में प्रवेश कर गया. शैलेंद्र ने भी कुछ ही दूरी पर अपनी स्कूटी पार्क की और उन के पीछेपीछे चल दिया. वह इस बात का ध्यान रख रहा था कि प्रदीप और नीता उसे न देखें. प्रदीप और नीता सीधे तीसरे तल पर स्थित मल्टीप्लैक्स पहुंच कर टिकट ले अंदर चले गए. प्रदीप कुछ दूर खड़ा उन्हें अंदर जाते देखता रहा. उस की समझ में यह बात नहीं आ रही थी कि जिस नीता ने उस के साथ प्यार का इजहार किया है वह प्रदीप के साथ कैसे है.
साथ रहने और मूवी देखने से उसे कोई आपत्ति नहीं थी पर जिस तरह वह मोटरसाइकिल पर प्रदीप से चिपकी हुई थी और रास्ते में भी उस की बांहें पकड़ कर उस से चिपकी हुई थी उस से उसे दाल में कुछ काला लगा. शैलेंद्र ने तुरंत अपने मोबाइल से नीता को कौल किया. नीता कौल को रिसीव कर बोली, ‘‘हैलो, डार्लिंग.’’ ‘‘हैलो डार्लिंग. कैसी हो,’’ शैलेंद्र ने पूछा. ‘‘कैसी रहूंगी, मुझे अकेली छोड़ कर हैदराबाद की बिरयानी उड़ा रहे हो,’’ नीता शिकायत भरे लहजे में बोली. ‘‘अरे मुझे तो काम से आना पड़ा है वरना तुम्हें छोड़ कर मेरी आने की इच्छा नहीं हो रही थी,’’ शैलेंद्र ने कहा. ‘‘झूठ… झूठ… झूठ…’’ नीता ने अदा से कहा. ‘‘नहीं डार्लिंग. अब 2 सप्ताह की तो बात है फिर आता हूं न तुम्हारे पास. वैसे अभी क्या कर रही हो?’’ शैलेंद्र ने कहा. ‘‘घर में बैठ कर बोर हो रही हूं,’’ नीता ने ऐसे कहा मानो उस से कितना नाराज हो.
‘‘अरे बाबा नौर्थ इंडिया मौल तुम्हारे फ्लैट से कुछ ही दूरी पर है. अभी नई मूवी रिलीज हुई है. देख आती,’’ शैलेंद्र ने कहा. कुछ पलों के लिए सन्नाटा रहा. नीता ने कोई जवाब नहीं दिया. ‘‘क्या हुआ नीता, मेरी आवाज नहीं आ रही क्या?’’ शैलेंद्र ने पूछा. ‘‘हां बीच में आवाज ब्रेक हो रही थी. अकेले मूवी देखने में मजा नहीं आता,’’ नीता ने जवाब दिया. ‘‘अरे तो प्रदीप को साथ ले लेती,’’ शैलेंद्र ने कहा. ‘‘प्रदीप को तो तुम जानते ही हो. जब से मैं ने तुम्हारे साथ रहने का निर्णय लिया है वह मुझ से खफा है,’’ नीता ने कहा ‘‘अरे प्रदीप तुमसे खफा नहीं है. वह मानता है कि तुम्हें अपने जीवन का निर्णय लेने का हक है.
वह बहुत ही सुलझे मस्तिष्क वाला व्यक्ति है और कुछ भी हो है तो हमारा दोस्त ही,’’ शैलेंद्र ने कहा. ‘‘अच्छा शैलेंद्र, मैं थोड़ी देर बाद कौल करती हूं. एक इंपौर्टैंट कौल आ रही है,’’ नीता ने कहा और फोन डिसकनैक्ट कर दिया. अब शैलेंद्र समझ गया कि उस के साथ नीता और प्रदीप धोखा कर रहे हैं. वह मोतियों की माला पैक कराए बिना वापस चला गया. कहां वह सोच कर आया था कि नीता को सरप्राइज देगा कहां नीता ने उसे सरप्राइज दे दिया था. वह बहुत दुखी हो गया. चुपचाप अपने कमरे में लेटा रहा. 3 घंटे के बाद नीता का फोन आया.
उस के मन में विचार आया कि वह नीता को खूब खरीखोटी सुनाए पर संयम बरत कर रह गया. उस ने बिलकुल सामान्य हो कर नीता से बात की. वैसे उस के दिल में जो उथलपुथल मची थी उस के प्रभाव से वह रोमांटिक हो कर नीता से बातें नहीं कर पा रहा था. नीता ने उलाहना भी दिया, ‘‘लगता है हैदराबाद में किसी से दिल लग गया है, इसलिए अब पहले जैसी बातें नहीं करते.’’ क्या कहता शैलेंद्र. मन ही मन बोला कि जो छुरी तुम ने मेरी पीठ में घोंपी है उस के बाद पहले जैसी बातें कैसे करूं.’’ प्रदीप से उस की बात होती थी तो वह बिलकुल सामान्य तरीके से बात करता था. 2 सप्ताह के बाद शुक्रवार को काम समाप्त कर वह फिर वापस दिल्ली चला आया.
शनिवार का दिन था. उस ने प्रदीप को फोन लगाया. ‘‘हैलो, वापस आ गए?’’ प्रदीप ने पूछा. ‘‘हां आ गया. तुम से कुछ जरूरी बातें करनी है. आ जाओ. यहीं खाना भी खाएंगे,’’ शैलेंद्र ने कहा. ‘‘ठीक है. 1 बजे आता हूं,’’ प्रदीप ने कहा और फोन डिसकनैक्ट कर दिया. ठीक 1 बजे प्रदीप हाजिर हो गया. इस के पहले ही शैलेंद्र ने खाना बना कर तैयार कर दिया था. ‘‘चलो खाना खाते हैं, फिर बातें करते हैं,’’ शैलेंद्र ने कहा. ‘‘नीता नहीं आ रही क्या?’’ प्रदीप ने पूछा. ‘‘क्यों? नीता के बिना हम साथ में खाना नहीं खा सकते क्या?’’ शैलेंद्र ने पूछा. ‘‘खा क्यों नहीं सकते? मुझे लगा काफी दिनों के बाद तुम आए हो तो नीता को भी बुलाओगे,’’ प्रदीप ने अपनी बात रखी. ‘‘नीता का किसी और के साथ अफेयर चल रहा है,’’ शैलेंद्र ने कहा.
‘‘क्या बात कर रहे हो? किस के साथ?’’ प्रदीप चौंक गया. ‘‘यह नहीं पता पर उस के साथ वह नौर्थ इंडियन मौल में पिक्चर देखने गई थी. किसी ने मुझे बताया? छोड़ो ये बातें चलो खाना खाते हैं,’’ शैलेंद्र ने कहा. दोनों मिल कर खाना खाने लगे. प्रदीप असहज महसूस कर रहा था. ‘जिस ने शैलेंद्र को यह बात बताई होगी उस ने जरूर मेरे बारे में भी बताया होगा,’ वह सोच रहा था. ‘‘किसी के साथ मौल में पिक्चर देखने में क्या हरज है यार?’’ प्रदीप बोला. ‘‘पिक्चर देखने में कोई हरज नहीं है पर बताने वाला बता रहा था कि दोनों बाइक पर ऐसे चिपक कर आए थे जिस से लगता था दोनों के बीच कुछ है. वैसे नमक ठीक है खाने में?’’ शैलेंद्र ने पूछा. ‘‘नमक ठीक है,’’ प्रदीप बोला. ‘‘इतना नमक है कि खाने वाले को धोखा देने पर नमकहराम कहा जा सके?’’ शैलेंद्र ने पूछा. अब प्रदीप समझ गया कि शैलेंद्र को सब पता चल चुका है.
वह बोला, ‘‘देखो यार जब नीता ने तुम्हारे साथ रहने का निर्णय लिया था तो मैं ने कुछ नहीं कहा था. अब वह मेरे साथ रहने का निर्णय ले रही है तो तुम्हें भी कुछ नहीं कहना चाहिए. वैसे तुम्हारे पीठ पीछे यह सब हुआ इस के लिए आई एम सौरी, मुझे माफ कर दो.’’ ‘‘इस के लिए माफ तो नहीं कर पाऊंगा तुम्हें प्रदीप पर तुम मेरे बहुत पुराने और करीबी मित्र हो. मित्रता जारी रहेगी विश्वासघात के धब्बे के साथ. जिस तरह उस ने मेरे साथ रहने का निर्णय लिया था तो मैं ने तुम्हें बताया था उसी तरह तुम बता देते तो मुझे कोई शिकायत नहीं रहती. तुम मेरे दोस्त हो इसलिए तुम से शिकायत कर रहा हूं. नीता से मैं शिकायत भी नहीं करूंगा. बस तुम उसे बता देना,’’ शैलेंद्र ने कहा. प्रदीप सिर झुकाए खाना खा रहा था. खाना एकाएक उसे बहुत बेस्वाद लगने लगा था.
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