Love Story in Hindi: एकदम सुबहसुबह मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया, ‘गुडमोर्निग छवि’ साथ में स्माइली वाली इमोजी भी थी. फिर तुरंत उस ने एक और मैसेज भेजा, ‘क्या हम मिल सकते हैं?’ मैं ने तुरंत उस के मैसेज पर ‘यस’ वाला अंगूठा दबाया और खुशी के मारे उछल पड़ी.

उस के मैसेज ने मेरे अंदर एक अजीब सा एहसास जगा दिया, मतलब, बहुत जानापहचाना सा, बहुत अपना सा, पता नहीं और क्या? उस के मैसेज को पढ़ कर मैं विस्मित थी और आनंदित भी. कहीं तो कोई महीन सा धागा जुड़ गया था प्यार का, हमारे बीच, जिसे मैं अपनी 2 बड़ीबड़ी आंखों से देख पा रही थी.

उस मैसेज को मैं ने कई बार पढ़ा. एक बार तो दिल बोला, कहीं यह मैसेज उस ने गलती से तो नहीं भेज दिया तुझे. ‘गलती से कैसे? देखो, उस ने मेरा नाम भी तो लिखा है, ‘छवि’. लेकिन मुझे खुद विश्वास नहीं हो रहा था उस ने मुझे… मुझे मैसेज भेजा.

करीब 6 महीने पहले मैं उस से उसी पार्क में मिली थी, जहां मैं रोज अपने हैरी मेरा कुत्ता, को ले कर वाक पर जाती हूं. लेकिन वह वाक नहीं करता था, दौड़ता था, अपने एक दोस्त के साथ. दोनों में रेस लगती कि कौन कितना तेज दौड़ सकता है. दौड़ने के बाद कुछ देर सुस्ता कर वह काफी देर तक ऐक्सरसाइज भी करता. वह लड़का लंबाचौड़ा तो था ही, स्मार्ट भी बहुत था. तभी तो मैं उसे देखते ही फिसल गई.

उस ने एएफसीएटी (एअरफोर्स कौमन एडमिशन टैस्ट) पास कर लिया है.

एसएसबी इंटरव्यू और मैडिकल टैस्ट में उत्तीर्ण होना बाकी है और उसी की तैयारी कर रहा है. ऐसा मैं ने उसे फोन पर किसी से बात करते सुना था. कह रहा था कि बचपन से उस ने फाइटर पायलट बनने का सपना देखा है, और वह बन कर रहेगा. उस का जनून देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा. लगा उसे जा कर शाबाशी दूं. लेकिन मैं तो उसे जानती तक नहीं. बस पार्क में दौड़ लगाते देखती रही हूं.

मेरे मामा भी फाइटर पायलट थे. बहुत ही हैंडसम थे वे. उन का रहनसहन और बात करने का तरीका बहुत हाई क्लास था. जब भी मैं मम्मीपापा के साथ नानी के घर जाती, तो मामा से कहती, ‘‘मैं भी बड़ी हो कर उन की तरह फाइटर पायलट बनूंगी और प्लेन उड़ाऊंगी.’’

इस पर मामा हंसते हुए कहते, ‘‘हां, जरूर बनना और प्लेन भी उड़ाना.’’

मेरे मामा मुझे बहुत प्यार करते थे. लेकिन एक रोज उन का प्लेन क्रेश हो गया जिस की वजह से उन की मौत हो गई. मामा के साथ दूसरे जो पायलट थे उन की भी मौत हो गई. दुख की बात तो यह थी कि 2 महीने बाद मामा की शादी होने वाली थी. खैर, मामा की मौत के साथसाथ मेरे सपने की भी मौत हो गई क्योंकि उन की मौत ने पापा को डरा दिया. अब वे नहीं चाहते थे कि मैं फाइटर पायलट बनूं. हर मातापिता चाहते हैं उन के बच्चे सुरक्षित रहें और मेरे मांपापा ने भी वही चाहा. लेकिन पापा को मैं यह बात सम?ाना चाहती थी कि मामा इसलिए नहीं मर गए कि वे ‘फाइटर पायलट थे बल्कि इसलिए मर गए कि उन्हें इतना ही जीना था.’

अभी अहमदाबाद में जो प्लेन क्रैश हुआ, उस प्लेन में सफर करने वाले यात्रियों के साथसाथ कई मैडिकल स्टूडैंट्स की भी जान चली गई. क्या उन मैडिकल स्टूडैंट्स ने सपने में भी सोचा होगा कि उन्हें ऐसी मौत मिलेगी? जिस वक्त वे खाना खा रहे होंगे, उन के ऊपर प्लेन आ गिरेगा और वे मर जाएंगे, नहीं न? फिर इंसान क्यों डरता रहता है? मौत समय और जगह बता कर थोड़े ही न आती है. उसे तो जब आना होता आ जाती है. लेकिन इंसान को लगता है ऐसा करते तो वैसा न होता. वैसे अब मेरे सपने बदल गए हैं. मैं आर्किटैक्चर की पढ़ाई कर रही हूं.

मगर यह भी सच है कि मुझे उस फाइटर पायलट से प्यार हो गया, जिस का नाम नीरव है और यह सपना कभी नहीं बदलने वाला. अब मुझे उस का नाम कैसे पता चला? तो जब वह अपने दोस्त के साथ पार्क में दौड़ लगा रहा था, तब उस के दोस्त ने उसे पीछे से आवाज दी थी, ‘‘नीरव, रुक जाओ यार.’’

और वह रुक कर पीछे मुड़ कर हंसा था. उस की हंसी इतनी मनमोहक थी कि मैं उसे देखती रह गई और मेरे हाथों से छूट कर हैरी मेरा कुत्ता भाग गया और मैं चिल्लाते हुए उस के पीछे भागी.

‘‘हैरी… स्टौप… हैरी स्टाप,’’ लेकिन वह शैतान कहां रुकने वाला था. पार्क के कई चक्कर लगाने के बाद भी जब वह मेरे हाथ में नहीं आया तो मैं हांफती हुए कमर पर हाथ रख एक तरफ खड़ी हो गई क्योंकि हैरी के पीछे भागतेभागते थक चुकी थी मैं. तभी देखा हैरी को गोद में लिए उसे पुचकारते हुए वह लड़का नीरव मेरी तरफ ही आ रहा है.

‘‘यह लीजिए, आप का हैरी. इस की डोर को कस कर पकड़ रखा करो ताकि दोबारा भागने न पाए. वैसे आप का हैरी बहुत ही प्यारा है,’’ मेरे हाथ में हैरी को सौंपते हुए अपनी मधुर मुसकान बिखेरते हुए वह फिर बोला, ‘‘कहीं सुना था कि कुत्तों को प्यार देने के लिए मनुष्य उन्हें नहीं चुनते बल्कि कुत्ते मनुष्य को चुनते हैं और उस के पास आते हैं.’’

‘‘हां, मैं ने भी सुना था कि जिन मनुष्यों को बेजबान जानवर प्रेम करते हैं, वे निश्चित तौर पर सुंदर लोग होते हैं,’’ मैं ने हैरी को प्यार से सहलाते हुए कहा, ‘‘भले ही यह हमारी तरह बोल नहीं सकता लेकिन प्रेम, भावनाएं व्यक्त करना जानता है.’’

मेरी बात पर उस ने मुझे गौर से देखा और फिर मुसकरा कर हाथ हिलाते हुए आगे

बढ़ गया. उस की इस मुसकराहट ने मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी जैसे लगा हर तरफ संगीत बज उठा हो.

‘एक बार, एक बार वह मुझे पलट कर देख ले तो समझ जाऊंगी कि वह भी मुझे पसंद करता है’ ऐसा मेरे दिल ने कहा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं उस ने मुझ पलट कर नहीं देखा. ‘कोई बात नहीं, लेकिन मैं तो उसे पसंद करती हूं न’ मैं ने अपने नन्हे से दिल को समझाया, तो वह बोल पड़ा, ‘वह किस जातिधर्म का है पता भी है तुम्हें?’ नहीं जानना मुझे कि वह कौन सी जाति और धर्म का है. सुना नहीं तुम ने, ‘प्रीत न जाने जातकुजात नींद न जाने टूटी खाट, भूख न जाने बासी भात और प्यास न जाने धोबीघाट. प्यार का तो एक ही धर्म और जाति है, प्यार.

मैं रोज समय से हैरी को ले कर पार्क पहुंच जाती. नीरव को देखते ही हैरी भाग कर उस के पास चला जाता और वह हैरी के रेशमी मुलायम  बालों से खेलते हुए उसे पुचकारता और फिर दोनों साथ में दौड़ लगाने लगते. कभी वह हैरी के पीछे भागता तो कभी हैरी उस के पीछे और मैं दोनों को देखदेख कर मुसकराती.

हैरी की एक आदत बहुत खराब है, जैसे ही उसे कोई कुतिया दिख जाती है उधर दौड़

लगा देता है. उस दिन भी यही हुआ, वह उस कुतिया के पीछे भागा तो सड़क के उस पार निकल गया.डर गई कि कहीं किसी गाड़ी के नीचे न आ जाए, इसलिए उस के पीछे भागी. मगर वह तो अपनी ही गति से भागा जा रहा था. लेकिन तभी बड़ी फुरती से नीरव उस के पीछे भागा और उसे पकड़ कर मु?ो सौंपते हुए बोला, ‘‘क्यों रे हैरी, लड़की को देखते ही लाइन मारने लगा तू?’’

‘‘थैंक यू सो मच. आप इसे पकड़ कर न लाते तो पता नहीं आज क्या हो जाता,’’ मैं उस का आभार प्रकट कर, झूठमूठ का हैरी पर गुस्सा करने लगी कि क्यों भाग गया? चल घर, आज मैं तुझे बताती हूं. शैतान कहीं का.

मुझे हैरी को यों डांटते देख वह हसा और बोला, ‘‘यह हमारी तरह इंसान नहीं है जो आप की नाराजगी का जबाव नाराजगी से दे सके. बेचारा, देखिए तो कैसे मुंह बना कर बैठा है.’’

हैरी के मुलायम बालों पर अपनी उंगलियां फिराते हुए वह ‘बाय’ बोल कर फिर अपने दोस्त के साथ दौड़ में शामिल हो गया और मैं उसे जाते देखती रही.

मैं हैरी को खींचते हुए पार्क की बैंच पर जा बैठी. लेकिन हैरी अपनी पूंछ हिलाहिला कर बारबार मुझे संकेत कर रहा था अब घर चलो. ‘‘हांहां, बस थोड़ी देर रुक जा, चलते हैं.’’ मेरी बात पर उस ने गुस्से में मुझे अपना दांत गड़ा दिया. यही करता है यह. जब भी इसे गुस्सा आता है या अपनी कोई बात मनवानी होती है, दांत गड़ा देता है. वैसे पापा के साथ मैं इसे हर महीने पशु चिकित्सालय ले कर जाती हूं ताकि इसे जरूरी टीके लगाए जा सकें.

पहले सुबह उठ कर पार्क आने में मुझे आलस होता था. पापा से कहती कि वे

हैरी को बाहर घुमा लाएं. लेकिन जब से नीरव से मिली हूं, नींद उड़ चुकी है मेरी. पागलों की तरह बिना अलार्म बजे उठ  जाती हूं और हैरी को ले कर पार्क पहुंच जाती हूं.

‘ओह, नीरव बिलकुल मेरे सपनों के राजकुमार जैसा है,’ मैं खुद में चहकती हुई बोली तो मेरे दिल ने कहा, ‘इतना जो उछल रही हो, क्या वह भी तुम्हें पसंद करता है? कहीं ऐसा न हो कि वह तुम्हारे सपनों का राजकुमार बन कर ही रह जाए,’ ‘कुछ भी मत बोलो’ मैं ने अपने दिल को फटकारा, ‘वह निश्चय ही मेरा होगा क्योंकि जब बुलंद इरादे और सच्ची लगन हो तो मंजिल के रास्ते खुदबखुद खुलते चले जाते हैं. क्यों हैरी सही कहा न मैं ने.’

और मेरी बात पर हमेशा की तरह उस ने अपनी पूंछ हिलाई.

हां, यह भी बात है कि वह मुझे पसंद करता है या नहीं, यह तो पता करना ही पड़ेगा, पर कैसे? क्या पूछूं उस से जा कर कि मैं उसे पसंद हूं या नहीं? नहींनहीं, क्या सोचेगा वह मेरे बारे में? तो फिर क्या करूं? उस का फोन नंबर मांग लूं क्या? लेकिन उस ने देने से मना कर दिया तो और फिर पूछेगा नहीं कि क्यों चाहिए मुझे उस का फोन नंबर? हां, उसे खत लिखूंगी मैं… अरे, तो क्या हो गया जो मोबाइल का जमाना आ गया तो खत की बात ही अलग है.

‘डाकिया डाक लाया… डाकिया डाक लाया…’ गाना आज भी दिल को छू जाता है. पहले के जमाने में 2 प्रेमी खत के जरीए ही तो अपने प्यार का इजहार किया करते थे. फिल्म ‘मैं ने प्यार किया’ में कैसे नायिका अपने प्रेमी को कबूतर के जरीए खत भिजवाती हुई गीत गाती है, ‘कबूतर जा जा जा… पहले प्यार की पहली चिट्टी… साजन को दे आ…’ और फिल्म ‘सरस्वती चंद्र’ में नायिका, ‘फूल तुझे भेजा है खत में… फूल नहीं मेरा दिल है…’ गा कर अपने प्रेम का इजहार करती है और खुद मेरे मम्मीपापा एकदूसरे को प्यार भरा खत भेजा करते थे.

मां ने ही मु?ो बताया था कि पापा हर संडे उन्हें घर के लैंडलाइन फोन पर फोन करते थे. लेकिन मां उन की बातों पर सिर्फ ‘हां, हूं’ में ही जवाब दे पाती थीं क्योंकि घर के सारे लोग वहां बैठे जो होते थे. फिर पापा और मां अपने प्यार का इजहार खतों के जरीए करने लगे.

तभी तो मैं भी खत के जरीए नीरव के सामने अपने प्यार का इजहार करूंगी. लेकिन मेरा प्यार भरा खत ले कर जाएगा कौन? अरे, मेरा शेरा, हैरी है न. यह पहुंचाएगा नीरव तक मेरा प्यार भरा खत.

‘‘क्यों हैरी, मेरा डाकिया बनेगा?’’ मेरी बात पर उस ने अपनी पूंछ हिलाई. मतलब करेगा.

‘‘शाबाश,’’ मैं ने हैरी को चूम लिया तो खुशी के मारे वह और तेजी से पूंछ हिलाने लगा.

मैं ने फटाफट एक प्यार भरा खत लिख डाला, साथ में अपना फोन नंबर भी चिपका दिया और हैरी के गले के पट्टे में अच्छे से टांग दिया ताकि नीरव को वह खत दिख जाए. फिर मैं खुद पार्क की एक बैंच पर जा कर बैठ गई. मैं दूर बैठी देख रही थी, रोज की तरह नीरव हैरी के साथ मस्ती कर रहा था. वापस घर आते समय जब मुझे हैरी के गले के पट्टे में वाह खत नहीं दिखा तो मैं खुशी से झूम उठी कि मेरा प्यार भरा खत नीरव तक पहुंच चुका है और अब वह मुझे जरूर फोन करेगा. पता चल जाएगा कि वह भी मुझे पसंद करता है या नहीं. लेकिन जब उस का कोई जवाब नहीं आया तो मैं परेशान हो उठी.

परेशान तो मेरा हैरी भी था क्योंकि बेचारे को 2 दिनों से पौटी नहीं हो रही

थी. कुछ खापी भी नहीं रहा था. मां से बोली तो उन्होंने कहा कि कुछ उलटासीधा खा लिया होगा इसलिए उसे पौटी नहीं हो रही है. हो जाएगी

तुम चिंता मत करो. ‘शायद हो सकता है’ मैं ने सोचा. लेकिन मेरा ध्यान तो फोन पर ही था कि अब नीरव का फोन आएगा, अब नीरव का फोन आएगा. उस के जवाब के इंतजार में मेरी आंखें पथरा गईं और फिर कब मुझे नींद आ गई पता ही नहीं चला. सुबह जब उठी तो देखा हैरी ने मेरे कमरे में पौटी कर दी थी.

‘‘छि: यह क्या किया तूने हैरी?’’ मैं ने अपनी नाक पर हाथ रखते हुए कहा, ‘‘यह इस की पौटी ऐसी सफेदसफेद क्यों है? हाय रे भुख्खड़, तूने मेरा प्रेम पत्र खा लिया. कितनी मुश्किल से लिखा था. यह मेरा पहला प्रेम पत्र था और तूने इसे खा लिया? तुझे शर्म नहीं आई कुत्ते,’’ मैं गुस्से में चीख पड़ी तो वह मुझ पर ?ापटा क्योंकि उसे कुत्ता सुनना बिलकुल पसंद नहीं.

‘‘अच्छाअच्छा सौरी हैरी महाराजजी,’’ मैं ने हाथ जोड़ कर उसे नमस्कार किया तो वह ‘कूंकूं’ कर लाड दिखाने लगा. लेकिन अब मैं क्या करूं, कुछ समझ नहीं आ रहा था.

तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया और मैं मुसकरा उठी. उस दिन जब पार्क में नीरव से मिली तो उसे यह कह कर पास के स्नैक्स बार में ले गई कि आज हैरी का जन्म दिन है तो आज उस की तरफ से पार्टी.

‘‘ओ हैप्पी बर्थडे हैरी,’’ हैरी के रेशमी बालों को अपने हाथों से सहलाते हुए नीरव बोला, ‘‘कितने साल का हो गया तू?’’ बोल कर वह हंसा तो मु?ो भी हंसी आ गई. हम ने 2 कौफी और फ्रैंचफ्राई मंगवाया बस. जब पैसे देने की बारी आई तो नीरव ही देने लगा पर मैं ने उसे

देने नहीं दिए और खुद ही फोन से पेमैंट करने लगी. लेकिन यह क्या, मेरा तो नैट ही नहीं चल रहा था और पैसे मैं अपने पास रखती नहीं. तो क्या करूं अब?

मुझे परेशान देख नीरव समझते देर नहीं लगी और वह पैसे देने लगा तो मैं ने उस से वादा किया कि मैं उस के पैसे लौटा दूंगी और उसे लेने पड़ेंगे. मैं ने उस का फोन नंबर ले लिया ताकि उस के पैसे लौटा सकूं.

घर आ कर सब से पहले मैं ने नीरव के पैसे लौटाए और फिर विजयी मुसकान के साथ हैरी की तरफ देखा. उस का झूठा बर्थडे और फोन में नैट न होने का नाटक जो किया था मैं ने ताकि उस का फोन नंबर मिल सके. खैर, मैं अपने प्लान में कामयाब हो चुकी थी और अब इंतजार था उस के फोन आने का. लेकिन उस बात को हफ्ता बीत गया न तो उस ने एक ‘हाय’ भेजा और न ही हमारे बीच बातों का कोई आदानप्रदान ही हुआ.

इधर कई दिनों से नीरव पार्क में दौड़ने भी नहीं आ रहा था. करीब 20-22 दिन

बाद वह मुझे पार्क में दिखा तो मेरा दिल खुशी से झूम उठा. मैं कुछ कहती उस से पहले ही वह मेरे पास आ कर बोला कि वह अपने घर लखनऊ गया था, अपनी शादी के लिए लड़की देखने.

उस की बात सुन कर मेरा दिल रोते हुए गाने ही जा रहा था, ‘दिल का खिलौना हाय टूट गया…’ कि तभी वह बोल पड़ा, ‘‘पर मैं ने इस शादी के लिए न बोल दिया क्योंकि मुझे जैसी लड़की चाहिए उस में वह बात नहीं थी.’’

उस की बातों ने मेरे दिल पर मरहम का काम किया और मैं मरतेमरते जी उठी.

‘‘वैसे आप को देख कर लगता है, आप ने मुझे बहुत मिस किया?’’

उस की बातों पर मैं सकुचा उठी.

‘‘जस्ट जोकिंग यार,’’ वह बेफिक्री से

हंसा. लेकिन यह बात सच है कि मैं ने उसे बहुत मिस किया.

तभी मां की तेज आवाज मुझे अतीत से बाहर खींच लाई.

‘‘हां, मां बोलो क्या है?’’

तो मां कहने लगीं कि मेरे लिए एक रिश्ता आया है.

‘‘तो मैं क्या करूं?’’ मैं चिढ़ते हुए बोली.

‘‘मैं क्या करूं मतलब? क्या तुझे शादी

नहीं करनी है?’’ मां ने भी उसी अंदाज में कहा.

‘‘नहीं, मुझे कोई शादी नहीं करनी.’’

‘‘क्या कहा, शादी नहीं करेगी? क्यों नहीं करनी?’’ मां ने मुझे घूरा.

‘‘बस ऐसे ही, म… मेरा मतलब है अभी मुझे जौब लेनी है फिर शादी के बारे में सोचूंगी.’’

‘‘कोई देख तो नहीं रखा है अपने लिए?’’ मां ने ताड़ते हुए कहा.

‘‘हां, मतलब नहीं, अरे, यार… जाओ यहां से आप,’’ मैं तिलमिला उठी,

कुछ सैकंड रुक कर मां, ‘‘यह लड़की भी न मेरी समझ से बाहर है,’’ बोल कर कमरे से बाहर निकल गईं.

‘मगर मैं क्या करूं क्योंकि नीरव तो… पता नहीं मैं उसे पसंद भी हूं या नहीं. अजीब लड़का है. अरे, कुछ बोलो तो सही कि मैं तुम्हें पसंद हूं या नहीं. इतना क्या भाव खा रहे हो. मुझ जैसी लड़की नहीं मिलेगी तुम्हें, बताए देती हूं. हुंह, जाने दो, अब मुझे भी तुम्हारे पीछे नहीं भागना,’ मैं खुद में ही भुनभुनाते हुए बोली. मां ने पलट कर मुझे देखा कि कहीं मैं पगला तो नहीं गई?

‘हां, पगला ही तो गई हूं, तभी तो सोतेजागते बस उसी के बारे में सोचती रहती हूं. तभी मुझे खयाल आया कि उस ने मुझे मैसेज कर मिलने बुलाया था.

मैं ने तुरंत उसे मैसेज किया ‘क्या आज हम मिल सकते हैं?’ उस ने तुरंत उत्तर दिया

‘ओके.’ मैं ने पूछा, ‘कहां?’ तो उधर से जवाब आया, ‘सिंधु भवन रोड, यांकी सिजलर’ रैस्टोरैंट में शाम के 4 बजे.’

‘ओके’ बोल कर मैं ने घड़ी की तरफ देखा. घड़ी अभी 2 बजा रही थी यानी 2 घंटे हैं अभी

4 बजने में. उस से मिलने के लिए पहले मैं ने खुद को मानसिक रूप से तैयार किया और फिर तैयार होने लगी. अलमारी से बहुत सारा टीशर्ट निकालने के बाद मुझे यह लाइट पर्पल कलर की टीशर्ट पसंद आई. इस के साथ ब्लैक जींस पहन ली. एक हाथ में ब्रेसलेट और दूसरे में घड़ी पहन ली. पर्स की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि मोबाइल में सबकुछ है. पैरों में सैंडल फंसाए और मां को यह बोल कर घर से निकल गई कि मैं अपनी दोस्त वैभवी से मिलने जा रही हूं थोड़ी देर में आ जाऊंगी.

पीछे से मां चिल्लाईं कि इतने कपड़े क्यों फैला दिए?

तब मैं ने पीछे मुड़ कर कहा, ‘‘सौरी मां, आ कर समेट दूंगी.’’

‘यांगी सिजलर’ रैस्टोरैंट में नीरव पहले से मेरा इंतजार कर रहा था. मुझे देखते ही खड़ा हो गया और खींच कर मेरे लिए कुरसी निकाली. कुछ सैकंड मुझे अपलक देखा और फिर वेटर को 2 कौफी लाने को कह कर हैरी के बारे में पूछने लगा. लेकिन अभी मेरा हैरी के बारे में बात करने में जरा भी इंटरैस्ट नहीं था. मैं चुप थी, कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि बात कहां से शुरू करूं? वैसे तो बहुत बकबक करती रहती हूं लेकिन आज पता नहीं उस के सामने घिग्घी क्यों बंध गई मेरी.

जिस नीरव से मिलने के लिए इतनी उतावली हो रही थी, उस से मिलते ही आज क्या हो गया मुझे कि शर्म से मरी जा रही हूं मैं? मुंह से एक बोल नहीं फूट रहा था. तभी वेटर 2 कप कौफी ले आया. कौफी का मग उस ने मेरी तरफ बढ़ाया तो मेरी आंखें उस की आंखों से जा लड़ीं और मैं ने शरमा कर अपनी नजरें नीची कर लीं. अजीब ही हूं मैं भी. मैं खुद पर खीज उठी.

‘‘तुम कैसी हो?’’ उस ने ही बात शुरू की.

नीरज के मुंह से ‘अपने लिए ‘आप’ की जगह ‘तुम’ संबोधन सुनना मधुर

संगीत जैसा लगा मुझे.

‘‘मैं ठीक हूं, आप कैसे हैं?’’ मैं ने पूछा.

‘‘अच्छा हूं. लेकिन तुम मुझे तुम बुलाओगी तो ज्यादा अच्छा लगेगा,’’ कौफी का घूंट भरते

हुए उस ने मु?ा से मेरी पढ़ाई और आगे का मेरा क्या प्लान है, सब पूछ लिया. अपने बारे में भी बता दिया. यह भी बताया कि उस का एएफसीएटी क्लीयर हो गया और अब वह ट्रेनिंग के लिए जाने वाला है. फिर वह कहने लगा कि फाइटर पायलट बनना उस का सपना था जो आज सच हो गया.

‘‘कौंग्रेट्स,’’ मैं ने उसे बधाई देते हुए कहा, ‘‘मेरे मामा भी फाइटर पायलट थे.’’

‘गुड’ बोलकर वह फिर कौफी का घूंट भरने लगा और यहांवहां की बातें करने लगा तो मुझे चिढ़ हो आई कि हम इस रैस्टोरैंट में करीब डेढ़ घंटे से बैठे हैं लेकिन अभी तक इस ने एक बार भी मुझे ‘आई लव यू’ नहीं बोला. आखिर क्या मकसद है मुझे यहां बुलाने का? मेरा दिल धीरेधीरे टूट रहा था, सच में.

‘‘मां इंतजार कर रही होंगी, मैं चलती हूं,’’ बोल कर मैं जाने के लिए मुड़ी ही कि

पीछे से उस ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला, ‘‘आई लव यू छवि. क्या तुम मेरी जिंदगी में

आना चाहोगी?’’

मैं ने पलट कर उसे आश्चर्य से देखा. लगा, कहीं यह कोई सपना तो नहीं है?

‘‘बोलो छवि, क्या तुम मुझ से शादी करोगी?’’ उस ने फिर वही बात दोहराई तो मैं अचेत से सचेत हो कर उसे देखने लगी. आज उस की आंखों में अलग ही चमक थी.

नीरव हंसते हुए फिर बोला, ‘‘पता है छवि, जब मैं ने तुम्हें पहली बार उस पार्क में देखा था न तभी मु?ो तुम से प्यार हो गया था. लेकिन अपने प्यार का इजहार इसलिए नहीं कर पाया क्योंकि उस वक्त मैं बेरोजगार था. लेकिन अब नहीं हूं. मैं ने शर्म से गरदन नीचे झुका ली और फिर धीरे से हां, कह कर रैस्टोरैंट से बाहर भाग आई.

घर आ कर मैं हैरी को गोद में उठा कर उसे चूमने लगी. खुशी के मारे लग रहा था नाचूंगाऊं क्या करूं क्योंकि आज मुझे मेरा प्यार जो मिल गया था.

मां ने मुझे झांक कर देखा और फिर

कमरे में आ कर बोलीं, ‘‘कौन है वह? नाम

क्या है उस का? करता क्या है?’’ एकसाथ इतने सारे सवाल सुन कर मैं झूठ नहीं बोल पाई और सब कुछ सचसच बता दिया. यह बात सुनते ही मां भड़क गईं कि लड़का यानी नीरव फाइटर पायलट है.

‘‘तो क्या हो गया मां. अरे नीरव को आप मामा से जोड़ कर क्यों देख रही हैं? क्या जो भी फाइटर पायलट बनते हैं जब मर ही जाते हैं? फिर देख लो मां, शादी तो मैं नीरव से ही करूंगी, भले पापा मानें न मानें,’’ बोल कर मैं कमरे से बाहर निकल आई. सोच लिया कि प्यार के इस महीन धागे को कभी टूटने नहीं दूंगी.

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