Hindi Kahaniyan : आद्या रह गई हक्कीवक्की. उस ने अपनी फैमिली डाक्टर वर्षा की सलाह पर उस की ही पैथलैब में कुछ दिनों से लगातार हो रही जलन के निदान के लिए यूरिन इन्फैक्शन के संदेह में यूरिन टैस्ट कराया था. रिपोर्ट में इन्फैक्शन तो आया ही था पर साथ में उस के डाक्टर ने यह भी बताया कि वह गर्भवती भी है. उस ने आश्चर्यचकित हो डाक्टर से कहा, ‘‘रिपोर्ट में जरूर कुछ गड़बड़ी है, ऐसा नहीं हो सकता.’’

‘‘मैं ने इन्फैक्शन के लिए दवा लिख दी है. तुम उसे लेना शुरू कर दो. रही बात गर्भ की तो अपनी लैब में मैं बड़ी सख्ती रखती हूं. रिपोर्ट गलत नहीं हो सकती. फिर भी तुम शांत मन से स्थिति पर विचार करो और फिर बताओ क्या करना है.’’

आद्या ने क्लीनिक के कैंपस में स्थित मैडिकर स्टोर से दवा ली और अपने घर वापस आ गई. वह नोएडा स्थित एक मल्टी नैशनल कंपनी में काम करती थी और नजदीक में ही उस ने अपना निवास ले रखा था. परिवार उस का कानपुर में रहता था. उस की सम?ा में बात नहीं आ रही थी कि वह क्या करे. क्या वह आर्यन से बात करे. घर वालों से इस बारे में बात करना भी गुनाह था. मां तो रोनाधोना मचा देगी. वह तो इस बात के भी खिलाफ थी कि वह नोएडा में आ कर नौकरी करे. उस के खयाल से लड़कियों के लिए पढ़नालिखना तो फिर भी ठीक है पर नौकरी करना बिलकुल गलत है. उस का मानना था कि नौकरीशुदा लड़कियां अपने पति बच्चों को पूरा समय नहीं दे पातीं और इस का परिवार पर बुरा असर पड़ता है. उस पर भी शादी से पहले गर्भवती होना तो बहुत बड़ा गुनाह था उस की निगाह में.

अगर आर्यन अभी का अभी शादी के लिए राजी हो भी जाए तो फिर शादी के 7-8 महीने बाद ही बच्चा होना… जितने मुंह उतनी बातें होंगी और मां के लिए यह सदमा ?ोलना मुश्किल होगा. वैसे भी वह दिल की मरीज है.

ऐसा कैसे हो गया? उस दिन अगर उस ने आर्यन की बात नहीं मानी होती तो बेहतर होता. आज से 3 माह पहले आर्यन अपनी नई नौकरी के सिलसिले में बैंगलुरु जाने वाला था. इस के पहले वह उस के औफिस के बगल में स्थित किसी कंपनी में काम करता था. लंच पीरियड में सभी बाहर निकल ठेले पर तरहतरह के व्यंजनों का आनंद लेते थे. उस सड़क पर दोनों ओर कम से कम 10 औफिस रहे होंगे. चौराहे पर बड़ा सा पार्क था. उस पार्क के सामने दसियों ठेले वाले खाने का सामान उपलब्ध कराते थे. चावलराजमा, साउथ इंडियन से ले कर चाइनीज डिश तक सभी कुछ उपलब्ध था वहां. वैसे सभी औफिस में अपनी कैंटीन थी पर जो चटपटा खाना इन ठेले वालों के पास मिलता था वह कैंटीन में नहीं मिलता था. कैंटीन में लोग बस चाय पीते थे और कुछ विशेष रूप से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग या फिर फुटपाथ पर खाने को अपने स्टेटस के अनुकूल न समझने वाले. अन्य लोग इन ठेलों पर ही लंच करते थे.

आद्या भी अपनी सहकर्मी विधि के साथ एक ठेले पर लंच करती थी. विधि

के कालेज का दोस्त आर्यन भी कभीकभार वहां आ जाता था. पहली बार मुलाकात में ही आर्यन उस पर फिदा हो गया. वह बिना नागा लंच में उस से मिलने लगा. कई बार वे शाम को भी किसी पार्क, किसी रेस्तरां में मिलने लगे और यहां विधि उन के बीच मध्यस्थ के रूप में नहीं रहती थी. धीरेधीरे एकदूसरे के घर भी आनाजाना होने लगा.

धीरेधीरे हाथ मिलने से दिल मिलने का सफर तय हो गया. दोनों एकदूसरे को चाहने लगे. पहले फ्लाइंग किस का आदानप्रदान होने लगा फिर फ्लाइंग किस लैंड भी करने लगा और फिर सबकुछ. इतना था कि दोनों सुरक्षा का पूरा खयाल रखते थे. आर्यन जब भी उस के पास इस उद्देश्य से आता कंडोम जरूर लाता. जिस दिन कंडोम नहीं होता उस दिन किसी और तरीके से एकदूसरे को संतुष्ट कर देते पर असुरक्षित सैक्स नहीं करते.

आद्या को किसी और तरीके से संतुष्टि में वह बात नजर नहीं आती थी. अत: उस ने भी अपने पास कंडोम रखना शुरू कर दिया. हां, इस बात का वह खयाल रखती थी कि कंडोम ऐसी जगह पर न रखे जहां गाहेबगाहे घर से आए किसी सदस्य की नजर पड़ जाए.

आज से 3-4 महीने पहले लंच में जब दोनों मिले तो आर्यन ने खुशखबरी दी, ‘‘मु?ो एक बहुत अच्छी कंपनी में जौब मिल गई है. आज मेरा यहां आखिरी दिन है. कल ही मैं बैंगलुरु के लिए निकल जाऊंगा.’’

‘‘अरे वाह, यह तो बहुत अच्छी बात है. फिर पार्टी तो बनती है,’’ आद्या ने कहा.

‘‘यह भी कोई कहने की बात है. आज शाम को रैस्टोरैंट में चलते हैं,’’ कह कर आर्यन ने इशारों में उसे किस कर लिया. जवाब में आद्या ने भी डबल किस उछाल दिया.

शाम को दोनों डिनर ले कर लौटे तो आर्यन उसे अपने घर ले गया. थोड़ी देर

इधरउधर की बातें होती रहीं. फिर आद्या अपने घर वापस आने के लिए उन्मुख हुई.

‘‘फिर कब लौटना होगा यह निश्चित नहीं. आज तो कुछ बनता है,’’ आर्यन ने रोमांटिक हो कर कहा.

‘‘नहीं, वापस आओ फिर कुछ बनेगा. आज कुछ बन जाएगा तो फिर तुम निश्चिंत हो कर वहीं रह जाओगे कई दिन,’’ आद्या ने बनावटी तरीके से मना किया.

‘‘बेबी, ऐसा क्यों सोचती हो. मैं तुम्हारे बिना कितने दिन रह पाऊंगा. देखना हफ्ते 2 हफ्ते में तो तुम्हारे पास आना ही होगा मु?ो,’’ आर्यन गिड़गिड़ाया.

इच्छा तो आद्या की भी थी पर उस ने यों ही मना किया, ‘‘अच्छा, छाता ले कर आओ,’’ उस ने आर्यन से कहा.

‘‘डार्लिंग, बातों ही बातों में छाता लाना तो भूल ही गया,’’ आर्यन ने घबरा कर कहा.

‘‘फिर?’’ आद्या ने प्रश्न किया.

आर्यन अफसोस की मुद्रा में खड़ा रहा. आद्या को उस पर दया आई या उस

की ही इच्छा जग गई, ‘‘चलो एन पी रहेगा.’’

‘‘एन पी क्या?’’ आर्यन ने पूछा.

‘‘अरे बुद्धू नौन पेनेट्रेटिव,’’ आद्या ने शोखी के साथ आंखें नचाते हुए कहा.

फिर दोनों एकदूसरे को चूमतेसहलाते चले गए. कुछ देर के बाद आद्या को महसूस हुआ कि इस क्रिया को अब समाप्त किया जाए तो उस ने अपने हाथों को गति दी.

‘‘जानूं, कल मैं जा रहा हूं, फिर कितने दिनों के बाद मिल पाऊंगा. आज तो खुल कर आनंद लेने दो,’’ आर्यन ने आद्या के हाथ को रोक उस के वक्ष को चूमते हुए कहा.

‘‘अब कंडोम तो तुम्हें रखना चाहिए था. मैं क्या मना करती?’’ आद्या ने आर्यन से चिपकते हुए कहा.

‘‘कुछ नहीं होगा स्वीटहार्ट. प्लीज मान जाओ न,’’ आर्यन गिडगिड़ाया.

आद्या ने चेहरा तो बनाया पर कहीं न कहीं सहमति भी दिखी आर्यन को. फिर क्या था वह ?ाट उस के ऊपर आ गया और फिर कंडोम को भूल गए वे.

‘ऐसा ऐसे हो गया शायद,’ आद्या ने सोचा. उस ने आर्यन को फोन मिलाया. ‘‘हैलो डार्लिंग,’’ आर्यन ने फोन उठाया.

‘‘आर्यन, उस दिन की गलती बहुत बड़ी भूल बन गई हमारे लिए. मैं प्रैगनैंट हो गई हूं,’’ आद्या ने कहा.

‘‘क्या?’’ आर्यन चौंका. उस ने कहा, ‘‘तुरंत अबौर्शन करवा लो.’’

‘‘तुम कुछ दिनों के लिए आ जाओ न?’’ आद्या ने क्षीण स्वर में कहा, ‘‘3 महीने से ऊपर हो गए तुम एक बार भी नहीं आए.

‘‘आद्या मेरी कंपनी मु?ो 2 वर्षों के लिए स्वीडन भेज रही है. अगले सप्ताह ही मु?ो जाना है. मेरे लिए संभव नहीं हो पाएगा,’’ आर्यन ने रूखे शब्दों में कहा.

‘‘आर्यन, 3 महीने से ऊपर हो चुके हैं, अबौर्शन कराना संभव हो भी पाएगा या नहीं कह नहीं सकती,’’ आद्या ने कहा.

‘‘इस का क्या इलाज है. तुम पढ़ीलिखी लड़की हो. कैसे 3 महीने से तुम्हें पता नहीं चला कि तुम गर्भवती हो?’’ आर्यन क्रुद्ध हो कर बोला, ‘‘मैं एक बहुत जरूरी मीटिंग में हूं, फुरसत में होने पर तुम से बात करूंगा.’’

आर्यन के जवाब से सन्न रह गई आद्या. जब से वह बैंगलुरु गया था कभी उस ने फोन नहीं किया. आद्या फोन करती तो जरूर वह मीठीमीठी बातें करता. पर उस की एक बात उस के कानों में गूंज रही थी, ‘‘तुम पढ़ीलिखी लड़की हो. कैसे 3 महीने से तुम्हें पता नहीं चला कि तुम गर्भवती हो?’’

यह सही है. उस के पीरियड्स तो लगातार आते रहे हैं. फिर वह गर्भवती कैसे हो

सकती है? गर्भवती होने के जो भी लक्षण वह जानती है उन में एक भी लक्षण नहीं उस के

शरीर में. वह दौड़ीदौड़ी डाक्टर के पास गई.

डाक्टर उसे देख मुसकराई, ‘‘कुछ निर्णय ले लिया है आप ने शायद?’’

‘‘निर्णय नहीं डाक्टर. मु?ो लगातार पीरियड्स आते रहे हैं फिर मैं गर्भवती कैसे हो सकती हूं?’’ उस ने कहा.

‘‘क्या?’’ डाक्टर चौंकी, ‘‘ऐसा कैसे हो सकता है? अच्छा आप पानी पी कर बैठो यदि यूरिन पास करने की इच्छा हो तो बताना आप की सोनोग्राफी करूंगी,’’ डाक्टर ने कहा.

आद्या ने उस के बताए अनुसार पानी पी लिया. सोनोग्राफी टैस्ट में ऐसी कोई बात नहीं आई.

‘‘आप याद करो यूरिन टैस्ट के लिए सैंपल आप ने कैसे दिया था? कहीं दूसरे के सैंपल से यह बदल न गया हो,’’ डाक्टर ने कहा.

आद्या ने अपनी याददाश्त पर जोर दिया.

उस ने यूरिन का सैंपल यूरिनल में रख दिया था. बाद में उसे याद आया था कि पाट पर उस ने अपना नाम का परचा तो लगाया ही नहीं. उस ने नर्स को कह कर अपने नाम का परचा लिया था. यूरिनल में जा कर पाट पर अपने नाम का परचा चस्पा किया था. शायद गलती से उस ने किसी और के सैंपल पर अपने नाम का परचा लगा दिया था या फिर परचा ठीक से चिपका न होने के वजह से हट गया होगा. उस ने यह बात डाक्टर को बताई.

‘‘फिर तो सैंपल ऐक्सचेंज का मामला है. ऐसी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए,’’ डाक्टर ने गंभीरतापूर्वक कहा.

‘‘सौरी डाक्टर,’’ आद्या ने कहा और घर वापस आ गई.

एक भूल ने उसे कितना तनाव दिया पर इसी भूल ने उसे आर्यन का असली चेहरा भी

दिखा दिया.

अब समय था आर्यन को सबक सिखाने का. उस ने उसे मैसेज किया, ‘‘मैं ने निर्णय लिया है कि मैं तुम्हारे खिलाफ मुकदमा करूंगी. सुबूत मेरी कोख में है. तुम अच्छी तरह जानते हो कि इस अपराध के लिए तुम्हें क्या सजा मिलेगी.’’

आद्या का मैसेज पाते ही आर्यन का

दिमाग ठंडा हो गया. उस ने आद्या को तुरंत फोन किया और सम?ाने की कोशिश की कि वह

2 वर्ष के बाद स्वीडन से वापस आ कर उस से शादी करेगा.

मगर आद्या का दिल उस के व्यवहार से बिलकुल उखड़ गया था. उस ने यह तो निर्णय ले ही लिया था कि अब वह आर्यन से ब्रेकअप कर लेगी पर साथ ही यह भी सोच लिया था कि उसे सबक जरूर सिखाएगी.

‘‘तुम्हें जो करना हो करना पर मु?ो क्या करना है मैं निर्णय कर चुकी हूं. मेरा वकील

3 दिनों के लिए बाहर गया है. वह आते ही तुम्हें और तुम्हारी कंपनी को नोटिश दे देगा. उस से सलाह ले कर ही मैं एफआईआर करूंगी.’’

‘‘आद्या तुम गलत कर रही हो. हम दोनों एकदूसरे से प्यार करते हैं. जो भी हुआ है सहमति से हुआ है. कोई मामला बनता ही नहीं है और फिर मैं कहां मना कर रहा हूं. इस बार प्लीज अबौर्शन करवा लो. 2 साल बाद मैं आ कर तुम से शादी करूंगा फिर हम बच्चे करेंगे,’’ आर्यन के स्वर में डर साफ ?ालक रहा था.

आद्या यही चाहती भी थी. उस ने आर्यन के फोन काल, मैसेज सभी को इगनोर करना शुरू कर दिया.

तीसरे दिन आर्यन उस के फ्लैट पर आ गया. बहुत ही नाराज हो कर बोला, ‘‘आद्या,

मैं नहीं जानता था कि तुम ऐसा रुख अपनाओगी.’’

‘‘अरे, तुम तो स्वीडन जाने वाले थे और

2 वर्षों के बाद आने वाले थे. इतनी जल्दी कैसे आ गए?’’ आद्या ने व्यंग्यपूर्वक कहा.

‘‘क्या करता? किसी तरह मौका निकाल कर आया हूं. तुम ने न मैसेज का जवाब दिया न फोन उठाया,’’ आर्यन नाराज हो कर बोला.

‘‘नाराज क्यों हो रहे हो? एक खुशखबरी सुनाऊं तुम्हें? नाराजगी दूर हो जाएगी,’’ आद्या

ने कहा.

आर्यन कुछ बोला नहीं बस आद्या को उत्सुकता से देखता रहा.

आद्या बोली, ‘‘मैं गर्भवती नहीं हूं. सैंपल चेंज होने के कारण यह धोखा हुआ था,’’ आद्या

ने कहा.

सुन कर काफी राहत महसूस की आर्यन ने. उस के चेहरे से तनाव जाता रहा. पर फिर

एकाएक गुस्से में आ कर बोला, यही बात तुम मु?ो फोन पर बता देती तो मु?ो आने की जहमत नहीं उठानी पड़ती.’’

‘‘लेकिन मैं चाहती थी कि तुम आओ,’’ आद्या ने कहा.

‘‘क्यों?’’ आर्यन ने पूछा.

‘‘इसलिए कि इस घटना ने मु?ो तुम्हारा असली चेहरा दिखा दिया है. अब मैं अंतिम बार तुम्हारा चेहरा देख रही हूं. अब जाओ यहां से

और कभी मु?ा से कोई संपर्क

मन रखना जाओ.’’ आद्या ने

इतनी नफरत से कहा कि आर्यन वहां रुक नहीं पाया और बाहर निकाल गया.

आद्या ने अंदर से फ्लैट का दरवाजा बंद कर लिया. आर्यन दरवाजे को बंद होते देख धीरेधीरे वहां से वापस चला गया.       द्य

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