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अपनी बात समाप्त करने के बाद मैं सचमुच ही रोने लगी. पिछले 10 दिनों से मन में सुमित की धोखेबाजी को ले कर जो आक्रोश इकट्ठा था, वह अचानक आंसुओं के साथ बह निकला.

सुमित अपनी सफाई में कुछ कहते उस से पहले ही आंसू बहाती माधवी मेरे सामने आ खड़ी हुई. मेरे सच्चे आंसुओं के कारण शायद उसे भी दुखी व शर्मिंदा दिखने में ज्यादा अभिनय नहीं करना पड़ रहा था.

‘‘मुझ से भारी भूल हुई है, सपना. मुझे माफ कर दो. मुझे नहीं मालूम था कि अपने मनोरंजन के लिए मैं ने खेलखेल में अपनी सब से अच्छी सहेली के पति पर डाका डाला है. मैं बहुत शर्मिंदा हूं, सहेली,’’ माधवी ने बड़े भावुक अंदाज में मेरे सामने हाथ जोड़ दिए.

माधवी ने अपने अवैध प्रेम संबंध को स्वीकार कर लिया, तो सुमित के पास और झूठ बोलने की गुंजाइश नहीं रही. वे फटीफटी आंखों से कभी मेरा तो कभी माधवी का चेहरा ताकने लगे.

माधवी और मेरा शानदार अभिनय करना जारी रहा, ‘‘इस शख्स के प्रति मैं तनमन से पूरी तरह समर्पित हूं और बदले में क्या दिया इन्होंने मुझे? धोखा, मक्कारी, झूठ के अलावा कुछ नहीं. मेरा दिल करता है कि या तो आत्महत्या कर लूं... या तलाक ले लूं इस झूठे इंसान से,’’ मेरी आवाज नफरत से भर उठी.

‘‘जरा शांति से काम लो, सपना, और...’’

‘‘अपनी जबान से मेरा नाम मत लो,’’ मैं इतनी जोर से चिल्लाई कि सुमित कूद कर पीछे हट गए.

‘‘तुम खामोश रहो, सुमित. मुझे अपनी सहेली से बात करने दो,’’ जब माधवी ने भी उन्हें गुस्से से घूरा तो सुमित के आत्मविश्वास का गुब्बारा बिलकुल ही पिचक गया.

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