Romantic story : दो नाव की सवारी तो सुनी होगी लेकिन देखी. नहीं देखी तो कोई रुचि को ही देख ले. जो दो नाव यानि कि 2 बौयफ्रेंड की प्यार की कश्ती पर सवार है. जहां लोग एक रिलेशनशिप में तालमेल नहीं बना पाते. रुचि 2 रिलेशनशिप में बैलेंस बनाए हुए हैं.
मगर सोचने की बात तो यह है कि यह बैलेंस आखिर कब तक बना रहेगा. एक न एक दिन तो किसी एक ही नाव में हमेशा के लिए बैठना होगा. लेकिन नाव होगी किस की? मिस्टर मसल की या मिस्टर ब्रेन की?
‘‘अब यह क्या नया नाटक है मिस्टर मसल, मिस्टर ब्रेन?’’ हेमा परेशान हो बोली.
रुचि ने जवाब दिया, ‘‘मेरा मतलब रोहित और अर्जुन से था. रोहित की मसल, उस की बौडी, फिटनैस, फ्लर्ट करने का अंदाज, मौजमस्ती का नैचर बहुत आकर्षित है. वहीं दूसरी तरफ है अर्जुन. जो बहुत शार्प माइंड, डिसिप्लिन, मैच्योर, केयरिंग और इंजिनियर है. तो बता भला मु?ो दोनों से प्यार कैसे नहीं होगा.
हेमा ने ?ोप कर जवाब दिया, ‘‘प्यार नहीं अट्रैक्शन है. प्यार में सैक्रिफाइस करना होता है. अगर तेरा अट्रैक्शन प्यार है तो किसी एक की चाहत को छोड़ कर सिर्फ एक के साथ आगे
बढ़ो. कौंप्रोमाईज, एडजस्ट कर जो पूरी दुनिया करती है.’’
‘‘लेकिन मु?ो दोनों पसंद हैं. अर्जुन सीरियस है. ऐंजोय करता है लेकिन अपनों के साथ, मेरे साथ, पेरैंट्स और कुछ खास दोस्त जो यहां है भी नहीं, दुनिया के दूर कोने में वह भी काम कर रहे हैं. उस के साथ डिनर पर जाना एक शांत जगह जाना है.
‘‘लेकिन रोहित का साथ कोई डिस्को या क्लब, जहां डांस हो, लाउड म्यूजिक हो और जहां हरकोई उस का दोस्त बन जाए. अर्जुन की लोंग ड्राइव रोमांटिक म्यूजिक के साथ हर ट्रैफिक रूल को फौलो करती है. वहीं रोहित की बाइक तेज स्पीड में ट्रैफिक को चीरते हुए हवा पर सवार. रोहित लाइफ में एक उत्साह भरता है और अर्जुन एक सुकून भरा ठहराव. इसलिए मु?ा से कौंप्रोमाइज नहीं होगा. मैं अपनी इच्छाएं नहीं छोड़ सकती.’’
‘‘ठीक है तो एक दिन यह तुझे ही छोड़ देगी.’’
रुचि को हेमा का ताना अच्छा नहीं लगा. उस ने हेमा से मुंह फेरा और अपने बैड पर जा कर सो गई.
हेमा और रुचि दोनों कालेज में मिले और बेस्ट फ्रैंड बन गए. कालेज के बाद दोनों ने अलगअलग जौब ली लेकिन साथ नहीं छोड़ा. पहले दोनों हौस्टल में रूममेट थीं और अब एक पीजी में रूममेट.
दोनों सुबह साथ औफिस निकलते, शाम को भी लगभग एक ही समय में आते. रुचि जहां केयरफ्री लड़की है, वहीं हेमा समय की पाबंद.
एक शाम रुचि अपने औफिस से निकली ही थी कि रोहित का फोन आ गया.
‘‘हां रोहित बोलो.’’
‘‘कहां हो. मैं लेने आता हूं.’’
‘‘लेने, लेकिन क्यों? आज क्या है? कहां जाना है.’’
‘‘अरे बस ऐसे ही. चलो न क्लब चल के कुछ कोल्ड ले, ‘डिनर करे’ साथ में.’’
‘‘अच्छा ठीक है.’’
‘‘हां तो मैं आता हूं लेने. तुम औफिस के पास हो न.’’
‘‘नहीं. मैं ने कितनी बार बोला है औफिस नहीं आना. मेरे औफिस के लोग बड़े बातूनी और चुगलखोर हैं और बौस को भी लवर्स का आनाजाना नहीं पसंद, वह गुस्सा करते हैं. कुछ को तो नौकरी से निकाल भी दिया.’’
‘‘तुम्हारे औफिस के लोग और तुम्हारा
बौस, 21वीं सदी में सन 70 की सोच ले कर बैठे हैं. भला यह सब किस औफिस में चलता है?’’
‘‘तुम वह छोड़ो. मैं सीधा क्लब आती हूं.’’
1 घंटे बाद रुचि क्लब पहुंच गई. वहां पहले से रोहित मौजूद था और अपने दोस्तों के साथ डांस कर रहा था. रोहित अपने दोस्तों के साथ आया नहीं था. दरअसल, वह दोस्त थे जो उस ने अभीअभी क्लब में ही बनाए थे. रुचि भी उन के साथ डांस में शामिल हो गई. कुछ देर के बाद दोनों बातें करने लगे कि इसी बीच अर्जुन का फोन आया जो रुचि ने टीमलीडर के नाम से सेव किया था. स्क्रीन पर टीमलीडर देख रोहित बोला, ‘‘तुम्हारे औफिस वालों को छुट्टी के बाद भी चैन नहीं,’’ रुचि फोन ले कुछ दूर गई और अर्जुन से बात करने लगी.
‘‘हां अर्जुन.’’
‘‘कैसी हो? और यह म्यूजिक क्यों इतना तेज बज रहा है?’’
‘‘अरे मैं कुछ फ्रैंड के साथ क्लब आई हूं.’’
‘‘औफिस से सीधा क्लब? बड़ी ऐनर्जी
है तुम लोगों में. वीकेंड का वेट भी नहीं किया. ठीक है तो क्या बात करें.’’ तुम ऐंजोय करो. लेकिन ज्यादा मत खाना और टाइम से घर
चली जाना.’’
‘‘हां पक्का, मैं ऐसा ही करूंगी.’’
फोन कट कर रुचि वापस रोहित के पास
आई. दोनों ने कुछ देर और साथ में गुजारा और फिर अपनेअपने घर निकल गए.
घर पर पहुंचते ही हेमा ने अपने सवालों की लड़ी लगा दी.
‘‘कहां थी? ब्रेन के साथ? या मसल? और कल औफिस है न तो वीकेंड का इंतजार नहीं कर सकती थीं ड्रिंक करने के लिए.
‘‘तुम्हें कैसे पता मैं ने ड्रिंक की है?’’
‘‘मुंह से बू आ रही है. 1 गिलास पियो या 1 बोतल बू तो आती ही है.’’
‘‘ओह अच्छा.’’
‘‘वैसे, रोहित ने बोला, चलते हैं तो बस थोड़ी मस्ती हो गई.’’
‘‘एक तो वह रोहित आवारा. सिर्फ बाइसेप्स फुलाता है और तू उस के चक्कर में अपनी नौकरी की भी कोई कदर नहीं करती.’’
‘‘अरे वह कैसे? मैं जौब के बाद गई न.’’
‘‘हां और यह भूल गई कि आज तु?ो अपना काम पूरा करना है. जो तू रोहित के चक्कर में 3 दिन से टाल रही थी. कभी रोहित मूवी ले गया, तो कभी डिनर.’’
‘‘और आज तो तू पी कर आई है. बोल अब कर लेगी प्रेजैंटेशन पूरा इस नशीली आंखों को रातभर खोल के.’’
रुचि को अपनी गलती का सिर्फ एहसास ही नहीं हुआ बल्कि डर भी लगने लगा. अपना नशा दूर करने के लिए पहले वह नहाई और फिर एक स्ट्रौंग कौफी बना कर उसे पीने लगी कि अर्जुन का फोन आया.
‘‘हैलो.’’ रुचि ने कहा.
‘‘रुचि घर पहुंच कर फोन करना चाहिए न. एक तो तुम ने आज ड्रिंक की थी ऊपर से कोई फोन भी नहीं किया. क्या लेट आई तुम?’’
‘‘नहींनहीं मैं टाइम से आ गई थी. बस टैंशन में हूं.’’
‘‘क्या टैंशन? क्या कोई बात हुई क्लब में?’’
‘‘नहीं ऐसा कुछ नहीं हुआ. वह मैं भूल गई कि औफिस का एक प्रेजैंटेशन बहुत टाइम से नहीं किया और कल उसे दिखाना है. बस उस की टेंशन है. इसलिए अब नहा कर कौफी पी रही हूं ताकि ड्रिंक सिर से उतर जाए.’’
‘‘अच्छा तो क्या उतर गई?’’
‘‘नहीं मुझे तो नींद आ रही है.’’
‘‘तुम सेंसिबल और रिस्पोंसिबल बनो थोड़ा. अब कालेज छुट गया है तो कालेज की हरकतें भी छोड़ो. पहले काम पर ध्यान दिया करो फिर मौजमस्ती पर.’’
‘‘यार डांटो मत. मैं पहले से टैंशन में हूं.’’
‘‘ठीक है. काम करो नहीं तो दूसरी नौकरी देखनी पढ़ेगी.’’
अर्जुन के फोन रखते ही रुचि ने खुद को गालियां दी और फिर अपना लैपटौप खोल काम करने लगी. इस बीच उसे कई बार झपकी आती और हर बार वह खुद को जगा कर काम पर लगती. मगर एक झपकी ऐसी आई कि जब आंख खुली तो सवेरा हो चुका था. रुचि सकपका कर उठी और अपने लैपटौप की स्क्रीन को ताकने लगी. रुचि ने देखा की रातभर में वह सिर्फ आधा पेज ही कर पाई है.
उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे, क्या नहीं. उस ने मदद के लिए हेमा को पुकारा. लेकिन हेमा ने कहा, ‘‘मुझे यह सब नहीं आता. मैं एक नर्स हूं कोई टेकनर्ड नहीं.’’
टेकनर्ड शब्द ने रुचि के दिमाग में घंटी बजाई और उस ने अर्जुन को फोन किया. अर्जुन को अपना दुखड़ा सुना रुचि ने वही सुना जो वह अर्जुन से सुनना चाहती थी. अर्जुन ने कहा, ‘‘अरे भेजो तुम अपने नोट्स और पौइंटर और वह अधूरी प्रेजैंटेशन.’’ रुचि ने फट से सब भेज दिया और नहाने चली गई.
रुचि के नहाने, नाश्ता करने से औफिस पहुंचने तक के समय में अर्जुन ने उस की पूरी प्रेजैंटेशन बना उसे एक मैसेज के साथ भेज दी, ‘‘लो सब पढ़ कर चैक करो और हां, याद रखना यह मदद लास्ट है.
मु?ो वह लोग बिलकुल पसंद नहीं जो अपने काम को सीरियस नहीं लेते.’’ अर्जुन का मैसेज देखते ही रुचि की आंखें चमक उठीं. उस ने प्रेजैंटेशन चैक की और अर्जुन का काम देख उलटा इस सोच में पढ़ गई कि औफिस में कोई विश्वास ही नहीं करेगा कि यह मैं ने बनाई है. मगर उस की मुश्किल तो दूर हो गई यह सोच उस ने ढ़ेर सारी स्माइली अर्जुन को मैसेज कर दी. कुछ देर बाद औफिस में रुचि की प्रेजैंटेशन देख सब हैरान और खुश थे. लेकिन जो 2 साथी रुचि के करीब थे उन्होंने उस से अकेले में कहा, ‘‘सच बता किस ने बनाई?’’
‘‘अरे इतना परफैक्शन तुझ में तो नहीं है. ऐक्सपर्ट हैल्प ली या पैसे दे कर बनवाई?’’
अर्जुन की हैल्प और अपनी तारीफ से रुचि बहुत खुश थी इसलिए उस ने अर्जुन के साथ डिनर पर जाने का प्लान बनाया. शाम को दोनों एक रेस्तरां में मिले. अर्जुन ने खातेखाते कहा, ‘‘लेकिन आदत मत बनाना तुम. मैं हर बार तुम्हारे औफिस का काम नहीं करूंगा.’’
रुचि ने मासूम चेहरा बना कहा, ‘‘यह काम नहीं हैल्प थी न.’’
अर्जुन ने भी साफ शब्दों में कहा, ‘‘ऐसी हैल्प तुम मुझे से पहले भी 3 बार करा चुकी हो. तुम्हारी लापरवाही मैं भरता हूं. अगर यह प्रेजैंटेशन तुम खुद बनाते हुए मुझ से कुछ पूछती, सीखती तो वह हैल्प होती. इसलिए साथ बैठ कर सीख लो बजाय इस के की मैं पूरा कर के दूं.’’
रुचि नाराजगी दिखाते हुए, ‘‘यार, मैं ने
नहीं बोला था करने को, तुम ने खुद सामने से मांगा था.’’
अर्जुन ने फिर साफ शब्दों में कहा, ‘‘वह इसलिए कि मैं नहीं चाहता था तुम्हारी नौकरी
पर तलवार लटक जाए, आखिर प्यार भी तो करता हूं.’’
अगले दिन से वही आम चक्कर फिर से चला औफिस से घर, घर से औफिस और जब वीकेंड आया तो सैटरडे रोहित से साथ और संडे अर्जुन. रुचि को भी यों दो नाव में सवार होना कभीकभी अच्छा नहीं लगता था लेकिन इस के अलावा उसे कोई रास्ता सूझता भी नहीं था क्योंकि उसे अर्जुन और रोहित दोनों पसंद थे.
फिर एक शुक्रवार की सुबह अर्जुन ने रुचि को फोन पर कहा, ‘‘कल मेरे पेरैंट्स आ रहे हैं. सोच रहा तुम्हें मिला दूं.’’ यह सुनते कि रुचि ने दबी आवाज में कहा, ‘‘इतनी जल्दी…’’ अर्जुन ने उसे झट से जवाब दिया, ‘‘जल्दी 2 साल से डेट कर रहे हैं. यह तुम्हें जल्दी लगता है?’’ रुचि अर्जुन की बात सुन घबरा गई और बात को पलटी दे फट से कहा, ‘‘अरे नहीं मेरा मतलब कल इतनी जल्दी है. मुझे तैयार होना होगा न.’’
अर्जुन ने कहा, ‘‘तैयार… तैयारी क्या
करनी है?’’
‘‘ठीक तो हो जैसी हो.’’
फिर उसी शाम रोहित का मैसेज आया कि वह आज रात ही दोस्तों के साथ वीकेंड ट्रिप पर बाहर जा रहा है. इस पर रुचि को तसल्ली हुई कि वह अब आराम से अर्जुन के पेरैंट्स से मिलेगी.
अगली दोपहर रुचि सुंदर कुरती पहन, तैयार हो अर्जुन के घर पहुंच गई.
लंच परोसा गया. अर्जुन की मां ने बहुत कुछ बनाया था, जो बहुत टेस्टी भी था. अर्जुन के पापा ने रुचि से उस की पढ़ाई, जौब, फैमिली के बारे में बहुत कुछ पूछा लेकिन मां खामोश सिर्फ रुचि को निहार रही थी.
खाने के बाद सभी ने साथ मिल कर एक फिल्म देखी और फिर शाम की चाय रुचि ने बनाई. चाय की चुसकियां लेते हुए अर्जुन की मां ने रुचि से पूछा, ‘‘तो तुम अर्जुन को ले कर सीरियस हो न. सिर्फ इसी से शादी करनी है न?’’ सभी को यह सवाल थोड़ा अटपटा लगा खासकर रुचि को. उसे तो ऐसा लगा जैसे अर्जुन की
मां रुचि उस की डबल लवस्टोरी की भनक रखती हो.
रुचि का उड़ा भाव देख कर अर्जुन ने मां को अपनी हंसी से ढकने की कोशिश की, ‘‘अरे मां आप भी… रुचि को शौक कर दिया.’’ अर्जुन की हंसी पर मां ने कहा, ‘‘पूछना पड़ता है अर्जुन. आजकल बच्चे प्यार और शादी को ले कर कन्फ्यूज रहते हैं. बहुतों को यह भी नहीं पता उन्हें प्यार है या अट्रैक्शन.’’
रुचि मां की बातों से घबराए हुए थी लेकिन सब के सामने अपनी समझदारी का कुछ नमूना तो उसे दिखाना था इसलिए उस ने मां की बात पर सहमति दिखाते हुए कहा, ‘‘बहुत सही कह रही हैं आंटी.’’
रात में रुचि को पीजी ड्रौप करते हुए अर्जुन ने पूछा, ‘‘क्या हुआ? मां का स्टाइल पसंद नहीं आया?’’
रुचि ने मुसकरा कर कहा, ‘‘नहीं, ऐसा
नहीं है.’’
‘‘चलो फिर कल मिलते हैं.’’
रुचि एक स्माइल के साथ गाड़ी से उतरी और पीजी को चली गई.
रुचि कहां रहती है, किस के साथ रहती और कहां काम करती है यह सिर्फ अर्जुन को पता था रोहित को नहीं. जिस की पहली वजह थी कि अर्जुन रोहित से बहुत पहले रुचि की जिंदगी का हिस्सा बना था. साथ ही अर्जुन बहुत सजह और समझदार है, जो सोसाइटी के तौरतरीकों को फौलो करता है. आवारा आशिकों की कोई हरकत नहीं करता.
बिस्तर पर कई करवटें लेने के बाद भी रुचि को नींद नहीं आ रही थी. अर्जुन की मां का सवाल बारबार उसे परेशान कर रहा था. ऊपर से रोहित के ढेर सारे मैसेज का रिप्लाई देना भी उसे एक आफत लग रहा था कि इसी बीच रोहित ने कौल कर दिया. रोहित का फोन उठा रुचि ने कहा, ‘‘हां, क्या हुआ. थोड़ा बिजी थी यार इसलिए रिप्लाई नहीं किया.’’
‘‘ओह, अच्छा मुझे लगा कि मेरी रुचि नाराज है कि मैं वीकेंड पर उस के साथ नहीं. मुझे भी हर शानिवार तुम्हारे साथ रहने की आदत हो गई है न. तुम्हारी बातें, हमारा डांस, शौपिंग, तुम्हारी जिद्द बहुत याद आ रही है. मैं तो सोच ही रहा था कि तुम्हारे पास आने के लिए अभी आधी रात में ही वापसी कर लेता हूं.’’
‘‘नहीं ऐसा कुछ नहीं है. कमरे की साफसफाई में पूरा दिन निकल गया. मैं थक गई हूं, सो जाती हूं.’’
‘‘ओह ठीक है.’’
रुचि ने फोन तो रख दिया लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी. पहले तो उसे अर्जुन की मां का सवाल बेचैन कर रहा था और अब रोहित का कहना कि वह रुचि के लिए आधी रात को वापस आ रहा था. उसे लगा रोहित इतना प्यारा है जो यह सोच कर वापस आ रहा था कि कहीं उस की रुचि नाराज तो नहीं. रोहित का यह सब कहना उस का दिल पिघला रहा था.
अगली शाम रुचि को साड़ी में देख अर्जुन को बहुत आश्यर्च हुआ और खुशी भी कि अब उस के पेरैंट्स की नजर में रुचि फिट आने लगेगी. अर्जुन की मां ने एक हलकी सी मुसकान रुचि को दी और पापा ने लुक्स की तारीफ की.
‘‘2 साल के रिश्ते में मैं ने तुम्हें आज तीसरी बार साड़ी में देखा है और वह भी सामने. नहीं तो पिछले 2 बार तसवीर में ही देखा था. तो मैं कह सकता हूं यह सब मेहनत मेरे लिए की है. है न?’’
‘‘ज्यादा खुश मत हो. मैं ने सिर्फ तुम्हारी मां का मूड अच्छा कर ने लिए साड़ी पहनी है.’’
‘‘अच्छा तो यह मां को बताना चाहिए,
क्या पता खुश हो कर वह आज हमारी सगाई ही कर दे.’’
‘‘क्या,’’ रुचि अर्जुन की बातों से खुश होने की जगह परेशान हो गई. उसे लगने लगा कि साड़ी पहन कर उस ने गलती कर दी.
‘‘ध्यान कहां है तुम्हारा?’’
‘‘चलो…’’ अर्जुन ने कहा.
‘‘नहीं….’’ रुचि बड़बड़ाई.
‘‘क्या नहीं.’’
अर्जुन गहरा स्वर रुचि को उस के खयालों के सागर से निकालता है. रुचि अपनी उल?ानों में यों उल?ा थी. अब रुचि क्या जवाब देती कि वह सगाई की फांसी अपने गले में देख कर नहींनहीं कर रही थी. नहीं न. इसलिए वह एक छोटी सी स्माइल दे शांत खड़ी रही.
अर्जुन की मां ने कहा कि वह आज रुचि को ट्रीट देना चाहती है. उन की यह बात सुन अर्जुन और रुचि दोनों बहुत खुश हुए.
रेस्टोरैंट में अभी डिनर और्डर किया ही था कि रुचि का फोन बज पड़ा.
स्क्रीन पर रोहिणी लिखा आ रहा था. रुचि फोन ले कर एक कोने में गई. इस पर मां ने अर्जुन
की तरफ देखा तो उस ने कहा, ‘‘रोहिणी रुचि
की ?ागड़ालू कजिन है. मैं अभी मिला नहीं क्योंकि रुचि बताती है कि वह बहुत आग
लगाऊ है. उस के घर कोई सीन न बने इसलिए नहीं मिलते.’’
‘‘क्या हुआ रोहित?’’ रुचि फोन पर गुर्राई.
‘‘मैं ने कहा न तुम आराम से ऐंजोय करो.’’
‘‘देखा मुझे पता था कि तुम मेरे जाने से नाराज हो इसलिए मैं सीधा तुम्हारे पीजी ही
आ गया.’’
रोहित की बात ने रुचि को हिला दिया.
उस ने रोहित से फिर पूछा, ‘‘क्या… क्या कहा
तुम ने?’’
‘‘हां बेबी ‘मैं तुम्हारे पीजी के पास ही खड़ा हूं. डरो मत तुम्हारी लैंड लेडी को नहीं दिखाई दूंगा. अब बस तुम जल्दी से नीचे आ जाओ. हम एक राइड पर चलेंगे और आइसक्रीम खाएंगे.’
‘‘आइसक्रीम… और मेरे डिनर ट्रीट का क्या?’’ यह मन ही मन रुचि ने कहा. ‘‘अरे आओ न बेबी.’’ रोहित ने फोन पर कहा.
रुचि ने कुछ ही सैकंड में बहुत सा गुनाभाग लगा लिया. उस ने रोहित को रुकने को कह
फोन काटा और अर्जुन को इशारे से अपने पास बुलाया. ‘‘क्या किया रोहिणी ने?’’ अर्जुन ने आते ही पूछा.
‘‘यार, वह किसी प्रौब्लम में है मुझे जाना होगा. प्लीज मुझे माफ कर दो. तुम बोलो तो मैं मांपापा से माफी मांग लूं.’’
अर्जुन ने एक गहरी सांस ले कहा, ‘‘नहीं मैं सम?ा दूंगा उन्हें. तुम क्या कहोगी. तुम्हारी कजिन की बुराई सुन उन की आंखों में तुम्हारी इमेज न खराब हो जाए, इसलिए तुम जाओ. मैं संभालूंगा. वैसे 2 साल से मुझे आदत हो गई है.’’ अर्जुन की हां मिलते ही रुचि रोहित से मिलने निकल गई.
यहां प्रौब्लम इस बात की नहीं थी कि रोहित पीजी के नीचे खड़ा था. बल्कि प्रौब्लम
यह थी कि वह पीजी ही गलत पीजी था. रुचि ने रोहित को जो अपना सही पता बताया ही नहीं था और वह इसीलिए कि कभी रोहित मुंह उठा उस के दरवाजे पर खड़ा न हो जाए और रुचि का डर आज सच भी हो गया. रोहित दरवाजे पर तो नहीं लेकिन बिल्डिंग के नीचे तो आ ही गया और अगर उसे यह सच पता चले कि वह गलत पते
पर आया है तो कहीं रोहित और ड्रामा न क्रिएट कर दे.
रोहित का कौल आया, ‘‘यार, 15 मिनट हो गए. तुम आ रही हो या नहीं.’’
‘‘सुनो, पीजी में पीछे वाले कैफे में जा कर बैठो. मैं आ रही हूं 10 मिनट में.’’
‘‘और 10 मिनट?’’
‘‘रोहित तुम जा रहे हो या नहीं. नहीं तो मैं तुम से कभी बात नहीं करूंगी.’’
‘‘अच्छा इतना नाराज मत हो. मैं वेट करता हूं वहां.’’
पूरे 15 मिनट बाद रुचि रोहित के सामने खड़ी हो गई. पहले तो रोहित रुचि को साड़ी में देख बहुत शौक हुआ फिर उस की खूबसूरती का कुछ देर बखान कर बोला, ‘‘ओह बेबी, तुम पीजी में नहीं थी न. किसी फंक्शन को छोड़ मेरे लिए आ रही हो. यार, तुम पहले बोल देती कि तुम फंक्शन में हो, मैं तुम्हें यों बुलाता नहीं.’’
‘हां बल्कि तुम खुद वहां भी धमक पड़ते कि बेबी, एक बार तुम से मिल कर चला जाऊंगा. आखिर तुम हो तो चिपकू ही,’ यह रुचि ने खुद से मन ही मन कहा.
रोहित रुचि का हाथ पकड़, ‘‘हां बेबी, मुझे बताना तो था न. मैं ही वहां आ जाता, फिर तुम से एक बार मिल कर सौरी बोल कर चला जाता और तुम अपना फंक्शन एंजोय करती.’’
कल जिस रोहित की बातों को सुन रुचि का पिघल रहा था. आज उसी रोहित की हरकतें उसे चिपकू, बेअकल, गधा कहने पर मजबूर कर रही थी. आज रुचि को अर्जुन हर तरह से परफैक्ट दिख रहा था. आखिर अर्जुन ने कहा तो सच ही था कि 2 साल से वह रुचि की हर गलती या लापरवाही को ठीक करते आ रहा है. चाहे वह औफिस के काम को ले कर ढिलाई हो या कोई निजी परेशानी.
‘‘बेबी खाओ न.’’
‘‘नहीं मुझे लगता है मुझे टोंसिल है. मेरी भी तुम खा लो,’’ रुचि की आइसक्रीम रोहित खुशीखुशी खाने लगा. इसी बीच अर्जुन का मैसेज आया, ‘‘अपने फैमिली ड्रामे के बीच कुछ खा लेना. तुम बिना डिनर किए गई हो जो मुझे अच्छा नहीं लग रहा और कोई हैल्प चाहिए होगी तो सोचना नहीं, झट से कौल करना मैं आ जाऊंगा.’’
अर्जुन का मैसेज पढ़ अब तो रुचि को रोहित पर इतनी खुंदक आई कि ऐसा लगा कि सारी आइसक्रीम रोहित के मुसकराते चेहरे पर फेंक दे.
रुचि ने कहा, ‘‘तुम क्या पीजी से मुझे निकलवाना चाहते हो या मेरी बेइज्जती कराना. मैं ने बताया था कि पीजी की मालिक पुराने खयालों की है. उन्हें लड़कों का आसपास होना पसंद नहीं. कई बार उन्होंने पुलिस बुलाई है.
रोहित बोला, ‘‘तुम्हारा पीजी और तुम्हारा औफिस पता नहीं कौन से पिछड़े जमाने के हैं.‘‘ ‘‘और अगर निकाल भी दे तो तुम मेरे साथ रहना.’’
रुचि को रोहित की बात पर हैरानी नहीं हुई क्योंकि उसे पता था रोहित ऐसे ही केयरफ्री नैचर का है. इसलिए उस ने आगे कोई बात नहीं की.
कुछ देर बाद जब रोहित चला गया तो रुचि ने उसी कैफे में बैठ कर डिनर किया और फिर अपने असली पीजी चली गई.
जब रुचि पीजी पहुंची तो हेमा उसे घूर रही थी. रुचि सम?ा गई कि उसे सारी कहानी जाननी है तो रुचि ने सब बता दिया.
‘‘तो क्या शादी का इरादा है तेरा?’’ हेमा ने पूछा.
‘‘शादी का इरादा है लेकिन अभी नहीं. अर्जुन में एक गुड हसबैंड की सारी क्वालिटी है. लेकिन अभी रोहित को छोड़ सिर्फ अर्जुन के साथ रही तो मेरी अभी की लाइफ से सारी मौजमस्ती चली जाएगी. मु?ो जो रोमांच और केयरिंग चाहिए वह किसी एक में नहीं बल्कि 2 अगलअलग लोगों में हैं तो अब मैं क्या करूं?
हेमा सम?ाते हुए बोली, ‘‘जब हमें दूसरों
की बात या राय सम?ा नहीं आती तो बहुत बार वह हमें किताबें सम?ा देती हैं क्योंकि उन में सचाई और अनुभव दोनों होता है. आज सोशल मीडिया पर जो परफैक्ट कपल और रिलेशनशिप की रील्स है न यह सब अपने फौलो बढ़ाने के लिए हैं न कि तेरे जैसे का भला करने के लिए. तू भी इन रील्स को देख कर खूब खुश होती है. क्या इन से तेरा भला हो गया? क्या पता चला रोहित चाहिए या अर्जुन चाहिए? क्या कोई और? इसलिए किताबों का सहारा ले. खुद को जानने के लिए और अपनी असली पसंद जानने के लिए. देख किसी भी एक इंसान में सारी खूबी नहीं होती और इसीलिए रिलेशनशिप को एडजस्टमैंट और अंडरस्टैंडिंग का रिश्ता भी
कहते हैं.’’
‘‘मगर मैं एडजस्टमैंट क्यों करूं? जब मु?ो दोनों मिल रहा है.’’
‘‘लेकिन किन शर्तों पर मिल रहा है, एक चीटर बना कर.’’
‘‘हेमा…’’ रुचि ?ोप गई.
‘‘जब सुनने में बुरा लग रहा है तो कर ने में क्यों नहीं.’’
‘‘देख रुचि सचाई तो यही रहेगी कि यह एक चीटिंग ही है, तो तू भी चीटर ही कहलाएगी,’’ रुचि को चीटर कहलाना अच्छा नहीं लगा कि इस पर हेमा ने एक और बात सामने रखी, ‘‘कभी यह सोचा है कि अर्जुन या रोहित को डबल टाइमिंग की कहानी पता चली तो क्या होगा? अर्जुन बहुत मैच्योर इंसान है, वह तो तु?ो बिना तमाशा किए छोड़ कर चला जाएगा. लेकिन रोहित. क्या रोहित इतनी आसानी से जाने देगा? और अगर कभी नहीं भी पता चला तो क्या दोनों से शादी करेगी? और दोनों के बच्चे भी पैदा करेगी?’’
रुचि चिढ़ कर बोली, ‘‘क्यों बकवास कर रही है.’’ हेमा ने भी बहुत कौंफिडैंट हो कर कहा, ‘‘हो सकता मैं बकवास कर रही हूं लेकिन तू तो बकवास जी रही है.’’ हेमा की बात में इतनी सचाई थी कि वह रुचि को बहुत चुभी. हेमा के कड़वे शब्द रातभर रुचि के कान में लाउडस्पीकर की तरह बजते रहे.
अगली सुबह रुचि का मूड, हावभाव
कुछ और दिख रहे थे. जिस से हेमा थोड़ी हैरान थी, इस पर रुचि में कहा, ‘‘मैं आज से कौंप्रोमाइज करूंगी.’’
हेमा ने एक स्माइल दे कहा, ‘‘अर्जुन बैस्ट चौइस है.’’
रुचि ने पूरे दिन रोहित के कौल और
मैसेज अवौयड किए और रात को उसी कैसे
में बुलाया जहां वह कल मिले थे. रुचि के इस रूखे बरताव से रोहित थोड़ा नाराज तो दिखा लेकिन कुछ बोला नहीं. रुचि ने उस से कहा, ‘‘देखो मुझे यह सब खत्म करना है. यह मैं और नहीं कर सकती.’’
रुचि और कुछ कहती कि रोहित बोल पड़ा, ‘‘मुझे पता है यह सब आसान नहीं. यों मुझे अवौयड करना तुम्हें पसंद नहीं आ रहा होगा.’’ रुचि रोहित को रोक अपनी बात कहना चाहती थी कि रोहित ने उसे चुप करा दिया और बोलता चला गया.
‘‘मुझे माफ कर दो. मुझे यों एकदम से नहीं जाना था. मुझे पता है तुम अभी भी नाराज हो. होना भी चाहिए मैं अभी तक तुम्हें कहीं नहीं ले गया और खुद अपने दोस्तों के साथ मौजमस्ती करने चला गया, लेकिन अब मैं सब सैटल कर दूंगा.’’ रोहित ने बहुत कुछ बोला और रुचि खामोशी से बस सुन कर घर वापस आ गई.
घर पर हेमा रुचि से कुछ पूछती लेकिन वह कपड़े बदल फिर से अपने कपड़े के ढेर को निहारने लगी. इस पर हेमा ने कहा, ‘‘क्या हुआ?’’
रुचि ने हेमा से कहा, ‘‘वीकेंड पर जाना है.’’
हेमा ने कहा, ‘‘ओह औफिस ट्रिप.’’
‘‘गोवा, मैं और रोहित, बोटिंग, स्कूबा, जेट स्कीइंग.’’
यह सुनते ही हेमा अपना माथा पकड़ कर बैठ गई.
रुचि के बारे में उस के पेरैंट्स जब भी
कुछ पूछते थे वह उन्हें मै… ?ाठ बोलकर कर देती थी. उसे उम्मीद थी कि
अर्जन के बारे में ही बता कर उसे ड्युटी मिल जाएगी. पर लगता है यह रुचि उसे अभी बरसों तक उल?ाए रखेगी.
आखिर हेमा भी तो प्यार करती है न रुचि से, एक छोटी बहन की तरह, एक बिगड़ैल कन्फ्यूज लड़की. रुचि मां की बातों से घबराए हुए थी लेकिन सब के सामने अपनी समझदारी का कुछ नमूना तो उसे दिखाना था…
अर्जुन का मैसेज पढ़ अब तो रुचि को रोहित पर इतनी खुंदक आई कि ऐसा लगा कि सारी आइसक्रीम रोहित के मुसकराते चेहरे पर फेंक दे…
