Kahaniyan :  रजत और अक्षरा को रुई  की तरह नर्ममुलायम सफेद बर्फ की चादर पर अक्षरा को अठखेलियां करते देख रजत को शरारत सूझी. उस ने बर्फ का एक बड़ा गोला बना कर अक्षरा के ऊपर फेंक दिया. अचानक अपने ऊपर बर्फ का गोला पड़ते देख अक्षरा अचकचा कर इधरउधर देखने लगी.

देखा तो रजत शरारती अंदाज में खड़ा मुसकरा रहा था.

‘‘अच्छा, तो यह शरारत इन जनाब की है. अभी बताती हूं,’’ कह गुस्से से नाक फुलाती हुई अक्षरा ने भी बर्फ का बड़ा सा गोला बनाया और रजत के ऊपर फेंकने के लिए भागी. मगर वह कहां उस की पकड़ में आने वाला था.

‘‘ओ मां,’’ अक्षरा चीखी तो रजत ने पीछे मुड़ कर देखा. अक्षरा का पैर बर्फ के अंदर घंस गया था जिस से वह गिर पड़ी.

‘‘अरे, अक्षरा,’’ रजत दौड़ा आया और उसे उठाने लगा. मगर अक्षरा ने बर्फ का गोला रजत के ऊपर दे मारा और बच्चे की तरह ताली बजाते हुए खिलखिला कर हंस पड़ी.

‘‘अच्छा, तो तुम ने गिरने का नाटक किया न ताकि मुझ पर बर्फ फेंक सको.’’

‘‘हां जी, तो आप को क्या लगा मैं सचमुच में गिर पड़ी,’’ बोल कर अक्षरा खुद ही हाथ झाड़ कर उठ खड़ी हुई और इशारे से उस ने रजत से कहा कि चलो, वहां चल कर भुट्टा खाते हैं.

‘‘ओके, लेकिन कहवा भी पीनी पड़ेगी. है मंजूर तो बोलो हां.’’

‘‘हां,’’ रजत पर आंखों से प्यार बरसाती हुई अक्षरा बोली. तभी आसमान से फिर बर्फ गिरने लगी तो अक्षरा ने अपने दोनों हाथ फैला दिए और उस की दोनों हथेलियां ताजा बर्फ से भर गईं. बर्फबारी जरा और तेज हुई तो दोनों एकदूसरे का हाथ पकड़ कर उस झोपड़ीनुमा दुकान के अंदर घुस गए. रजत ने जब देखा कि अक्षरा ठंड से सिकुड़ी जा रही है तो उस ने अपनी गरम जैकेट उतार कर अक्षरा को पहना दी और अक्षरा उस के सीने से लग इतरा उठी.

रजत और अक्षरा की शादी अभी इसी अक्तूबर महीने की 8 तारीख को हुई थी और शादी के तुरंत बाद दोनों यहां कश्मीर हनीमून मनाने आ गए. वैसे रजत तो 1-2 बार अपने दोस्तों के साथ कश्मीर घूमने आ चुका था. मगर अक्षरा का यह पहला मौका है कश्मीर घूमने का. वह पहले कभी कश्मीर घूमने नहीं आई थी. हां, टीवी और फिल्मों में जरूर देखा था कश्मीर का नजारा. मगर अब जब वह प्रत्यक्ष में कश्मीर देख रही है तो उस की खुशी और आश्चर्य का ठिकाना नहीं था. सबकुछ उसे एकदम दिवास्वपन्न की तरह लग रहा था.

कश्मीर की वादियों में घूमते हुए उन्हें 3 दिन हो चुके थे लेकिन फिर भी अक्षरा का मन नहीं भरा. यहां की हरेक चीज उसे अविश्वसनीय प्रतीत हो रही था. चांदी सा चमकती झील, बर्फीले पहाड़ों से निकलने वाली क्रिस्टल नीली नदियां और बड़ेबड़े चिनार के पेड़ जो शरद ऋ तु आने पर पूरी घाटी में लालपीले ट्यूलिप के फूलों से खिलखिला उठते हैं और पूरी घाटी में रंगों की छटा बिखेर देते हैं. कश्मीर की छटा देखदेख कर अक्षरा दीवानी हुई जा रही थी और रजत उसे देख कर दीवाना हुआ जा रहा था. उसे अपनी अक्षरा कश्मीर की कली से कम नहीं लग रही थी.  वैसे अक्षरा है भी बेहद खूबसूरत. उसे देख कर लगता है जैसे प्रकृति ने बड़ी फुरसत में उसे गढ़ा होगा. दूध सा गोरा रंग, बड़ीबड़ी गुलाबी आंखें, लंबे घने बाल और पतली छरहरी काया. क्या नहीं था उस में. तभी तो अक्षरा को देखते ही रजत उस पर लट्टू हो गया और बिना एक पल की देरी किए शादी के लिए हां बोल दी. वैसे कालेज में भी अक्षरा के कम दीवाने नहीं थे. लड़के भंवरों की तरह उस के आगेपीछे मंडराते रहते थे.

जरा सी भी धूप पड़ने पर जब उस के गाल लाललाल हो जाते, तब उस की सारी सहेलियां उस के गालों को छूती हुई कहतीं कि उस के गाल कश्मीर के सेब की तरह लाल हो गए हैं. मन करता है खा जाऊं और वह चिढ़ कर अपनी सहेलियों को मारने दौड़ती थी.

शादी के बाद तो अक्षरा का रूप और यौवन और भी निखर आया था. रजत ने तो अपनी पत्नी का नाम ‘कश्मीर की कली’ ही रख दिया था. कश्मीर में जब वह वहां की पोशाक पहन कर फोटो खिंचवा रही थी, तब कोई कह ही नहीं सकता था कि वह कश्मीरी लड़की नहीं है. मजाकमजाक में एक बार रजत ने पूछ भी लिया उस से कि कहीं उस के मातापिता कश्मीरी पंडित तो नहीं हैं और फिर बिहार आ गए हों रहने?

उस की बात पर अक्षरा अपनी भौंहें सिकोड़ कर बोली, ‘‘नहीं तो.’’

कश्मीर में अक्षरा ने हाउस बोट का मजा लिया. वहां के बेहतरीन व्यंजन जो कभी उस ने खाए नहीं थे, उन का भी खूब स्वाद चखा. कश्मीर का यखनी और दमआलू तो वह कभी भूल ही नहीं सकती. जब भी दोनों किसी होटल में खाने जाते, अक्षरा दमआलू और यखनी तो जरूर ही मंगवाती. उसे खूब स्वाद लेले कर दमआलू खाते देख रजत हंसता और कहता कि  बिलकुल बच्ची हो तुम.

सुबह के समय कश्मीर की खास ‘नून चाय’ का भी खूब मजा लिया उन्होंने. यहां के शरमीले और मुसकराते लोगों से दोस्ती भी कर ली अक्षरा ने. खूब बातें करती उन से. वहां के बारे में पूछती. वे कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं, वह सब जानने की कोशिश करती. मिलनसार स्वभाव की अक्षरा ने कुछ ही दिनों में वहां के कई लोगों को अपना बना लिया.

 

कश्मीर है ही ऐसी जगह, जहां कोई भी आ कर अपनी सुधबुध खो बैठता है. प्रकृति ने कश्मीर को अविश्वसनीय सुंदरता से नवाजा है और सही माने में यह ‘धरती का स्वर्ग’ कहा जाता है. लेकिन रजत इस स्वर्ग में अपना घर बसाने नहीं आया था बल्कि अपनी नईनवेली दुलहन के साथ हनीमून मनाने आया था. लेकिन अक्षरा थी कि उस का यहां से जाने का मन ही नहीं हो रहा था.लेकिन वापस दिल्ली जाना तो था ही. इसलिए एक दिन दोनों शौपिंग के लिए निकल गए.

सुना था कि यहां की पश्मीना शाल बहुत ही सुंदर और गरम होती है, इसलिए उस ने अपनी मां और सास के लिए पश्मीना शाल खरीदी. अपने लिए कढ़ाई वाली पारंपरिक पोशाक और 2 कुरतियां खरीदी. रजत के लिए टीशर्ट और बाकी घर वालों के लिए भी उस ने कुछ न कुछ लिया ही. रजत ने भी अपनी पसंद से अक्षरा के लिए टॉप और कश्मीरी ज्वैलरी खरीदी.

उन की कल सुबह 4 बजे की दिल्ली के लिए फ्लाइट थी. इसलिए वे लोग रात के करीब डेढ़ बजे एअरपोर्ट पहुंच गए ताकि कोई दिक्कत न हो. वहां जा कर रजत को अपना औफिस भी जौइन करना था. अपनी शादी के लिए उस ने 20 दिन की छुट्टी ले रखी थी. लेकिन अक्षरा इस बात से थोड़ी मायूस थी कि पता नहीं अब कब कश्मीर आना होगा. उसे उदास देख कर रजत ने उस से वादा किया कि अपनी पहली ऐनिवर्सरी पर वह अक्षरा को फिर कश्मीर ले कर आएगा.

‘‘सच में. आप सच में फिर मुझे कश्मीर ले कर आएंगे?’’अक्षरा की बात पर रजत ने मुसकरातेहुए कहा कि हां, और वह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता.

रजत की बात सुन कर अक्षरा ने प्यार से उस के कंधे पर अपना सिर रख दिया और अपना हाथ हिला कर मुसकराते हुए कहा, ‘‘बाय कश्मीर, हम फिर मिलेंगे.’’

दिल्ली पहुंच कर वहां 1-2 दिन रुकने के बाद रजत अक्षरा को उस के मायके पटना पगफेरे के लिए ले गया. वैसे तो अक्षरा को उसे वहां छोड़ कर आने का जरा भी मन नहीं हो रहा था पर उसे अपना औफिस जौइन करना था तो वापस दिल्ली आना पड़ा. लेकिन जातेजाते वह अक्षरा से कहने लगा कि वह जल्द ही उसे लेने आएगा. रजत ने अक्षरा के कान में फुसफुसा कर कहा कि वह रोज रात उसे वीडियो काल किया करेगा. अक्षरा के गालों पर शर्म की लाली देख कर उस की छोटी भाभी ने उसे छेड़ा कि लगता है अक्षरा का पति को छोड़ने का मन नहीं हो रहा है.

‘‘अरे जमाई राजा, आप जा ही क्यों रहे हैं, रुक जाइए न. अपनी नईनवेली दुलहन को साथ ले कर ही जाइएगा. वैसे भी वहां आप का अपनी पत्नी के बिना मन तो लगेगा नहीं.’’

जब अक्षरा की बड़ी भाभी ने रजत को छेड़ते हुए कहा, तो वह शरमा कर झेंप गया.

घर में सब से विदा ले कर रजत दिल्ली के लिए निकल गया पर जातेजाते भी कई  बार मुड़मुड़ कर वह अपनी अक्षरा को देखता रहा और अक्षरा भी तब तक अपना हाथ हिलाती रही जब तक कि वह उस की आंखों से ओझल नहीं हो गया.

रजत के जाने के बाद अक्षरा सब के लिए लाए उपहार सब को देते हुए बताने लगी कि कश्मीर में वे कहांकहां घूमे, क्याक्या देखा और कितने स्वादिष्ठ व्यंजनों का स्वाद चखा जो पहले कभी नहीं चखा था. उस के चेहरे पर उमड़ती खुशी को देख कर उस की मां सुमन और पिता श्याम गदगद हुए जा रहे थे. अक्षरा के दोनों भाई भी खुश थे कि बहन खुश है. उन के बच्चे भी ‘बूआबूआ’ कर अक्षरा के आगेपीछे डोल रहे थे. सुमन तो कब से अपनी बेटी के चेहरे को ही निहारे जा रही थी. बारबार वह बेटी के गालों को चूमते हुए उस की बलैयां लेती और कहती कि उस की बेटी पूरी जिंदगी यों ही खुश रहे, स्वस्थ रहे. उसे जीवन की सारी खुशियां मिलें.

रजत अक्षरा को उस के मायके अपनी गाड़ी, स्कौपियो से छोड़ने आया था. साथ में ड्राइवर भी था क्योंकि रजत की मां अपने बेटे को कहीं दूर गाड़ी चलाने देने से डरती थी. कारण, एक बार रजत का ऐक्सीडैंट हो चुका है, जब वह अपनी गाड़ी से जयपुर से दिल्ली बाई रोड आ रहा था तब. वह तो शुक्र था कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ. लेकिन तब से रजत की मां हमेशा डरीडरी रहती है. उसे लगता है कहीं फिर कुछ ऐसावैसा न हो जाए उस के बेटे के साथ. इसलिए वह चाह रही थी कि दोनों प्लेन से पटना चले जाएं. परंतु रजत का मन था अपनी गाड़ी से बाई रोड पटना जाने का. बेटे के मन को देखते हुए रजत की मां ने साथ में ड्राइवर को भेज दिया ताकि उसे चिंता न हो.

रजत ने अपनी गाड़ी और ड्राइवर यहीं पटना में ही छोड़ दिया था यह कहते हुए कि अगर उसे छुट्टी नहीं मिल पाई, तो अक्षरा ड्राइवर के साथ दिल्ली आ जाए. अब गाड़ी और ड्राइवर तो था ही, सो रोज ही अक्षरा कहीं न कहीं घूमने, शौपिंग करने या किसी रिश्तेदार के घर मिलने निकल पड़ती थी. अक्षरा को यों बड़ी गाड़ी में आए देख सब कहते कि वाह, अक्षरा के तो दिन ही बदल गए इतने बड़े घर में शादी हो कर. कहीं न कहीं अक्षरा भी यह मानने लगी थी कि रजत से शादी कर के उस ने बिलकुल सही किया. वह अपने मांपापा और दोनों भाइयों का एहसान मानती कि आज उन की ही बदौलत उसे इतने सुख के दिन देखने को मिले हैं वरना तो वह खुद को गटर में डुबोने को तैयार ही बैठी थी. कितनी पागल थी वह भी.

‘‘अरे ड्राइवर भैया, गाड़ी जरा साइड में लेना न, मुझे उस मौल में शौपिंग करने जाना है,’’ अक्षरा ने अपने ड्राइवर से कहा लेकिन सड़क पर गाडि़यों का जाम लगा था. गाडियां धीरेधीरे रेंग रही थीं. वह गाड़ी साइड लेता तो कैसे.

‘‘एक काम करती हूं मैं यहीं उतर जाती हूं.  आप गाड़ी नीचे पार्किग में लगा देना ले जा कर,’’ अक्षरा ने कहा तो ड्राइवर ने बड़े सलीके से उस की बातों पर सहमति जताते हुए गाड़ी रोक दी और जब अक्षरा उतर गई तो गाड़ी को पार्किंग में लगा दिया.

दरअसल, अक्षरा को अपने तीनों भतीजियों और भतीजे के  लिए कपड़े और खिलौने खरीदने थे मौल से. उस ने वादा किया था उन से. आते समय 8 साल की रिनी, 13 साल की पिंकी और उस का 6 साल का भतीजा चिंटू ‘बूआ मैं भी चलूंगा, बूआ मैं भी चलूंगी, कहते हुए अक्षरा से लिपट रहे थे. तब सुमन ने उन्हें जोर से डांटा कि बूआ को तंग मत करो. डांट खा कर बेचारे बच्चों के मुंह ऐसे बन गए कि अक्षरा को हंसी आ गई. उस ने सोचा बच्चों के लिए मौल से खरीद कर कुछ ले जाती हूं वे खुश हो जाएंगे. ये तीनों बच्चे उस के दोनों भाई के हैं जो अक्षरा को बहुत प्यारे हैं.

अभी अक्षरा खिलौने के सैक्शन में घुसी ही थी कि पीछे से किसी ने ‘अक्कू’ कहते हुए उस की पीठ पर हाथ फेरा तो वह अचकचा कर पीछे मुड़ी. सामने सुजीत को खड़ा देख कर वह हक्कीबक्की रह गई कि यह यहां कैसे आ गया. फिर उस ने बेमन से मुसकरा कर पूछा, ‘‘अरे, सुजीत तुम…. तुम यहां… कैसे?’’

लेकिन सुजीत ने उस की बातों का कोई जवाब नहीं दिया और बड़ी गौर से उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए मुसकराया और उस के गालों को छूने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया ही कि अक्षरा पीछे खिसक गई.

‘‘और बताओ, कैसे हो तुम?’’ अक्षरा ने सवाल किया.

‘‘कैसा रहूंगा तुम्हारे बिना, बोलो? जी रहा हूं बस और क्या. लेकिन मैं सुजु से सुजीत कब हो गया तुम्हारे लिए अक्कू? शादी के बाद तुम यह भी भूल गई कि तुम मुझे किस नाम से पुकारा करती थी?’’

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. वह तो मैं…’’ अक्षरा को समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहे और कैसे यहां से निकले?

‘‘अरे, मैं तो मजाक कर रहा था,’’ अक्षरा का हाथ अपने हाथ में लेते हुए सुजीत मुसकराया, फिर कहने लगा, ‘‘तुम्हें पता है अक्कू… तुम्हारी शादी की बात सुन कर मैं कितना टूट गया था. तुम तो शादी कर के अपनी ससुराल चली गई. लेकिन मैं कितना रोया हूं, तड़पा हूं  तुम्हारे लिए, मैं ही जानता हूं. हां, पता है तुम भी कम नहीं तड़पी होगी मेरे लिए. लेकिन मैं तुम से वादा करता हूं मेरी अक्कू अब हमें कोई जुदा नहीं…’’ सुजीत अपनी बात को पूरी करता अक्षरा उसकी बात को बीच में काटते हुए बोली, ‘‘अच्छा, सुनो मम्मी का कई बार फोन आ चुका है, जाना होगा मुझे. मिलते हैं,’’ बोल कर वह ऐसे भागी जैसे कोई भूत देख लिया हो. लेकिन पीछे से सुजीत बोला कि कल वह उस का यहीं पर इंतजार करेगा.

‘ओह, जान छूटी,’ गाड़ी में बैठते हुए अक्षरा ने एक सुकून भरी सांस ली और ड्राइवर से कहा कि वह सीधे घर ही चले. सोचा था बच्चों के लिए आइसक्रीम और चौकलेट भी लेती जाएगी, बच्चे खुश हो जाएंगे. लेकिन सुजीत को देख कर वह इतना डर गई कि उसे कहीं भी रुकना उचित नहीं लगा.

घर पहुंच कर अभी अक्षरा अपने पति रजत को फोन लगा ही रही थी कि सामने से उस का

फोन आ गया. रजत का फोन आए देख अक्षरा खुशी से उछल पड़ी. लेकिन जब रजत ने कहा कि वह ड्राइवर के साथ न आए. छुट्टी मिलते ही वह उसे खुद लेने आएगा तो अक्षरा उदास हो गई और ठुनकते हुए बोली कि उस रजत के बिना मन नहीं लग रहा है इसलिए वह जल्दी आ कर उसे यहां से ले जाए.

अपनी दुलहन के दिल में अपने लिए इतना प्यार देख कर रजत फूल कर कुप्पा हो गया. बोला, ‘‘मेरी कश्मीर की कली, मेरी जान, मैं तुम्हें ऐसे ही किसी ड्राइवर के सहारे नहीं छोड़ सकता न. इसलिए जरा सब्र करो, छुट्टी मिलते ही मैं तुम्हें लेने आ जाऊंगा,’’ रजत ने कहा पर सब्र उस से भी कहां हो रहा था. तभी तो वह अक्षरा को दिन में कई बार फोन करता और फिर भी उस का मन नहीं भरता था. उस का तो मन कर रहा था कि अभी हवा में उड़ कर उस के पास पटना पहुंच जाए लेकिन छुट्टी ही नहीं मिल रही थी. शादी के समय उस ने काफी छुट्टी ले ली थी. इसलिए उसे छुट्टी मिलने में दिक्कत हो रही थी. लेकिन कैसे भी कर के 2 दिन की छुट्टी ले कर वो अक्षरा को खुद लाने जाएगा, सोच लिया था उस ने और इस के लिए अपने बौस को मक्खन भी लगा रहा था.

इधर अक्षरा दिन नहीं, पल गिन रही थी कि जल्दी रजत आए और उसे यहां से ले जाए. अक्षरा को बेचैन देख कर उस की दोनों भाभियां उसे छेड़ते हुए बोलीं कि लगता है जमाई राजा का अपनी पत्नी के बिना मन नहीं लग रहा है तभी बारबार फोन कर रहे हैं. लेकिन अक्षरा कैसे बताए उन्हें कि फोन रजत नहीं बल्कि सुजीत कर रहा है उसे. बारबार वह उसे फोन कर के परेशान कर रहा है कि वह उस से मिलने कब आएगी. अगर वह उस का फोन नहीं उठाती तो मैसेज करता है. मैसेज का जवाब नहीं देती तो ईमेल भेजता है कि वह उस से मिलने आए. अक्षरा ने कहा भी कि वह रोजरोज उस से मिलने नहीं आ सकती है इसलिए वह उसे फोन या मैसेज न करे. जब अक्षरा ने उस का फोन उठाना बंद कर दिया तो वह उसे अलगअलग नंबरों से फोन कर के परेशान करने लगा. लेकिन यह बात वह कहे किस से.

‘‘अरे बेटा, अब तक जाग रही हो?’’ उस के कमरे का लाइट औन देख कर सुमन उस के कमरे में आते हुए बोली, ‘‘क्या हुआ, सब ठीक है न? जमाई राजा का फोन आया? कब आएंगे बोले कुछ?’’

‘‘हां मां, कहा कि छुट्टी मिलते ही आ जाएंगे. आप सो जाओ जा कर. मैं भी सो जाती हूं,’’ कह कर उस ने अपने कमरे की लाइट बंद कर दी पर उस की आंखों में नींद नहीं थी. परेशान थी इस बात से कि सुजीत से अपना पीछा कैसे छुड़ाए. अगर घर वालों को यह बात पता चल गई कि वह अभी भी सुजीत से मिलती है तो क्या सोचेंगे उस के बारे में और कहीं यह बात उड़तेउड़ते रजत के कानों तक पहुंच गई तो क्या होगा. ‘नहींनहीं, मुझे संभल कर रहना होगा क्योंकि कुछ नातेरिश्तेदार ऐसे भी हैं जो मेरी खुशियां देख जलकुड़ गए हैं. उन्हें यह बात पच नहीं रही है कि इतने बड़े घर में मेरी शादी कैसे हो गई,’ अपने मन में सोच अक्षरा बेचैन हो उठी. मन किया रजत को फोन लगाए. मगर इतनी रात गए फोन करना ठीक नहीं लगा उसे. इसलिए वह सोने की कोशिश करने लगी.

कहते हैं हर किसी को कभी न कभी एक बार जिंदगी में प्यार होता ही है. अक्षरा और सुजीत को भी प्यार हुआ. कालेज में साथ पढ़ते हुए दोनों की आंखें लड़ीं तो दोनों एकदूसरे के प्यार में डूबते चले गए. वैसे कालेज में अक्षरा के आगेपीछे मंडराने वाले कई लड़के थे. मगर अक्षरा के मन को सुजीत ही भाया था. किसी नशेड़ी की तरह दोनों पर प्यार का ऐसा नशा छाया था कि उन्हें एकदूसरे के सिवा कुछ दिखता ही नहीं था. एकदूसरे की मुहब्बत में दोनों की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ चुका था. दोनों देर रात तक फोन पर बातें करते, मैसेजिंग करते और उस से भी मन नहीं भरता तो वीडियो कालिंग कर एकदूसरे से बात करते हुए पूरी रात गुजार देते थे.

 

सुजीत अक्षरा को प्यार से अक्कू बुलाता था और वहीं अक्षरा उसे प्यार से सुजु बुलाती थी. उन के प्यार की दीवानगी इस कदर आगे बढ़ चुकी थी कि वे एक दिन भी एकदूसरे से मिले बिना नहीं रह पाते थे. रविवार के छुट्टी वाले दिन भी बहाना बना कर सुजीत से मिलने निकल पड़ती थी.

अक्षरा के पापा श्याम के 2 भाई थे और तीनों भाइयों को 2-2 बेटे ही थे. मतलब कि अक्षरा पूरे खानदान में एकलौती बेटी थी और सब की प्यारी भी. बहुत सपने देख रखे थे उन्होंने अक्षरा की शादी को ले कर. मगर यहां अक्षरा तो उन की मिट्टी पलीद करने पर तुली थी. वह घर वालों से छिपछिप कर रोज सुजीत से मिलने जाती और घंटों उस के साथ बिताती. जब घर वाले उस से सवाल करते,तो कुछ भी बहाना बना जाती. उस के घर वाले उस की इस हरकत से बिलकुल अनजान थे कि वह पढ़ाई और सहेली से मिलने का बहाना बना कर एक लड़के से मिलने जाती है.

कालेज की पढ़ाई पूरी होते ही घर में अक्षरा की शादी की बात चलने लगी. मगर अक्षरा तो सुजीत से शादी के सपने देख रही थी और सुजीत तो पागल ही था उस के प्यार में. वह तो अभी कहो तो अभी अक्षरा से शादी करने को तैयार था. मगर समस्या यहां यह थी कि सुजीत कोई कामधंधा नहीं करता था. अपनी पढ़ाई पूरी कर बेरोजगार बैठा था और एक बेरोजगार लड़के से कभी उस के मांबाप उस की शादी के लिए राजी नहीं होंगे यह बात अक्षरा अच्छे से जानती थी. इसलिए बारबार वह सुजीत से कहती कि कोई जौब ढूंढे़. मगर उसे तो बैठेबैठे अपने बाप की कमाई खाना ज्यादा अच्छा लगा रहा था तो कहां से जौब ढूंढ़ता. हां, मगर जताता कि वह जौब जल्द ही ढूंढ़ लेगा और फिर उस के पापा से उस का हाथ मांगने आएगा. लेकिन एक कहावत तो सुनी ही होगी आप ने ‘न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी’ ऐसे करतेकरते एक साल और निकल गया. न तो अक्षरा के लिए कोई अच्छा रिश्ता  मिल पा रहा था और न ही सुजीत की कहीं जौब लग पाई थी अब तक. मगर इस बीच दोनों मिल कर एकदूसरे से वादे खूब कर रहे थे.

बेटी की शादी कहीं तय न हो पाने के कारण श्याम चिंतित रहने लगे थे क्योंकि कहीं वर अच्छा मिलता तो घर नहीं और कहीं घर अच्छा मिलता तो वर नहीं. श्याम को अपनी बेटी की शादी के लिए इतना परेशान रहते देख कर उन के एक परममित्र ने अक्षरा के लिए एक लड़का सुझाया जो आईआईटी इंजीनियरिंग कर के दिल्ली की एक बड़ी कंपनी में जौब कर रहा था. दरअसल, वह लड़का श्याम के दोस्त के समधी का बेटा था. लड़का, परिवार सबकुछ बहुत बढि़या था, इसलिए अक्षरा के मांपापा ने इस रिश्ते के लिए तुरंत हां बोल दी. सब से बड़ी बात कि लड़का जानापहचाना था और दहेज लोभी नहीं था. उन्हें तो केवल एक सुंदर, संस्कारी लड़की चाहिए थी जो उन के घर में अच्छे से रचबस जाए.

लड़के वालों को अक्षरा इतनी पसंद आ गई कि वे भी शादी के लिए हां बोल गए. और रजत से तो क्या ही पूछना क्योंकि उसे तो पहली ही नजर में अक्षरा इतनी पसंद आ गई कि मन ही मन उस ने उसे अपनी पत्नी भी मान लिया. लेकिन अक्षरा को यह शादी नहीं करनी थी क्योंकि वह तो सुजीत को चाहती थी और यह बात उस ने डंके की चोट पर अपने घर वालों को बता दी कि वह किसी और से प्यार करती है और उसी से शादी करेगी.

अक्षरा की बात सुन कर उस के घर वालों के होश उड़ गए. घर में मातम साछा गया कि अब क्या होगा. सुमन का तो रोरो कर बुरा हाल था कि यह बेटी क्या बोल गई. उस के भाइयों का खून खौल रहा था. मन कर रहा था कि जा कर उस सुजीत की जान ही ले लें. मगर ये लोग शरीफ आदमी थे. लड़ाईझगड़ा से कोसों दूर रहने वाले.

पता नहीं इस अक्षरा ने उस सुजीत में क्या देखा? न तो शक्ल से अच्छा था न ही अक्ल से. बस हीरो बना फिरता था. पढ़ाई में भी फिसड्डी ही रहा. एक ही क्लास में 3-3 बार फेल होने के बाद बड़ी मुश्किल से ग्रैजुएशन कर पाया था. अभी भी आवारा घूमता रहता है. 4 बहनों पर 1 भाई जो है तो बिगड़ैल तो होगा ही. बाप की कमाई पर पलने वाला लड़का अपनी पत्नी को क्या सुख देगा? मगर यह बात अक्षरा समझ नहीं रही थी. सही कहते हैं लोग कि प्यार अंधा होता है. अक्षरा सुजीत के प्यार में अंधी हो चुकी थी. अपना भलाबुरा कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था उसे. उसे यह समझ ही नहीं है कि जिंदगी सिर्फ प्यार से नहीं चलती, पैसे भी चाहिए होते हैं.

अक्षरा के पापा और उन के दोनों भाई जान चुके थे कि अब उन्हें क्या करना है क्योंकि यह लड़की तो मूर्ख है. कुछ पता नहीं इसे. अपना भविष्य बिगाड़ लेगी. इसलिए उन्होंने जल्द से जल्द अक्षरा की शादी रजत से तय कर शादी की डेट भी फिक्स कर दी. बात हुई कि शादी अक्षरा की बूआ के घर, लखनऊ से होगी. उन्हें डर था कि सुजीत कहीं आ कर शादी के दिन लड़के वालों के सामने हंगामा न खड़ा कर दे. इसलिए उन्होंने अक्षरा की शादी उस की बूआ के घर लखनऊ से करने का फैसला लिया.

इधर अक्षरा ने खूब रोनाधोना मचाया और अपनी शादी को रोकने की पूरी कोशिश की. धमकी भी दी कि अगर उन्होंने उस की शादी जबरन कराने की कोशिश की तो वह घर से भाग जाएगी. लेकिन फिर सुमन ने भी एक धमकी दे डाली कि अगर उस ने ऐसा कुछ करने की सोचा भी तो ठीक नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि अगर उस ने घर से भागने की कोशिश की या इस शादी से मना किया तो पूरा परिवार जहर खा कर मर जाएगा, फिर करती रहना जो करना है. ऐसा वह कुछ करने वाली नहीं थी पर डराया उस ने अक्षरा को और वह डर भी गई.

मन मसोस कर उसे रजत से शादी करने के लिए हां बोलना पड़ा लेकिन विदाई के समय वह खूब रोई कि उस के बापभाई ने उस की जिंदगी बरबाद कर दी. भाई पिता को कोसतीकोसती वह ससुराल भी पहुंच गई. मगर जब वह अपने ससुराल पहुंची और वहां की शानोशौकत देखी तो उस की आंखें फटी की फटी रह गईं. अब कौन सुजीत और कौन सुजु, उसे कुछ याद नहीं था. उस की ससुराल में उस का एक राजकुमारी की तरह स्वागत हुआ. सासससुरननद सब उसे पलकों पर बैठाए हुए थे और वह उस घर के वैभव को देख कर चकित थी कि कहां से कहां आ गई वह. कहां वह रेलवे क्वार्टर और कहां यह महल जैसा घर.

दिल्ली जैसे बड़े शहर में इतना बड़ा 3 मंजिला मकान, 4-4 गाडियां, ड्राइवर, नौकरचाकर क्या नहीं था उस की ससुराल में. रजत एक बड़ी कंपनी में मैनेजिंग डाइरैक्टर था और ससुर पुलिस कमिश्नर. एक ननद अमेरिका में रहती अपने पति के साथ तो दूसरी बैंगलुरु में. उस के मन में बारबार यही खयाल आ रहा था कि कहां रजत और कहां वह सुजीत. कोई मेल ही नहीं है दोनों में. क्या ही सुख देता वह. उसे छोटीछोटी चीजों के लिए तरसती मर जाती. समाज और परिवार से रिश्ता बिगड़ता वह अलग. वक्त के तराजू पर ससुराल का वैभव भारी पड़ गया और अक्षरासुजीत का प्यार हलका हो गया.

मुंहदिखाई पर जब उस की सास ने उसे सोने में हीरा जड़ा नैकलैस देते हुए कहा कि वह उस की बहू नहीं बेटी है तो वह उन का मुंह देखती रह गई. कुछ बोला ही नहीं गया उस से. उसे तो लग रहा था वह कोई सुनहरा सपना देख रही है पर यह हकीकत थर. मध्यवर्गीय परिवार में जन्मी अक्षरा ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उस की इतने बड़े घर में शादी होगी जहां रुपयापैसा ऐशोआराम सबकुछ होगा और साथ में इतना प्यार करने वाला पति होगा जो उसे अपनी पलकों पर बैठाए रहेगा.

फोन की आवाज से अक्षरा की तंद्रा भंग हुई तो देखा सुजीत का मैसेज था. कल फिर उसे उसी कैफे में मिलने बुलाया था जहां वे उस से 3 बार मजबूरी में मिल चुकी थी.‘ओह, क्या करूं मैं? कैसे इस से अपना पीछा छुड़ाऊं’ अपने मन में बुदबुदाती वह अपने कमरे की लाइट औफ करने ही जा रही थी कि फिर मोबाइल पर एक मैसेज आया. सुजीत ने उसे आई लव यू लिखा था और साथ में प्यार वाली इमोजी भी डाला था. मजबूरी में अक्षरा ने भी एक स्माइली वाली इमोजी फेंका और मोबाइल का नैट बंद कर सोने की कोशिश करने लगी. पर डर और बेचैनी के चलते उसे नींद नहीं आ रही थी. बड़ी मुश्किल से उस की नींद लगी. मगर सुबह 6 बजे फिर सुजीत ने फोन कर उसे जगा दिया और आलतूफालतू बातें करने लगा कि कैसे दोनों छिपछिप कर मिला करते थे, कैसे एकदूसरे की बांहों में खोए रहते थे, वगैरहवगैरह. उस की इस हरकत से अक्षरा चिढ़ उठी और फोन काट दिया. लेकिन फिर उस का मोबाइल बज उठा तो इस बार वह तमतमा उठी, ‘‘अरे, क्या है तुम्हें. क्यों परेशान कर रहे हो मुझे? कहा न मुझे तुम से नहीं मिलना है.’’

‘‘अरे, कौन परेशान कर रहा है मेरी बीवी को,’’ उधर से जब रजत की आवाज सुनी तो अक्षरा सकपका उठ बैठी. कहने लगी कि उस का भतीजा चिंटू बारबार उसे काल कर के परेशान कर रहा है कि उसे चौकलेट चाहिए.

‘‘ओह, तो यह चिंटू की हरकत है. वैसे एक बात कहूं चौकलेट तो मेरा भी फैवरिट है. मुझे भी मिलेगी?’’ रजत हंसा तो अक्षरा शरमा गई.

‘‘सोरी मैं ने तुम्हें सुबहसुबह परेशान किया. लेकिन मैं ने यह बोलने के लिए फोन किया है कि परसों तुम्हें लेने आ रहा हूं. तैयार रहना.’’

रजत के आने की बात सुन कर अक्षरा खुशी से उछल पड़ी. मगर इस के पहले उसे सुजीत नाम के कांटे को अपने रास्ते से हटाना होगा. लेकिन कैसे? यह समझ नहीं आ रहा था उसे.

जब अक्षरा सुजीत से मिलने पहुंची तो वह उस का उसी कौफी शौप में जहां पहले दोनों मिला करते थे, इंतजार करते पाया. अक्षरा को देखते ही वह लपक कर उस के करीब आ गया और उस का हाथ पकड़ कर प्यार से कुरसी पर बैठाते हुए बोला कि वह करीब घंटेभर से उस का यहां इंतजार कर रहा था.

‘‘क्यों, कोई कामधाम नहीं है क्या तुम्हें,’’ अक्षरा बोली. यह सुन वह झेंप गया. फिर कहने लगा, ‘‘जानती हो अक्कू मैं तुम से मिलने के लिए पूरी रात बेचैन रहा.’’

‘‘पहले तो तुम यह अक्कूअक्कू कहना बंद करो. मेरा नाम अक्षरा रजत है, समझे तुम?’’ अक्षरा बड़ी रुखाई से बोली.

 

‘‘अच्छा ठीक है,’’ सुजीत ने एक फीकी हंसी के साथ कहा लेकिन उसे अक्षरा का ऐसा बोलना अच्छा नहीं लगा. ‘‘अच्छा, ये बताओ तुम क्या लोगी? चायकौफी या फिर जूस?’’

‘‘कुछ भी नहीं, अक्षरा बोली.’’

‘‘ऐसे कैसे कुछ तो लेना ही होगा. एक काम करता हूं तुम्हारी फैवरिट कोल्ड कौफी मंगवाता हूं. पहले की तरह हम एक ही स्ट्रो से पीएंगे.’’

यह सुन कर अक्षरा लगभग चीख पड़ी और वहां बैठे लोग उसे देखने लगे.

‘‘सौरी, मेरी आवाज जरा तेज हो गई. लेकिन सच में मैं अब कौफी नहीं पीती. नहीं, कुछ खाना भी नहीं है. तुम ने मिलने बुलाया था. क्या कहना है बोलो जल्दी? मुझे जाना है.’’

मगर सुजीत कहने लगा कि उस के बिना उस से जीया नहीं जा रहा है. वह वापस आ जाए उस की जिंदगी में.

‘इतनी बड़ी पागल नहीं हूं मैं जो उस महल की ऐशोआराम छोड़ कर तुम्हारी झोंपड़ी में आ जाऊं. फक्कड़ कहीं के. दे ही क्या सकते हो तुम मुझे सिवा इस बकवास के’ वह अपने मन में बुदबुदाई फिर बोली, ‘‘देखो, शादीब्याह कोई गुड्डेगुडि़यों का खेल नहीं है जो एक को छोड़ कर दूसरे को पकड़ लिया जाए. यह एक पवित्र बंधन है जो 7 जन्मों तक नहीं टूटता है.’’

‘‘ये कैसी बहकीबहकी बातें कर रही हो? तुम भूल गई वे वादे जो हम ने एकसाथ किए थे? आखिर मैं तुम्हारा प्यार हूं,’’ सुजीत ने उस का हाथ थामते हुए कहा तो झट से उस ने अपना हाथ खींच लिया और बोली, ‘‘देखो, मुझे ये सब बातें नहीं पता. लेकिन इतना जानती हूं कि अब मैं एक शादीशुदा औरत हूं और मेरे लिए किसी पराए मर्द के बारे में सोचना भी गुनाह है.’’

अक्षरा की बात पर सुजीत को हंसी आ गई.

‘‘हंस क्यों रहे हो?’’

‘‘इसलिए कि प्यार का नशा उतर कर दौलत का नशा चढ़ चुका है तुम्हारी आंखों पर.’’

सुजीत की बातों पर अक्षरा ने अपनी नजर दूसरी तरफ फेर ली.

‘‘सच में, बहुत बदल गई तुम. लेकिन मैं नहीं बदला हूं. मैं आज भी तुम से उतना ही प्यार करता हूं और तुम्हें एक दिन अपनी जिंदगी में ला कर रहूंगा,’’ सुजीत समझ चुका था कि अक्षरा उसे इगनोर कर रही है. उस से पल्ला छुड़ाना चाहती है पर वह ऐसा होने नहीं देगा.

‘‘धमकी दे रहे हो मुझे? यह सच है कि मैं तुम से पल्ला छुड़ाना चाहती हूं. कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती तुम से,’’ बोलते हुए अक्षरा उठ खड़ी हुई और अपना पर्स ले कर चलती बनी.

‘‘रुको जरा,’’ पीछे से सुजीत ने आवाज दी तो वह मुड़ी.

‘‘बहुत अकड़ रही हो अपने उस धनवान पति पर? तो देखना एक दिन उसी पति ने तुम्हें धक्के मार कर अपनी जिंदगी से बाहर न निकाल दिया तो कहना.’’

‘‘क्या करोगे तुम?’’

‘‘मैं, मैं तुम्हारे पति को हमारी सारी सचाई बता दूंगा. फिर वह तुम्हें छोड़ देगा. और फिर तुम्हारे पास एक ही रास्ता बेचगा. ‘‘गलियां… गलियां मेरी गलियां…’’ गाते हुए वह अक्षरा के समीप आ कर उस के गालों को सहलाते हुए बोला, ‘‘मेरी अक्कू सी यू लेटर,’’ और वह उसे जाते देखती रह गई. कुछ बोल ही नहीं पाई.

घर आ कर अक्षरा बैड पर लेट गई. बच्चे बूआबूआ कर उस के आगेपीछे डोलने लगे

क्योंकि चौकलेट जो चाहिए थी उन्हें. पर वह तो डर के मारे कांप रही थी कि अगर सच में सुजीत ने रजत को सब बता दिया तो क्या होगा.

रजत आया लेकिन अक्षरा उतनी खुश नहीं दिखी तो पूछा कि क्या हुआ सब ठीक है न? तो उस ने एक फीकी सी मुसकान से केवल इतना ही कहा कि उसे उस के बिना यहां अच्छा नहीं लग रहा था.जल्दी ले चले यहां से.

‘‘ओह, तो यह बात है.मैं तो डर ही गया था कि मेरी सुंदर बीवी को क्या हो गया. मगर अब तो खुश हो जाओ. मैं आ गया हूं न,’’ उस के गुलाबी गालों पर एक प्यार भरा चुंबन देते हुए रजत बोला तो वह हंस पड़ी. मगर उस की उदासी का कारण रजत का लेट आना नहीं था बल्कि सुजीत था. लेकिन यह बात  कैसे बताती उसे. मगर फिर वह इस बात से खुश हो गई कि अब कल ही उन्हें दिल्ली के लिए निकलना है, फिर सुजीत क्या ही बता पाएगा रजत को. लेकिन अक्षरा के घर वालों ने जबरन रजत को और 2 दिन के लिए रोक लिया यह कहते हुए कि वे लोग अपने जमाई राजा का ठीक से स्वागत भी नहीं कर पाए हैं. अब  मां समान सास का दिल कैसे तोड़ सकता था वह. लेकिन इन 2 दिनों में रजत ने पूरा पटना घूम लिया और फिर सब से विदा ले कर वे दिल्ली चले गए.

उस रात रजत को फोन पर किसी से हंसहंस कर बात करते देख अक्षरा से रहा नहीं गया और जब उस ने उस से पूछा कि वह किस से इतना हंसहंस कर बात कर रहा है तो वह बोला कि एक नया दोस्त मिल गया है और वह उसी से बात कर रहा है.

‘‘नया दोस्त. पर कौन है वह?’’ अक्षरा थोड़ा हैरान हुई.

‘‘अरे, तुम घबराओ मत, वह लड़का है. बताया था न मैं ने तुम्हें कि उस दिन पटना के रिलायंस मौल में जब मैं शौपिंग कर रहा था तब मेरा आईफोन कहीं गुम गया था और मैं पागलों की तरह अपना फोन ढूंढ़ रहा था. तब वह फरिश्ता बन कर आया और मेरा डेढ़ लाख का फोन मेरे हाथ में रखते हुए बोला कि मेरा फोन वहां गिरा मिला उसे. बहुत ही शरीफ आदमी लगा मुझे वरना डेढ़ लाख का आईफोन कोई लौटाने लगा भला. मैं ने उस दिन से उसे अपना दोस्त बना लिया और अभी मैं उसी से बात कर रह था.’’

‘‘अच्छा, तो मुझे भी मिलवाइए अपने इस नए दोस्त से कभी,’’ अक्षरा बोली.

‘‘हांहां, इस बार जब हम पटना चलेंगे न तो जरूर तुम्हें मिलवाऊंगा उस से. देखना कितना अच्छा लड़का है वह.’’

उस रोज दिल्ली में अचानक रजत को वह पटना वाला लड़का दिख गया जिस ने उस का फोन ढूंढ़ कर दिया था, ‘‘अरे, तुम यहां कैसे?’’

मैं अपने एक दोस्त के साथ यहां आई हूं.’’

रजत ने कहा, ‘‘दिल्ली आने पर तुम ने फोन क्यों नहीं किया?’’

वह कहने लगा, ‘‘गलती से उस का नंबर मेरे फोन से डिलीट हो गया है.’’

‘‘ओह, अच्छा ठीक मैं तुम्हें अपना फोन नंबर दे देता हूं. कोई भी जरूरत हो तो मुझे काल करना.’’

इस तरह 1-2 बार और उस लड़के से रजत की मुलाकत हुई तो रजत को उस के परिवार के बारे में थोड़ाबहुत पता चला कि उस के घर में कितने लोग हैं और उस के पापा क्या काम करते हैं.

‘‘मगर तुम ने अभी तक शादी क्यों नहीं की?’’ उस दिन कौफी शौप में रजत ने जब उस से सवाल किया तो कहने लगा कि वह एक लड़की से प्यार करता है. दरअसल, वो यहां उसी लड़की से मिलने आया है.

‘‘अच्छा तो मिले तुम उस से?’’ रजत ने पूछा.

‘‘अभी तक नहीं?’’

‘‘क्यों?’’

‘‘उस का घर नहीं पता? बस इतना जानता हूं उस का घर वसंतकुंज में है,’’ वह लड़का बोला.

‘‘वसंतकुंज में. लेकिन मेरा घर भी तो वहीं है. देखें, उस लड़की का फोटो दिखाओ जरा.’’

मगर जब उस लड़के ने फोन पर अपनी प्रेमिका का फोटो दिखाया तो रजत के पैरों तले की जमीन खिसक गई. वह लड़की कोई और नहीं, बल्कि अक्षरा थी. वह यहां अक्षरा की जिंदगी तबाह करने आया था.

‘‘यह क्या बकवास कर रहे हो तुम? तुम्हें पता भी है यह कौन है? मेरी पत्नी है यह,’’ रजत का खून खौल उठा.

‘‘मुझे नहीं पता. लेकिन इतना जानता हूं कि मैं इसे अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता और यह भी मुझे. बहुत प्यार करती है. हम शादी करने वाले थे लेकिन तुम हमारे बीच में आ गए,’’ अपने चेहरे का नकाब हटाते हुए सुजीत अपने असली चेहरे में आ गया.

‘‘ओह तो तुम्हें सब पता है और हमारा मिलना कोई संयोग नहीं है.’’

‘‘सही पकड़े,’’ सुजीत एक चालबाज की तरह हंसा, ‘‘देखो, विश्वास नहीं होता तो देखो, यह फोटो, प्यार भरे मैसेज, लैटर और ये हमारे वीडियो जब हम एकदूसरे से प्यार भरी बातें करते थे. बोलो, अब भी कहोगे कि ये सब झूठ है?’’

रजत को लगा वह वहीं खड़ेखड़े गिर पडे़गा.

‘इतना बड़ा धोखा. क्यों किया मेरे साथ अक्षरा ने?’ ढेरों सवाल लिए जब वह घर पहुंचा तो अक्षरा सो रही थी इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाया और वह भी लेट गया. यह सोचसोच कर वह गुस्से से फनफना रहा था कि अक्षरा ने उस से सचाई छिपा कर अच्छा नहीं किया.

तभी अक्षरा के फोन की घंटी बजी, तो रजत ने ही उठा लिया क्योंकि वह सो रही थी. लेकिन अभी वह हैलो बोलता कि उस से पहले ही उधर से सुजीत बोला, ‘‘क्या हाल है मैडम? वैसे, अच्छा तो नहीं ही होगा… उस दिन बहुत अकड़ दिखा कर गई थी न कि अब तुम्हें मुझ से बात करना भी गवारा नहीं है क्योंकि तुम एक शादीशुदा औरत हो और अब तुम्हारा पति ही तुम्हारे लिए सबकुछ है वगैरहवगैरह. तो देख, कैसे वही तुम्हारा पति तुम्हें धक्के मार कर उस घर से बाहर निकलेगा क्योंकि मैं ने तुम्हारे खिलाफ उस के दिल में जहर जो भर दिया है,’’ बोल कर सुजीत ठहाके लगा कर हंसा और फोन रख दिया.

रजत हक्काबक्का रह गया. कभी वह फोन को देखता तो कभी सो रही अक्षरा को जो एकदम मासूम लग रही थी उसे. वह धम्म से जा कर कुरसी पर बैठ गया और अपना सिर पकड़ लिया.

‘क्यों, क्यों तुम ने मुझ से सचाई छिपाई अक्षरा. बता देती तो क्या मैं तुम्हें छोड़ देता? विश्वास नहीं क्या मुझ पर?’ वह खुद में बुदबुदाया, ‘लेकिन ऐसी कौन सी बड़ी बात कर दी अक्षरा ने जो मैं इतना आगबबूला हो रहा हूं. एक प्यार ही तो किया उस ने? कालेज के समय मुझे भी तो एक लड़की से प्यार हो गया था और यह बात मैं ने अक्षरा को बताई भी थी. उस पर उस ने हंसते हुए कहा था कि अरे वाह, क्या नाम था उस लड़की का? कैसी दिखती थी? मुझ से भी सुंदर थी क्या?’’ उस पर मैं ने कहा था कि हां, सुंदर तो थी पर तुम से ज्यादा नहीं. लेकिन उसे तो मेरे प्यार की बात सुन कर कोई जलन या गुस्सा नहीं हुआ. फिर मैं क्यों इतना परेशान हो उठा? प्यार करना कोई गुनाह तो नहीं है न. कृष्ण ने भी तो राधा से प्यार किया था अपने मन में सोच रजत खुद को धिक्कार उठा.

पलट कर रजत ने अक्षरा को देखा. चैन की नींद सो रही थी वह. उस ने प्यार से

उसे अपनी बाहों में भर लिया और बोला, ‘‘मैं पागल नहीं हूं जो किसी ऐरेगैरे की बातों में आ कर इतनी सुंदर पत्नी को छोड़ दूंगा. फिर कहां मिलेगी मुझे ऐसी कश्मीर की कली,’’ और फिर अक्षरा को चूमते बोला. रजत गुनगुनाता हुआ उठा और अक्षरा से गर्म कौफी की डिमांड करते हुए बाथरूम में घुस गया.

‘‘कौफी बहुत अच्छी बनी थी, थैंक यू. अच्छा सुनो, तुम कह रही थी कि मैं तुम्हें अपने नए दोस्त से कब मिलाओगे तो चलो आज मिलवाता हूं.’’

अचानक अपने सामने सुजीत को देख कर अक्षरा डर गई.

‘‘डरो मत, यह कोई भूत नहीं है जो तुम्हें खा जाएगा बल्कि यही तो मेरा नया दोस्त है,’’ रजत बोला, ‘‘और इन से मिलो, ये हैं मेरी पत्नी, मेरी अर्धांगिनी, मेरी कश्मीर की कली, अक्षरा रजत,’’ अक्षरा का परिचय देते हुए जब उस ने सुजीत की तरफ देखा तो उस के चेहरे पर 12 बज गए. उसे तो शौक ही लग गया कि यह क्या हो गया. कहां सोचा था उस ने कि अक्षरा रोतीकल्पती उस के पास वापस आ जाएगी. मगर यहां तो सब उलटा ही हो गया.

रजत कोई दूध पीता बच्चा नहीं था. समझ गया था कि उस का फोन गुम हो जाना, फिर सुजीत को मिल जाना, फिर उस की तरफ उसका दोस्ती का हाथ बढ़ाना, दिल्ली आना, अपने प्यार के बारे में जिक्र करना और फिर अक्षरा का अपने फोन में फोटो दिखाना, मैसेजस दिखाना और यह जतलाना कि दोनों घंटों वीडियो कालिंग पर बात करते थे, सब एक साजिश के तहत किया इस ने ताकि रजत और अक्षरा का रिश्ता खराब हो जाए और वह अपनी पत्नी को अपनी जिंदगी से निकाल फेंके. मगर ऐसा कुछ तो हुआ नहीं. अक्षरा का हाथ कस कर थामे रजत वहां से चलता बना और सुजीत देखता रह गया.

रजत और अक्षरा की शादी को 1 साल पूरा हो चुका था और दोनों अपना दूसरा हनीमून मनाने फिर से उन्हीं कश्मीर की वादियों में विचर रहे थे. बहुत लोगों को नहीं पता पर रजत एक बहुत अच्छा गायक भी था. अक्षरा की फरमाइश पर रजत गुनगुनाने लगा, ‘‘तुम अगर साथ देने का वादा करो, मैं यों ही मस्त नगमें लुटाता रहूं, तुम मुझे देख कर मुसकराती रहो, मैं तुम्हें देख कर गीत गाता रहूं…’’

राइटर- मनी सिंह

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...