Social Story in Hindi: मानो कल की ही तो बात थी जब चेष्ठा पहली बार अमन से मिली थी. हाई स्कूल का सब से हैंडसम लड़का अमन जो सिर्फ चेष्ठा को देखता था. अमन और चेष्ठा की जोड़ी स्कूल की सब से हैपनिंग जोड़ी थी. स्कूल के दिनों से ही अमन को फोटोग्राफी का शौक था और चेष्ठा को पेंटिंग का. एक खूबसूरती को डीएसएलआर से कैमरे में कैद करता और दूसरा मन की आंखों से देख उन्हें पेंटिंग से बयां करता. शायद दोनों के बीच की कैमिस्ट्री इसी वजह से बनी. आगे जा कर दोनों के कालेज भले अलग हो गए लेकिन साथ कभी अलग नहीं हुआ. दोनों के घरों में एकदूसरे के आर्ट दीवारों पर सजे रहते थे.

उन की जोड़ी उन के मांबाप बहुत पहले स्वीकार कर चुके थे. दोनों ही हाई सोसाइटी परिवार से थे, जहां प्रेम संबंधों को ले कर खयाल खुले होते हैं. दोनों परिवारों का स्टैटस भी मैच होता था तो कभी बच्चों के प्रेम पर पाबंदी नहीं लगी. वैसे भी प्रेम को ले कर हायतोबा अकसर मध्यवर्गीय परिवारों में ही होती है. कालेज की फाइनल परीक्षा हो चुकी थी और दोनों अपने आगे के लक्ष्य के लिए तैयार थे. एक रात हमेशा की तरह दोनों वीडियो कौल पर थे. ‘‘लंदन जा कर कोई गोरा मत पटा लेना,’’ अमन ने टांग खिंची. ‘‘हां बस आसीए एडमिशन मिल जाए फिर मैं पक्का तुम्हें भूल जाऊंगी.’’ ‘‘अच्छा मैडम. वैसे अमन रस्तोगी जैसा कोई नहीं.

स्ट्रौंग, हैंडसम, रस्तोगी डिजाइन का नैक्स्ट डिजाइन हैड.’’ ‘‘क्या? क्या?’’ चेष्ठा चौंक गई. ‘‘चौंक गई न. आज डैड के साथ कंपनी गया था. वहां जा कर काफी अच्छा लगा. लोग पसंद करते हैं मुझे. चाहते हैं मैं जल्द ही कंपनी जौइन करूं.’’ ‘‘ऐसा लोग चाहते हैं या तुम्हारे डैड या तुम?’’ ‘‘क्या फर्क पड़ता है.

आखिर है तो सब मेरा ही. देखो डैड चाहते हैं कि मैं कंपनी जौइन करूं, अपना बिजनैस संभालूं.’’ ‘‘तुम्हारा बिजनैस?’’ ‘‘औफकोर्स मेरा. डैड ने आज खुद कहा कि सन इट्स आल यौर्स. यह सुन सीना इतना चौड़ा हुआ कि क्या बताऊं. अब बस एमबीए हो जाए, फिर सब मेरे हाथों में होगा.’’ ‘‘एमबीए. मगर तुम तो डौक्यूमैंट्री इंटरशिप के लिए बैंगलुरु जाने वाले थे? तुम्हें तो रेहान क्रोकेविएल की तरह बनना था. अपना पैशन छोड़ तुम्हें डैस्क जौब करनी है?’’ ‘‘क्या डैस्क जौब वह जौब नहीं मेरा फर्ज है और मेरा हक भी. मेरे डैड का बिजनैस आखिर मेरा ही तो है.’’ ‘‘मगर अमन…’’ ‘‘कोई मगर नहीं. यह मेरा अपना डिसीजन है. लोगों की आड़ीटेढ़ी तसवीरें अपने शौक के लिए खींचता हूं और शौक बदलते रहते हैं. चेष्ठा देखना एक दिन तुम्हारा भी पिकासो बनने का भूत उतर जाएगा.’’

अमन की बातें चेष्ठा की समझ से परे होती जा रही थीं. उस ने काल कट कर दी और अपनी नई पेंटिंग को देखने लगी. यह नई पेंटिंग अमन का बर्थडे गिफ्ट थी. एक तसवीर जिसे चेष्ठा ने अपने हाथ से बनाया था. आज जब 2 हफ्तों बाद यह कंप्लीट हुई तो अमन ने अपने आइडियल रेहान क्रोकेविएल को डिच ही कर दिया. वह रेहान जिस की खींची तसवीर अमन दोगुनी कीमत पर भी खरीदता था. चेष्ठा बेचैन थी, शायद इस की वजह अमन का बिजनैस जौइन करने का डिसिजन था. चेष्ठा को इस बात से दिक्कत नहीं थी कि अमन ने बिजनैस चुना उसे दिक्कत इस बात से थी कि उस ने अपने ड्रीम से पहले बिजनैस को चुना.

अगर वह अपनी फोटोग्राफी इंटरशिप पूरी कर के बिजनैस जौइन करता तो चेष्ठा को दुख नहीं होता. एक शाम चेष्ठा छोटी बहन निष्ठा और मांबाप के साथ अमन की बर्थडे पार्टी मे पहुंची है. दोनों परिवार एकदूसरे से खुशीखुशी मिले. बिजनैस, स्पोर्ट्स, बौलीवुड की बहुत जोरशोर से चर्चा हो रही थी. पार्टी बहुत बड़ी थी और उस से भी बड़े उस में आए लोग. तभी एक गैस्ट के आने से पार्टी का रंगीन माहौल एकदम से संजीदा हो गया है. ‘‘क्या वह नीरज कुमार है?’’ ‘‘एमएलए नीरज कुमारजी,’’ अमन ने चेष्ठा को सही किया. ‘‘जी और इस अमन पर 2 साल पहले ही रेप चार्ज लगा था और तुम ने इसे यहां बुलाया है?’’ ‘‘चेष्ठा धीरे बोलो. मत भूलो वह एक एमएलए है और डैड का गैस्ट भी.’’ तभी अमन के डैड ने उसे इशारा कर बुला लिया तो अमन और चेष्ठा उन के पास पहुंचे. ‘‘अच्छा आप ही का जन्मदिन है. बहुत बधाई हो,’’ एमएलए बधाई दे कर अमन के गले में एक सोने की चेन पहनाई.

डैड के इशारे पर अमन ने एमएलए के पैर छुए जो चेष्ठा को बिलकुल पसंद नहीं आया. तभी एमएलए की नजर चेष्ठा के नाराज चेहरे पर पड़ी बोले, ‘‘और यह कौन? आप की कोई बेटी तो है नहीं. फिर?’’ ‘‘बेटी जैसी है… अमन की दोस्त है,’’ अमन के डैड ने कहा. ‘‘गर्लफ्रैंड बोल दीजिए अजयजी. हम भी खुले विचारों के हैं. जोड़ी सुंदर है और वैसे भी आजकल के बच्चे प्यार, रिश्ता, हनीमून सब खुद ही तय कर लेते हैं.’’ अमन के पापा ने मुसकरा कर अमन को इशारा किया और अमन ने चेष्ठा को.

चेष्ठा अमन का इशारा तो समझ गई थी लेकिन एमएलए का व्यंग्य सुन अमन ने उसे अवौइड कर दिया. कुछ देर बाद, ‘‘यह क्या था चेष्ठा?’’ कह अमन ने गुस्से में अपने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया. ‘‘क्या?’’ ‘‘नादान मत बनो. तुम अगर उस के पैर छू लेती तो क्या होता? डैड को यह अच्छा नहीं लगा ओके.’’ ‘‘अमन मेरी ड्रैस कटवाली है तो नीचे कैसे झकती और अगर मैं ने साड़ी भी पहनी होती तो भी मैं उस रैपिस्ट के पैर नहीं छूती.’’ ‘‘धीरे बोलो चेष्ठा.’’ ‘‘क्या धीरे? तुम खुद कालेज के दिनों में सब को बोलते थे उसे वोट न करने को और अब उस की दी चेन पहने फिर रहे हो.’’ ‘‘पहले तो मुझे अब फर्क नहीं पड़ता उस ने क्या किया क्या नहीं? दूसरा यह चेन सिर्फ दिखावा है. उस का हमारे साथ होना बिजनैस को फायदा दिलाएगा. सो प्लीज रिस्पैक्ट हिम, झठा ही सही.’’ ‘‘मगर अमन…’’ ‘‘कोई मगर नहीं. मेरे बर्थडे के दिन मत लड़ो.’’ फिर दोनों कुछ देर चुपचाप बैठे रहे. ‘‘वैसे मेरा गिफ्ट कहां है?’’ कह चेष्ठा अमन के कमरे में रखे एक बड़े से गिफ्ट को अनरैप करने लगी.

‘‘ओह, गोश. तुम ने मेरे लिए बनाया,’’ अमन रेहान का पोर्ट्रेट देख शौक्डहो गया. ‘‘यह तो बहुत कमाल का है. लगता है अभी बोल पड़ेगा,’’ अमन अपना गिफ्ट देख बहुत खुश था. उस ने अपने कमरे में लगे सैंटर पीस को हटा कर वह पेंटिंग वहां रख दी. ‘‘वी आर यंग, हमें पहले अपना ड्रीम पूरा करना चाहिए..़’’ चेष्ठा का इशारा अमन की इंटरशिप की तरफ था. ‘‘एक बार मास्टर हो जाए, फिर कुछ दिन का ब्रेक लें… यह भी कर लेंगे.’’ ‘‘यह पहले कर लो… तुम्हारे डैड जानते थे कि तुम्हें क्या करना है और वे चाहते भी थे कि तुम अपने सपने पूरे करो.’’ ‘‘हां चेष्ठा वे मुझे नहीं रोक रहे. बस यह चाहते हैं कि मैं अपनी जिम्मेदारियां जल्दी समझूं तो इस में गलत क्या है और फोटो तो मैं कभी भी, कहीं भी ले सकता हूं,’’ और अमन अपना कैमरा उठा चेष्ठा की तसवीरें लेने लगा. तभी कमरे के दरवाजे खटखटाने की आवाज आई, ‘‘यह पार्टी तुम्हारी है अमन. चेष्ठा के अलावा भी लोग हैं दुनिया में जो तुम से मिलना चाहते हैं,’’ अमन के मामा की आवाज में एक फटकार थी.

अमन की मां चेष्ठा के लिए कभी ऐसी टोन इस्तेमाल नहीं करती थीं. इसलिए दोनों थोड़ा हैरान थे. जब दोनों कमरे से बाहर आए तो बहुत सी बातें जान चौंक गए. जैसे चेष्ठा का परिवार घर जा चुका था. दरअसल, चेष्ठा की मां उसी अखबार की ऐडिटर हैं जिस ने एमएलए के रेप केस को बहुत तूल दिया था. जब एमएलए और चेष्ठा की मां का आमनासामना हुआ तो दोनों के बीच थोड़ी व्यंग्यबाजी हुई. शायद इस वजह से दोनों पार्टी से जल्दी चले गए. कुछ देर बाद अमन भी चेष्ठा को घर छोड़ने निकल पड़ा. ‘‘क्या शानदार बर्थडे रहा मेरा.’’ ‘‘मां तुम्हारा बर्थडे तो स्पौइल नहीं करेगी न?’’ ‘‘हां मुझे पता है. उन का कोई इंटैंसन नहीं होगा. वे तो बस उन के तीखे आर्टिकल. वे थोड़ा ब्लंट बोलती और लिखती हैं.

खैर उन का प्रोफैशन ही ऐसा है. मुझे ध्यान रखना होगा नैक्स्ट टाइम दोनों न मिलें.’’ अपनी मां के लिए तीखे, ब्लंट जैसे वर्ड सुन चेष्ठा अमन को घूरने लगी. चेष्ठा अमन को पसंद थी उस का एक कारण उस की मां ही थी. उस की मां के लेख की सचाई और असामाजिक तत्त्वों के सामने हिम्मत से खड़े होने वाली शक्ति को देख अमन इतना प्रभावित होता था कि फोटोग्राफी छोड़ जर्नलिस्ट बनने की सोचता था. तो कैसे आज वही अमन उन लेखों को तीखे, ब्लंट बोल रहा है. ‘‘वैसे उन का सर्वाइकल कैसा है? किस तरह वे दिनरात अपने काम में खोई रहती हैं. अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखतीं. उन्हें अब आराम करना चाहिए.

रिटायरमैंट या बड़ा ब्रेक ले कर किसी हौलिडे पर निकल जाएं. मे बी सैकंड हनीमून. शी नीड ब्रेक. कितना काम करेंगी. तुम और निष्ठा अपना ध्यान रख सकते हो. उन्हें सच में आराम करना चाहिए.’’ अमन को अपनी मां की चिंता कर देख चेष्ठा को अच्छा लगा. घर पर सब सो चुके थे तो चेष्ठा भी कपड़े बदल सो गई. सुबह ब्रेकफास्ट पर चेष्टा की मां ने पूछा, ‘‘पार्टी कैसी रही?’’ ‘‘सब ठीक रहा. आप तो कल की बात से नाराज या…’’ ‘‘नहींनहीं चेष्ठा हमारे और नेताओं के लिए तो यह रोज की खींचातानी है.

इस से फर्क नहीं पड़ता. तुम और अमन तो…’’ ‘‘नहीं हमारे बीच सब ठीक है.’’ ‘‘गुड,’’ चेष्ठा की मां यह कह अपने औफिस के लिए निकल गईं. चेष्ठा निष्ठा से बोली, ‘‘आज पापा टैनिस कुछ ज्यादा लंबा नहीं खेल रहे. क्लब से अभी तक नहीं आए.’’ ‘‘शायद टैनिस कोर्ट में अपना गुस्सा निकाल रहे हों,’’ निष्ठा ने कहा. ‘‘गुस्सा. लेकिन मां तो शांत थीं?’’ ‘‘मां को यह सब हैंडल करना आता है. लेकिन पापा… वैसे भी एमएलए ने जो अमन के डैड से कहा पापा उस बात से नाराज हैं.’’ ‘‘ऐसा क्या कहा था उस ने?’’ ‘‘यही कि अजयजी समधी अपना नफानुकसान देख कर बनाने चाहिए.’’ ‘‘क्या ऐसा कहा उस ने?’’ ‘‘हां और जातेजाते मां को सलाह दे रहा था, ‘‘श्वेताजी, 30 साल से काम कर रही हैं, अब रिटायरमैंट ले लीजिए.’’ निष्ठा की बात सुनते ही चेष्ठा के माथे पर शिकन आ गई. उसे अच्छे से समझ आ गया कि अमन के मन में उस की मां की तबीयत और रिटायरमैंट की बात कैसे आई. ‘‘क्या? गुरुजी? 5 सालों में तो कभी नहीं बुलाया मिलने,’’ चेष्ठा ने अपनी मां से कहा. ‘‘तब तुम बच्ची थी शायद इसलिए. वैसे मैंने तो बहाना कर दिया कि मुझे मीटिंग के लिए मुंबई जाना है तो अब तुम अपना देख लो. तुम्हें वैसे भी पता है मैं इन गुरुबाबाओं के चक्करों से दूर रहती हूं और अगर पास जाऊंगी तो हैडलाइन बना दूंगी.’’ ‘‘मां मुझे भी इन चक्करों में नहीं पड़ना.’’ ‘‘बेटा वे अमन की मां के गुरु हैं तो तुम तो हमेशा के लिए इन चक्करों मे बंध गई हो.

अमन की मां ने फोन कर रिक्वैस्ट की है तुम्हारे लिए. बाकी तुम्हारी मरजी.’’ न चाहते हुए भी चेष्ठा को अमन और उस की मां के साथ गुरुजी के पास जाना पड़ता. पूरा रास्ते अमन की मां गुरुजी की महिमा सुना रही थीं और यह भी चेता दिया कि आज चेष्ठा ने सूटसलवार डाला है तो ड्रैस में कट है बहाना नहीं चलेगा. ‘‘पता है गुरुजी को भविष्य भी दिखता है. तेरे ममेरे भाई के लड़का होगा या लड़की यह पूछा था मैं ने गुरुजी से. उन्होंने कहा था कि लड़की होगी और देख लड़की हुई न. इतना बड़ा बिजनैस और हुई लड़की. अब कौन देखेगा वह सारा.’’ अमन की मां की बात पर चेष्ठा कोई प्रतिक्रिया देती उस से पहली अमन बोल पड़ा, ‘‘अब लड़कालड़की में क्या फर्क? लड़कियां भी बिजनैस संभाल रही हैं और बहुत सक्सैसफुल हैं.

चेष्ठा को देखो. इतनी टेलैंटेड है. अपना पैशन पूरा कर रही है और निष्ठा भी ला पढ़ रही है. लेकिन बाद में अंकल का बिजनैस ये दोनों ही तो संभालेगी.’’ ‘‘और घरपरिवार को?’’ अमन की मां बोली. ‘‘चेष्ठा बहुत टेलैंटेड है मां. वह सब देख लेगी.’’ पहले तो चेष्ठा अमन के इंटरशिप छोड़ने के डिसिजन से खुश नहीं थी लेकिन अब अमन और उस की मां के चेष्ठा के लिए फ्यूचर प्लान को सुन कर और भी टैंशन मे आ गई. तभी आश्रम आ गया. आश्रम बहुत बड़ा और खूबसूरत था. चारों तरफ फूल ही फूल थे. ‘‘मुझे अपना कैमरा लाना चाहिए था.’’ अमन के ये शब्द सुन चेष्ठा को थोड़ी राहत मिली कि उस के अंदर का आर्टिस्ट अभी जिंदा है और क्या पता वह बिजनैस वारिश पर कब हावी हो जाए. तभी सामने से गुरुजी आ गए.

मां के इशारे पर अमन झट से उन के पैरों मे गिर गया है. चेष्ठा ने भी उन का आदर करते हुए उन के पैर छुए है. गुरुजी अमन की पीठ जोर से ठोंक उसे आशीर्वाद देते हैं. लेकिन जब वे चेष्ठा के सिर पर हाथ रख आशीर्वाद देते हैं तो चेष्ठा झिझक से पीछे हट गई. ‘‘क्या हुआ?’’ गुरुजी ने चेष्ठा से पूछा. चेष्ठा ने संकोच से अमन की तरफ देखा, ‘‘शायद उसे लगा आप उस की भी पीठ तोड़ दोगे…’’ अमन की बात सुन गुरुजी जोर से हंस दिए, ‘‘अरे नहीं, ऐसा आशीर्वाद सिर्फ जवान लड़कों को मिलता है.

कोमल बालिकाओं को तो सिर्फ प्यार से आशीर्वाद मिलता है.’’ कुछ देर के प्रवचन के बाद गुरुजी और अमन की मां एक कोने में बैठ कुछ बातें करने लगे. ‘‘यह आदमी अच्छा नहीं है.’’ ‘‘कौन आदमी?’’ ‘‘यह तुम्हारा गुरु. उस ने मुझे छुआ.’’ ‘‘उस ने मुझे छुआ. अब यह क्या बकवास है. मैं 1 मिनट भी तुम से दूर नहीं हुआ तो फिर ऐसी ओछी बात कहां से आ गई?’’ ‘‘उस ने जब आशीर्वाद दिया तब उस ने मुझे छुआ मेरे सिर में.’’ ‘‘आशीर्वाद सिर छू कर ही देते हैं चेष्ठा.’’ ‘‘ठीक वैसे ही जैसे तुम छूते हो अमन?’’ अमन चेष्ठा को घूरने लगा. ‘‘वह सिर के बालों को यों सहला रहा था जैसे तुम करते हो.’’ भला यह आशीर्वाद नहीं होता तो क्या होता?’’ ‘‘आई नो गुड टच ऐंड बैड टच अमन.’’ अमन कुछ बोल नहीं पाया. वह कभी चेष्ठा को देखे तो कभी उस गुरु को.

थोड़ी देर बाद अमन की मां मिठाई का डब्बा चेष्ठा को पकड़ा कर बोलीं, ‘‘गुरुजी ने तुम्हारे लिए भेजी है. बोले लड़की बहुत अच्छी है, दुनिया में नाम करेगी. कुंडली भी बहुत अच्छी है तुम दोनों की. बस अब एमबीए हो जाए फिर तुम दोनों की सगाई और शादी.’’ ‘‘क्या?’’ अमन चिल्ला पड़ा है. ‘‘हां तो. जब तुम दोनों के साथ से दोनों परिवार खुश हैं तो देर क्यों करें? मुझे भी घर की जिम्मेदारियों से रिटायरमैंट लेना है. अब कुछ साल बाद सब चेष्ठा देखेगी और मैं अपने गुरुजी के आश्रम में सेवा करूंगी.’’

अमन की मां का रिटायरमैंट प्लान सुन चेष्ठा सुन्न रह गई. वह बस इंतजार कर रही थी कि कब अमन उसे अकेले मिले और वह उस पर बरस पड़े. अपनी मां को घर छोड़ जब अमन चेष्ठा को उस के घर ले जा रहा था तो दोनों की बहस शुरू हो गई. अमन पूरा रास्ते उसे समझता रहा कि वह सच में शादी की बात नहीं जानता था.

घर में आ चेष्ठा अपने कमरे में घुस गई. उस के पैरों की आवाज से उस के बिगड़े मूड को भांप उस की मां उस के पास गईं. पूछा, ‘‘क्या हुआ? झगड़ा हुआ तुम दोनों का?’’ चेष्ठा ने लंबी सांस ली और सब उगल दिया सिवा गुरु के आशीर्वाद के नहीं तो कल सच में चेष्ठा की मां गुरुजी को हैडलाइन बना देतीं. ‘‘तो इस में गुस्सा क्यों हो? शादी नहीं करनी या अमन से शादी नहीं करनी?’’ ‘‘आई लव हिम मौम, मगर 22 साल की उम्र में मुझे इन चीजों में नहीं पड़ना.’’ ‘‘तो यह बात बोल दो अमन और उस की मां को. वैसे भी उन के हिसाब से तो 2 साल हैं सगाई को.’’ ‘‘और आप के?’’ चेष्ठा की मां थोड़ा सोच कर बोलीं, ‘‘मेरे लिए तुम 2 क्या 5 या 10, जितने साल लेना चाहो ले लो. आखिर शादी कर के तुम्हें अमन के साथ रहना मुझे नहीं. यह तुम्हारा फैसला होना चाहिए न कि मेरा, न अमन की मां का.

सिर्फ तुम्हारा और अमन का. चेष्ठा स्टैंड औनली फौर योरसैल्फ नौट टू प्लीज ऐनीवन.’’ उसी रात डिनर पर चेष्ठा अपने पापा से बोली, ‘‘पापा, आप ने कभी यह सोचा कि आप के रिटायरमैंट के बाद आप के बिजनैस का क्या होगा? आई मीन मैं पेंटर हूं, निष्ठा वकील बनेगी तो आप का बिजनैस कौन संभालेगा?’’ चेष्ठा के पापा ने एक मोहक मुसकान लिए कहा, ‘‘वही जो मेरे बोर्ड में काबिल होगा. मेरा बिजनैस मेरा पैशन, मेरा ड्रीम था तो उस की जिम्मेदारी मेरी है तुम्हारी नहीं. हां तुम दोनों में किसी एक की भी बिजनैस में रुचि होती तो मैं उसे बिजनैस खुशीखुशी दे देता.

लेकिन तुम दोनों ने अपनी राह चुन ली है और मुझे पता है तुम दोनों इस में सक्सैसफुल भी रहेंगी. मैं ने वह किया जो मुझे पसंद था. तुम वह करो जो तुम्हें पसंद हो.’’ चेष्ठा ने जब यह बात अमन को बताई तो वह कुछ नहीं बोला. ‘‘कुछ बोलो अमन?’’ ‘‘मैं बस तुम्हारे पापा की बात से हैरान हूं. आखिर अपना बिजनैस किसी और के हाथों में देना तो कोई समझदारी की बात नहीं हुई. खैर, यह तुम्हारे पापा का डिसिजन है मुझे इस में कुछ और नहीं कहना.’’ अमन से बात करते वक्त चेष्ठा की नजर अपने लैपटौप पर आए एक मेल पर पड़ी, जिस के खुलते ही वह जोर से चिल्ला पड़ी, ‘‘वह आ गया… वह आ गया.’’

चेष्ठा का शोर सुन उस के पेरैंट्स कमरे में आ गए. ‘‘क्या हुआ?’’ चेष्ठा के पापा ने पूछा. ‘‘आ गया पापामां. आरसीए का मेल आ गया. उन्हें मेरी पेंटिंग पसंद आई, वे मुझे स्कौलरशिप दे रहे हैं. अब मैं लंदन जाऊंगी.’’ ‘‘हमें सैलिब्रैट करना चाहिए,’’ चेष्ठा के पापा बोले. अगली रात चेष्ठा के घर डिनर पर अमन आया. सब चेष्ठा के लिए बहुत खुश हुए. उस के जाने की प्लानिंग शुरू करने की बातें हुईं. इसी बीच चेष्ठा अमन को अपने कमरे में ले जा जोर से हग कर बोली, ‘‘मुझे भूल मत जाना.’’ ‘‘नहीं भूलूंगा.

लेकिन बहुत याद आएगी तुम्हारी. वैसे यह भी अच्छा है. जब मैं एमबीए के लिए हैदराबाद रहूंगा तब तक तुम भी अपना पिकासो ड्रीम मतलब मास्टर पूरा कर लोगी.’’ ‘‘हां, हां तुम देखना अब जल्द ही लंदन आर्ट गैलरी में मेरी बनाई पेंटिंग्स होंगी.’’ ‘‘हां गुरुजी ठीक बोल रहे थे लड़की दुनिया में नाम करेगी.’’ ‘‘अमन, फिर गुरुजी की महिमा मत शुरू करो.’’ ‘‘अच्छा अब तुम ही देखो, कल ही तुम उन से मिली और आज यह चमत्कार हो गया.’’ ‘‘चमत्कार?’’ यह हार्डवर्क है मेरा.’’ ‘‘चेष्ठा सिर्फ 28% चांस होते हैं आरसीए में एडमिशन के. उन 28% में तुम्हारा नाम. यह चमत्कार ही हुआ न?’’ ‘‘तुम्हारा मतलब यह चांस मुझे मेरे हार्डवर्क से नहीं चमत्कार से मिला है. ऐसा है तो मैं सिर्फ एक फार्म सबमिट कर देती न कोई वर्क न पोर्टफोलियो. तो क्या तब भी मेरा नाम आता? अमन मुझे सिर्फ एडमिशन नहीं स्कौलरशिप मिली है जो किसी का काम, हार्डवर्क, पेंटिंग देख कर दी जाती है न कि एक सिंपल ऐप्लिकेशन देख कर.’’

अमन झेंप कर बोला, ‘‘मुझे कुछ नहीं कहना.’’ ‘‘लेकिन मुझे कहना है. मैं अभी सिर्फ अपने कैरियर के बारे में सोचना चाहती हूं. आरसीए, खुद का आर्ट स्टूडियो. तो मुझे अभी इस शादी के चक्कर से दूर रखो.’’ ‘‘तो तुम इस बात से अभी तक नाराज हो. मां ने शादी करने को नहीं कहा. वे सिर्फ उस की बात कर रही थीं. इतनी जल्दी शादी मुझे भी नहीं करनी. हां लेकिन करनी तुम से ही है इतना तो तय है. मगर तुम्हारा तय है या नहीं वह मुझे अब नहीं पता,’’ और फिर नाराजगी में अमन डिनर किए बिना ही चला गया. जैसेजैसे चेष्ठा के लंदन जाने के दिन नजदीक आ रहे थे, चेष्ठा और अमन की दूरी बढ़ती जा रही थी. 17 साल की उम्र में जो तितलियां अमन को देख चेष्ठा के आजूबाजू उड़ती थीं वे आज न जाने कहां गायब हो गई थीं.

जिस अमन को चेष्ठा जानती थीं वह भी थोड़ा बदल चुका था या शायद पूरा ही. चेष्ठा का अमन अंधविश्वासों से दूर रहता था, खुद की काबिलीयत साबित करना चाहता था, दुनिया के कोनेकोने ऐक्स्प्लोर करना चाहता था लेकिन यह अमन खुद को अपने डैड के चैंबर में कैद करना चाहता है और चेष्ठा को अपने घर में. इसी दुख को लिए चेष्ठा अपनी मां के पास गई, ‘‘जो आप के आर्टिकल पढ़ कर इंस्पायर होता था आज उसी को आप के आर्टिकल ब्लंट लगते है. मैं ने सोचा था मैं और अमन, आप और पापा की तरह कूल कपल रहेंगे जो एकदूसरे को मोटीवेट करेंगे, सपोर्ट देंगे. मगर…’’ ‘‘मगर तुम्हें हमारे जैसा बनना ही क्यों है? यह गलत है. तुम्हें मेरा जैसा या अमन को तुम्हारे पापा जैसा क्यों बनाना है? क्या मैं और तुम्हारे पापा अपने पेरैंट्स जैसे हैं? नहीं न? अपना परफैक्ट कपल थीम तुम दोनों खुद बनाओ न कि हमें या किसी और को कौपी कर.

तुम्हारे पापा व्हाइट पसंद करते हैं और मैं ब्लैक. उन्हें टैनिस पसंद है और मुझे क्रिकेट. हम दोनों ने अपनी पसंद को अपनाए रखा और अपनी पसंद एकदूसरे पर थोपे बिना साथ निभाया. इसलिए अपना टाइम लो और फिर कोई डिसिजन लो.’’ अपनी मां की राय चेष्ठा ने अच्छे से सुनी और समझ. अगले दिन वह अमन से मिलने उस के घर गई. उस ने सोचा आज सारे गिलेशिकवे मिटा ठंडे दिमाग से बात कर दोनों अपनी दूरिया तय करेंगे. घर में घुसते ही चेष्ठा ने अमन की मां को ग्रीट किया लेकिन वे उसे नजरअंदाज कर चली गईं. 5 सालों में ऐसा पहली बार था कि अमन की मां ने उस से रूखा बरताव किया. अमन किसी के साथ काल पर था इसलिए चेष्ठा चुपचाप उस के कमरे में बैठ गई. तभी 2 हैल्पर अमन का कुछ सामान पैक करने आए. एक कुछ बौक्स उठा ले गया और एक रेहान की पेंटिंग ले जा रहा था कि चेष्ठा ने उसे टोका और पेंटिंग वापस कमरे में रखने को कहा. हैल्पर पेंटिंग रख चला गया.

अमन काल पर काफी देर तक बात करता रहा. इस बीच दोनों के लिए कौफी भी आ गई. चेष्ठा ने कौफी के 2 घूंट लिए कि अमन ने उस के पास बैठ उस का माथा चूमते हुए कहा, ‘‘चलो तुम्हारा गुस्सा शांत हुआ.’’ ‘‘सामान कहां जा रहा है?’’ ‘‘वह कल हैदराबाद के लिए निकलूंगा इसलिए कुछ सामान साथ ले जा रहा हूं.’’ ‘‘क्या कल? तुम ने बताया भी नहीं?’’ ‘‘अरे सब सडन डिसाइड किया. वैसे अभी तुम्हारे ही पास आने वाला था.’’ चेष्ठा को इस बात का बुरा तो लगा कि अमन ने उसे अपने जाने का पहले नहीं बताया लेकिन उसे इस बात की खुशी भी थी कि अमन उस की बनाई पेंटिंग साथ ले जा रहा है.

आज तुम पूरा दिन मेरे साथ हो. तो बोलो कहीं बाहर चलना या मेरे साथ इस कमरे में बंद होना है. चेष्ठा अमन से लिपट कर बोली, ‘‘मुझे तुम्हारी बहुत याद आएगी.’’ ‘‘जिस तरह आजकल तुम लड़ रही हो न, तो याद का ऐसा लगता नहीं.’’ ‘‘तुम लड़ते हो… तुम बदल गए हो अमन.’’ ‘‘अच्छाजी, अपनी जिम्मेदारियों को समझना और मैच्योर बिहेव करना अगर बदलना है तो यह बदलाव अच्छा है और ऐसे बदलाव की थोड़ी जरूरत तुम्हें भी है.’’ ‘‘मुझे?’’ ‘‘हां तुम्हें. अगर मैं चेंज हो डैड की जगह ले रहा हूं तो तुम्हें भी कुछ चेंज कर मां की तरह बनना पड़ेगा. तभी तो हम परफैक्ट कपल बनेंगे. मेरे मांडैड की तरह.’’ ‘‘लेकिन हमें तुम्हारे मांडैड की तरह क्यों बनना है?’’ ‘‘तो क्या तुम्हारे डैड की तरह बनें जो पति टैनिस खेलता रहता और बीवी दिनरात लोगों की लाइफ को मासलेदार सुर्खिया बनाती है.’’ अमन की टिप्पणी में अभद्रता थी. उस का उपहास भरा स्वर सुन चेष्ठा को बहुत क्रोध आया. वह कुछ कहती तभी हैल्पर दोबारा कमरे में आया.

अमन ने उसे आंखें दिखा कहा, ‘‘अब फिर क्यों आए हो?’’ ‘‘सर वह एमएलएजी का सामान ले जाना है या नहीं? वही पूछना था.’’ ‘‘हां ले जाना है. अभी तक ले क्यों नहीं गए?’’ ‘‘वह मैडम ने रखवा दिया था.’’ ‘‘अच्छा कोई नहीं अब ले जाओ.’’ जैसे ही हैल्पर रेहान का पोर्टे्रट उठाने लगा चेष्ठा ने अमन को घूर कर देखा. अमन बहुत कूल हो बोला, ‘‘अरे वह कल नीरजजी आए थे. पापा उन्हें तुम्हारी बनाई पेंटिंग दिखा रहे थे. उन्हें बहुत पसंद आई. उन्होंने कहा कि तुम उन का भी पोर्ट्रेट बना देना. उन के कैंपेन को अच्छा प्रमोट मिलेगा. और हां रेहान उन को अपने बेटे जैसा दिखा तो पापा ने इसे गिफ्ट करने को कहा.’’ ‘‘क्या?’’ चेष्ठा तिलमिलाई. अमन फिर कूल बन बोला, ‘‘अरे इतना नाराज मत हो. तुम तो ऐसे और भी बना सकती हो. इट्स नौट अ बिग डील.’’ अमन की बातें चेष्ठा के तनमन में आग लगा चुकी थीं. उस की आंखें जितनी आंसुओं से भरी थीं उतनी ही लाल भी हो चुकी थीं.

अमन की हरकत देख चेष्ठा अपना आपा खो रही थी. उस ने आव देखा न ताव और सीधा अपनी कौफी रेहान की तसवीर पर फेंक अमन से बोली, ‘‘यह मेरी पेंटिंग है जिस के लिए न वह रैपिस्ट डिजर्व करता है और न तुम जैसा मौकापरस्त, जिस की विचारधारा इतनी खोखली है जो बिजनैस प्रौफिट्स के लिए अपनी बुद्धि, अपनी संवेदना ही बेच दे.’’ ‘‘चेष्ठा,’’ अमन गुस्से से आगबबूला हो उठा. मगर चेष्ठा भी उस के सामने खड़ी हो जार से चिल्लाई, ‘‘इट्स ओवर अमन. मुझे तुम्हारे मांडैड की तरह परफैक्ट नहीं बनना, न अपने मांपापा की तरह. मुझे सिर्फ अपने जैसे बने रहना है. माई पेंटिंग, माई चौइस, माई फीलिंग्स आर बिग डील. इट्स आलवेज अ बिग डील अमन रस्तोगी.’’   Social Story in Hindi

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