Stories : आज  परम को औफिस से लौटने में देर हो गई थी. उस ने अपनी पत्नी रूबी को मैसेज कर दिया कि अभी उसे औफिस में थोड़ी देर और लगेगी क्योंकि वापसी में वह अपनी आंखों का चैकअप कराने डाक्टर के पास जाएगा. रात करीब 9 बजे परम अपने फ्लैट पर पहुंचा तो उस के हाथ में एक बड़े से थैले में कुछ सामान था. पारस थैला रूबी को दे कर सोफे पर पसर गया.

लखनऊ शहर के हजरतगंज में बने ‘ऐथैंस टावर’ में परम का औफिस था. ‘जेनिथ ड्रीम्स’ नाम की इस आईटी कंपनी में डाटा ऐनालिस्ट के तौर पर काम करता था परम, आईटी कंपनी में जौब होने के कारण परम को लगातार कंप्यूटर पर काम करना होता था.

परम और रूबी की शादी को 2 साल हुए थे और उन दोनों ने आपसी सहमति से फैमिली प्लानिंग कर ली थी और वह यह था कि कम से कम अगले 2 सालों तक उन दोनों के बीच कोई बच्चा नहीं आएगा. हालांकि, यह फरमान महत्त्वाकांक्षी परम की ओर से आया था, जबकि रूबी तो चाहती थी कि वह जल्दी एक बच्चे को जन्म दे जिस से उस का अकेलापन कम हो सके. वह नौकरी की कोशिश कर रही थी पर ढंग की नौकरी नहीं मिल रही थी.

परम के औफिस चले जाने के बाद वह अपने फ्लैट पर अकेली रह जाती और पूरा दिन उस से काटे नहीं काटता था. बोर होने पर टीवी देखती पर टीवी पर भी कुछ खास मजा नहीं आता. रूबी को पढ़ने का शौक जरूर था इसलिए बाजार जा कर कुछ किताबें खरीद लाती और उन्हें पढ़ती. उस ने कुछ मैगजीन का औनलाइन सब्सक्रिप्शन भी ले रखा था. खाली समय में इन्हीं पुस्तकों और मैगजीन्स को पढ़ कर अपना ज्ञान बढ़ाती और मन भी बहलाती.

रूबी का फोन बजा. उधर से उस का कजिन मनोहर बोल रहा था. मनोहर को शिकायत थी कि एक दिन पहले उस का जन्मदिन था पर रूबी ने उसे फोन कर के विश तक नहीं किया.

‘‘ओह, मेरे दिमाग से ही उतर गया था. क्या करूं मनोहर, मैं बहुत सी बातें भूल जाती हूं,’’ रूबी ने अफसोस जताते हुए कहा.

मनोहर ने रूबी की इस गलती पर पैनल्टी लगाने की बात कह कर फोन रख दिया. रूबी अपनी भूल जाने की आदत पर गिल्ट महसूस करती रही. वह अपनी मैमोरी का क्या करे? जो उसे याद नहीं रहता. रूबी किचन में जा कर चाय बनाने लगी.

जब रूबी वापस आई तो उस के हाथ में 2 कप चाय के साथ रोस्टेड काले चने थे जो सेहत के लिए अच्छे होते हैं. चाय टेबल पर रख कर रूबी ने परम की ओर देखा तो उस के हाथ में एक छोटा स्पीकर के जैसा एक सुनहरे रंग का डिवाइस था जिसे वह बड़ी एहतियात बरतते हुए कोने वाली टेबल पर सजा रहा था. वह उस पैकेट में से निकला था जिसे परम लाया था.

‘‘क्या यह कोई स्पीकर है?’’

‘‘नहीं यह लेटैस्ट एआई असिस्टैंट है,’’ परम ने बताया तो रूबी कुछ सोच में पड़ गई.

इधर कुछ दिनों से एआई का नाम तो पत्रिकाओं और समाचारों में सुना था पर इस के काम और उपयोगिता के बारे में कोई भी जानकारी नहीं थी रूबी को उस के चेहरे पर सवालिया निशान देख कर परम ने उसे बताया कि सम?ा यह जादू का एक पिटारा है. जितने भी सवाल हमारा दिमाग सोच सकता है यह उन सब के उत्तर बता देगा और वह भी चुटकियों में. इतना ही नहीं हमारी सारी समस्याओं के हल भी इस के पास रहते हैं. एआई यानी ‘आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस’’ एक ऐसी तकनीक है जो कंप्यूटर या मशीन को इंसानों की तरह सोचनेसमझने की क्षमता देती है. हम इस का नाम सायरा रखते हैं.

सायरा को उन के फोनों से कनैक्ट कर दिया गया. घर का टीवी भी सायरा से कनैक्ट था. असल में वे ही सायरा को कहते थे कि आज तक पर कोई बेमतलब की बहस चल रही हो तो उस की जगह नैटफ्लिक्स पर कुछ चल रहा हो वही तो बना दो. सायरा उन के कैलेंडर भी बनाती. वह अंदरबाहर का टैंपरेचर जानती थी.

सायरा की जानकारी के लिए उन्होंने अपने कपड़ों, जेबरों, घडि़यों, जूतों के फोटो खींच कर डिजिटल स्कैन कर के सायरा से जोड़ दिया था.

परम लगातार एआई के बारे में बताए जा रहा था पर ये सब बातें रूबी की बौद्धिक क्षमता और इंटरैस्ट से बाहर की थीं इसलिए वह चाय के घूंट भरने लगी, जबकि परम ने एक के बाद एक कई सवाल उस स्पीकरनुमा मशीन से किए, हर सवाल का जवाब उस मशीन से मिलता गया, हर बार एक मशीनी आवाज गूंजती जो किसी महिला की आवाज की तरह थी.

अब तो जब औफिस के काम को घर पर करते समय परम उलझ जाता या कुछ

भी पूछना होता तो हवा में ही बोलता. ‘‘सायरा, इस बार हमारे प्रोडक्ट्स की बिक्री कितनी बढ़ी?’’

परम ने सवाल किया और अगले ही पल सायरा यानी उस एआई की आवाज गूंजी और परम को उस का उत्तर मिल गया. सायरा का कनैक्शन औफिस के सर्वर से भी था.

‘‘आज डिनर में क्या बनाऊं?’’ रूबी ने परम के पास आ कर पूछा, तो बहुत ही जौली आवाज में परम ने सवाल एआई डिवाइस की ओर उछाल दिया, ‘‘सायरा, बताओ आज डिनर में क्या बनाया जाए?’’

तुरंत ‘सायरा’ का उत्तर हाजिर था क्योंकि सायरा को मालूम था मौसम क्या है और कहां क्या बनना है. इस में सिस्टम में लाखों रैसिपीज भी थीं.

‘‘अ… बाहर हलकी बारिश हो रही है. ऐसे में तो पूरी और कचौरी खाने का मजा ही कुछ अलग है पर डीप फ्राई खाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है इसलिए लौकी या टिंडों की सब्जी और रोटी ही ठीक रहेगी.’’

सायरा एआई की आवाज सुन कर रूबी खामोश हो गई क्योंकि लौकी या टिंडे घर में उपलब्ध नहीं थे.

‘‘तो क्या हुआ मैं अभी चौराहे तक जा कर लौकी या टिंडे ले आता हूं,’’ कह कर परम स्कूटी की चाबी ले कर निकल गया जबकि बाहर बारिश हो रही थी.

अपने पति को इस तरह एक मशीन की आवाज पर प्रतिक्रिया करते हुए पहली बार देख रही थी रूबी.

धीरेधीरे रूबी देख रही थी कि उस का पति परम उस आर्टिफिशिल इंटैलिजैंस का गुलाम सा बनता जा रहा है. उस के सारे फैसले अब वह ‘सायरा एआई’ करती है. यहां तक कि वीकैंड पर कहां जाना है? नेहा की ऐनिवर्सरी पर कौन सा गिफ्ट देना है? हमें अपने बच्चे को जन्म देने की तैयारी कब से शुरू करनी होगी आदिआदि.

कुछ हद तक तो रूबी सायरा से चिढ़ने लगी थी. उसे लगने लगा था कि परम अपना सारा ध्यान उस एआई ‘सायरा’ पर लगा रहा है और वह इस पतिपत्नी के रिश्ते में हाशिए पर खड़ी हुई कोई दूसरी औरत हो गई है. यह कुछ ऐसा एहसास था मानो सायरा कोई एआई न हो कर उस की सौतन हो.

और अपनी यह फीलिंग रूबी ने रात को बिस्तर पर लेटे हुए परम से शेयर करी तो वह इस तरह से हंसा जैसे रूबी ने उसे कोई जोक सुना दिया हो. रूबी को परम का इस तरह से हंसना अच्छा नहीं लगा और वह भी करवट ले कर सो गई.

आने वाले दिनों में परम अपना घर का सारा समय ही सायरा एआई से सवालजवाब करने में गुजार देता. रूबी के सब्र की इंतिहा हो चुकी थी और उस दिन जब शाम की चाय पीतेपीते परम ने सायरा से कुछ बचकानी बातें करनी शुरू करीं और कुछ जोक्स सुनाने की फरमाइश करी तो रूबी बहुत नाराज हो गई. परम ने पहले तो रूबी को समझने की कोशिश करी पर फिर उस के कठोर चेहरे को देखते हुए अपना इरादा बदल दिया.

‘‘आज तुम्हें मु?ा में और इस मशीन में से एक को चुनना होगा,’’ आज रूबी बहुत गंभीरता से बात कर रही थी. उस ने परम पर बुरा व्यवहार करने और उस की अनदेखी करने आरोप लगाने शुरू कर दिए.

परम को लगा कि रूबी को उस का सायरा एआई से बातचीत करना पसंद नहीं पर

भला इस में बुराई ही क्या है, सायरा तो एक मशीन भर है पर रूबी की खुशी को ध्यान में रखते हुए कहा, ‘‘चलो बाबा आज के बाद मैं सायरा को चार्ज ही नहीं करूंगा और इसे इस्तेमाल भी नहीं करूंगा,’’ कहते हुए परम खामोश हो गया और उस के बाद फिर उस ने घर में कभी भी सायरा से बात नहीं करी.

रूबी मन ही मन बहुत खुश थी कि उस ने अपने पति को एक मशीन का गुलाम होने से बचा लिया.

तभी सायरा की नजर दीवार पर चिपके एक कागज पर गई जिस पर उस ने ही लिख कर यहां चिपकाया था ताकि उसे याद रहे, ‘20 तारीख को नमिता की किट्टी पार्टी में जाना है.’ रूबी जल्दीजल्दी तैयार हो कर किट्टी पार्टी में पहुंच गई. जहां सभी लोग पहुंच चुके थे और अभी आपस में बातचीत ही चल रही थी. इस के बाद संगीत का कार्यक्रम हुआ और उस के बाद चायनाश्ते और खाने का नंबर आया.

रूबी ने खाना खाते समय महसूस किया कि नमिता की सारी डिशेज दिखने में बहुत सुंदर और  स्वाद में बहुत नवीनता लिए हुए हैं. अलगअलग तरह के सलाद भी तैयार किए थे नमिता ने. इतना सबकुछ कैसे कर लिया? नमिता ने मेहता ने जबकि पिछली बार तो उन्होंने बहुत ही बेकार खाना बनाया था?

मन ही मन द्वेष से भर गई रूबी. पार्टी में लगभग सभी लोगों ने नाश्ते, खाने के साथसाथ नमिता के घर की डैकोरेशन की भी बहुत तारीफ करी.

खाना खा कर सब एकसाथ बैठे थे और घर में बनी आइसक्रीम का दौर चल रहा था. तभी किसी ने नमिता से उन के खाने के स्वाद का राज पूछ ही लिया.

‘‘अरे ये सब तो मैं ने इस एआई की मदद से किया है,’’ कह नमिता ने एक तरफ रखे हुए एक डिवाइस की तरफ इशारा किया तो रूबी ने देखा कि यहां भी एक एआई डिवाइस रखा हुआ है.

तभी एआई की मशीनी आवाज सब के कानों में पड़ी, ‘आप का मल्टीविटामिन दवाई खाने का समय हो गया है.’

नमिता कुछ भूलने का नाटक करते हुए अचानक मुसकरा पड़ी और फिर वे दराज से दवा निकाल कर खाने लगी.

रूबी एआई के इन सब कारनामों को देख कर हैरान थी कि कुछ भी कहो यह मशीन है तो कमाल की. वह तो बेकार ही परम को नाराज कर बैठी और उस का और एआई को रिश्ता खत्म करवा दिया.

मन ही मन कुछ सोचविचार में पड़ गई थी रूबी और एक निर्णय पर पहुंच गई थी.

आने वाले दिनों में उस ने नमिता से सीखना शुरू किया कि इस एआई डिवाइस को कैसे प्रयोग करते हैं? किसी के बर्थडे आदि को याद कराने के लिए एआई को कैसे कमांड किया जाए? करीब 1 हफ्ते में ही रूबी एआई को अच्छी तरह यूज करना सीख गई.

एक शाम को परम जब घर लौटा तो देखा रूबी एआई डिवाइस सायरा  से बात कर रही थी.

यह देख कर परम को बहुत अच्छा लगा, ‘‘तो क्या तुम अब इसे अपनी सौतन नहीं मानती?’’ परम ने पूछा.

तब रूबी ने परम से कहा कि परम ने उस की खुशी के लिए सायरा एआई को डिसकनैक्ट कर के रख दिया था और अब रूबी ने परम को खुश करने के लिए एआई की तकनीक सीखी है और इस की विशेषताएं जानने की कोशिश भी करी और एआई का सही प्रयोग करना भी सीख लिया है और इस बार रूबी ने सायरा एआई को एक नया नाम दिया, ‘सायरा 2.0’

अब ‘सायरा 2.0’ न केवल रूबी को अच्छीअच्छी डिशेज बनाना सिखाती है बल्कि उसे उस के रिश्तेदारों के बर्थडे भी याद दिला देती है. परम की आंखों में आईड्रौप कब डालना है यह भी ‘सायरा 2.0’ ही उसे बताती है और घर की इंटीरियर डैकोरेशन के बारे में भी नएनए आइडियाज देती है.

परम के साथसाथ रूबी ने भी एआई का प्रयोग कर के अपने जीवन को सहज और आनंददायक बना लिया था. अब उस के दिमाग पर ज्यादा दबाव भी नहीं रहता था क्योंकि अब ‘सायरा 2.0’ उस की हर जरूरत का खयाल जो रखती थी.

‘सायरा 2.0’ से रूबी को इस से पहले उतनी परेशानी कभी नहीं हुई जब एक दिन उस की 2 सहेलियां घर पर आईं. इग्नोर कर के रूबी को उन्हीं के सामने परम से हुए ?ागडे़ की बात पर अपना सौल्यूशन देना शुरू कर दिया.

‘सायरा 2.0’ के साथसाथ परम को रूबी का यह 2.0 वर्जन भी काफी अच्छा लग रहा था पर उस दिन अचानक तेज आंधीतूफान आया, तेज आंधी के कारण कई पेड़ गिर गए और आसपास के इलाके में कहीं बिजली भी गिरी. मौसम बहुत खराब हो गया था.

रूबी ने महसूस किया कि आज तो ‘सायरा 2.0’ काम ही नहीं कर रही है क्योंकि सर्वर पूरी तरह डाउन था. रूबी ने बारबार चैक किया पर सर्वर सही नहीं हुआ और एआई ठप पड़ गया. रूबी को लगा कि उसे भी एआई की आदत और लत सी होने लगी है और आज सर्वर डाउन होने के कारण उसे यह एहसास हो गया है कि अधिक तकनीक का इस्तेमाल करना भी गलत हो सकता है.

बाहर अभी भी बारिश हो रही थी. रूबी ने अपने बुकशैल्फ की तरफ देखा. वहां पर रखी किताबों और मैंग्जींस पर धूल आ गई थी. रूबी ने किताबों पर पड़ी धूल साफ करी और एक मैगजीन ले कर बालकनी में आ गई और आरामकुरसी पर बैठ कर मैगजीन पढ़ने लगी. कितनी सोंधी सी खुशबू आ रही थी मैगजीन के पन्नों के बीच से मैगजीन के चित्रांकन को देख कर रूबी का मन खुश हो उठा, यह सब एहसास भला कोई मोबाइल या किसी एआई के पास नहीं होता.

2 दिन के बाद सर्वर ठीक हो गया था और ‘सायरा 2.0’ भी सही से काम कर रही थी पर रूबी ने आज फिर सायरा को हटा कर रख दिया क्योंकि अब उसे किसी भी एआई की जरूरत नहीं क्योंकि तकनीक कभी भी धोखा दे सकती है पर आप का दिमाग हमेशा साथ देता है, इसलिए अब तो वह खुद ही सबकुछ याद रखने का प्रयास करेगी और इस के लिए उस ने एक डायरी पर जरूरी काम की लिस्ट, रिश्तेदारों, दोस्तों के बर्थडे, ऐनिवर्सरी आदिनोट करने की आदत डाल ली है और परम की आंखों में ड्रौप डालना भी याद रखने का प्रयास करेगी.

शाम को जब परम घर आया तो उसे ‘सायरा 2.0’ दिखाई नहीं दी तो परेशान हो उठा.

रूबी ने शांत भाव से अपना पक्ष रखते हुए कहा, ‘‘देखिए, ‘सायरा 2.0’ और अन्य एआई किसी भी जानकारी हासिल करने के लिए औफिस में बहुत अच्छे हैं पर जब वही एआई घर में दखल दे कर पतिपत्नी के रिश्ते में तीसरा बनने लगें तब यह ठीक नही होता. मु?ो लगने लगा था कि आप मु?ा से अधिक समय एआई के साथ बिता रहे थे. बेहतर होता कि एआई की तकनीक को आप अपने औफिस तक सीमित रखते और घर का समय मुझे देते.’’

आज रूबी के पास काफी कुछ कहने को था, ‘‘मैं ने आप की खुशी को देखते हुए तकनीक को समझने और सीखने की कोशिश करी ताकि मैं भी आप की भावनाओं की कद्र कर सकूं.’’

रूबी की यह बात सुन कर बिना मुसकरा नहीं रह पाया परम. सच तो यह है कि पतिपत्नी के बीच की भावनाएं और इंसानी जुड़ाव दोनों किसी भी एआई से बड़े होते हैं.

परम मुसकरा उठा, ‘‘कितनी सम?ादार हो तुम, तुम्हारे होते हुए मुझे किसी भी एआई की तरूरत नहीं, आज से मेरी ‘सायरा 2.0’ तुम ही तो हो,’’ रूबी के माथे पर चुंबन अंकित करते हुए कहा परम ने.

परम भी खुश था क्योंकि उस के औफिस में एक नई लड़की जौली आई थी और उस ने बड़े प्यारे सैक्सी मैसेज परम को भेजने शुरू कर दिए थे. परम को डर लगने लगा कि कहीं ‘सायरा 2.0’ उन का राज रूबी के सामने न खोल दे. वैसे तो ‘सायरा 2.0’ को परम और रूबी घर में हैं उन के फोन से पता चल जाता था पर अगर कोई फोन चार्ज न होने की वजह से बंद हो गया तो सायरा 2.0 को लगता कि वह जब घर में नहीं है. सायरा का जाना परम के लिए अब खुशी की बात थी.

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