जसप्रीत की सांस बहुत तेजी से चल रही थी. 65 साल की उम्र में कोई उन्हें प्रपोज करेगा, उन्होंने कभी नहीं सोचा था. जसप्रीत को सम झ नहीं आ रहा था कि मानव की बात का वह क्या जवाब दे?
क्या यह कोई उम्र है उस की अपने बारे में सोचने की? कुछ ही वर्षों में तो उस के पोते, पोतियों की शादी की उम्र हो जाएगी. मगर जसप्रीत फिर भी अपनेआप को रोक नहीं पा रही थी. बरसों बाद जसप्रीत को लग रहा था कि वह भी एक औरत है जिसे कोई पुरुष पसंद कर सकता है. मगर क्या एक उम्र के बाद औरत औरत रह जाती है या उसे एक बेजान समान मान लिया जाता है जैसेकि घर में पड़ा हुआ फालतू फर्नीचर जिस के न होने से घर खालीखाली लगता है मगर उस का घर में कितना योगदान है किसी को पता नहीं होता है.
जसप्रीत को पहननेओढ़ने का बेहद शौक था. शोख रंग जसप्रीत के गोरे रंग पर बेहद फबता था. आज भी जसप्रीत को ऐसा लगता है मानो वह पिछले जन्म की बात हो. हर साल लोहड़ी और बैसाखी पर जसप्रीत आबकारी के सलमासितारों वाले दुप्पटे लेती थी. सिल्क, शिफौन, क्रेब और भी न जाने कितनी तरह के सूट जसप्रीत के पास थे. सूट ही नहीं, इस सिखनी को साडि़यों का भी बेहद शौक था. घर की हर अलमारी जसप्रीत के कपड़ों से भरी हुई थी.
पति महेंद्र सिंह को भी जसप्रीत को सजाने का बेहद शौक था. मगर जब कुलवंत 13 वर्ष का था और ज्योत 10 वर्ष की तभी महेंद्र सिंह की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. 2 महीने तक तो जसप्रीत को अपना भी होश नहीं था. मगर फिर बच्चों का मुंह देख कर जिंदगी की तरफ लौटना पड़ा.
लगभग 2 महीने बाद जब जसप्रीत ने अलमारी खोली तो उस का मन रोंआसा हो गया. कितने शौक से उस ने सब कपड़े बनवाए थे. जसप्रीत खड़ेखड़े रोने लगी.
तभी जसप्रीत की सास नवाब बोली, ‘‘पुत्तर कुदरत के आगे किस की चलती है?’’
‘‘तू दिल छोटा मत कर तू नहीं तो तेरी देवरानी, भाभियां ये कपड़े पहन लेंगी.’’
जसप्रीत बोलना चाह रही थी कि उस का पति मरा है मगर वह अभी जिंदा है.’’
देखते ही देखते जसप्रीत के कपड़े बांट दिए गए. उस की जिंदगी की तरह उस के कपड़े भी बेरंग हो गए थे.
देवर और देवरानी ने एहसान जताते हुए कहा, ‘‘भाभी, बीजी को आप के पास छोड़े जा रहा हूं, आप को सहारा भी हो जाएगा और आप का मन भी लगा रहेगा.’’
जसप्रीत को सम झ ही नहीं आ रहा था कि सास नवाब उस का सहारा बनेगी या जसप्रीत को उन का सहारा बनना पड़ेगा.
नवाब के साथ रहने से जसप्रीत को उन के हिसाब से और बच्चों के हिसाब से 2 अलग तरह का खाना बनाना पड़ता था. जसप्रीत जरा भी हंसबोल लेती तो नवाब की त्योरियां चढ़ जाती थीं. लगता जैसे जसप्रीत बेहयाई कर रही हो. घर से दफ्तर जाते हुए और दफ्तर से घर आ कर जसप्रीत को सारा काम करना पड़ता. सास की दवा का भार और अलग से था.
1 वर्ष के भीतर ही जसप्रीत मुर झा गई. उस की सांसें तो चल रही थीं मगर जिंदगी कहीं पीछे छूट गई थी. तभी जसप्रीत की जिंदगी में विपुल का पदार्पण हुआ. विपुल जसप्रीत के भाई का दोस्त था. वह कभीकभी जसप्रीत के छोटेमोटे काम कर देता था. ऐसे ही जसप्रीत और विपुल करीब आ गए. कभीकभी जसप्रीत विपुल के घर भी चली जाती. जसप्रीत अब फिर से जिंदगी की तरफ कदम बढ़ा रही थी. उस ने विपुल की जिंदगी में अपना दोयम दर्जा स्वीकार कर लिया था. मगर एक दिन जब जसप्रीत और विपुल को जसप्रीत के देवर ने देख लिया तो जसप्रीत को लानतसलामत दी गई. जसप्रीत के देवर ने कहा, ‘‘भाभी, आप को शर्म नहीं आती इस उम्र में ये सब करते हुए?’’
उधर जसप्रीत की सास लगातार बोल रही थी, ‘‘औरतें तो अपने सुहाग के साथ सती हो जाती हैं और एक यह है.’’
‘‘अरे 40 साल की उम्र में कौन सी जवानी चढ़ी हुई है तुम्हें?’’
जसप्रीत के पास इन बातों का कोई जवाब नहीं था. उधर विपुल भी सब बातों के बाद जसप्रीत से कन्नी काटने लगा था. इस घटना के बाद जसप्रीत की सास अधिक चौकनी हो गई थी.
जसप्रीत का परिवार भी उसे उस की जिम्मेदारियों से अवगत कराता था. कैसे एक मां बन कर उसे अपने बच्चों के लिए रोल मौडल बनना है. जसप्रीत ने अपने अंदर की औरत का गला घोट दिया था.
जसप्रीत की सास के साथसाथ जसप्रीत के अपने मातापिता भी उस की ही जिम्मेदारी बनते जा रहे थे. जब भी भाईभाभियों को कहीं घूमने जाना होता तो जसप्रीत के मातापिता महीनों उस के साथ रहते.
जसप्रीत का भी मन करता था बाहर घूमनेफिरने का. मगर न तो हालात ने कभी इस बात की इजाजत दी और न ही उस के आसपास वालों को इस की कभी जरूरत लगी.
जसप्रीत की सास और बाकी परिवार उसे बचत और हाथ रोक कर खर्च करने की ही सलाह देता था.
विपुल की घटना के पश्चात भी जसप्रीत की जिंदगी में पुरुषों का सिलसिला चलता रहा. बस अब जसप्रीत पहले से ज्यादा सतर्क हो गई थी. कभीकभी उसे लगता जैसे वह खुद को औरत साबित करने के लिए इधरउधर रेगिस्तान में भटक रही है. जहां भी उसे लगता कि पानी है वह मिराज निकलता. उसे लगने लगा था कि वह इंसान नहीं एक समान है. जब तक वह पुरुष को दैहिक सुख दे सकती है तब तक ही पुरुष उस के आसपास बने रहेंगे. जल्द ही उसे यह बात सम झ आ गई कि आंतरिक प्यास इधरउधर के अफेयर से कभी नहीं बु झ पाएगी. वह अपनेआप में सिमट गई थी.
जसप्रीत को कुदरत ने एक बेटा दिया हुआ है. थोड़े दिनों की बात और है जब उस के दुख खत्म हो जाएंगे. उन दिनों जसप्रीत ने भी इन बातों पर विश्वास कर लिया था. उस के जीवन की धुरी अब कुलवंत और ज्योत बन गए थे. मगर फिर भी न जाने क्यों जसप्रीत के अंदर का खालीपन बढ़ता ही जा रहा था. देखते ही देखते वह 55 वर्ष की हो गई थी. कुलवंत अब परिवार में मुखिया की भूमिका निभा रहा था.
कुलवंत का विवाह हो गया. वह अपनी पत्नी में डूब गया और ज्योत ने भी जल्द ही अपनी पसंद से विवाह कर लिया. जसप्रीत की सास और मातापिता का निधन हो गया था. कुलवंत बराबर अपनी मां जसप्रीत पर पैतृक घर बेचने का दबाव डाल रहा था. जसप्रीत अब 62 वर्ष की हो गई थी. नौकरी प्राइवेट थी, इसलिए पेंशन नही थी.लोगो की सलाह पर उसे लगा, बेटे से बिगाड़ना ठीक नहीं हैं इसलिए उस ने घर बेच दिया. कुलवंत ने एक शानदार सोसायटी में फ्लैट ले लिया. उस फ्लैट में जसप्रीत एकाएक बूढ़ी और अकेली हो गई थी. सारा दिन वह घर के कामों में लगी रहती और अपनी पोती झलक को संभालती. उस की जिंदगी बेरंग हो गई थी.
जब झलक का 10वां बर्थडे था तब जसप्रीत की बहू अजीत की मम्मी हरप्रीत भी आई हुई थी. रंगों और शोखी से भरपूर हरप्रीत को देख कर कोई नहीं कह सकता था कि उन की इतनी बड़ी नातिन है. हरप्रीतजी ने ही जबरदस्ती उस रोज जसप्रीत को गुलाबी रंग का सूट पहनाया जो उन के रंग में घुल सा गया था.
जाने से पहले हरप्रीत ने जसप्रीत से कहा, ‘‘आप खुद के लिए खड़ा होना सीखिए. आप बस 62 साल की हुई हैं. अभी भी आप के पास जिंदगी है.’’
जसप्रीत धीरेधीरे ऐक्सरसाइज करने लगी. सोसायटी के क्लब में जाने से जसप्रीत को अपने हमउम्र मिले और कुछ ऐसे रास्ते भी मिले जिन से वह अपने लिए कमा भी सकती थी. जसप्रीत ने धीरेधीरे अपने हमउम्र लोगों की सहायता से औनलाइन ट्रक्सैक्शन, इनवैस्टमैंट और बैंकिंग सीखी. उस ने अपने आर्थिक फैसले खुद लेने आरंभ किए.
जैसे ही जसप्रीत आर्थिक रूप से स्वावलंभी हुई उस के पंख खुलने लगे. बच्चों की जिम्मेदारी भी पूरी हो गई थी. इसलिए जसप्रीत ने अब देश घूमने का फैसला किया. उस के बाहर घूमने का फैसला उस के बेटे को पसंद नहीं आया क्योंकि जसप्रीत अपने पैसे से जा रही थी इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाया.
फन एट सिक्स्टी नामक ग्रुप के साथ जसप्रीत घूमने जा रही थी.62 साल की उम्र में पहली बार उसे 16 वर्ष के भांति उत्साहित हो रही थी.पूरे जोरशोर के साथ बहुत वर्षों के बाद उस ने शौपिंग करी.
बेटेबहू सामने से तो कुछ कह नहीं पाए मगर उन के भावों में नाराजगी झलक रही थी. जसप्रीत का एक बार तो मन हुआ कि न जाए मगर फिर उस ने अपना मन कड़ा कर लिया. जब जसप्रीत अपने समान के समेत बस में चढ़ी तो उसे इस बात का बिलकुल भान नहीं था कि यह सफर उस की जिंदगी का सफर की दिशा ही बदल देगा.
एक मिनी बस थी. सभी लोग जसप्रीत को अपने हमउम्र दिख रहे थे. करीब 20 लोग बैठे हुए थे, जिन में से 8 जोड़े थे और 3 महिलाएं और 1 पुरुष था. शुरूशुरू में तो जसप्रीत को थोड़ी ि झ झक हो रही थी मगर फिर वह सहज हो गई.
जब सां झ के धुंधलके में वह गु्रप वाराणसी पहुंचा तो जसप्रीत को थकान के बजाय बेहद ताजा महसूस हो रहा था.
जसप्रीत जब अपने कमरे से बाहर निकली तो सभी लोग अपने कमरों में दुबके हुए थे. उस ने देखा बाहर लौबी में बस मानव बैठे हुए थे. जसप्रीत को देख कर उठ खड़े हुए और बोले, ‘‘चलो, मेरी तरह कोई और भी है जो कमरे से बाहर तो निकला है बाकी सभी लोग तो आज थकान उतारेंगे.’’
जसप्रीत ने कहा, ‘‘आप घाट पर चलना चाहेंगे?’’
मानव हंसते हुए बोला, ‘‘चलना नहीं दौड़ना चाहूगा.’’
दोनों ने एक रिकशा कर लिया और पूरे जोश के साथ घाट पहुंच गए. एक अलग सा माहौल था घाट का. दोनों ही करीब 2 घंटे तक वहीं बैठ कर घाट को निहारते रहे. मानव की तंद्रा तब भंग हुई जब होटल से उन के ग्रुप का फोन आया. पूरा ग्रुप दोनों के लिए चिंतित था.घड़ी देखी तो रात के 9 बज गए थे.
वापसी में मानव और जसप्रीत ने कचौरी और टमाटर की चाट का आनंद लिया.
जसप्रीत शुरू में थोड़ी ि झ झकी मगर मानव ने यह कहते हुए उस का डर काफूर कर दिया, ‘‘मैं डाक्टर हूं कुछ हुआ तो देख लूंगा. बिंदास खाइए और जिंदगी का आनंद लीजिए.’’
जब रात के 10 बजे मानव और जसप्रीत होटल पहुंचे तो मैत्री की डोर में बंध गए थे.
4 दिन ऐसा लगा मानो 4 पल के समान उड़ गए हों. जसप्रीत ने जिस तरह अपने पति को युवावस्था में खो दिया था वैसे ही मानव का अपनी पत्नी के साथ विवाह के 5 वर्ष बाद ही अलगाव हो गया था. पहले विवाह का अनुभव इतना अधिक कसैला था कि मानव ने दोबारा विवाह नही किया. दोनों ने अपनी युवावस्था अकेलेपन में गुजारी थी इसलिए दोनों ही एकदूसरे के साथ बेहद सहज थे. दोनों की किसी के प्रति जवाबदेही नहीं थी.
जसप्रीत को ऐसा लग रहा था मानो वह दोबारा से एक औरत की तरह सांस ले रही हो. मानव ने बातों ही बातों में जसप्रीत से कहा, ‘‘अरे, आप को देख कर लगा ही नहीं कि आप 62 साल की हैं. मु झे तो आप 55 से अधिक की नहीं लगी थी.’’
न जाने क्यों जसप्रीत को मानव की ये बातें अंदर से गुदगुदा रही थीं. पूरे ट्रिप के दौरान जसप्रीत और मानव एकसाथ ही बने रहे. दोनों को एकदूसरे का साथ बहुत भा रहा था.
वापसी यात्रा में मानव और जसप्रीत दोनों को यह लग रहा था कि यह सफर कभी खत्म न हो. फोन के द्वारा मानव और जसप्रीत के बीच बातचीत चलती रही. जिस दिन दोनों की बातचीत नहीं होती ऐसा लगता मानो वह दिन कुछ अधूरेपन के साथ समाप्त हुआ हो. 62 साल की उम्र में जसप्रीत अपने मन की थाह को नहीं पा रही थी. यह जीवन उस ने पहले भी जीया था मगर तब उस के अपने परिवार ने उसे सामाजिक और नैतिक रूप से गलत साबित किया था. क्या ये भाव उसे शोभा देते हैं? क्यों मानव का एक फोन उसे खुशी से भर देता है? जसप्रीत को पहली बार अपने पति के जाने के बाद ऐसा कोई पुरुष मिला था जो उस से व्यापार नहीं कर रहा था. मानव ने जसप्रीत के साथ एक साथी की तरह ही व्यवहार किया था. यह सच था कि जसप्रीत और मानव उम्र के उस मोड़ पर थे जहां पर दैहिक व्यापार का प्रश्न गौण हो जाता है. मगर पुरुष फिर भी उम्र के हर पड़ाव पर स्त्री से किसी न किसी चीज की उम्मीद ही रखता है.
जसप्रीत और मानव को बात करतेकरते पूरा 1 साल बीत गया. इस 1 साल में मानव जसप्रीत को बहुत अच्छे से जान गया था. आज मानव का जन्मदिन था. जसप्रीत ने जैसे ही रात के 12 बजे उस को कौल किया तो मानव ने जसप्रीत को प्रपोज कर दिया.
मानव ने जसप्रीत से कहा, ‘‘जसप्रीत, जीवन की इस संध्या में कब जीवन का सूर्य अस्त हो जाएगा, मालूम नहीं? मगर अब आगे की यात्रा में तुम्हारे साथ तय करना चाहता हूं.’’
जसप्रीत यही तो सुनना चाहती थी. मगर उस के अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह इतना बड़ा फैसला ले पाए.
जसप्रीत को अच्छे से पता था कि अगर वह मानव का यह प्रस्ताव अपने घर वालों के समक्ष रखेगी भी तो उस के बच्चे ही उस के अतीत को कुरेदने लगेंगे.
जसप्रीत के अंदर हिम्मत का अभाव देख कर मानव एक दिन खुद ही जसप्रीत के घर पहुंच गया.
जसप्रीत से कोई पुरुष मिलने आया है, यह बात जसप्रीत के बेटेबहू को पसंद नहीं आई. मगर प्रत्यक्ष रूप से वे कुछ कह नहीं पाए. मानव को आए हुए 2 घंटे हो गए थे.
जाने से पहले मानव ने जसप्रीत के बेटे से कहा, ‘‘बेटा, सम झ नहीं आ रहा ये बात में कैसे करूं? मगर मैं आप की मम्मी से विवाह करना चाहता हूं.’’
मानव की यह बात सुनते ही जसप्रीत का बेटा आग बबूला हो उठा, ‘‘मम्मी इस उम्र में भी आप यह गुल खिला रही हैं.’’
उधर जसप्रीत की बहू बोली, ‘‘आप ऐसा करोगी तो कौन झलक से विवाह करेगा? उम्र है अपना जन्म सुधारने की… ध्यान में ध्यान लगाएं.’’
जसप्रीत शर्म से जमीन में गढ़ी जा रही थी. उसे लग रहा था कि उस से फिर से गलती हो गई है. क्यों उसे एक साथी की दरकार रहती है? क्यों वह कुदरत में ध्यान नहीं लगा पाती हैं?
मानव ने जसप्रीत से कहा, ‘‘जसप्रीत मु झे तुम्हारे फैसले का इंतजार रहेगा.’’
मगर उस दिन के बाद से जसप्रीत और मानव के बीच कोई बात नहीं हुई. कुलवंत ने यह बात अपनी बहन ज्योत को भी बता दी थी. ज्योत भी घर आ गई थी. जसप्रीत के बेटे और बेटी ने साफसाफ शब्दों में कह दिया था कि अगर जसप्रीत को मां का दर्जा चाहिए तो दूसरे विवाह की बात दिमाग से निकाल दे.
जसप्रीत फिर से सम झौता करने को तैयार हो गई थी. वह घर की शांति और समाज के रिवाजों के हिसाब से खुद को ढालने के लिए तैयार हो गई थी. कैसी होती है एक 62 वर्ष की महिला की जिंदगी, एक फालतू फर्नीचर जिस के होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है. हां यदि वह न हो तो घर का एक कोना खाली हो जाता है. 62 साल की महिला या वृद्धा को अपनी जिंदगी के बाकी दिन नातीपोतों की देखभाल में बिताने चाहिए. जिंदगी के इस पड़ाव में किसे घूमनेफिरने की, इधरउधर मित्रता करने की ललक होती है?
जसप्रीत ने मानव से बातचीत लगभग बंद कर दी थी. बहू ने फूल टाइम मेड की छुट्टी कर दी. उस के अनुसार मम्मीजी घर के कामकाज में बिजी रहेंगी तो उन के दिमाग में फालतू बात नहीं आएगी.
जसप्रीत ने खुद को घर के कार्यों में व्यस्त तो कर लिया मगर मानसिक रूप से टूट गई थी. पहले सासससुर और मातापिता ने उसे बच्चों की दुहाई दे कर कठपुतली की तरह नचाया और अब उस के अपने बच्चे उसे समाज की दुहाई दे कर नचा रहे हैं.
1 हफ्ते बाद दीवाली थी. घर में जोरशोर से तैयारियां चल रही थीं. जसप्रीत के बेटे ने जसप्रीत से कहा, ‘‘मम्मी, मैं इस बार बच्चों के साथ दीवाली पर घूमने जा रहा हूं. आप को भी ले चलते मगर आप की तबीयत भी ठीक नहीं रहती और फिर दीवाली पर घर भी बंद नहीं कर सकते हैं.’’
जसप्रीत को बुरा लगा मगर उस ने खुद को ही दोष दिया, उस की क्या उम्र है घूमनेफिरने की?
बच्चे नियत समय पर दुबई के लिए रवाना हो गए थे. जसप्रीत को अगले ही दिन बुखार हो गया. उस ने फोन पर बच्चों को बताया तो उसे डाक्टर से मिलने की सलाह दे दी गई.
बेटी ज्योत भी दीवाली पर अपने परिवार के साथ घूमने गई हुई थी. दीवाली की रात पर चारों ओर रोशनी से आकाश सजा हुआ था मगर जसप्रीत के अंदर इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि वह खड़ी हो जाए.
बुखार की दवाई कोई असर नहीं कर रही थी. सुबह से कुछ खाया भी नहीं था. तभी जसप्रीत को फोन पर मानव का मैसेज दिखा. जसप्रीत ने बुखार की घुमेरी में उसे कुछ लिखा और फिर जब जसप्रीत को होश आया तो उस ने खुद को अस्पताल में पाया.
मानव वहीं जसप्रीत के सामने बैठा हुआ था. वह मन ही मन सोच रही थी कि अब समाज उस के बच्चों से कुछ क्यों नहीं पूछ रहा है जब वे लोग उसे अकेले छोड़ कर दीवाली मनाने चले गए. जसप्रीत ने फिर मानव को अपनी पूरी कहानी सुना दी. जसप्रीत ने अपनी जिंदगी का वह पन्ना भी मानव के समक्ष बेपरदा कर दिया जिस के कारण वह खुद को माफ नहीं कर पाई थी.
मानव ने सुना और बस जसप्रीत से इतना कहा, ‘‘न तुम कल गलत थी और न ही आज गलत हो. उस समय अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उन परिस्थितियों में तुम्हें वह ही ठीक लगा होगा. हमारा अतीत हमारे वर्तमान को नियंत्रित नहीं कर सकता है. मैं आज भी तुम्हारे फैसले की प्रतीक्षा में हूं.’’
जसप्रीत की अस्पताल से छुट्टी हुई तो उस ने खुद ही मानव से कहा, ‘‘जब तक बच्चे नहीं आते मैं तुम्हारे घर पर ही रहूंगी.’’
बिना कुछ बोले जसप्रीत के मन की बात मानव को सम झ आ गई थी.
अपने दोनों बच्चों को अपने फैसले से अवगत कराते हुए जसप्रीत ने सूचित कर दिया था. उस ने दोबारा से एक महिला की तरह फैसला ले लिया था.
जसप्रीत समाज को जवाब देने के लिए तैयार थी. कोर्ट में विवाह की तिथि के लिए पंजीकरण करवा दिया था. खुद को माफ करते हुए जसप्रीत ने दोबारा से जिंदगी की तरफ कदम बढ़ाया था.
जसप्रीत के इस फैसले के बाद उस के परिवार ने उस का बहिष्कार कर दिया. वह अपने परिवार के इस बरताव से आहत थी. वह चाहती थी कम से कम उस की बेटी ज्योत तो उसे सम झेगी.
पहले 1 महीने तक तो जसप्रीत इसी ऊपोपोह में रही कि क्या वह मानव के साथ रहे या फिर वापस अपने घर चली जाए. मगर मानव ने जसप्रीत को इतना विश्वास और प्यार दिया कि जसप्रीत का मन मानव के घर में रम गया.
मानव सुबह सवेरे जब ऐक्सरसाइज करता तो जसप्रीत को भी अपने साथ करवाता. दोनों साथसाथ नाश्ता करते, फिर मानव हौस्पिटल चला जाता और जसप्रीत अपना औनलाइन बिजनैस देखती. पैसे की कोई कमी नहीं. मानव जसप्रीत का साथ पा कर पूर्ण महसूस करता था. जसप्रीत भी बेहद खुश थी मगर अपने बच्चों और परिवार की कसक उसे रहरह कर टीस देती. मानव को जसप्रीत के दर्द का आभास था मगर उसे सम झ नहीं आ रहा था कि वह कैसे जसप्रीत और उस के परिवार को एक कर दे.
दिन हफ्तों में और हफ्ते महीनों में परिवर्तित हो गए थे. आज जसप्रीत बेहद खुश थी. बरसों बाद उस के जीवन में करवाचौथ इतनी सारी रोशनी और मिठास ले कर आई थी. उस ने आज सुनहरे रंग की कांजीवरम साड़ी पहन रखी थी. साथ में उस ने बेहद शोख रंग की चूडि़यां और मेकअप कर रखा था. मानव तो आज जसप्रीत को देख कर पलक झपकाना भूल गया.
जसप्रीत शरमाते हुए बोली, ‘‘बहुत ओवर हो गया लगता है. इस उम्र में इतना शोख मेकअप अच्छा नहीं लगता है.’’
मानव जसप्रीत का हाथ पकड़ते हुए बोला, ‘‘खूबसूरती की कोई उम्र नहीं होती है जसप्रीत. तुम आज बेहद सुंदर लग रही हो.’’
चांद को देखने के बाद मानव और जसप्रीत ने खाने का पहला निवाला ही तोड़ा था कि अस्पताल से फोन आ गया. मानव बिना खाने खाए कार निकल कर अस्पताल चला गया. वहां जा कर मानव को पता चला कि ऐक्सीडैंट केस है. खून से लथपथ एक जोड़ा अस्पताल के गलियारे में कराहा रहा था. मानव जैसे ही उन के करीब पहुंचा जसप्रीत के बेटे कुलवंत और उस की पत्नी को देख कर उस के होश उड़ गए. बिना पुलिस की प्रतीक्षा करे मानव ने जूनियर डाक्टर्स को इलाज करने के लिए बोल दिया. मानव को सम झ नहीं आ रहा था कि वह कैसे जसप्रीत को यह बात बताए. तभी मानव को जसप्रीत की पोती झलक की याद आई कि वह कहां है?
मानव बिना देर करे जसप्रीत को ले कर उस के बेटे कुलवंत के घर पहुंचा. झलक दादी को देखते ही गले लग कर रोने लगी.
‘‘दादी पिछले 4 घंटो से मम्मीपापा का फोन बंद आ रहा है.’’
जसप्रीत ने मानव की तरफ देखा तो वह बोला, ‘‘तुम दोनों हौसला रखो, उन का ऐक्सीडैंट हो गया है और वे मेरे ही हौस्पिटल में भरती हैं.’’
झलक और जसप्रीत के साथ मानव जब अस्पताल पहुंचा तो कुलवंत और अजीत तब भी औपरेशन थिएटर में ही थे.
मानव ने बड़ी मुश्किल से झलक और जसप्रीत को कुछ खिलाया और वहीं हौस्पिटल के एक कमरे में आराम करने की व्यवस्था कर दी.
जसप्रीत को बारबार यही लग रहा था कि वह मनहूस है. मगर काली रात के बाद जब सूरज की पहली किरण आई तो कुलवंत खतरे से बाहर था. दोपहर होतेहोते अजीत को भी होश आ गया. जसप्रीत की बेटी ज्योत भी आ गई थी.
पूरे 4 दिन बाद जब दोनों को डिस्चार्ज मिला तो जसप्रीत भी अपने बेटे और बहू के साथ उन के घर चली गई.
मानव ने घर से नौकर और अस्पताल से एक नर्स भी भेज दी थी. कुलवंत और ज्योत
आज पहली बार अपनी मां से नजर नहीं मिला पा रहे थे.
कुलवंत को अच्छे से पता था कि अगर वह मानव का अस्पताल न होता तो वे दोनों पतिपत्नी वहीं अस्पताल में पुलिस की प्रतीक्षा में मर जाते. मानव ने अपनी जिम्मेदारी पर ही दोनों का इलाज करा था.
पूरे 1 हफ्ते तक जसप्रीत वहां रही और खूब अच्छे से पूरे घर को संभाला.
जसप्रीत रोज रात मानव को फोन करती मगर न तो कुलवंत ने और न ही अजीत ने कभी मानव से बात करने की इच्छा जाहिर करी. जसप्रीत को थोड़ा बुरा भी लगा, मगर वह चुप लगा गई.
दीवाली से 2 दिन पहले जब जसप्रीत ने अपने घर जाने की इच्छा जाहिर करी तो झलक बोली, ‘‘दादी, इस बार तो बूआ भी दीवाली पर यहीं हैं. आप भी प्लीज रुक जाए.’’
बहू अजीत भी बोली, ‘‘मम्मी, मान जाएं. पूरा परिवार कबकब साथ होता है? चाचाजी और चाचीजी भी यहीं पर दीवाली मनाएंगे.’’
जसप्रीत का मन किया बोलने का कि मानव के बिना यह परिवार कैसे पूरा हो सकता है? मगर वह फीकी हंसी हंस दी.
छोटी दीवाली पर अजीत की मम्मी भी आ गई थी. जसप्रीत ने मानव को जब इस प्रोग्राम के बारे में बताया तो वह बोला, ‘‘कोई बात नही जसप्रीत, तुम्हारे परिवार का तुम पर हक है.’’
दीवाली पर चारों तरफ हंसीखुशी का माहौल था. जसप्रीत ने सब की पसंद के पकवान बनाए मगर रहरह कर उस का मन मानव को याद कर रहा था.
सब के कहने पर न चाहते हुए भी जसप्रीत ने महरून सिल्क की साड़ी पहन ली थी. बहू अजीत ने सोने का सैट जबरदस्ती पहना दिया था.
बेटी ज्योत हुलसते हुए बोली, ‘‘मम्मी, सच में आज आप कमाल की लग रही हो.’’
तभी दरवाजे की घंटी बजी. मानव मिठाई के डब्बों और उपहारों के साथ खड़ा था.
जसप्रीत एकाएक घबरा गई. तभी कुलवंत ने आगे बढ़ कर मानव के पैर छू लिए, ‘‘अंकल, आप ने हमारे लिए वही किया है जो हमारे पापा जिंदा होते तो करते.’’
जसप्रीत का देवर भी बोल उठा, ‘‘भाभीजी को हम ने हमेशा गलत ही सम झा, मगर हम ही गलत थे.’’
हंसीखुशी पटाखे छुड़ाते हुए मानव ने ही बताया, ‘‘पूरा प्लान ज्योत और अजीत का ही था.’’
देर रात को जब जसप्रीत और मानव अपने घर के लिए निकलने लगे तो मानव ने झलक को पास बुला कर कहा, ‘‘बेटे, अब तुम्हारे इस शहर में 2 घर हैं, एक यह और एक दादी का.’’
ज्योत मुंह फुला कर बोली, ‘‘अंकल, क्या हम आप के परिवार का हिस्सा नहीं हैं?’’
मानव खुशी से बोला, ‘‘उठाओ सामान और अब कुछ दिन हमारे घर को भी गुलजार करो.’’
जसप्रीत आज मन ही मन कुदरत का धन्यवाद कर रही थी. देर से ही सही जसप्रीत को भी मुकम्मल जहां मिल गया था.
