Indian social activists : भारत जैसे धर्म सत्तात्मक देश में जहां स्त्रियों का काम महज घरपरिवार संभालना, घर के पुरुष सदस्यों को देवता की तरह मान कर उन का हुक्म मानना और बचे हुए समय में पूजापाठ और दूसरों की देखभाल में लगे रहना माना जाता है, ऐसे देश में अगर कोई स्त्री सत्तासीन पुरुषों से सवाल पूछे और उन की मनमरजी पर लगाम लगाने की कोशिश करे तो आप सम झ सकते हैं यह काम आसान नहीं होगा.
नोएडा में रहने वाली सरल स्वभाव की मलिका 52 वर्षीय अंजलि भारद्वाज को देख कर आप सहज विश्वास नहीं कर पाएंगे कि उन्होंने समाज में व्याप्त करप्शन के खिलाफ न सिर्फ खुद की आवाज बुलंद की बल्कि कितनी ही दूसरी महिलाओं में भी यह हौसला भरा कि वे गलत के खिलाफ आवाज उठाएं, शासन कर रहे अधिकारियों से सवाल पूछें और उन्हें जवाब देने को विवश कर दें.
अंजलि 1999 से यानी 25 साल से ज्यादा समय से आरटीआई आंदोलन से जुड़ी हुई हैं. वे एनसीपीआरआई (इंटरनैशनल कैंपेन फौर पीपल्स राइट्स टू इन्फौर्मेशन) से भी 20 साल से ज्यादा समय से जुड़ी हुई हैं. 2004 से वे इस की वर्किंग कमेटी में हैं और अभी एनसीपीआरआई की कोकन्वीनर हैं. यह पूरे देशभर में सूचना के अधिकार पर काम करते हुए लोगों का अभियान है.
अंजलि भारद्वाज को 2021 में अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा इंटरनैशनल ऐंटीकरप्शन चैंपियन अवार्ड से सम्मानित किया गया. 2011 में लेडी श्रीराम कालेज की ओनर रोल और 2009 में अशोका फैलोशिप फौर सोशल ऐंटरप्रन्योर्स से भी वे सम्मानित हो चुकी हैं.
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