EV vs petrol : पेट्रोल डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं और ऐसे में भारतीय परिवार एक बड़ा फैसला ले रहे हैं. मई 2026 के आंकड़े बता रहे हैं कि अब भारतीय महिलाएं और परिवार इस झंझट से निकलने का रास्ता ढूंढ चुके हैं. पहली बार देश में इलैक्ट्रिल व्हीकल्स की कुल हिस्सेदारी 11प्रतिशत के पार पहुंच गई. मतलब साफ है –

अब हर 10 में से 1 नई गाड़ी शोरूम से इलैक्ट्रिक निकल रही है *.

कैसे बदला ग्राहकों का मूड*

सन, 2028-26 के दौरान कारों में ईवी का औसत शेयर महज 4.25 प्रतिशत था जो मार्च में बढक़र 5.11 प्रतिशत; हुआ और अब मई 2026 में छलांग लगाकर 6.63 प्रतिशत पर पहुंच गया है. इसी तरह कमर्शियल गाडिय़ों में भी ईवी का शेयर 1.83 प्रतिशत के सालाना औसत के मुकाबले बढक़र इस बार 2.86 प्रतिशत हो गया है.

दोपहिया सेगमेंट में हालांकि मार्च के क्लोजिंग डिस्काउंट्स और स्कीम्स की वजह से शेयर 9.79 प्रतिशत था लेकिन पिछले साल मई की 6.11 प्रतिशत के मुकाबले इस बार की 9.25 प्रतिशत की हिस्सेदारी यह साफ करती है कि ग्राहकों का भरोसा अब इलेक्ट्रिक पर मजबूत हो रहा है. टू-व्हीलर सेगमेंट में Fy 26 का सालाना औसत 6.54 ही था.

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खरीदने से पहले ये 3 बातें जरूर जानें

– चार्जिंग कहां होगी? घर पर चार्जर लगवाना संभव है या नहीं, सोसाइटी/बिल्डर
से पूछें. आसपास पब्लिक चार्जिंग स्टेशन भी देखें.

– रेंज कितनी है? रोजाना 40-50 किमी चलाना है तो 150 किमी रेंज वाली
इलैक्ट्रिक कार या दोपहिया काफी है. लंबा सफर करना हो तो प्लानिंग जरूरी है.

– सर्विस और वारंटी : बैटरी की वारंटी कम से कम 5-8 साल की हो यह डीलर से लिखित में लें.

-इलैक्ट्रिक सिर्फ ट्रेंड नहीं, अब जरूरत बन रही है. महंगाई से बचने, घर का खर्च कम करने और बच्चों को बेहतर हवा देने के लिए ये समझदारी भरा कदम है. पर कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी जरूरत, बजट और चार्जिंग सुविधा जरूर जांचें.

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