life safety : जैसेजैसे सड़कों का जाल बढ़ रहा है और सड़कों पर व्हीकल्स बढ़ रहे हैं, वैसे ही लाइफ डैंजर में जा रही है. 2024 में 81 हजार से ज्यादा मौतें टूव्हीलर चलाने वालों की हुईं.

यह नंबर छोटा नहीं है क्योंकि ये ऐसी मौतें थीं जो टाली जा सकती थीं. गलती किस की थी, इस पर न जाएं, यह सोचें कि हर मौत से कितने परिवारों के कितने लोगों को भयंकर डिस्ट्रैस होगा. टूव्हीलर चलाने वाले ज्यादातर युवा होते हैं जिन पर या तो पतिपत्नी, बच्चे आश्रित होते हैं या पेरैंट्स जो उन पर सपने देखते थे. हर मौत गहरी पीड़ा छोड़ जाती है जिस का दर्द जीवनभर रहता है.

मौत जीवन का अंग है. आकस्मिक मौत भी जीवन का एक अंग है. पर वह मौत जिस में सिर्फ लापरवाही है ऐक्सीडैंट के शिकार की या ऐक्सीडैंट में जुड़े दूसरे की, बहुत ज्यादा दर्दनाक होती है. ऐसा लगता है कि पिछले कितने दशकों का प्यारदुलार क्षणों में हाथ से फिसल गया और फिर आगे के दशकों का भय सिर पर आ मंडरा जाता है.

इन 81 हजार मौतों में से 50% तो सिर्फ इसलिए हुईं कि ऐक्सीडैंट के शिकार ने या तो हैलमेट नहीं पहन रखा था या हैलमेट सही नहीं था. कुछ रुपयों की खातिर जान पर जुआ खेलना न केवल मूर्खता है, यह पूरे परिवार के साथ एक अपराध भी है. आज अगर टैक्नोलौजी के कारण तेज चलते व्हीकल आ गए हैं तो सेफ्टी स्टैंडर्ड भी बढ़ गए हैं. आमतौर पर सावधानी से व्हीकल्स का उपयोग करा जाए तो ये जानलेवा हैं ही नहीं. ये तो बैलगाडि़यों और घोड़ागाडि़यों से भी ज्यादा सुरक्षित हैं.

प्रौैब्लम यह है कि व्हीकल हाथ में आते ही जवानी का जोश भर आता है और सड़कों को खुला मैदान समझ कर रेसिंग शुरू कर दी जाती है. घर में रील्स में समय बरबाद करने वाले या मंदिर में चंदे में जेब खाली करने के लिए लाइनों में घंटों लगे लोगों को सड़कों पर टेढ़ेमेढ़े होते हुए सैकंडों को बचाने के लिए रिस्क लेने की आदत पड़ी हुई है.

चलाने वाले युवा खासतौर पर यह नहीं सोच सकते कि सड़कों पर हर तरह के लोग होते हैं. अगर वे ट्रैफिक नियमों को तोड़ रहे हैं तो दूसरे भी तोड़ रहे होंगे और ये ऐक्सीडैंटों का आसान कारण बन सकते हैं. हमारे यहां एक और मिस कंसैप्शन है कि लाल कपड़ा बांध लिया या काला निशान लगा लिया ऐक्सीडैंट नहीं होगा. यह पंडोंपुजारियों का पैदा किया भ्रम है क्योंकि उन्हें तो ऐक्सीडैंट में भी मोटा मुनाफा मिलता है. असल बात तो यह है कि हर असामयिक मौत पर प्रौफिट एक ही पाता है- पंडित जिसे सप्ताहों तक नहीं साल दर साल कुछ मिलता रहता है जबकि उसी का दोष था कि उस ने पहले से मौत को क्यों नहीं रोका जबकि उस के कनैक्शन तो किसी काल्पनिक ऊपर वाले से पहले बने हुए हैं.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...