husband wife relationship : ‘उस की आंखें गुलाबी और मेरी… मेरी क्या बेजान रेगिस्तान. शर्म नहीं आती.’
शादी हो या कोई और फंक्शन, हंसीमजाक, थोड़ी छेड़छाड़, इशारेबाजी या शेरोशायरी तो चलती रहती है. ठीक ऐसी ही एक शेरोशायरी दिनेश ने भी अपनी दूर की भाभी से कर ली, जिस की हर किसी ने तारीफ की. मगर दिनेश की बीवी तो उसे दिनेश की छिछोरीपंती मान आगबबूला हो गई और अब 2 महीनों से उसी शेरोशायरी पर दिनेश का जीना हराम कर रखा है.
ऐसा बहुत बार होता है कि बीवियां अपने पति के मुंह से दूसरी औरतों की प्रशंसा सुन परेशान या गुस्सैल जाती हैं, जिस की एक बड़ी वजह है दोहरी मानसिकता.
यह दोहरी मानसिकता वैसी कि जब आप को दूसरों से अपनी तारीफ सुनना गलत नहीं. जब किसी फंक्शन में कोई रिश्तेदार या दोस्त आप की तारीफ के पुल बांधे, ‘‘वाह भाभीजी क्या कमाल की दिख रही हैं आप,’’ ‘‘क्या साड़ी पहनी है आप ने,’’ ‘‘मेरा दोस्त तो धन्य हो गया आप को पा कर,’’ वगैरहवगैरह तो आप फूली नहीं समातीं. उलटा अपने पति से कहती हैं कि देखा, इसे मेरी तारीफ करने आती है. उस वक्त तो सबकुछ सही होता है. लेकिन यही तारीफ आप का पति किसी औरत की कर दे तो आप पर पहाड़ टूट पड़ता है.
आप की तारीफ करने वाला क्यूट और पति तारीफ करें तो छिछोरापन? अपनी तारीफ सुन आप यही कहती हैं कि हाय यह तुम्हारा दोस्त कितना क्यूट है, वाह कितना तमीजदार है, ‘‘इसे औरतों की तारीफ करने आती है,’’ ऐसे बहुत से कौंप्लिमैंट्स आप रिटर्न करती हैं लेकिन आप के हसबैंड ने कोई कौंप्लिमैंट्स कर दिया तो वह आप के लिए छिछोरापन बन जाता है.
जरा सोचिए
आप का मुसकराना ग्रीटिंग बना और पति का लाइन मारना, दूसरों की तारीफ सुन जब आप मुसकरा देतीं या खिलखिला कर हंस देती हैं, तो वह आप का सैल्फ ऐक्सप्रैशन बन जाता है, ग्रीटिंग और थैंक्स गिविंग में बदल जाता है. मगर आप के हसबैंड मुसकरा दें तो वे लाइन मार रहे हैं तो क्यों न आप उन को यह कह कर शादी, फंक्शन में ले जाएं कि सुनो कोई कुछ भी बोले तुम मुंह बंद रखना.’’
यह सिर्फ कौंप्लिमैंट देनेलेने की बात है, जिस पर मनमुटाव हो जाता है. लेकिन सोचिए कि अगर आप के हसबैंड अगर किसी और औरत के लिए पानी या कोई डिश ले आए या उन्होंने उस के साथ डांस कर लिया तब क्या?
अकसर शादीब्याह में यह बहुत आम है कि पुरुष अपनी भाभियों या नातेरिश्ते में आतीं औरतों या लड़कियों के लिए जलपान ले आते हैं या उन के साथ डांस करते हैं जैसे देवरभाभी का डांस, जीजासाली का डांस या पुराने 2 दोस्तों का डांस जिस में एक पुरुष हो और दूसरी स्त्री, यह सब देख कर बहुत सी पत्नियों का खून खौलने लगता है. अगर इन व्यवहारों में वह भाभी हो और वह अपने देवर के साथ ताल से ताल मिला रही हो, तब तो शादीब्याह की मौजमस्ती कहलाती है, पति की बेहूदगी.
आखिर क्यों करती हैं पत्नियां ऐसा व्यवहार
खुद को कम समझना: अकसर दूसरों की तारीफ सुन हम खुद को कम सम?ाना, उन से छोटा सम?ाना शुरू कर देते हैं. किसी के बालों की तारीफ सुनी तो अपने बाल झड़ लगने लगते हैं, किसी के चेहरे की तारीफ सुनी तो अपना चेहरा बेजान लगता है. ठीक ऐसा ही हर पत्नी को लगता है जब उस का पति किसी और औरत की तारीफ कर दे. उन्हें लगता है कि अब न वह अपने पति के लिए खूबसूरत है न ही आकर्षित.
बेइज्जती महसूस करना: किसी अपने से दूसरे की तारीफ सुनना कई बार खुद की तौहीन लगने लगती है. लगता है कि क्या हम उस लायक ही नहीं कि वह हमें छोड़ किसी और की तारीफ कर रहा है या वह हमें नीचा दिखाने के लिए ऐसा कर रहा है.
ईर्ष्या या जलन: ईर्ष्या तो ऐसी चीज है जो अच्छेअच्छे रिश्ते, संबंध चुटकियों में तोड़ दें. जलन का तो तोड़ भी बहुत मुश्किल है क्योंकि इस का इलाज कोई दूसरा नहीं कर सकता. यह बीमारी तो आप को स्वयं ही दूर करनी पड़ती है.
धोखा खाने का डर: कई बार ऐसा लगता है कि उन्होंने यानी मेरे साथी ने किसी और की प्रशंसा इसलिए कि क्योंकि वह उसे पसंद करता है. उस के साथ किसी चक्कर में है या कोई चक्कर शुरू करना चाहता है. वह जल्द ही मुझे छोड़ किसी और का हो जाएगा या उस का कैरेक्टर ही ऐसा है कि मौका मिलते ही धोखा दे जाएगा. यहां बात इतनी भी बड़ी नहीं होती, जितने बड़े अनुमान लगाए जाते हैं.
इतनी शंका क्यों
अब ऐसा नहीं है कि यह सारी खुरापात सिर्फ पत्नियों के दिलोदिमाग में ही चलती रहती है. जलन, शक, धोखे का डर या चरित्र पर शंका महिलाओं को भी सदियों से ?ोलते कई पीढि़यां, कई दौर गुजार गए हैं. बिना किसी आधार के सिर्फ शंका पर उन्हें चरित्रहीन घोषित करना, उन का शोषण करना, उन्हें बेघर करना या दूसरी औरत के लिए उन्हें मार देना या निकाल देना बहुत आम बात थी.
आज भी कोई औरत किसी पुरुष के साथ कुछ कदम टहल ले, बात कर ले या मुसकरा दे तो वह ढीले कैरेक्टर वाली, चालू या चक्कर मान ली जाती है और यहां कुंआरी या विवाहित के लिए कोई अलग मानदंड नहीं. आप औरत हैं और आप किसी से हंस लीं बस इतना काफी है आप का कैरेक्टर डिसाइड करने को और यह डिसाइड करने में न बाहर के लोग पीछे रहते और न घर वाले और इन घर वालों में आप के परिजन, ससुराल वाले, यहां तक कि आप का अपना पति भी होता है.
सदियों से जितना उत्पीड़न औरतों ने सहा है, उस का तो 5त्न भी कभी किसी पुरुषवर्ग ने महसूस नहीं किया होगा और आज भी करोड़ों महिलाएं इस उत्पीड़न का शिकार हैं.
खैर, हम आज की बात करें या सदियों पुरानी, ये सारी बातें पुरुष और महिला दोनों पर बराबर लागू होती हैं और आगे भी होती रहेंगी क्योंकि प्रेम और विवाह संबंध ऐसे रिश्ते हैं जो हमेशा से संवेदना और भावनाओं की ऊंचीनीची पगडंडियों और चुनौतियों से हो कर ही गुजरते हैं और उन का जीवन उन्हीं पर टिका रहा है. इसलिए रिश्ते में शंकाओं और अनुमानों का गुणाभाग सिर्फ महिलाओं को ही नहीं बल्कि पुरुषों को भी छोड़ने की जरूरत है क्योंकि रिश्ता निभाने के लिए सम?ा, विश्वास और संवेदना दोनों में बराबर होनी चाहिए.
