Kahaniyan : २७ वर्ष की प्रियंका का रंगढंग आम लड़की सा नहीं है और हो भी क्यों, वह आम है भी नहीं. वह तो हैदराबाद के जानेमाने फार्मा उद्योगपति किशन दीवान की इकलौती औलाद है. प्रियंका का स्टाइल किसी हौलीवुड स्टार से कम नहीं. गोरा रंग, कंची आंखें, बौबी कट हेयर, कलाई पर डायमंड वाच, कपड़ों में प्रीमियम इटैलियन और फ्रैंच ट्रेलर मेड सूट पहने जब भी वह कंपनी में आती तो हर किसी की नजर उस के वैलकम में झुक जाती.
बिजनैस स्कूल से पढ़ी, मौडर्न खयालों की लड़की प्रियंका बचपन से ही अपने पिता के कारोबार को बारीकी से देखती आई है इसलिए एक बिजनैस को चलाने की समझ वह पहले से रखती है.
मगर क्या सम झ होना ही काफी है? अकसर बिजनैस की बागडोर लेने के लिए काबिलीयत देखी जाती है लेकिन यहां उस के पापा प्रियंका की शादी देख रहे हैं. वह भी अपनी पसंद के लड़के के साथ. मगर प्रियंका के मन में तो पहले से कोई और है अजय.
देखने में अजय बहुत स्मार्ट है लेकिन क्वालिफिकेशन और स्टेटस में सिर्फ एवरेज. 3 साल पहले अजय को दीवान कंपनी की रिसैप्शन पर कहा गया था कि वह किसी भी पोस्ट के लिए फिट नहीं बैठता तो उस का इंटरव्यू के लिए वेट करना बेकार है. लेकिन अजय उन की बात को अनसुना कर वेटिंग लिस्ट में बना रहा.
इंटरव्यू में फेल होने के बाद ही अजय वहां से गया. जब अगले दिन प्रियंका शौर्ट लिस्ट कैंडिडेट के प्रोफाइल देख रही थी तो मैनेजर ने बातोंबातों में यह बात यों ही बताई कि कल एक ऐसा कैंडिडेट भी था जिसे फार्म सबमिशन के समय ही यह बताया गया था कि वह इस रोल के लिए क्वालिफाइड भी नहीं फिर भी 7 घंटे तक इंटरव्यू के लिए बैठा रहा.
प्रियंका ने पूछा कि ऐसा उस ने क्यों किया तो मैनेजर ने बताया कि उस ने यानी अजय ने कहा कि यह मौका मैं नहीं छोड़ सकता. क्या पता मैं इंटरव्यू में कुछ ऐसा साबित कर सकूं जो मेरी क्वालिफिकेशन में नहीं दिखता.
प्रियंका को अजय के तेवर अच्छे लगे. कुछ दिन बाद फिर से अजय रिसैप्शन पर नए इंटरव्यू के लिए दिखा. इस बार प्रियंका वहीं से गुजर रही थी तो मैनेजर ने चुटकी लेते हुए उसे अजय के बारे में फिर से बताया. कैबिन में आते ही प्रियंका ने मैनेजर को अजय को जौब देने को कहा.
तब मैनेजर ने कहा, ‘‘मगर वह इस पोस्ट के लिए सही नहीं है.’’
प्रियंका ने मुसकान भरी, ‘‘इस पोस्ट पर नहीं. उसे मार्केटिंग में रखो. डाक्टर्स, हौस्पिटल्स में हमारी ब्रैंडिंग और मार्केटिंग के लिए ऐसे ही लोग चाहिए जो न सुनने पर भी टिके रहें और अपनी बात कह कर आएं.’’
अपनी ट्रेनिंग के दौरान जब अजय को पता चला कि उस की नौकरी प्रियंका की सिफारिश पर लगी है तो वह बिना देर किए, बिना किसी इजाजत के प्रियंका के सामने खड़ा हो गया और उस का शुक्रिया करने लगा. पहले तो प्रियंका के असिस्टैंट ने उसे डांटा फिर प्रियंका के इशारे पर वह चुप हो गया.
प्रियंका ने अजय से कहा, ‘‘हर जगह यह जोश काम नहीं आता. अगली बार ध्यान रखना और इस बात का भी कि मेरा फैसला गलत न हो.’’
अजय ने एक सौरी के साथ विश्वास दिलाया कि उसे नौकरी देने का प्रियंका का फैसला गलत साबित नहीं होगा.
इस तरह प्रियंका और अजय की पहली मुलाकात हुई और फिर इस मुलाकात का सिलसिला कभी बंद न हो उस के लिए अजय पूरी कोशिश करता था. वह जानबू झ कर किसी न किसी काम या बहाने से प्रियंका के आसपास भटकने, बात करने का मौका ढूंढ़ता रहता था. धीरेधीरे ये मुलाकातें पसंद में और फिर प्यार में बदल गईं.
ऐसा प्यार जिस का कोई भविष्य नहीं था क्योंकि प्रियंका एक हाई सोसाइटीबिजनैस फैमिली से थी और अजय एक मामूली परिवार से और स्टेटस के अलावा भी यह जोड़ी बेमेल ही थी. प्रियंका लंदन से बिजनैस डिगरी होल्डर और अजय आम कालेज का ग्रैजुएट.
यहां गौर करने वाली बात यह भी थी कि अगर पैसों और डिगरी को भी न देखें तो भी यह साथ कभी एक नहीं होगा क्योंकि प्रियंका की फैमिली का लाइफस्टाइल भले मौडर्न हो लेकिन पारिवारिक सोच पुरानी ही है. जो जातपांत का दामन बहुत मजबूती से पकड़े है. प्रियंका के पिता अपने मारवाड़ी समाज के बाहर किसी कीमत पर प्रियंका की शादी नहीं करेंगे भले ही उन्हें अपनी सियासत बनाए रखने के लिए प्रियंका को समाज के बाहर और जायदाद से बेदखल करना पड़े. वहीं अपने पापा के बिजनैस को बचपन से देख कर, सम झ कर प्रियंका भी इतना जानती थी कि इतनी बड़ी जायदाद से बेदखल होना बेवकूफी होगी.
एक दिन प्रियंका इसी कशमकश में घिरी थी कि अजय ने कहा, ‘‘मु झे अपने परिवार के लिए शादी करनी है.’’
प्रियंका अजय की बात सुन गुस्से से भर गई. वह कोई रिएक्शन देती उस से पहले अजय बोल पड़ा, ‘‘देखो मैं तुम से प्यार करता हूं लेकिन प्यार एक तरफ है और जरूरतें अपनी. मैं कब तक अपनी शादी की बात टालता रहूंगा. मेरे मांबाप बूढ़े हैं, मु झे उन की देखरेख के लिए कोई चाहिए. साथ ही लड़की साइंस टीचर है तो घर में आमदनी भी आएगी. वैसे भी तुम्हें पता है मैं बहुत सा पैसा शेयर बाजार में डुबो चुका हूं. ऐसे में यह शादी और नाम की बीवी मेरा बो झ हलका कर देगी. यकीन मानों मेरे दिल में सिर्फ तुम रहोगी और वह सिर्फ घर में. हम यों ही हमेशा की तरह मिलते रहेंगे. कुछ नहीं बदलेगा हमारे बीच.’’
अजय के शेयर में पैसे डुबोने के बाद उस की खस्ता हालत को देख प्रियंका ने उसे एक फ्लैट भी रहने को दिया. यह प्रियंका की वह प्रौपर्टी थी जिस का पता उस के पिता को भी नहीं था. शादी के बाद एक अच्छा फ्लैट रहने को मिला तो अजय की बीवी वंदना बहुत खुश थी.
वंदना बोली, ‘‘इतना अच्छा घर. यहां का किराया तो ज्यादा होगा लेकिन आप की कंपनी हमें रहने को दे रही है. बहुत अच्छे हैं कंपनी वाले.’’
‘‘कंपनी वाले नहीं, कंपनी वाली.’’
‘‘मतलब?’’
वंदना को कोई शक न हो इसलिए अजय सफाई में बोला, ‘‘अरे मेरे एक अमीर दोस्त की मंगेतर की सिफारिश से यह नौकरी लगी थी. लेकिन मैं ने काम अच्छा किया तो अब कंपनी भी साथ देती है. तभी तो रहने को घर दिया. लेकिन इसे अपना घर मत सम झना है कंपनी का ही है. बस सम झो कि हम बिना किराए के किराएदार हैं.’’
‘‘बड़ा अच्छा दोस्त है. आप कभी खाने पर बुलाना उसे.’’
अजय की शादी को 6 महीने के बाद प्रियंका के पिता ने भी उस के लिए लड़का पसंद कर लिया.
हैदराबाद की 2 बड़ी बिजनैस फैमिली एक हो रही थीं, जिस की
खबर छोटेबड़े हर अखबार में थी. ललित, बजाज मिल्स के मालिक दिलीप बजाज का दूसरा बेटा था. जिस ने जरमनी से मैनेजमैंट की पढ़ाई की थी. ललितप्रियंका की सगाई लीला पैलेस में
बहुत धूमधाम से हुई और 4 महीने बाद की शादी के लिए उदयपुर के एक आलीशान पैलेस को चुना गया.
सगाई के बाद ललित और प्रियंका रोज मिलने लगे. कभी डिनर तो कभी लंच और कभी देर रात तक नैकलैस रोड और हुसैन सागर पर वाक और लंबी ड्राइव. प्रियंका का ललित के लिए शौपिंग, उस की पसंद का खाना बनाना, उस के साथ घूमनाफिरना, दोनों की कैमिस्ट्री देख कर कोई कह नहीं सकता था कि प्रियंका किसी और से प्यार करती है.
एक शाम प्रियंका के बालों को सुल झाते हुए अजय ने कहा, ‘‘पापा की पसंद से सगाई कर ली. अब क्या शादी भी करोगी?’’
‘‘हमारे एक होने के लिए सगाई जरूरी थी, तभी तो सामाजिक कलंक हटेगा.’’
‘‘कलंक?’’
‘‘आज से 15 साल पहले जब मेरी बूआ की सगाई हुई थी तो शादी से कुछ दिन पहले ही उन के मंगेतर की मौत हो गई थी. सब ने यही कहा कि शायद कोई कुंडली दोष होगा इसलिए लड़का मर गया. मेरी बूआ को समाज में अपशकुनी माना जाने लगा. पापा की बड़ी दौलत भी बूआ को हमारे समाज का नया दूल्हा नहीं दिला पाई. अब जब ठीक वैसा उन की बेटी के साथ होगा तो तो अपशकुनी का टैग हमेशा के लिए हमारे खानदान से जुड़ जाएगा, फिर उस मजबूरी में जब तुम
मेरा हाथ थामने आगे आओगे तो पापा मना नहीं कर पाएंगे.’’
प्रियंका की यह स्कीम अजय को बहुत पसंद आई.
फिर एक दिन प्रियंका ने ललित को अजय से यह कह कर मिलवाया कि अजय उस की दोस्त वंदना का पति है और खुद एक शाम वंदना से मिलने चली आई.
‘‘तुम?’’ अजय प्रियंका को दरवाजे पर देख हैरान था. वह कुछ बोलता, सम झता कि प्रियंका घर में दाखिल हो गई. उसे देख वंदना और मां ने अजय की ओर देखा. अजय की बोलती बंद थी इसलिए प्रियंका ने कहा, ‘‘मैं प्रियंका हूं. यह मेरा ही घर है. सोचा एक बार देख लूं आप सब ठीक से हैं न. कोई दिक्कत तो नहीं और सगाई की मिठाई भी देनी थी,’’ कह प्रियंका ने मिठाई का डब्बा मेज पर रख दिया.
इतना सुनते ही वंदना बोल पड़ी, ‘‘अच्छा आप के मंगेतर ही इन के दोस्त है.
इन्होंने कहा था कि इन के दोस्त की मंगेतर की सिफारिश से नौकरी लगी थी और फिर घर भी मिला.’’
‘‘अच्छा अजय ने यह बताया है.’’ प्रियंका वंदना की बात सुन अजय को एकटक देख रही थी.
इसी बीच वंदना बोली, ‘‘मैं आप के लिए चाय बनाती हूं.’’
‘‘अरे तुम क्यों. यह अजय है न,’’ प्रियंका ने कहा, ‘‘मेरे मंगेतर ने कहा था कि अजय बहुत अच्छी चाय बनाता है.’’
अजय चाय बनाने किचन में चला गया और उस के पीछे मां भी. इधर वंदना ने कुछ देर बहुत सारी बातें प्रियंका से कीं और एक मुश्किल सवाल प्रियंका से किया जिस का जवाब प्रियंका ने बहुत सफाई से दिया.
वंदना ने पूछा, ‘‘अजय तो 3 साल से आप की कंपनी में काम कर रहे हैं, लेकिन सगाई तो आप की अभी हाल ही में हुई तो आप के मंगेतर की सिफारिश…’’
प्रियंका ने मुसकरा कर कहा, ‘‘हां मंगेतर अभी बने हैं लेकिन साथ बहुत पुराना है. फैमिली का साथ उठना बैठनाहमेशा से है. हम दोनों स्कूल से साथ हैं. पहले दोस्ती फिर अब सगाई. हम बिजनैस फैमिली के बच्चे अपनी पर्सनल लाइफ, अपनी पसंद सीक्रेट रखते हैं नहीं तो न्यूज वाले पीछे पड़ जाते हैं.’’
वंदना भी मुसकरा दी, ‘‘हां आप ने ठीक कहा.’’
प्रियंका ने धीरे स्वर में कहा, ‘‘ललित पहले बहुत नशा करता था शराब, सिगरेट और शायद ड्रग भी.’’
इतना सुनते ही वंदना के होश उड़ गए.
‘‘अजय ने उसे बहुत बार सम झाया था, इसलिए मैं ने अजय को नौकरी और यह घर दिया.’’
इतने में अजय चाय ले आया और प्रियंका चाय पी कर चली गई.
प्रियंका तो चली गई लेकिन वह आई ही क्यों थी यह अजय के पल्ले नहीं पड़ा.
अगले दिन अजय प्रियंका से मिला, ‘‘कल घर आने की वजह?’’
‘‘सम झो यह भी प्लान का एक हिस्सा है.’’
‘‘प्लान कैसा प्लान?’’
‘‘मेरे पापा ने काम अच्छा किया. उन्होंने बलि का बकरा बनाने के लिए ललित
को चुना. जो मेरा क्लास मेट था. इस तरह हम हमेशा टच में रहे, साथ ही मु झे उस के सारे अफेयर और ड्रग की लत की खबर रही. एक बार एक ड्रग मामले में फंसतेफंसते बचा था. लेकिन इस बार नहीं बचेगा. सोचो अगर ड्रग के हाई डोज से वह पहाड़ से गिर पड़ा तो? जांच हुई भी तो ललित की बौडी और सामान से ड्रग मिलेगा जिस की गवाही हम और…’’
‘‘वंदना भी देगी…’’ अजय कह कर हंस पड़ा. फिर बोला, ‘‘यह इतना नायाब प्लान तुम ने कैसे बनाया?’’
प्रियंका ने बिना इमोशन के उत्तर दिया,’’ अब तुम मर्द लोग हम लड़कियों को कमजोर और गूंगी गुडि़याएं सम झना बंद कर दो. धर्म का नाम ले कर तुम लोगों ने हमें बहुत सदियों से ऐक्सपोलाइट किया है. अब नहीं. हम क्या कर सकती हैं, यह तुम सोच भी नहीं सकते.’’
उस की बातें सुन कर अजय अंदर तक कांप उठा.
चारों एक दिन पिकनिक के लिए भोंगिरी फोर्ट पर इकट्ठे हुए. वंदना और ललित पहली बार मिले थे. दोनों को हायहैलो के अलावा अजय ने बात नहीं करने दी. ललित और अजय फोर्ट के टिकट लेने गए कि इस बीच बातोंबातों में वंदना ने बताया कि वह प्रैगनैंट है, जिसे सुन प्रियंका को अंदर ही अंदर बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि अजय ने तो यही कहा था कि यह शादी सिर्फ दिखावे की है. उसे वंदना के साथ परिवार नहीं बनाना. वह अजय पर चिल्लाना चाहती थी लेकिन ललित और वंदना के रहते यह करना मुश्किल था.
कुछ देर बाद जब सब इकट्ठे हुए तो देखा प्रियंका सब के लिए जूस ले आई है. जूस पर ट्रैकिंग की बात चली तो प्रियंका ने कहा कि वंदना को ट्रैकिंग नहीं करनी चाहिए. जिस पर सब ने सहमति दिखाई. इसीलिए तय हुआ कि प्रियंका वंदना के साथ नीचे ही रहेगी और अजय और ललित ट्रैकिंग पर जाएंगे. जो प्रियंका और अजय के बनाए प्लान का हिस्सा न था. अजय ने प्रियंका की तरफ देखा तो उस ने चुपचाप जाने का इशारा किया. अजय फिर बिना सवाल किए चुपचाप ललित के साथ चला गया.
इधर वंदना और प्रियंका में बहुत बातें हुईं कि कैसे सब घर में बच्चे को ले कर खुश हैं. अजय तो बच्चे के लिए शौपिंग भी कर रहा है. अजय की नौकरी और घर के लिए वंदना हमेशा ललित और प्रियंका की आभारी रहेगी.
20 मिनट गुजरे तो वंदना ने प्रियंका से कहा, ‘‘एक बार फोन कर लें कि कितना टाइम लगेगा. कहीं दोनों चक्करा कर बेहोश तो नहीं हो गए,’’ यह कह वंदना खूब हंसी.
मगर थोड़ी देर में ऐसी खबर आई कि वह खुद बेहोश हो गिर पड़ी. ललित और
अजय न जाने कैसे ट्रैक से नीचे गिर पड़े थे. दोनों को काफी चोटें आई थीं. लोगों की मदद से उन्हें जल्दी पास के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया. अस्पताल खास बड़ा या नामी तो नहीं था लेकिन डाक्टर और सुविधा तो थी कि ऐसे हालात को संभाला जा सके लेकिन अफसोस कुछ भी काम न आया. ललित और अजय को जो चोटें लगी थीं, उन से खून निकलना बंद ही नहीं हो रहा था और ज्यादा खून निकलने की वजह से दोनों की मौत हो गई. साथ ही डाक्टर ने यह भी बताया कि ललित और अजय दोनों ड्रग्स लिए थे, जिस वजह से वे अपना बैलेंस खो बैठे होंगे और ट्रैक से नीचे गिर पड़े. ललित पहले भी एक ड्रग्स केस से बचा था तो इस बार उस का नाम आसानी से ड्रग्स से जुड़ गया और माना गया कि दोनों अजय और ललित ने साथ ड्रग्स लिया था.
दोनों परिवारों के लिए यह बहुत बड़ी दुर्घटना थी. ललित का परिवार अपने परिवार को बेटे की मौत और अपने नाम को ड्रग्स की बदनामी से संभालने में लगा था और दूसरी तरफ अजय का परिवार अब यह प्रार्थना कर रहा था कि वंदना का इस सदमे से बच्चा भी सुरक्षित रहे. एक बड़ी फौरमैलिटी के बाद दोनों परिवारों को शव दे दिए गए.
2 दिन बीत गए. प्रियंका शांत बैठी रही थी और उस के पिता यही कहते रहते, ‘‘मेरी बहन की तरह मेरी बेटी के हिस्से भी सुख नहीं था इतने पैसों का क्या जब घर की बेटियों को लोग अपशकुनी कहें.’’
उधर वंदना भी खामोश बैठी रहती थी. कभी चुप रहती तो कभी सब के सामने आंसू
बहाती. कुछ दिन और बीते. फिर एक दिन वंदना को डाक्टर की कही बात बारबार याद आ रही थी कि अजय की चोट इतनी गंभीर नहीं थी लेकिन उस का खून निकलना ही बंद नहीं हो रहा था. यह बात वंदना को बारबार कचोटती.
एक बार तो उस से रहा न गया और उस
ने अजय के ऐक्सीडैंट की पूरी मैडिकल फाइल पढ़ी. उस ने हर पहलू को बहुत नजदीक से पढ़ा, फाइल में लिखे हर मैडिकेशन पर नजर डाली
और फिर उन के फौर्मूला पर कुछ रिसर्च की, जानकारी निकाली. देखते ही देखते उसे आंखों के सामने ऐसा सच आया कि उस के होश उड़ गए.
उस ने देर नहीं कि और अगले ही पल पुलिस स्टेशन पहुंच गई. सुबह सभी समाचारपत्रों की हर हैडलाइन यही बता रही थी कि हैदराबाद के जानेमाने दीवान फार्मास्युटिकल के इंजैक्शन
में भारी मात्रा वारफेरिन नाम का जानलेवा कैमिकल मिला. जो रैट पौइजन में इस्तेमाल
होता है और इंसानी प्रयोग में उसे बहुत ही कम मात्रा में ब्लड थिन्निंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है वह भी डाक्टर की निगरानी में. उस का अधिक मात्रा में होना यानी खून के बहाव को बढ़ाना इतना कि वह ललित और अजय की मौत का कारण बन गया.
जल्द ही किशन दीवान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और दीवान फार्मास्युटिकल पर जांच बैठाई गई. जांच में बहुत बातें सामने आईं कि कंपनी बहुत सी ऐसी हलकी क्वालिटी की दवाइयां बना कर कई सरकारी अस्पतालों में सप्लाई कर रही है और सरकार से मोटा पैसा वसूल रही है. साथ ही जब इस जानलेवा इंजैक्शन की बात आई तो किशन दीवान और कंपनी ने यही कहा कि यह एक फेल और एटेंपट था जिस का उन्हें पता चला था तो इंजक्शन उन्होंने कभी मार्केट में सप्लाई किए ही नहीं फिर वे बाहर कैसे आए उन्हें पता नहीं.
औफिस रिकौर्ड्स से पता चला कि अजय ही इस डिवीजन की सेल देखता था और स्टौक के बारे में उसे ही पता था. अजय को मरने के बाद अभियुक्त बनाया गया. कोर्ट में किशन दीवान खुद को बेगुनाह साबित नहीं कर पाए. किशन दीवान को एक बड़े हरजाने के साथ 4 साल की सजा सुनाई गई और दीवान फार्मास्युटिकल की बहुत दवाइयों को हमेशा के लिए बैन कर दिया गया. अब कंपनी को बचाने की कमान प्रियंका के हाथ में आ गई थी.
एक दिन वंदना के दरवाजे पर दस्तक हुई. जब उस ने दरवाजा खोला तो प्रियंका खड़ी थी. प्रियंका जैसे ही घर के अंदर आई अजय के मांबाप उसे खरीखोटी सुनाने लगे, ‘‘तुम्हारे इंजैशन की वजह से हमारा बेटा मरा है फिर किस मुंह से यहां आई हो?’’
प्रियंका कुछ कहती कि वंदना ने कहा, ‘‘पापा इन के मंगेतर भी नहीं रहे. इन्हें पता होता कि इंजैक्शन ऐसा था तो ये क्या होने देतीं वह सब? इन्होंने ने उलटा हमेशा मदद ही की है. अजय को नौकरी दी और यह घर भी दिया रहने को. लेकिन अब अजय तो है नहीं तो हम किस हक से रहें यहां.’’
प्रियंका बोली, ‘‘नहीं ऐसा मत कहो. दोष तो मेरी ही कंपनी और पापा का है. मैं तो बहुत शर्मिंदा हूं और तुम जब तक चाहो यहां रहो और प्रैगनैंसी में तुम यह सब स्ट्रैस मत लो.’’
वंदना ने प्रियंका की तरफ बहुत आशा से देखा. प्रियंका उस के हाथों में दिया और कहा, ‘‘देखो पैसों से हर कमी तो पूरी नहीं की जा सकती लेकिन बहुत कमियों को दूर किया जा सकता है. इसे रखो तुम्हारे और बच्चे के काम आएगा और कुछ समय तक काम पर जाने की
भी जरूरत नहीं पड़ेगी. हां कभी भी नौकरी फिर से शुरू करने का मन करे तो मेरे पास आना. तुम्हारी कैमिस्ट्री की डिगरी और काबिलीयत
मेरे बहुत काम आएगी. आखिर तुम्हारे जैसे सम झदार लोग ही मेरी कंपनी से हुई भूल को सुधार सकते हैं.’’
वंदना प्रियंका की बातों से भावुक हो रो पड़ी. प्रियंका ने वंदना को दिलासा दिया.
इस बीच अजय की मां प्रियंका के लिए चाय बना लाई. चाय पीते प्रियंका शांत हो
दीवार पर लगी अजय की तसवीर देख रही थी और मन ही मन उस से कह रही थी कि धोखेबाज तु झे मैं ने कंपनी, घर, अपना दिल, पैसा सब दिया और तू झूठी शादी कर सच्चा परिवार बसा रहा था.
अब तेरी बीवी मेरे घर में इस उम्मीद से रहेगी कि उसे एक आशियाना मिल गया है लेकिन जल्द ही उस की दुनिया भी तेरे धोखे की वजह से बरबाद होगी. अगर उस दिन वंदना मुझे अपनी प्रैगनैंसी नहीं बताती तो मु झे तेरा असली चेहरा दिखता ही नहीं.
इसलिए तो मैं ने तुम्हारे जूस में भी ड्रग डाला था. तुम और ललित वह जूस पी ट्रैक पर गए और फिर दिमागी संतुलन खो नीचे गिर गए.
फिर कोई जांच भी होती तो वजह सिर्फ 2 निकलतीं– एक तुम दोनों का ड्रग एडिक्ट होना और दूसरा वारफेरिन इंजैक्शन. बैकअप प्लान के लिए वह इंजैक्शन मैं ने ही मैडिसिन के पैकेज में वहां भेजे थे ताकि खून रोकने वाला इंजैक्शन ही खून बहाने वाला बन जाए. इस तरह पापा से भी बदला पूरा हुआ. बदला मेरी पसंद, मेरी शादी कंट्रोल करने का, मु झे बेदखल करने की धमकी देने का.
जब वह जेल से बाहर आएंगे तब तक पूरी कंपनी और मेरी लाइफ पर सिर्फ मेरा ही हक होगा और ठीक 11 महीने बाद एक दिन वंदना के घर पर प्रियंका के गार्ड पहुंचे और वंदना को घर खाली करने का और्डर दे दिया. वंदना ने बहुत मन्नतें कीं, प्रियंका को काल की लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. उल्टा प्रियंका ने वंदना की काल देख एक खिल्ली भरी मुसकान के साथ अपना फोन बंद कर दिया.
